China Plans Attack on India: जब पूरी दुनिया की निगाहें ताइवान पर टिकी हैं, जब अमेरिका, जापान और यूरोप चीन की हर हरकत को ताइवान के चश्मे से देख रहे हैं, उसी वक्त एक चौंकाने वाली चेतावनी सामने आई है। यह चेतावनी किसी आम विश्लेषक की नहीं है, बल्कि एक पूर्व अमेरिकी मरीन इंटेलिजेंस अधिकारी की है, जिसका साफ कहना है कि ताइवान तो सिर्फ एक शोर है, असली खतरा कहीं और है और वो खतरा भारत हो सकता है।
पूर्व अमेरिकी मरीन इंटेलिजेंस अधिकारी ग्रांट न्यूशम ने सीधे-सीधे आगाह किया है कि चीन ताइवान के बहाने दुनिया को उलझाकर किसी दूसरे मोर्चे पर चौंकाने वाली सैनिक कार्रवाई कर सकता है। न्यूशम का कहना है कि जब सबकी नजरें ताइवान पर हों, तो आपको वहां देखना चाहिए जहां कोई नहीं देख रहा। और उस नो मैन जोन में सबसे ऊपर नाम आता है भारत का।
शी जिंपिंग अपनी सेना का टेस्ट करना चाहते हैं
न्यूशम के मुताबिक, चीनी राष्ट्रपति शी जिंपिंग अपनी सेना में बदलाव कर रहे हैं और इसलिए वह उनका टेस्ट करना चाहेंगे। इसी वजह से जब पूरी दुनिया सांस रोककर ताइवान को देख रही है, तो जिंपिंग इसके बजाय भारत पर हमला करने का फैसला कर सकते हैं। न्यूशम ने कहा कि सालों पहले एक विदेशी रिपोर्टर ने उनसे कहा था कि आपको हमेशा वहीं देखना चाहिए जहां बाकी सब नहीं देख रहे हैं।
ऐसे में जब सारा ध्यान ताइवान पर है और फिलहाल उसी के बारे में बात हो रही है, लेकिन अगर आप उसी पर ध्यान दे रहे हैं तो आपको दूसरी जगहों पर भी देखना चाहिए। यह चेतावनी ऐसे वक्त में आई है जब भारत-चीन सीमा पर तनाव लगातार बना हुआ है और दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी साफ दिख रही है।
2049 तक महाशक्ति बनने का चीन का सपना
बता दें कि चीन का सपना है 2049 तक खुद को दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति बनाना। पेंटागन की ताजा रिपोर्ट साफ कहती है कि चीन इस लक्ष्य के लिए सैन्य ताकत, मनोवैज्ञानिक युद्ध और रणनीतिक धोखे तीनों का इस्तेमाल कर रहा है। ग्रांट न्यूशम के मुताबिक, राष्ट्रपति शी जिंपिंग पीएलए यानी पीपल्स लिबरेशन आर्मी में हालिया बदलाव को टेस्ट करना चाहते हैं और इसके लिए किसी सीमित लेकिन हाई इंपैक्ट युद्ध से बेहतर मौका नहीं हो सकता है।
अक्सर कहा जाता है कि चीनी सेना दशकों से कोई बड़ा युद्ध नहीं लड़ी है और इसलिए वह अनटेस्टेड है। लेकिन न्यूशम इस दलील को सिरे से खारिज करते हैं और वो याद दिलाते हैं कि गलवान घाटी जहां भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने भिड़े थे, जहां पीएलए को भारी नुकसान झेलना पड़ा था।
चीन पर भरोसा करना खतरनाक है
न्यूशम ने आगे कहा कि चीन शांति की बातें करता है लेकिन उसकी ट्रेनिंग बेहद कठोर है। चीन पर भारत को भरोसा नहीं करना चाहिए। वह लगभग एक निश्चित समय पर एक निश्चित काम करेंगे। हालांकि ताइवान सिर्फ एक डिस्ट्रैक्शन हो सकता है। असल में चीन भारत, दक्षिण कोरिया, दक्षिणी जापान या फिलीपींस जैसे क्षेत्रों में अपनी ताकत दिखा सकता है।
