West Bengal Economic Decline की कहानी 2006 के Singur से शुरू होती है जहां एक फैसले ने पूरे राज्य की किस्मत बदल दी। Tata Motors को Nano project के लिए West Bengal सरकार ने 1000 एकड़ जमीन allot की थी। लेकिन जैसे ही यह जमीन allot हुई, Singur के किसान इसका विरोध करने लगे। देखा जाए तो सरकार के हिसाब से यह जमीन single-crop land थी, लेकिन किसानों का मानना था कि उनकी जमीनें बहुत fertile हैं।
ढेर सारे NGOs, environmental activists, intellectuals और Mamata Banerjee भी अपनी पार्टी TMC (Trinamool Congress) के साथ किसानों के साथ आकर खड़ी हो गईं। 2008 तक चले इस आंदोलन ने हिंसा की भी राह पकड़ ली। जिसके बाद Tata ने अपने plant को Bengal से Gujarat shift करने का फैसला किया।
हैरान करने वाली बात यह है कि इस तरह से Bengal में Tata का बना-बनाया ₹1550 करोड़ का plant बर्बाद हो गया। इस आंदोलन से Mamata Banerjee का political land जरूर fertile हो रहा था, लेकिन West Bengal के industrial growth का सपना एक बार फिर ठंडे बस्ते में चला गया।
समझने वाली बात है कि Tata से पहले किसी ने Bengal में इतना बड़ा investment नहीं किया था और न ही उसके बाद आज तक ऐसा कोई step लिया गया है। इस anti-industrial vision में कहीं न कहीं Bengal के लोगों ने भी अपना support दिया। इसी के चलते 2011 के state assembly elections में 34 सालों बाद CPI(M) की हार हुई और Mamata Banerjee Bengal की CM बनीं।
आजादी के बाद सबसे अमीर था Bengal
दिलचस्प बात यह है कि आजादी के बाद देश से यह उम्मीदें लगाई जा रही थीं कि Bengal देश की economy को boost करेगा। लेकिन वह खुद अपने यहां की industries और business को बर्बाद करके सिर्फ agriculture और unorganized sector तक ही सिमट गया।
Bengal की civilization 4000 साल से भी ज्यादा पुरानी है। Ganga और Brahmaputra जैसी दो सबसे बड़ी नदियों के fertile land पर बसा यह राज्य भारत का eastern part है। Bengal में मौजूद rich Gangetic Delta इस region के inhabitation और economic wealth के लिए शुरू से ही जिम्मेदार रहा है।
Bengal अपनी positioning की वजह से Indian subcontinent के far eastern side तक पहुंचने का सबसे आसान तरीका भी रहा है। यह Bay of Bengal को Himalaya से जोड़ने वाला सबसे छोटा route भी provide करता है। यही वजह है कि Bengal शुरू से ही एक commercial hub रहा है।
Silk Route का गौरवशाली इतिहास
Bengal को famous Silk Route से connect करता है। जहां से Eurasian traders Bay of Bengal के रास्ते South East देशों तक जाते थे। Second century से लेकर 15th century तक Bengal में बनने वाले सभी सामान इसी Silk Route के जरिए Central Asia से होते हुए Europe जाते रहे।
18th century तक Bengal का silk और cotton पूरी दुनिया में famous था। उस time के सभी travelers ने अपने Indian visit पर Bengal के silk और cotton का जिक्र जरूर किया है। यही कारण है कि Bengal में अंग्रेजों के आने से पहले एक rich handloom industry काम करती थी। Bengal में बनने वाले कपड़ों का export दुनिया भर में किया जाता था।
अगर गौर करें तो Bengal के इसी business के चलते 18th century तक India की GDP global GDP की 25% थी। कई European travelers ने तो Bengal के Muslin (मलमल) के बारे में यह तक लिखा है कि इसकी तुलना दुनिया के किसी भी muslin से नहीं की जा सकती।
