VIDEO-किसानों द्वारा जजपा विधायक का विरोध, विधायक ने किसानों को दी गालियां व किया अपमान

नई दिल्ली, 1 जून

आज हरियाणा के टोहाना में विधायक देवेंद्र बबली के कार्यक्रम का किसान संगठनों द्वारा विरोध किया गया। किसानों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हिंसक रंग देने के उद्देश्य से विधायक ने किसानों के साथ गाली गलौच की व अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया। इसके बाद किसानों ने विरोध जारी रखा तो पुलिस द्वारा लाठीचार्ज करवाया गया। जिसमे हरियाणा के जुझारू किसान ज्ञान सिंह बोडी, सर्वजीत सिद्धु और बूटा सिंह फतेहपुरी को गहरे चोटें भी आई। सयुंक्त किसान मोर्चा इस बेरहम कार्रवाई की निंदा करता है। किसानों के साथ गंभीर गाली गलौज भी किया गया। यह भाजपा व जजपा की बौखलाहट की झलक है। विधायक ने किसानों पर झूठे इल्जाम लगाते हुए कहा कि किसानों ने विधायक की गाड़ी पर हमला किया परंतु यह बिल्कुल झूठा आरोप है। सयुंक्त किसान मोर्चा हरियाणा के किसानों से अपील करता है कि शांतमयी रहते हुए विधायक के इस बर्ताव का कड़ा विरोध किया जाएं। साथ ही हरियाणा के समस्त भाजपा व जजपा नेताओ को चेतावनी देते है कि वे किसानों को न उकसाये वरना नेताओ को बुरे परिणाम झेलने पड़ सकते है। इस घटना के तुरंत बाद किसानों ने विरोधस्वरूप हिसार चंडीगढ़ हाईवे भी जाम किया।

दिल्ली की सीमाओं पर बारिश और तूफान के कारण भारी नुकसान हुआ है। सिंघू व टिकरी बॉर्डर पर मुख्य मंच सहित किसानों के बड़ी संख्या में टेंट क्षतिग्रस्त हुए हैं। यह वह समय है जब भाजपा उत्तर प्रदेश चुनाव की अपनी रणनीति में व्यस्त है। केंद्र सरकार ने किसानों के मुद्दों को दरकिनार करते हुए चुनावी मुद्दों पर को ज्यादा जरूरी समझा है। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसान अभी भी दिल्ली की सीमाओं पर लगातार आ रहे हैं। आज सिंघु बॉर्डर पर पंजाब के मालवा क्षेत्र से किसानों के किसानों के जत्थे पहुंचे। हालांकि किसान इस मौसम में भी मजबूत रहने की कोशिश कर रहे हैं, हम साथ ही समाज कल्याण संगठनों और किसान आंदोलन के समर्थकों से अपील करते हैं कि वे धरना स्थल पर हर संभव मदद करें।

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किसान आंदोलन के 6 महीने होने पर एक तरफ जहां दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का लगातार आना जारी है, वही देश-दुनिया के कई हिस्सों में किसानों और किसान समर्थकों ने सक्रियता दिखानी शुरू की है. जिन जगहों पर कोविड लॉकडाउन नहीं है वहां पर किसानों ने शारीरिक रूप से उपस्थिति दर्ज कर हड़ताल की है। वही कई संगठनों ने ऑनलाइन वेबीनार, सेमिनार और अन्य प्लेटफार्म पर किसान आंदोलन के समर्थन में कार्यक्रम किए हैं।

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