Union Budget 2026: भारत वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार, 1 फरवरी 2026 को अपना रिकॉर्ड नौवां लगातार बजट पेश करने जा रही हैं। यह बजट वैश्विक अनिश्चितता और नाजुक व्यापारिक परिस्थितियों के बीच पेश किया जाएगा। आम जनता से लेकर उद्योग जगत तक, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस बार क्या सस्ता होगा और क्या महंगा। क्योंकि यह बजट न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था, बल्कि आम लोगों के घरेलू बजट को भी तय करता है।
मिडिल क्लास को टैक्स राहत की उम्मीद
इस बार टैक्सपेयर्स, खासकर मिडिल क्लास को सरकार से खास राहत की उम्मीद है। महंगाई से बढ़ते रोजमर्रा के खर्चों को देखते हुए सरकार इस बजट में बड़े कदम उठा सकती है। ज्यादा टैक्स छूट, आसान कंप्लायंस और ऐसे इंसेंटिव की मांग की जा रही है जो लंबी अवधि की बचत को बढ़ावा दें।
सैलरी पाने वाले लोगों और छोटे प्रोफेशनल्स को उम्मीद है कि यह बजट उनके फाइनेंशियल स्ट्रेस को कम करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार टैक्स स्लैब में मामूली बदलाव कर सकती है या रिबेट में थोड़ी वृद्धि कर सकती है। हालांकि बड़े टैक्स कट की संभावना कम है, क्योंकि सरकार दीर्घकालिक स्थिरता और विकास पर अधिक ध्यान दे रही है।
₹15 लाख तक की आय पर जीरो टैक्स की संभावना
सबसे बड़ी अटकलों में से एक यह है कि सरकार ₹12 लाख की जगह ₹15 लाख तक की वार्षिक आय पर जीरो टैक्स पॉलिसी ला सकती है। यह कदम मिडिल क्लास की क्रय शक्ति को बढ़ाएगा और उपभोग को बढ़ावा देगा। इसके अलावा, स्टैंडर्ड डिडक्शन को मौजूदा ₹75,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख किया जा सकता है, जिससे नई टैक्स व्यवस्था के तहत ₹13 लाख तक की आय कर-मुक्त हो सकती है।
मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स सस्ते होने की संभावना
तकनीक प्रेमियों के लिए अच्छी खबर हो सकती है। सरकार मोबाइल फोन के पुर्जों जैसे कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले और चार्जर पर कस्टम ड्यूटी घटा सकती है। इससे भारत में बने स्मार्टफोन और टैबलेट की कीमतें कम हो सकती हैं। मोबाइल बैटरी निर्माण में इस्तेमाल होने वाली 28 वस्तुओं पर ड्यूटी छूट की उम्मीद है, जिससे मोबाइल फोन और उनके एक्सेसरीज के दाम घट सकते हैं।
इसी तरह, LED/LCD टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं पर भी ड्यूटी में कमी आ सकती है, जिससे ये उत्पाद आम लोगों की पहुंच में आ सकेंगे।
घर खरीदारों के लिए राहत
जो लोग अपने सपनों का घर बनाने का ख्वाब देख रहे हैं, उन्हें भी इस बजट से बड़ी सौगात मिल सकती है। होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली टैक्स छूट को मौजूदा ₹2 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख किया जा सकता है। यह सीमा लगभग एक दशक से नहीं बदली गई है, इसलिए इसमें बढ़ोतरी की प्रबल संभावना है।
यह कदम न सिर्फ घर खरीदारों को राहत देगा, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर को भी बढ़ावा देगा। सरकार “मेड इन इंडिया” उत्पादों, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और किफायती आवास को सस्ता बनाने पर जोर दे रही है।
दवाइयां और मेडिकल उपकरण सस्ते होंगे
स्वास्थ्य सेवाओं को किफायती बनाने की दिशा में सरकार बड़ा कदम उठा सकती है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं और लाइफ सेविंग मेडिकल डिवाइसेस पर कस्टम ड्यूटी कम होने की उम्मीद है। इससे मरीजों को महंगे इलाज में राहत मिलेगी।
इसके साथ ही, हेल्थ इंश्योरेंस पर भी सरकार जीएसटी कम कर सकती है, ताकि अधिक लोग स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीद सकें। सेक्शन 80D के तहत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर टैक्स कटौती की सीमा (वर्तमान में ₹25,000/₹50,000) बढ़ाए जाने की भी मांग है।
क्या चीजें महंगी हो सकती हैं?