उस time पर textile के साथ Bengal के handicrafts भी पूरी दुनिया में famous थे। Bengal हमेशा से ही अपने music, art, culture और intellect के लिए पहचाना जाता रहा है।
Partition का सबसे बड़ा झटका
1943 की tragedy से Bengal संभल पाता कि 1947 में देश की आजादी के साथ हुए Partition ने Bengal के एक बड़े हिस्से को उससे अलग कर East Pakistan का हिस्सा बना दिया। इस तरह से Bengal की glory आजादी के साथ ही फीकी पड़ने लगी।
हालांकि तब भी Bengal भारत के बाकी states से काफी अमीर था। लेकिन अगले एक दशक में Bengal देश के बाकी राज्यों से भी काफी पिछड़ गया। 2018-19 तक आते-आते West Bengal की economical condition इतनी decline हो गई कि वो Chhattisgarh जैसे राज्य से भी गरीब हो गया।
Jute Industry का पतन
1947 के Partition में Bengal की established economy को सबसे बड़ा धक्का तब लगा जब Bengal की jute mills से production बंद हो गया। दरअसल ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि Partition में West Bengal के हिस्से पांच jute mills जरूर आई थीं, लेकिन उसके लिए जरूरी raw material East Pakistan के हिस्से से आता था।
East Pakistan, जिसे इस business में West Bengal के साथ मिलकर काम करना था, उसने jute पर tax बढ़ा दिए। जिससे jute products के दाम बढ़ गए और Bengal के jute की demand घटने लगी।
दूसरा कारण यह भी था कि Nylon जैसे synthetic fabrics market में आ गए थे। लोगों को यह synthetic fabrics बहुत कम दामों में ही मिलने लगे। जिसने jute के production को और बर्बाद कर दिया। इसका सीधा असर Bengal की economy पर पड़ा।
चिंता का विषय यह है कि जिस business को आजादी के बाद grow होना था, वह पूरी तरह से बंद होने की कगार पर पहुंच गया।
फिर भी 1960 में सबसे आगे था Bengal
लेकिन जैसा कि हमने पहले बताया, colonialism और Partition के बावजूद भी Bengal की economy पूरे देश में सबसे strong थी। 1960 में Bengal का Net State Domestic Product (NSDP) Maharashtra से भी ज्यादा था।
लेकिन कुछ ही सालों में Maharashtra ने Bengal को न सिर्फ overtake किया बल्कि वह सबसे आगे भी निकल गया। Bengal की economy बाकी states के मुकाबले भी लगातार गिरती चली गई।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि सोचा यह जा रहा था कि आजादी के बाद Bengal India के development में न सिर्फ intellectually participate करेगा बल्कि economically भी वो भारत के लिए booster की तरह होगा। लेकिन यह सोच mid-60s तक आते-आते पूरी तरह से गलत साबित हुई।
1965-1977: सबसे काला दौर
अगर हम 1965 से 1977 के time को एक साथ analyze करते हैं तो यही वो साल था जिसने Bengal की economy को सबसे ज्यादा कमजोर किया। और Bengal आज तक इससे उभर नहीं पाया है।
1965 के बाद Bengal की economic decline में Indo-Pak War का भी बड़ा role रहा है। इस time period में भारत ने Pakistan के साथ दो युद्ध लड़े जिसकी वजह से पूरे देश की economy पर बहुत बुरा असर पड़ा।
भले ही अब तक Bengal की economy textile पर depend करती थी, लेकिन 1960 में यह engineering sector की तरफ inclined हो गई। इसका बड़ा कारण था Indian government का railways में बहुत extensive investment।
Railways को develop करने के लिए अलग-अलग engineering goods की demand बढ़ गई थी और यह Bengal में ही बनाया जा रहा था। Bengal के लोग भी engineering sector में ज्यादा काम करने लगे थे।
लेकिन war के चलते Bengal की railway industry में भारत सरकार का investment rapidly घट गया। Bengal की economy का engineering shift भी बर्बाद हो गया।
