LIVE | ...
बुधवार, 12 अगस्त 2026
🏅 सोना ... | 🥈 चांदी ...
The News Air
📈 NIFTY 50 ... | 🏦 NIFTY BANK ...
No Result
View All Result
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
No Result
View All Result
The News Air
No Result
View All Result

The News Air - Breaking News - Vitiligo Autoimmune Disease से जुड़े मिथक टूटे: खाने से नहीं होता सफेद दाग

Vitiligo Autoimmune Disease से जुड़े मिथक टूटे: खाने से नहीं होता सफेद दाग

मछली-दूध मिक्स या मांस से नहीं होता विटिलिगो, यह ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें शरीर अपने ही मेलानोसाइट्स पर हमला करता है

Ajay Kumar by Ajay Kumar
बुधवार, 12 अगस्त 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, हेल्थ
A A
0
Vitiligo Autoimmune Disease
104
SHARES
692
VIEWS
ShareShareShareShareShare

Vitiligo Autoimmune Disease India: पीढ़ियों से भारतीय घरों में यह चेतावनी दी जाती रही है कि मछली के साथ दूध ना लें, कुछ खास तरह का मांस ना खाएं वरना त्वचा पर सफेद दाग हो जाएंगे। लेकिन अब चिकित्सा विज्ञान ने साफ कर दिया है कि विटिलिगो एक ऑटोइम्यून कंडीशन है, जिसका खाने-पीने से कोई सीधा संबंध नहीं है।

देखा जाए तो यह मिथक इतना गहरा बैठा है कि आज भी हजारों लोग इसकी वजह से भेदभाव का शिकार होते हैं। दिलचस्प बात यह है कि दुनिया भर में लगभग 0.5 से 2% लोगों को विटिलिगो होता है, लेकिन भारत में यह आंकड़ा कुछ इलाकों में 8-9% तक पहुंच जाता है।

🔍 यह भी पढ़ें- Women Heart Disease: महिलाओं को Heart Attack का खतरा कम? जानें बड़ा सच

हर 100 में से 1 व्यक्ति को है विटिलिगो

यूरोप, जापान और अमेरिका के 35,694 लोगों पर किए गए एक बड़े सर्वे के अनुसार यह संख्या निकली 1.3%। यूरोप में 1.6%, अमेरिका में 1.4% और जापान में 0.5% लोगों को विटिलिगो है।

समझने वाली बात यह है कि The Lancet Public Health की 2024 की एक मॉडलिंग स्टडी ने सुझाव दिया कि विटिलिगो की व्यापकता साउथ एशिया और सेंट्रल यूरोप में सबसे ज्यादा है। मेडिकल लिटरेचर में बार-बार यह बात सामने आती है कि इंडियन सबकॉन्टिनेंट में विटिलिगो की प्रेवलेंस रिलेटिवली हाई है।

एक हॉस्पिटल बेस्ड स्टडी में यह नंबर 9.98% तक चला गया। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह hospital-based data है, जो पूरी आबादी को represent नहीं करता।

गुजरात और राजस्थान में सबसे ज्यादा मामले

अगर गौर करें तो गुजरात को दुनिया के उन क्षेत्रों में माना गया है जहां विटिलिगो की प्रेवलेंस काफी हाई है – लगभग 8.8%। गुजरात और राजस्थान दोनों के लिए कुछ मेडिकल पेपर्स में “epidemic proportions” जैसे शब्द तक इस्तेमाल किए गए हैं।

हैरान करने वाली बात यह है कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने विटिलिगो को देश की तीन बड़ी मेडिकल प्रॉब्लम्स में गिना था। बाकी दो थीं – कुष्ठ रोग और मलेरिया।

यह दर्शाता है कि विटिलिगो कोई नई समस्या नहीं है और ना ही यह कोई छोटी या दुर्लभ बीमारी है।

🔍 यह भी पढ़ें- Brain Disease Research: सिर की चोटों से जुड़ी रहस्यमय बीमारी CTE की पहचान के करीब वैज्ञानिक

