Iran Protest Crisis : ईरान में महंगाई, बेरोजगारी और दमन के खिलाफ उठी जनता की आवाज अब 15वें दिन में पहुंच चुकी है। सड़कों से लेकर संसद तक हालात बेकाबू हैं और अब यह टकराव सिर्फ सरकार बनाम जनता नहीं रह गया। तेहरान से आई धमकियों ने अमेरिका और इजराइल को सीधे इस संकट में खींच लिया है, जिससे युद्ध की आशंका और गहरा गई है।

तेहरान से संसद तक भड़का गुस्सा
ईरान की राजधानी तेहरान में विरोध प्रदर्शन लगातार हिंसक होते गए हैं। सरकारी आंकड़ों से अलग जमीनी तस्वीर डरावनी है। अब तक 538 लोगों की मौत, 10,600 से ज्यादा गिरफ्तारियां और 60 घंटे से अधिक का इंटरनेट ब्लैकआउट सामने आया है। इंटरनेट बंद होने के कारण देश के भीतर की तस्वीरें बाहर नहीं पहुंच पा रहीं, लेकिन जो जानकारियां सामने आई हैं, वे हालात की गंभीरता बयान करने के लिए काफी हैं।
संसद अध्यक्ष की खुली धमकी
ईरान की संसद में हालात उस वक्त और बिगड़ गए, जब लाइव सत्र के दौरान सांसद मंच की ओर दौड़ते दिखे और ‘डेथ टू अमेरिका’ के नारे गूंजे। संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालीबा ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने, उनके जहाज और इजराइल सीधे निशाने पर होंगे।

प्रदर्शनकारियों पर सख्ती का ऐलान
कालीबा ने यहीं रुककर प्रदर्शनकारियों को भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने गिरफ्तार लोगों के साथ “सबसे सख्त” कार्रवाई की बात कही और पुलिस व पैरामिलिट्री फोर्स Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) की खुलकर तारीफ की। सरकारी एजेंसी Tasnim News के अनुसार, कई इलाकों में प्रदर्शन हिंसक हो चुके हैं और सरकारी परिसरों को निशाना बनाया गया है।
अमेरिका की चेतावनी, इजराइल अलर्ट
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया पर संकेत दिया कि ईरान शायद आज़ादी की ओर देख रहा है और अमेरिका मदद को तैयार है। इस बयान के बाद ईरान की धमकी ने हालात और तनावपूर्ण कर दिए। नतीजतन Israel हाई अलर्ट मोड पर आ गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक Reuters ने सुरक्षा सतर्कता बढ़ने की पुष्टि की है।
पहले भी हो चुका है टकराव
याद दिला दें कि जून में ईरान और इजराइल के बीच 12 दिन की जंग हो चुकी है, जिसमें अमेरिका ने इजराइल के साथ मिलकर हवाई हमले किए थे। हाल ही में इजराइली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio के बीच फोन पर बातचीत भी हुई, हालांकि मुद्दों का खुलासा नहीं किया गया।
आम लोगों पर असर और बढ़ता डर
महंगाई और बेरोजगारी से परेशान आम लोग अब सीधे सत्ता के खिलाफ खड़े हैं। सड़कों पर आग है, जेलें भर चुकी हैं और इंटरनेट बंद होने से परिवार अपनों की खबर तक नहीं ले पा रहे। यह संकट सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए खतरा बन गया है।
क्या है पृष्ठभूमि
ईरान में आर्थिक संकट, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और राजनीतिक दमन के खिलाफ लंबे समय से असंतोष पनप रहा था। हालिया प्रदर्शनों ने उस गुस्से को हिंसक रूप दे दिया है। संसद से आई धमकियों और अमेरिका-इजराइल की प्रतिक्रिया ने इस आंतरिक संकट को वैश्विक टकराव के मोड़ पर ला खड़ा किया है।
मुख्य बातें (Key Points)
- ईरान में 15 दिनों से हिंसक प्रदर्शन जारी, सैकड़ों मौतें।
- संसद अध्यक्ष की अमेरिका-इजराइल को सीधी धमकी।
- ट्रंप के बयान के बाद इजराइल हाई अलर्ट पर।
- इंटरनेट ब्लैकआउट से हालात और गंभीर।