Left Politics और Naxalite Movement
साथ ही Bengal की politics ने भी late 60s में करवटें लेना शुरू कर दिया था। Left parties का influence बढ़ता गया। Left party और Marxism के बढ़ते influence के बीच West Bengal में Siliguri के Naxalbari गांव से Naxalite Movement की भी शुरुआत हो गई।
Charu Majumdar के leadership में CPI(M) के radical group ने Bengal में zamindars के exploitation के खिलाफ हिंसक आंदोलन किए। Naxalbari से शुरू हुए इस violent movement ने पूरे Bengal के upper class के लिए एक threat पैदा कर दिया।
बड़े लोग जिनके पास capital था, land था – वो भी Bengal में insecure feel करने लगे। इसीलिए नए innovations जिनकी Bengal की economy को जरूरत थी, वो नहीं हो सकीं।
CPI(M) का 34 साल का शासन
Left की ideology जो workers और किसानों के हक की बात करती थी, उसे Bengal के आम लोगों ने पसंद करना शुरू कर दिया। इसका result यह हुआ कि 1969 में पहली बार CPI(M) ने Bengal के elections में Congress से ज्यादा seats हासिल कीं।
1967 से 1971 के बीच Left parties की वजह से state में strikes और lockouts के cases अचानक से बढ़ गए। बहुत सी companies इस बढ़ते strike culture से परेशान हो गईं और वह Bengal से shift होकर दूसरे coastal areas जैसे Maharashtra या Gujarat की तरफ migrate करने लगीं।
देखते ही देखते Bengal में private investment पूरी तरह से बंद हो गया। जिसका सीधा असर Bengal की industries पर हुआ और वह capital deficiency की मार झेलने लगीं।
समझने वाली बात है कि ऐसी situation से निकलने के लिए Bengal को economic reforms की जरूरत थी। लेकिन ऐसा कोई reform नहीं हुआ क्योंकि Bengal की society और आम लोगों ने इसे एक socialist state की तरह देखना शुरू कर दिया था।
1971 Bangladesh War और Refugee Crisis
1971 में Bangladesh War के दौरान West Bengal में large scale पर migration होना शुरू हो गया। Refugee Relief and Rehabilitation Department of the Government of West Bengal की मानें तो 1971 में करीब 60 lakh refugees ने East Pakistan से West Bengal में migrate किया। 1980 तक ये number 80 lakh तक पहुंच गया।
इसने Bengal की economy पर extra burden डाल दिया। राहत की बात नहीं है – यह एक और संकट था जिससे Bengal को जूझना पड़ा।
Jyoti Basu का दौर (1977-2000)
1977 में CPI(M) ने Bengal में पहली बार अपनी government बनाई। Jyoti Basu Bengal के नए Chief Minister बने। Bengal के विकास के लिए उनसे काफी उम्मीदें जताई जा रही थीं। 1978 में वह Bengal के लिए नई Industrial Policy भी लेकर आए।
लेकिन यहां पर भी heavy industrial growth की सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया क्योंकि इस policy में ज्यादा focus छोटे और small scale industries की growth पर ही किया गया था।
Operation Barga और Land Reforms
Jyoti Basu के land reforms ने भी Bengal के capitalists को किसी लायक नहीं छोड़ा। दरअसल Bengal में land reforms के दौरान Operation Barga को शुरू किया गया था। जिसके तहत बड़े zamindars और अमीर लोगों की जमीनों पर उन किसानों को forcefully कब्जा लेने का हक दिया गया जो बहुत पहले से उनकी जमीनों पर काम कर रहे थे।
इससे West Bengal में 15 lakh से ज्यादा किसानों को फायदा हुआ जिन्होंने 11 lakh एकड़ की जमीन को अपने कब्जे में कर लिया। इससे हुआ यह कि Bengal में छोटे-छोटे किसानों के groups बन गए जो zamindars और अमीर लोगों की जमीन पर कब्जा करने के लिए violent activities करते।