एक 19 साल के लड़के की कहानी

एक 19 साल का लड़का कॉलेज के पहले साल में था। एक दिन शेव करते वक्त उसने मिरर में देखा कि उसके अपर लिप के पास स्किन का एक छोटा सा पैच थोड़ा हल्का हो गया है।

उसने सोचा कि शायद ब्लेड लग गई होगी। लेकिन अगले दो महीनों में वो पैच बढ़ता गया। फिर उसकी कोहनी पर भी एक पैच आया। उसने घर में बताया और उस दिन से उसके घर का व्यवहार धीरे-धीरे उसके प्रति बदलने लगा।

किसी ने कहा यह पिछले जन्म का कर्म है। किसी ने कहा यह तो कुष्ठ रोग है। एक पड़ोसी ने उसकी मां से कहा – “बच्चों को थोड़ा दूर ही रखिए।”

और बस यहीं से शुरू हुई असली त्रासदी। उसकी प्लेट अलग रखी जाने लगी। उसका ग्लास अलग हो गया। उसका तौलिया अलग रखा जाने लगा। किसी ने डायरेक्टली कुछ कहा भी नहीं, लेकिन धीरे-धीरे एक दूरी बना दी गई।

विटिलिगो होता क्या है? साइंस को समझें

आपकी स्किन की ऊपरी परत में कुछ स्पेशल सेल्स होते हैं – मेलानोसाइट्स। इनका मुख्य काम है मेलानिन बनाना। मेलानिन वो पिगमेंट है जो आपकी त्वचा को रंग देता है, बालों को रंग देता है और आंखों के रंग में भी इसकी भूमिका होती है।

दिलचस्प बात यह है कि मेलानिन आपकी त्वचा को सूर्य की पराबैंगनी किरणों से सुरक्षा भी प्रदान करता है। अब विटिलिगो में क्या होता है?

आपका इम्यून सिस्टम जो नॉर्मली बैक्टीरिया और वायरस से लड़ता है, अपने ही मेलानोसाइट्स को दुश्मन समझने लगता है। और फिर वह धीरे-धीरे उन पर हमला करने लगता है और कई केसेज में उन्हें नष्ट भी कर देता है।

Step by Step समझें Autoimmune Process

चरण 1: सेल्स का कमजोर होना
विटिलिगो से प्रभावित लोगों के मेलानोसाइट्स में कुछ जेनेटिक और माइटोकॉन्ड्रियल विशेषताएं हो सकती हैं। इनकी वजह से ये सेल्स ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के सामने ज्यादा vulnerable हो जाते हैं।

चरण 2: डेंजर सिग्नल्स
जब मेलानोसाइट स्ट्रेस में आता है तो वह कुछ सिग्नल्स रिलीज करता है – एक तरह का खतरे का अलार्म। ये सिग्नल्स इम्यून सिस्टम के अर्ली रिस्पॉन्डर्स को एक्टिवेट करते हैं जैसे डेंड्रिटिक सेल्स और NK सेल्स।

चरण 3: T Cells का हमला
ये इम्यून सेल्स मेलानोसाइट्स के स्पेसिफिक मार्कर्स को पहचान लेते हैं – जैसे टायरोसिनेस, मेलन A और GP100। इन मार्कर्स की जानकारी CD8+ साइटोटॉक्सिक T सेल्स तक पहुंचती है।

समझने वाली बात यह है कि ये T cells बहुत शक्तिशाली होते हैं और infected या abnormal cells को नष्ट कर सकते हैं। लेकिन विटिलिगो में समस्या यह है कि यह अपने ही मेलानोसाइट्स को टारगेट करने लगते हैं।

चरण 4: विशियस साइकिल
ये CD8+ T cells परफोरिन और ग्रैंजाइम जैसे molecules रिलीज करते हैं जो मेलानोसाइट्स को damage या destroy कर देते हैं। इसका रिजल्ट यह होता है कि उस खास एरिया में मेलानिन बनाने वाले सेल्स कम होते जाते हैं और वह हिस्सा सफेद दिखने लगता है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि T cells एक molecule रिलीज करते हैं – Interferon Gamma। यह JAK-STAT pathway को activate करता है जो CXCL9 और CXCL10 chemicals प्रोड्यूस करता है।

और बस यहीं से बनता है एक दुष्चक्र। ज्यादा T cells आते हैं, ज्यादा damage होता है, फिर ज्यादा signals, फिर ज्यादा T cells। यही वजह है कि सफेद धब्बे फैलते चले जाते हैं।

क्या छूने से फैलता है विटिलिगो? बिल्कुल नहीं!

