Women Heart Disease को लेकर भारत में एक बड़ी गलतफहमी फैली हुई है कि दिल की बीमारियां और हार्ट अटैक सिर्फ पुरुषों की समस्या है। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। 2019 में हुई Global Burden of Disease स्टडी के मुताबिक भारत में दिल की बीमारियों से कुल 28% मौतें होती हैं और इनमें महिलाओं की तादाद लगातार बढ़ रही है। तीन प्रमुख कार्डियोलॉजिस्ट : डॉ. प्राची शर्मा (इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट, मेट्रोप्राइम हॉस्पिटल, जबलपुर), डॉ. प्रीति शर्मा (डायरेक्टर, कार्डियाक साइंसेस, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, देहरादून) और डॉ. सरिता राव (सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट, अपोलो हॉस्पिटल, इंदौर) ने Women Heart Disease से जुड़े कई चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं जो हर भारतीय महिला और उसके परिवार को जानने जरूरी हैं।
भारतीय महिलाओं में Heart Disease: आंकड़े डराने वाले हैं
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि Women Heart Disease भारत में कितनी आम है। डॉ. प्रीति शर्मा के अनुसार, लगभग 18 से 20% भारतीय महिलाएं हृदय रोग और उससे संबंधित बीमारियों से पीड़ित हैं। दिल की जिस बीमारी से सबसे ज्यादा मौतें होती हैं, उसका नाम है कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD)।
NFHS-5 (2019-2021) के डाटा के मुताबिक भारत में लगभग 24% महिलाएं ओवरवेट या ओबीज हैं। वहीं 21% महिलाओं को हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है। ये दोनों ही स्थितियां Women Heart Disease का खतरा कई गुना बढ़ा देती हैं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि भारतीय महिलाओं को पश्चिमी देशों में रहने वाली महिलाओं के मुकाबले 5 से 10 साल पहले ही दिल की बीमारियां हो जाती हैं। इसके पीछे वजह हैं ओबेसिटी, डायबिटीज, हाइपरटेंशन, एक्सरसाइज की कमी और PCOD जैसी बीमारियों में बढ़ोतरी।
30-40 की उम्र में भी Heart Attack: उम्र अब सुरक्षा कवच नहीं रही
डॉ. सरिता राव ने बेहद चिंताजनक आंकड़ा साझा किया। उनके मुताबिक, 1990 के दशक में युवा उम्र में करीब 21% हार्ट अटैक के मामले सामने आते थे, लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़कर 31% हो चुका है। इसका साफ मतलब है कि Women Heart Disease अब सिर्फ बुजुर्ग महिलाओं की समस्या नहीं रही।
डॉ. सरिता राव ने स्पष्ट किया कि कम उम्र में हार्ट अटैक के पीछे कई कारण हैं। लाइफस्टाइल पूरी तरह बदल गई है। स्ट्रेस लेवल बहुत बढ़ गया है। ओबेसिटी तेजी से बढ़ रही है और लोग एक्सरसाइज कम कर रहे हैं। सेडेंटरी लाइफस्टाइल हावी हो गई है। इसके अलावा भारतीयों की जेनेटिक बनावट ऐसी है कि उन्हें पश्चिमी देशों के लोगों के मुकाबले 10 साल पहले हार्ट अटैक का खतरा हो जाता है।
यह बात आम महिलाओं के लिए एक बड़ी चेतावनी है। अगर कोई 30-35 साल की महिला यह सोच रही है कि उसे दिल की बीमारी नहीं हो सकती, तो उसे अपनी सोच बदलने की जरूरत है।
Women Heart Attack Symptoms: महिलाओं में लक्षण बिल्कुल अलग होते हैं
Women Heart Disease की सबसे बड़ी समस्या यह है कि महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों से काफी अलग होते हैं। डॉ. प्राची शर्मा ने इस बारे में विस्तार से बताया कि पुरुषों में आमतौर पर सीने पर जकड़न, हैवीनेस और भारीपन महसूस होता है, लेकिन महिलाओं में ऐसा जरूरी नहीं है।
महिलाओं में हार्ट अटैक के दौरान सीने में दर्द हो ही न या फिर बहुत मामूली दर्द हो। इसकी बजाय महिलाओं में अचानक पसीना आना, सांस फूलना, जबड़े में दर्द होना या अचानक बहुत ज्यादा थकान महसूस होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कई बार महिलाओं को लगता है कि एसिड बन रहा है, गैस बन रही है या बदहजमी हो रही है।
डॉ. प्राची शर्मा ने खासतौर पर सचेत किया कि अगर ये लक्षण 15-20 मिनट से ज्यादा समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए क्योंकि ये Women Heart Disease और हार्ट अटैक के संकेत हो सकते हैं।
