UP Smart Meter: उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर आई है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर जो बवाल पिछले कुछ महीनों से छिड़ा हुआ था, उस पर अब सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने प्रीपेड स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता खत्म कर दी है और पोस्टपेड या प्रीपेड स्मार्ट मीटर विकल्प चुनने का अधिकार उपभोक्ता को दे दिया है।
देखा जाए तो यह फैसला उन हजारों उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात है जो प्रीपेड मीटर की वजह से परेशान थे। अब स्मार्ट मीटर तो लगेगा, लेकिन वह प्रीपेड होगा या पोस्टपेड, यह तय करने का अधिकार उपभोक्ता के पास होगा।
1 अप्रैल 2026 से नए नियम लागू
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने 1 अप्रैल 2026 को नई अधिसूचना जारी कर स्मार्ट मीटर नियमों में संशोधन किया है। नई व्यवस्था के तहत स्मार्ट मीटर लगवाना उपभोक्ता के लिए अनिवार्य है। लेकिन प्रीपेड या पोस्टपेड स्मार्ट मीटर चुनने का अधिकार अब उपभोक्ता को दिया गया है।
यह एक बड़ा बदलाव है क्योंकि पहले सरकार जबरन प्रीपेड मीटर लगवा रही थी। इससे उपभोक्ताओं को कई दिक्कतें हो रही थीं।
प्रीपेड vs पोस्टपेड: क्या है अंतर
उपभोक्ता अब अपनी सुविधा के मुताबिक प्रीपेड या पोस्टपेड स्मार्ट मीटर लगवा सकते हैं। पोस्टपेड विकल्प चुनने वाले स्मार्ट मीटर में सामान्य मीटर की तरह ही महीने के आखिर में एक बार बिल आएगा और बकाया बिल पर चक्रवृद्धि ब्याज भी देना होगा।
अगर गौर करें तो प्रीपेड मीटर में रिचार्ज करना पड़ता है, जबकि पोस्टपेड में महीने के अंत में बिल आता है। यह फैसला पूरी तरह उपभोक्ता के हाथ में है।
UP में क्यों था बवाल
उत्तर प्रदेश में इन दिनों स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर जबरदस्त बवाल छिड़ा हुआ था। हर तरफ सिर्फ सरकार से इसे बदलने की मांग की जा रही थी। कारण यह था कि न सिर्फ उपभोक्ताओं की बिजली काटी जा रही थी, बल्कि धड़ाधड़ बिल भी आ रहे थे।
यहां ध्यान देने वाली बात यह थी कि जैसे ही उपभोक्ताओं का बैलेंस नेगेटिव में जाता था, तुरंत उनके घर की बिजली काट दी जाती थी। रिचार्ज कराने के बावजूद कई घंटों तक बिजली बहाल नहीं होती थी। यहां तक कि इसमें कई-कई दिन लग जाते थे।
शिकायतें लेकिन समाधान नहीं
कई उपभोक्ताओं ने बिजली विभाग को कई बार शिकायतें कीं, लेकिन उसका समाधान नहीं मिला। ऐसी ही शिकायतें उत्तर प्रदेश के कई जिलों से सामने आईं। लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, गाजियाबाद, नोएडा जैसे बड़े शहरों से लगातार शिकायतें आ रही थीं।
समझने वाली बात यह है कि प्रीपेड मीटर का कॉन्सेप्ट गलत नहीं था, लेकिन इसे लागू करने का तरीका गलत था। जबरन लगाना और फिर सही तरीके से सर्विस न देना – यही लोगों की मुख्य समस्या थी।
CM योगी ने लगाई फटकार
इन शिकायतों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को फटकार लगाई। CM योगी ने साफ तौर पर कहा था कि बिजली उपभोक्ताओं को किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जहां भी जबरन स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं और उपभोक्ताओं को परेशान किया जा रहा है, तो उन अधिकारियों के खिलाफ सख्त कारवाई होनी चाहिए। यह सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
स्मार्ट मीटर के फायदे
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सबसे पहले तो बिजली उपभोक्ताओं को यह समझना जरूरी है कि स्मार्ट मीटर सिर्फ एक मीटर है, जिसका काम केवल बिजली खपत की रीडिंग करना है। बिजली का टैरिफ रेट संबंधित राज्य विद्युत विनियामक आयोग हर साल तय करता है और उसी के मुताबिक बिजली बिल बनता है।
स्मार्ट मीटर में कई फायदे हैं जैसे:
- रियल टाइम पर बिजली खपत की जानकारी
- सटीक बिलिंग
- आसान भुगतान
- सोलर पैनल के साथ उपयोग
- ऑनलाइन रिचार्ज पर छूट
अब फैसला उपभोक्ताओं के हाथ में
इस नए संशोधन के अनुसार, उपभोक्ता अब खुद तय करेंगे कि उन्हें रिचार्ज करना है या महीने के अंत में बिल भरना है। यह फैसला पूरी तरह उपभोक्ताओं के हाथ में है।
दिलचस्प बात यह है कि पोस्टपेड विकल्प में बिल्कुल पुराने सिस्टम की तरह ही काम होगा। महीने के अंत में बिल आएगा, उसे पे करना होगा। बकाया पर ब्याज भी लगेगा।
टेक्नीशियन को काम करने दें
विभागीय अधिकारी उपभोक्ताओं से अपील कर रहे हैं कि जब टेक्नीशियन मीटर बदलने आए तो उसे अपना काम करने दें। याद रखिए कि टेक्नीशियन का काम सिर्फ मीटर लगाना है। वह चाहकर भी बिलिंग मोड में बदलाव नहीं कर सकता क्योंकि यह अधिकार उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
यह अधिकार केवल बिजली विभाग (UPPCL) के पास है। मीटर लगने के बाद आप विभाग से संपर्क करके अपना विकल्प चुन सकते हैं।
स्मार्ट मीटर अनिवार्य, विकल्प वैकल्पिक
समझने वाली बात यह है कि स्मार्ट मीटर लगवाना अब भी अनिवार्य है। लेकिन वह प्रीपेड होगा या पोस्टपेड, यह वैकल्पिक है। यह एक बैलेंस्ड अप्रोच है जो सरकार की आधुनिकीकरण की मंशा और उपभोक्ताओं की सुविधा दोनों को ध्यान में रखती है।
आम आदमी पर असर
इस फैसले का आम आदमी पर सीधा असर पड़ेगा। जो लोग पुराने सिस्टम में सहज थे, वे पोस्टपेड स्मार्ट मीटर चुन सकते हैं। जो लोग अपनी बिजली खपत पर कंट्रोल रखना चाहते हैं और रियल टाइम मॉनिटरिंग चाहते हैं, वे प्रीपेड विकल्प चुन सकते हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
• केंद्र सरकार ने प्रीपेड स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता खत्म की
• 1 अप्रैल 2026 से नए नियम लागू, उपभोक्ता को चुनने का अधिकार
• पोस्टपेड में महीने के अंत में बिल, प्रीपेड में रिचार्ज सिस्टम
• CM योगी ने अधिकारियों को दी थी फटकार
• UPPCL के पास बिलिंग मोड बदलने का अधिकार