विटिलिगो में ना कोई बैक्टीरिया है, ना वायरस है, ना फंगस। यहां कोई external infectious agent नहीं है। यह पूरी लड़ाई एक ही शरीर के अंदर चल रही है – एक व्यक्ति के इम्यून सिस्टम और उसके अपने मेलानोसाइट्स के बीच।

इसलिए:

  • एक ही प्लेट में खाना खाने से विटिलिगो नहीं होता
  • एक ही ग्लास में पानी पीने से नहीं फैलता
  • हाथ मिलाने से नहीं फैलता
  • गले लगाने से नहीं फैलता
  • एक ही बिस्तर पर सोने से नहीं फैलता
  • किसी भी नॉर्मल फिजिकल कॉन्टैक्ट से नहीं फैलता

राहत की बात यह है कि अब medical science ने इसे पूरी तरह समझ लिया है। लेकिन समाज अभी भी पुरानी मान्यताओं में फंसा है।

India में क्यों ज्यादा दिखता है विटिलिगो?

जेनेटिक्स का रोल
रिसर्च में देखा गया है कि Indo-Pak origin के लोगों में first degree relatives (माता-पिता, भाई-बहन, बच्चे) में विटिलिगो होने का प्रपोर्शन लगभग 6.1% तक है। यह general population से काफी ज्यादा है।

Visibility Factor
विटिलिगो का सफेद पैच डार्क स्किन पर ज्यादा clearly visible होता है। इंडिया में relatively darker skin tone की वजह से depigmented patches काफी noticeable हो जाते हैं।

Hospital Data की सीमाएं
जो 9.98% या 8.8% जैसे नंबर्स हैं, ये अक्सर hospital-based या skin clinic-based studies के हैं। ये पूरी Indian population का random sample जरूरी नहीं है।

हॉस्पिटल में वही आएगा जिसके पास noticeable symptoms होंगे। जब India-wide population level surveys किए गए तो prevalence निकला लगभग 0.89%, जो global average के आसपास ही है।

सामाजिक कलंक: असली बीमारी

मुंबई के KEM Hospital में 100 विटिलिगो मरीजों पर एक स्टडी हुई। परिणाम चौंकाने वाले थे:

पैरामीटरप्रतिशत
Quality of Life Affected97%
महिलाओं में Depression63.64%
पुरुषों में Depression42.86%
महिलाओं में Stigma Feel52%
पुरुषों में Stigma Feel45%

चिंता का विषय यह है कि बीमारी का असर सिर्फ त्वचा तक सीमित नहीं था। यह mental health, relationships और everyday social life तक पहुंच चुका था।

महिलाओं पर ज्यादा भार

भारत में विटिलिगो का सामाजिक बोझ युवा अविवाहित महिलाओं पर विशेष रूप से भारी होता है। शादी एक बहुत बड़ी चिंता है।

हमारी समाज में अरेंज मैरिज सिस्टम के संदर्भ में दिखावट को बहुत ज्यादा महत्व दिया जाता है। मेडिकल लिटरेचर में साफ discuss किया गया है कि विटिलिगो वाली युवा महिलाओं के marriage prospects significantly प्रभावित होते हैं।

यह दर्शाता है कि विटिलिगो एक medical condition से आगे बढ़कर एक social issue भी बन जाता है।

कुष्ठ रोग नहीं है विटिलिगो

सदियों से भारत में विटिलिगो को कभी-कभी leprosy (कुष्ठ रोग) समझ लिया गया है। यह एक गंभीर misconception है।

विशेषताविटिलिगोकुष्ठ रोग
कारणAutoimmuneBacterial Infection
Contagiousनहींहां (कम)
TreatmentImmunosuppressantsAntibiotics
त्वचा पर प्रभावWhite patchesSkin lesions + nerve damage