सस्ती चीजों की लिस्ट के साथ-साथ कुछ वस्तुएं महंगी भी हो सकती हैं। लग्जरी और इंपोर्टेड आइटम्स पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई जा सकती है। इसका मतलब है कि विदेश से आने वाले महंगे जूते, कपड़े, घड़ियां और अन्य लग्जरी सामान की कीमतें बढ़ सकती हैं।
सरकार ने पहले ही संकेत दिया था कि तंबाकू और सिगरेट की कीमतें बढ़ाई जाएंगी। इस बजट में नए टैक्स व्यवस्था के तहत सिगरेट पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लगाई जा सकती है, जो पहले से 40% जीएसटी के अलावा होगी। इससे सिगरेट की कीमतें काफी बढ़ सकती हैं।
विदेशी कॉस्मेटिक्स यानी बाहर से आने वाले ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर भी टैक्स बढ़ाया जा सकता है, जिससे ये महंगे हो जाएंगे। इसी तरह, निटेड फैब्रिक्स (बुने हुए कपड़ों) पर भी ड्यूटी बढ़ने की आशंका है।
पेट्रोल-डीजल और खाद की कीमतें
आम अटकलें बताती हैं कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत की संभावना कम है। सरकार से इस मोर्चे पर कोई बड़ा संकेत नहीं मिला है।
खेती से जुड़ी वस्तुओं, खासकर खाद (फर्टिलाइजर) पर सब्सिडी घटाए जाने की भी आशंका है, जिससे किसानों के लिए ये महंगे हो सकते हैं। यह कदम राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने के लिए उठाया जा सकता है।
सीनियर सिटीजन्स के लिए राहत
वरिष्ठ नागरिकों को भी इस बजट से उम्मीदें हैं। उनके लिए बेसिक एग्जेम्पशन लिमिट बढ़ाई जा सकती है, जिसमें सभी सीनियर सिटीजन्स (60 साल से अधिक) के लिए ₹5 लाख की यूनिवर्सल सीमा का प्रस्ताव है। वर्तमान में 60-80 साल के लिए यह ₹3 लाख और 80 से अधिक के लिए ₹5 लाख है।
इसके अलावा, सेक्शन 80TTB के तहत बचत और फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाले ब्याज पर कटौती की सीमा को ₹50,000 से बढ़ाकर कम से कम ₹1 लाख करने की मांग है।
बजट के अन्य फोकस क्षेत्र
सरकार इस बजट में पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) को प्राथमिकता देने की उम्मीद है। सड़कें, रेलवे, शहरी बुनियादी ढांचा, नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी परियोजनाओं के लिए निरंतर आवंटन का अनुमान है।
रोजगार सृजन, विनिर्माण क्षेत्र और एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) को बढ़ावा देने के लिए भी कदम उठाए जा सकते हैं। क्रेडिट सपोर्ट, आसान कंप्लायंस और निर्यात प्रोत्साहन की उम्मीद है।
ग्रीन ट्रांजिशन के लिए भी अधिक आवंटन की संभावना है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बुनियादी ढांचे पर जोर दिया जा सकता है।
1 फरवरी को होगा फैसला
अंततः यह 1 फरवरी 2026 को ही साफ होगा कि सरकार इस बजट में क्या सौगात देती है। यह बजट रविवार को पेश किया जाएगा, जो एक असामान्य दिन है। इकोनॉमिक सर्वे 2026 ने वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.8-7.2% रहने का अनुमान लगाया है, जो घरेलू मांग की मजबूती पर आधारित है।
देश की जनता और उद्योग जगत की निगाहें अब सीतारमण के बजट भाषण पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि इस साल आपकी जेब पर क्या असर होगा।
मुख्य बातें (Key Points)
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 (रविवार) को अपना रिकॉर्ड नौवां लगातार बजट पेश करेंगी।
मिडिल क्लास को टैक्स राहत की उम्मीद; ₹15 लाख तक की आय पर जीरो टैक्स पॉलिसी की संभावना।
मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयां और मेडिकल उपकरण सस्ते हो सकते हैं; होम लोन पर टैक्स छूट ₹5 लाख तक बढ़ सकती है।
लग्जरी आइटम, सिगरेट, विदेशी कॉस्मेटिक्स महंगे होने की आशंका; पेट्रोल-डीजल में राहत की संभावना कम।