लेकिन अगर बात चौंकाने वाली कार्रवाई की हो तो भारत चीन की लिस्ट में सबसे ऊपर है। न्यूशम ने कहा कि भारत में ऐसे बहुत से लोग हैं जो आपको बताएंगे कि कोई खतरा नहीं है, लेकिन भारत निश्चित रूप से लिस्ट में है। यह बयान भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि वे चीन की हर हरकत पर पैनी नजर रखें।
भारत-अमेरिका संबंधों में अहम हलचल
इसी बीच भारत-अमेरिका संबंधों में भी एक अहम हलचल देखने को मिल रही है। व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी होने के ठीक एक दिन बाद ग्रांट न्यूशम ने भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी की भूमिका को बेहद अहम बताया। गार्सेटी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी माने जाते हैं।
न्यूशम के मुताबिक, उनकी भारत में नियुक्ति सिर्फ कूटनीतिक कदम नहीं बल्कि एक स्ट्रेटेजिक मैसेज है। गार्सेटी राष्ट्रपति ट्रंप के बेहद करीबी हैं और राजदूत के रूप में उनकी नियुक्ति भारत-अमेरिका संबंधों के लिए एक बड़ा संकेत है। यह इस बात का इशारा है कि अमेरिका भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में देख रहा है।
ताइवान पर बढ़ता शोर, भारत के लिए स्पष्ट संदेश
न्यूशम के बयान से साफ है कि ताइवान पर बढ़ता शोर दुनिया को भटका सकता है। लेकिन भारत के लिए संदेश एकदम स्पष्ट है – चीन पर भरोसा नहीं, सिर्फ सतर्कता। क्योंकि इतिहास गवाह है कि जब चीन हमला करता है तो वह हमेशा वहीं करता है जहां कोई उम्मीद नहीं होती है।
1962 के भारत-चीन युद्ध से लेकर 2020 की गलवान घाटी की झड़प तक, चीन ने हमेशा अचानक हमले की रणनीति अपनाई है। ऐसे में न्यूशम की चेतावनी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। भारतीय सुरक्षा बलों को लगातार सतर्क रहने और सीमा पर किसी भी संभावित खतरे के लिए तैयार रहने की जरूरत है।
भारत की तैयारी और रणनीति
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे का विकास, सैनिकों की तैनाती में बढ़ोतरी और आधुनिक हथियारों की खरीद इसके प्रमुख उदाहरण हैं। लेकिन न्यूशम की चेतावनी यह बताती है कि भारत को अभी और सतर्क रहने की जरूरत है।
चीन की रणनीति हमेशा से धोखे और चालाकी पर आधारित रही है। ताइवान के मुद्दे पर दुनिया का ध्यान भटकाकर भारत पर अचानक हमला करना चीन की रणनीतिक योजना का हिस्सा हो सकता है। ऐसे में भारत को न केवल सैन्य बल्कि कूटनीतिक मोर्चे पर भी मजबूत रहना होगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- पूर्व अमेरिकी मरीन इंटेलिजेंस अधिकारी ग्रांट न्यूशम ने चेताया कि ताइवान सिर्फ एक शोर है, असली खतरा भारत को है
- शी जिंपिंग पीपल्स लिबरेशन आर्मी में हुए बदलावों को टेस्ट करने के लिए भारत पर हमला कर सकते हैं
- चीन का लक्ष्य 2049 तक दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति बनना है और इसके लिए वह सैन्य ताकत, मनोवैज्ञानिक युद्ध और रणनीतिक धोखे का इस्तेमाल कर रहा है
- भारत में अमेरिकी राजदूत की नियुक्ति एक स्ट्रेटेजिक मैसेज है जो भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूती को दर्शाता है
- इतिहास गवाह है कि चीन हमेशा वहीं हमला करता है जहां कोई उम्मीद नहीं होती