दोनों में त्वचा पर visible changes आते हैं, लेकिन ये completely different diseases हैं। एक ordinary person के लिए दोनों में फर्क समझना मुश्किल हो सकता है, लेकिन medically ये बिल्कुल अलग हैं।

Religious Beliefs और Myths

कुछ जगह विटिलिगो को पिछले जन्म के पापों से जोड़ा गया है। कुछ belief यह भी रहा है कि अगर किसी ने पिछले जन्म में गुरु द्रोह किया हो तो उसे विटिलिगो हो सकता है।

यह भी पढे़ं 👇

Helium Crisis

Helium Crisis: China Export Ban से India पर खतरा, 100% Import Dependent

बुधवार, 12 अगस्त 2026
CM Bhagwant Mann

CM Bhagwant Mann ने जगतार Hawara की Parole के लिए की Governor से मुलाकात

बुधवार, 12 अगस्त 2026
Punjab Vigilance

Punjab Vigilance Bureau ने जुलाई में 14 को रंगे हाथों पकड़ा, बड़ी कार्रवाई

बुधवार, 12 अगस्त 2026
Delimitation Bill

बड़ा फैसला: Delimitation Bill और Women Reservation रद्द, Cabinet Meeting भी टली

बुधवार, 12 अगस्त 2026

हैरान करने वाली बात यह है कि जब किसी बीमारी को पाप, श्राप या कर्म का परिणाम समझा जाता है तो व्यक्ति medical treatment लेने की जगह faith healers के पास जाता है। इससे treatment में कई साल की देरी हो जाती है।

Treatment में बड़ी प्रगति

राहत की बात यह है कि पिछले कुछ वर्षों में विटिलिगो के treatment में महत्वपूर्ण progress हुई है।

परंपरागत Options:

  • Topical Steroids
  • Tacrolimus Creams
  • Phototherapy (Narrow Band UVB)
  • Surgical Options (Skin Grafting)

2022 की बड़ी खबर:
US FDA ने Ruxolitinib Cream को विटिलिगो के treatment के लिए approve किया। यह विटिलिगो के लिए पहला topical JAK inhibitor treatment था।

याद है हमने JAK-STAT pathway की बात की थी? Ruxolitinib इसी pathway को target करती है। यानी theoretically यह उस vicious circle को बीच में ही interrupt करने की कोशिश करती है।

Clinical Trial Results:
24 weeks के बाद Ruxolitinib cream लेने वाले लगभग 45% patients के चेहरे पर कम से कम आधा repigmentation देखा गया। बिना treatment वाले group में यह सिर्फ 3% था।

समझने वाली बात यह है कि इसका मतलब यह नहीं कि अब हर विटिलिगो patient पूरी तरह ठीक हो जाएगा। Treatment long-term हो सकता है और हर व्यक्ति का response different होता है।

Shame खुद Treatment का दुश्मन बनता है

यहां एक cruel irony है। जितना ज्यादा परिवार विटिलिगो को छिपाता है, उतनी देर से patient डॉक्टर के पास जाता है। और जितनी देर से treatment शुरू होता है, उतना difficult हो सकता है effective response मिलना।

यानी जो चीज समाज के दबाव की वजह से छिपाई जाती है, वही delayed treatment को और difficult बना देती है।

पूरी बात एक जगह

विटिलिगो एक autoimmune condition है जिसमें immune system के CD8+ T cells मेलानोसाइट्स को target करते हैं। जब ये cells destroy होते हैं तो त्वचा के खास हिस्सों में pigmentation कम हो जाती है और सफेद धब्बे विकसित होने लगते हैं।

लेकिन एक बात बिल्कुल clear है:

  • विटिलिगो contagious नहीं है
  • इसमें कोई bacteria, virus या fungus नहीं है
  • खाने-पीने से नहीं होता
  • छूने से नहीं फैलता
  • यह किसी पाप या श्राप का नतीजा नहीं है
  • यह leprosy नहीं है

विटिलिगो से जान नहीं जाती। यह infectious नहीं है। इसमें जरूरी दर्द नहीं होता। यह काम करने की क्षमता को automatically destroy नहीं करता।