Bengal के rich class के लोगों में इन rebel groups की वजह से एक डर पैदा हो गया। जिसके चलते Bengal में बड़े business grow नहीं कर पाए। नई companies न तो Bengal में establish हो पाईं और पुरानी companies भी Bengal से shift होने लगीं।
1991 के Economic Liberalization का प्रभाव
1991 में सरकार ने भारत की economy को open कर दिया जिससे foreign investors के लिए भारत में invest करना आसान हो गया। Economic liberalization का असर Bengal पर भी देखने को मिला।
Bengal की government ने 1994 में नई Industrial Policy लागू की जिससे बड़ी industries की दिक्कतें कुछ कम हुईं। Bengal सरकार ने tax में भी कटौती की जिसके चलते Bengal का urban poverty rate भी कम हो गया।
लेकिन इन सबके बावजूद भी Bengal को जिस growth की जरूरत थी, वो Bengal को नहीं मिल पा रही थी। इसका एक बड़ा कारण था Bengal का पुराना और कमजोर infrastructure।
Infrastructure की भारी कमी
70s तक तो Bengal का infrastructure पूरे भारत में सबसे बेहतरीन था। लेकिन उसके बाद देश के बाकी हिस्सों में infrastructure पर लगातार काम किया गया, जबकि Bengal अपने उसी infrastructure पर चलता रहा।
अगर आपने गौर किया हो तो Kolkata जैसे बड़े शहरों में आज modern-day buildings उतनी नजर नहीं आएंगी जितनी Mumbai और Bengaluru जैसे शहरों में देखने को मिल जाती हैं।
Bengal के poor infrastructure का सबसे बड़ा कारण lack of revenue था। Bengal government के पास उतना revenue नहीं था कि वो उसे public infra पर खर्च करें।
Land Acquisition की जटिलताएं
Infrastructure के अलावा Bengal में किसी भी बड़ी company के लिए अपना plant setup करने के लिए land acquire करने में बहुत मुश्किलें आती थीं। सरकार ने जो land reforms किए थे, उसके according यह तय ही नहीं हो पाया था कि कौन सी जमीन agriculture के purpose से इस्तेमाल की जाएगी और किस पर industry को settle किया जाएगा।
इसी confusion की वजह से Bengal में जब भी किसी industry को set करने के लिए जमीन allot की जाती, वहां के किसान यह कहकर इसका विरोध करने लगते कि जिस जमीन पर industry को set किया जा रहा है, वो agriculture land है।
सवाल उठता है कि क्या सरकार ने कभी इस issue को solve करने की कोशिश की? नहीं, बल्कि political gains के लिए इसे और भड़काया गया।
West Bengal की Geographical Challenge
इसके पीछे जितनी जिम्मेदारी सरकार की है, उतनी ही West Bengal की geographical condition भी responsible है। ऐसा कहा जाता है कि West Bengal की 60% से ज्यादा जमीन agriculture के purpose के लिए ही नहीं है।
ऐसे में अगर किसानों की जमीनों को छीनकर बड़े उद्योगपतियों को दिया जाता तो विरोध का सामना तो करना ही पड़ता। यह एक genuine concern भी था जिसे political parties ने अपने फायदे के लिए use किया।
Mamata Banerjee का दौर (2011 से अब तक)
2011 में जब Mamata Banerjee की नई सरकार किसानों को उनकी जमीन वापस दिलाकर सत्ता में आई, उस time भी उन्होंने industries की जगह West Bengal की economy को boost करने के लिए agriculture पर ही focus किया।
लेकिन उसके बाद भी कोई खास बदलाव नहीं आया है। अगर आप Bengal के 2012-13 से 2017-18 की growth rate को देखेंगे तो rest of India में जहां growth rate 7.1% थी, वहीं Bengal में यह सिर्फ 5% थी।
Unorganized Sector की समस्या