PCOD और Heart Disease: हार्मोनल समस्या के पीछे छिपा दिल का खतरा
Women Heart Disease की एक बड़ी वजह PCOD (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज) भी है, जिसके बारे में ज्यादातर महिलाएं अनजान हैं। डॉ. प्रीति शर्मा ने समझाया कि PCOD को लोग सिर्फ एक हार्मोनल समस्या समझते हैं जो रिप्रोडक्टिव एज ग्रुप की महिलाओं को होती है। लेकिन PCOD में हार्मोनल प्रॉब्लम के साथ-साथ मेटाबॉलिक डिसऑर्डर्स भी होते हैं।
इसमें हाई ब्लड प्रेशर, हाई इंसुलिन रेजिस्टेंस और डायबिटीज का ज्यादा खतरा शामिल है। ये सभी रिस्क फैक्टर्स मिलकर महिलाओं में कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ा देते हैं।
डॉ. सरिता राव ने इस बात पर जोर दिया कि जिन युवा महिलाओं को PCOD है, उनमें Women Heart Disease का खतरा काफी ज्यादा है। PCOD में इंसुलिन रेजिस्टेंस से शुगर बढ़ती है, लिपिड प्रोफाइल बिगड़ती है, कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है और ब्लड प्रेशर भी बढ़ता है। इसीलिए ऐसी महिलाओं की बहुत कम उम्र से स्क्रीनिंग शुरू करके समय पर इलाज करना जरूरी है।
PCOD में स्क्रीनिंग क्यों जरूरी: क्या-क्या चेक कराएं
डॉ. प्रीति शर्मा ने बताया कि PCOD वाली महिलाओं को बेसिक स्क्रीनिंग में अपना ब्लड प्रेशर चेक कराना चाहिए, वजन पर नजर रखनी चाहिए, BMI देखना चाहिए, शुगर लेवल्स और कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए। इसके अलावा कुछ हार्मोनल टेस्ट भी होते हैं जो डॉक्टर बताते हैं।
इस स्क्रीनिंग का मकसद यह है कि जो भी रिस्क फैक्टर्स हैं उन्हें समय रहते पहचानकर कंट्रोल किया जा सके, ताकि आगे चलकर Women Heart Disease या हार्ट अटैक का खतरा कम हो।
प्रेगनेंसी में कॉम्प्लिकेशंस: आगे चलकर दिल को खतरा
Women Heart Disease का एक और अनदेखा पहलू प्रेगनेंसी से जुड़ा है। डॉ. सरिता राव ने बताया कि प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में कई बदलाव होते हैं। कई महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान गेस्टेशनल हाइपरटेंशन (प्रेगनेंसी में हाई बीपी), गेस्टेशनल डायबिटीज और लिपिड प्रोफाइल में गड़बड़ी होती है।
ज्यादातर लोग यह सोचते हैं कि डिलीवरी के बाद ये सब नॉर्मल हो जाएगा। कई मामलों में ऐसा हो भी जाता है। लेकिन जिन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान ये समस्याएं हुई हैं, उनमें आगे चलकर कोरोनरी आर्टरी डिजीज और कार्डियोवस्कुलर डिजीज का खतरा काफी बढ़ जाता है।
इसीलिए अगर किसी महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या कोलेस्ट्रॉल में गड़बड़ी हुई है, तो उसे लॉन्ग टर्म फॉलोअप की सख्त जरूरत है। यह बात हर महिला और उसके परिवार को समझनी चाहिए।
क्या महिलाओं को पुरुषों जैसी कार्डियाक केयर मिल रही है?
Women Heart Disease का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि महिलाओं को पुरुषों जैसी कार्डियाक केयर आज भी नहीं मिल रही। डॉ. प्राची शर्मा ने इस पर बेबाकी से कहा कि समस्या हर स्तर पर है।
पहली समस्या यह है कि महिलाएं खुद अपने लक्षणों को इग्नोर करती हैं। सांस फूल रही है, बदहजमी लग रही है, एसिडिटी हो रही है, तो सोच लेती हैं कि कोई बात नहीं, कल दिखा लेंगे। वे तुरंत डॉक्टर के पास नहीं जातीं।
दूसरी समस्या यह है कि परिवार वाले भी जितनी तेजी से एक पुरुष को हार्ट अटैक के लक्षण दिखने पर डॉक्टर के पास ले जाते हैं, उतनी तवज्जो महिलाओं को नहीं दी जाती। यहां तक कि कई बार हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स भी पुरुषों के लक्षणों पर जितना ध्यान देते हैं, महिलाओं के लक्षणों को कई बार इग्नोर कर देते हैं।
नतीजा बेहद भयानक है। डॉ. प्राची शर्मा ने बताया कि Women Heart Disease और हार्ट अटैक की वजह से महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले 20% ज्यादा मौतें होती हैं। स्टडीज में यह भी पाया गया है कि हार्ट अटैक होने के बाद महिलाओं में एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसा उचित उपचार पुरुषों के मुकाबले बहुत कम किया जाता है।
महिलाओं की दिल की सेहत से जुड़े बड़े मिथक जो तोड़ने जरूरी हैं