फिर भी India में विटिलिगो से जूझ रहे कई लोगों के लिए यह बहुत painful experience बन जाता है। और कई बार कारण बीमारी से ज्यादा समाज बन जाता है।


मुख्य बातें (Key Points)
  • विटिलिगो एक autoimmune disease है जिसमें शरीर अपने ही melanocytes को destroy करता है
  • यह छूने, खाने या किसी physical contact से नहीं फैलता – बिल्कुल भी contagious नहीं है
  • India में 1% के आसपास prevalence है, कुछ hospital studies में 8-9% दिखा (लेकिन वह biased data है)
  • सामाजिक कलंक और भेदभाव असली समस्या है – 97% patients की quality of life affected होती है
  • Treatment में बड़ी प्रगति हुई है including JAK inhibitor creams जो autoimmune cycle को तोड़ते हैं

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या मछली और दूध साथ खाने से विटिलिगो होता है?

बिल्कुल नहीं। यह एक पुराना मिथक है। विटिलिगो एक autoimmune condition है जिसमें शरीर की immune system अपने ही melanocyte cells पर हमला करती है। किसी खास खाने के combination से यह नहीं होता।

प्रश्न 2: क्या विटिलिगो छूने से फैलता है?

नहीं। विटिलिगो में कोई bacteria, virus या fungus नहीं होता। यह एक ही शरीर के अंदर immune system और melanocytes के बीच की लड़ाई है। एक ही प्लेट में खाने, हाथ मिलाने, गले लगाने या किसी भी तरह के physical contact से यह नहीं फैलता।

प्रश्न 3: क्या विटिलिगो का इलाज संभव है?

हां, आधुनिक medical science में विटिलिगो का treatment संभव है। Topical steroids, phototherapy, JAK inhibitor creams (जैसे Ruxolitinib) और surgical options उपलब्ध हैं। हालांकि हर मरीज का response different होता है और early diagnosis बहुत महत्वपूर्ण है।

ताज़ा खबरों के लिए हमसे जुड़ें
Google News
WhatsApp
Telegram
Previous Post

CM Bhagwant Mann ने जगतार Hawara की Parole के लिए की Governor से मुलाकात

Next Post

Helium Crisis: China Export Ban से India पर खतरा, 100% Import Dependent

Ajay Kumar

Ajay Kumar

पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

Related Posts

Helium Crisis

Helium Crisis: China Export Ban से India पर खतरा, 100% Import Dependent

बुधवार, 12 अगस्त 2026
CM Bhagwant Mann

CM Bhagwant Mann ने जगतार Hawara की Parole के लिए की Governor से मुलाकात

बुधवार, 12 अगस्त 2026
Punjab Vigilance

Punjab Vigilance Bureau ने जुलाई में 14 को रंगे हाथों पकड़ा, बड़ी कार्रवाई

बुधवार, 12 अगस्त 2026
Delimitation Bill

बड़ा फैसला: Delimitation Bill और Women Reservation रद्द, Cabinet Meeting भी टली

बुधवार, 12 अगस्त 2026
Cash Langgar Chandigarh

चंडीगढ़ में Cash Langgar वायरल: 500 रुपए, बर्गर और कोल्ड ड्रिंक्स बांटे

बुधवार, 12 अगस्त 2026
August 12 History

12 August History: जब Ford ने बनाई पहली Model T और IBM ने लॉन्च किया पहला PC

बुधवार, 12 अगस्त 2026
Next Post
Helium Crisis

Helium Crisis: China Export Ban से India पर खतरा, 100% Import Dependent

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

The News Air

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।

Google News Follow us on Google News

  • About
  • Editorial Policy
  • Privacy & Policy
  • Disclaimer & DMCA Policy
  • Contact

हमें फॉलो करें

No Result
View All Result
  • प्रमुख समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • सियासत
  • राज्य
    • पंजाब
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • महाराष्ट्र
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • उत्तराखंड
    • मध्य प्रदेश
    • राजस्थान
  • काम की बातें
  • नौकरी
  • बिज़नेस
  • टेक्नोलॉजी
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • हेल्थ
  • स्पेशल स्टोरी
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • WEB STORIES

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।