2015 के data से समझ सकते हैं कि 2015 में biggest unorganized sector Bengal में ही था। यह नियम है कि किसी भी state की economy जितनी अधिक unorganized sector पर depend करेगी, उसकी growth rate उतनी ही कम होगी।
आपको जानकर हैरानी होगी कि 1980 तक देश की manufacturing में Bengal का share 12% था। लेकिन यह anti-industrial mindset की वजह से 2011 तक सिर्फ 4% ही रह गई है।
Bengal के लोग और वहां की economy आज भी agriculture से बहुत obsessed है। इसी के चलते Bengal में लोगों को formal jobs की जगह सिर्फ daily wage type का ही काम मिल पाता है।
जिससे Bengal का unemployment rate बाकी के राज्यों से जरूर कम नजर आता है, लेकिन वहां पर सबसे बड़ी संख्या labourers की ही है।
Social Welfare Schemes पर Over-Dependence
मौजूदा सरकार भी लोगों को social welfare schemes और कई freebies के सहारे ही अपने साथ लेकर चल रही है। लेकिन अभी Bengal को कुछ नए economic reforms और industries की सख्त जरूरत है।
राहत की बात नहीं है – यह चिंता का विषय है कि एक समय का economic powerhouse आज subsidies और freebies पर चल रहा है।
Startup Culture की नई किरण
पिछले कुछ सालों में Bengal में भी startup culture develop होते हुए देखा जा रहा है। Kolkata-based startups ने 2014 से 2019 के बीच 37 deals में $44 million का fund raise किया है, जिसमें मुख्य रूप से agriculture और food businesses शामिल हैं।
इसके अलावा 2016 में TMC government ने भी West Bengal में startup culture को बढ़ावा देने के लिए नई policy launch की है। जिसमें university level पर ही youths को Bengal में innovative startups के लिए motivate किया जा रहा है।
उम्मीद की किरण यह है कि अगर यह सही दिशा में आगे बढ़े तो Bengal फिर से अपनी पुरानी glory हासिल कर सकता है।
आगे का रास्ता
Bengal न सिर्फ एक old और rich culture से जुड़ा रहा है बल्कि अपने geographical condition और positioning की वजह से हमेशा से strategically important साबित हुआ है। Bengal की wealth से ही Britishers भारत में establish हो पाए।
लेकिन आज वही Bengal industries और capital crisis से जूझ रहा है। Bengal के पास इतना potential अब भी है कि वो देश की leading growth वाली economy बन सके।
Government और local population को एक साथ मिलकर काम करना होगा जिससे Bengal एक बार फिर से भारत का shining star बन सके। Anti-industrial mindset को छोड़कर, modern infrastructure develop करके और ease of doing business improve करके ही Bengal अपनी पुरानी glory वापस पा सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
• Singur में Tata Nano का ₹1550 करोड़ का plant बर्बाद, Mamata के विरोध से Gujarat shift हुआ
• 1960 में Bengal का NSDP Maharashtra से ज्यादा था, आज पिछड़ गया
• Partition में jute industry का पतन, raw material East Pakistan में चला गया
• 1965-77 का दौर सबसे काला – Indo-Pak War और Naxalite Movement
• CPI(M) का 34 साल का शासन (1977-2011), strike culture से industries भागीं
• Operation Barga में 15 lakh किसानों को 11 lakh एकड़ जमीन मिली
• 1980 में manufacturing में 12% share, 2011 में घटकर 4% रह गया
• 60% जमीन agriculture के लायक नहीं, land acquisition मुश्किल
• 2012-18 में Bengal की growth 5%, बाकी India की 7.1%
• Biggest unorganized sector Bengal में, formal jobs की कमी