डॉ. प्रीति शर्मा ने Women Heart Disease से जुड़े कुछ बड़े मिथकों को तोड़ा जो आज भी समाज में गहरे तक जड़ें जमाए बैठे हैं।
पहला मिथक: महिलाओं को हृदय रोग नहीं होता, यह सिर्फ पुरुषों की बीमारी है। सच्चाई यह है कि 20 से 30% महिलाओं को हार्ट और उससे संबंधित बीमारियां होती हैं।
दूसरा मिथक: युवा महिलाओं को हार्ट की दिक्कत नहीं होती क्योंकि एस्ट्रोजन हार्मोन उन्हें प्रोटेक्ट करता है। सच्चाई यह है कि अगर किसी युवा महिला की जेनेटिक हिस्ट्री है, उसे हाई ब्लड प्रेशर है, डायबिटीज है या PCOD है, तो उसे भी हार्ट अटैक का उतना ही खतरा है जितना एक पुरुष को।
तीसरा मिथक: हार्ट अटैक में बहुत तेज सीने में दर्द होता है। अगर दर्द कम है तो हार्ट अटैक नहीं है। सच्चाई यह है कि महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण बिल्कुल अलग होते हैं। अगर गैस या एसिडिटी समझकर इलाज करते रहे और टाइमली ट्रीटमेंट नहीं लिया तो Women Heart Disease के कॉम्प्लिकेशंस बहुत गंभीर हो सकते हैं।
90% हार्ट अटैक रोके जा सकते हैं: ये बदलाव जरूर करें
डॉ. प्राची शर्मा ने एक बेहद उम्मीद भरी बात बताई कि Women Heart Disease और हार्ट अटैक 90% रूप से रोके जा सकते हैं। इसके लिए बस कुछ लाइफस्टाइल बदलाव जरूरी हैं।
रोजाना 30 मिनट एक्सरसाइज करें। हफ्ते में पांच दिन साइकलिंग, योगा या ब्रिस्क वॉक करें। खाने में फल, सब्जियां, नट्स और दालों का सेवन बढ़ाएं। चीनी और नमक की मात्रा कम करें। फ्राइड फूड्स और पैकेज्ड फूड्स से दूर रहें। स्मोकिंग बिल्कुल बंद करें। ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं। वजन कंट्रोल में रखें क्योंकि ओबेसिटी Women Heart Disease का बहुत बड़ा रिस्क फैक्टर है। स्ट्रेस से बचें, मेडिटेशन करें। रोजाना 8 घंटे अच्छी नींद लें।
डॉक्टर सरिता का ABCDE फॉर्मूला: हर महिला के लिए जरूरी
डॉ. सरिता राव ने हर महिला को एक खास संदेश दिया और Women Heart Disease से बचने का ABCDE फॉर्मूला बताया। उन्होंने कहा कि एक हेल्दी महिला से घर हेल्दी रहता है और एक हेल्दी घर से पूरा देश हेल्दी रहता है।
A : Abdominal Obesity : पेट की चर्बी और मोटापे को दूर रखें।
B : Blood Pressure : नियमित रूप से ब्लड प्रेशर चेक कराएं।
C : Cholesterol Level : कोलेस्ट्रॉल की जांच कराते रहें क्योंकि इससे भी दिल की बीमारी होती है।
D : Diet : खाना खाते समय कैलोरिक वैल्यू कम रखें और ताजे फल-सब्जियां खाएं।
E : Exercise : रोजाना कम से कम एक घंटा अपने लिए निकालें और एक्सरसाइज जरूर करें।
हर परिवार को समझनी होगी यह बात
Women Heart Disease के बारे में सबसे जरूरी बात यह है कि अगर घर में किसी महिला को अचानक पसीना आ रहा है, घबराहट हो रही है, एसिडिटी जैसा महसूस हो रहा है, सीने में जलन हो रही है, सांस फूल रही है या अचानक बहुत थकान लग रही है, तो इसे सिर्फ गैस या एसिडिटी समझकर टालना जानलेवा हो सकता है।
जितनी तवज्जो घर के पुरुषों के दिल की सेहत को दी जाती है, ठीक उतनी ही तवज्जो महिलाओं को भी दी जानी चाहिए। लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए क्योंकि समय से इलाज हो जाए तो दिल को परमानेंट डैमेज से बचाया जा सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- भारत में दिल की बीमारियों से 28% मौतें होती हैं और 18-20% भारतीय महिलाएं Women Heart Disease से पीड़ित हैं, फिर भी महिलाओं को पुरुषों जैसी कार्डियाक केयर नहीं मिलती।
- महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण अलग होते हैं : सीने में तेज दर्द की बजाय पसीना, सांस फूलना, जबड़े में दर्द, थकान और एसिडिटी जैसा महसूस होना हार्ट अटैक के संकेत हो सकते हैं।
- PCOD वाली युवा महिलाओं में इंसुलिन रेजिस्टेंस, हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई बीपी की वजह से हार्ट अटैक का खतरा काफी ज्यादा होता है, इसलिए कम उम्र से ही स्क्रीनिंग जरूरी है।
- 90% हार्ट अटैक रोके जा सकते हैं : रोजाना एक्सरसाइज, संतुलित आहार, वजन नियंत्रण, स्मोकिंग बंद करना और नियमित जांच से Women Heart Disease का खतरा काफी कम किया जा सकता है।







