PM Modi Rajya Sabha Speech के दौरान संसद में सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया। नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा का जवाब देते हुए देश की प्रगति, वैश्विक स्थिति और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया। यह भाषण राज्यसभा में उस वक्त हुआ, जब विपक्ष ने विरोध में सदन से वॉकआउट कर दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीता साल भारत के लिए तेज़ विकास और बड़े बदलावों का रहा है। देश विकसित भारत की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आज पूरी दुनिया भारत को उम्मीद और भरोसे की नजर से देख रही है।
‘घुसपैठियों को बचाने की कोशिश’ पर सख्त टिप्पणी
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में घुसपैठ का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि दुनिया के समृद्ध से समृद्ध देश भी अवैध नागरिकों को बाहर निकाल रहे हैं, लेकिन भारत में कुछ लोग घुसपैठियों को बचाने के लिए हर स्तर पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि देश का नौजवान ऐसे लोगों को कैसे माफ करेगा, जो घुसपैठियों की वकालत करते हैं, जबकि यही घुसपैठिए युवाओं की रोज़ी-रोटी छीन रहे हैं और आदिवासियों की ज़मीन पर कब्ज़ा कर रहे हैं।
कांग्रेस पर करारा हमला
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष के पास न तो इच्छाशक्ति है और न ही कोई दूरदृष्टि। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता सुख के अलावा कांग्रेस की कोई आकांक्षा नहीं बची है, लेकिन फिर भी वह उपदेश देने से पीछे नहीं हटती।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जिन राज्यों में विपक्ष की सरकारें हैं, वहां के लोगों का भविष्य अंधकार में डूब रहा है, लेकिन इसके बावजूद वही दल संसद में नैतिकता का पाठ पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत भूमिका
अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोविड-19 के बाद वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है। आज दुनिया भारत की ओर झुक रही है और भारत ग्लोबल साउथ की एक मजबूत आवाज बनकर उभरा है। उन्होंने संकेत दिया कि हालिया अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते इसी बदलती वैश्विक सोच का परिणाम हैं।
विपक्ष का वॉकआउट और सियासी संकेत
प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान विपक्षी दलों का वॉकआउट अपने आप में एक सियासी संदेश माना जा रहा है। सत्ता पक्ष इसे मुद्दों से भागने की राजनीति बता रहा है, जबकि विपक्ष सरकार पर सवालों से बचने का आरोप लगा रहा है।
विश्लेषण: घुसपैठ और राष्ट्रवाद का स्पष्ट संदेश
प्रधानमंत्री का यह भाषण साफ तौर पर दो संदेश देता है—पहला, सरकार घुसपैठ को लेकर कोई नरमी नहीं बरतेगी; दूसरा, राष्ट्रवाद और युवाओं के अधिकारों को केंद्र में रखकर विपक्ष पर दबाव बनाया जाएगा। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से बाहर भी राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- प्रधानमंत्री मोदी का राज्यसभा में तीखा भाषण
- घुसपैठियों को बचाने वालों पर सख्त टिप्पणी
- कांग्रेस पर इच्छाशक्ति और दृष्टि की कमी का आरोप
- वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका का दावा








