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The News Air - Breaking News - TMC Symbol Freeze पर Mamata Banerjee Supreme Court पहुंचीं, EC के आदेश को चुनौती

TMC Symbol Freeze पर Mamata Banerjee Supreme Court पहुंचीं, EC के आदेश को चुनौती

पश्चिम बंगाल में टीएमसी में आंतरिक विभाजन के बाद चुनाव आयोग ने पार्टी का नाम और प्रतीक दोनों फ्रीज किए, ममता ने SC का दरवाजा खटखटाया

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
शनिवार, 19 सितम्बर 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, पश्चिम बंगाल, सियासत
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TMC Symbol Freeze
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TMC Symbol Freeze Controversy: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) में आंतरिक विभाजन के बाद चुनाव आयोग ने पार्टी के नाम और प्रतीक (फूल और घास का चिन्ह) दोनों को फ्रीज कर दिया है। इस फैसले से नाराज ममता बनर्जी ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

देखा जाए तो यह सिर्फ एक पार्टी के नाम और चिन्ह का मामला नहीं है। यह पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने वाला फैसला साबित हो सकता है।

🔍 यह भी पढ़ें- US ने Indo-Pacific से हटाया ‘Indo’, India के लिए Warning Sign या सिर्फ Symbolic?

हुआ क्या है?

पश्चिम बंगाल में TMC में एक बड़ा स्प्लिट (विभाजन) हुआ है। पार्टी दो गुटों में बंट गई है:

  1. ममता बनर्जी गुट: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ कुछ विधायक और नेता
  2. राइवल गुट: रीता ब्रता बनर्जी के नेतृत्व में एक बड़ा समूह

दोनों गुट दावा कर रहे हैं कि असली TMC पार्टी और उसका प्रतीक (फूल और घास) उन्हीं का है।

समझने वाली बात यह है कि पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को दो विधानसभा सीटों – नंदीग्राम और रेजीनगर – पर उपचुनाव होने हैं। इसी को देखते हुए यह लड़ाई तेज हो गई है।

चुनाव आयोग का फैसला

17 सितंबर को Election Commission of India ने अंतरिम आदेश जारी किया। इसमें कहा गया कि:

  • TMC का नाम (All India Trinamool Congress) कोई भी गुट नहीं इस्तेमाल कर सकता
  • पार्टी का प्रतीक (फूल और घास) भी फ्रीज कर दिया गया
  • दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और प्रतीक दिए गए

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह अस्थायी व्यवस्था है, जब तक असली TMC का फैसला नहीं हो जाता।

दोनों गुटों को मिले नए नाम और प्रतीक
गुटअस्थायी नामअस्थायी प्रतीकविधायकों की संख्या
ममता बनर्जीममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेसफुटबॉल प्लेयर15
रीता ब्रता बनर्जीडेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेसलिफाफा (Envelope)65

अगर गौर करें तो राइवल गुट के पास ममता बनर्जी से ज्यादा विधायक हैं। लेकिन चुनाव आयोग सिर्फ संख्या के आधार पर फैसला नहीं करता।

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क्यों फ्रीज किया गया प्रतीक?

भारत में, खासकर ग्रामीण इलाकों में, लोग पार्टी के नाम से ज्यादा उसके प्रतीक को पहचानते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि:

  • BJP = कमल (लोटस)
  • Congress = हाथ
  • AAP = झाड़ू
  • TMC = फूल और घास

ये प्रतीक लोगों के दिमाग में गहराई से बैठे होते हैं। अगर एक गलत गुट को यह प्रतीक मिल जाए, तो लोगों का वोट गलत दिशा में चला जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात को पहचाना है कि लंबे समय बाद पार्टी का प्रतीक लोगों के साथ बहुत जुड़ जाता है।

1968 के नियम क्या कहते हैं?

यह पूरा मामला Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत आता है।

इस नियम के अनुसार, अगर एक पार्टी दो हिस्सों में बंट जाती है, तो:

  1. चुनाव आयोग यह तय करेगा कि असली पार्टी कौन है
  2. Article 324 के तहत EC को यह शक्ति मिली है
  3. केवल विधायकों की संख्या से फैसला नहीं होता
चुनाव आयोग किस आधार पर फैसला करेगा?

EC निम्नलिखित बातों पर ध्यान देगा:

1. संगठनात्मक समर्थन:

  • राष्ट्रीय और राज्य कमेटियाँ किसके नियंत्रण में हैं?
  • जिला यूनिट, अधिकृत पदाधिकारी किसके साथ हैं?

2. पार्टी संविधान:

  • नियुक्ति और हटाने के नियम क्या कहते हैं?
  • निर्णय लेने की प्रक्रिया क्या है?

3. विधायी समर्थन:

  • कितने विधायक किस गुट के साथ हैं?
  • कितने सांसद किसके साथ हैं?

4. दस्तावेजी सबूत:

  • किसके पास पार्टी के आधिकारिक दस्तावेज हैं?

यहां समझने वाली बात यह है कि 2023 के शिवसेना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि EC को सिर्फ विधायकों की संख्या के आधार पर फैसला नहीं करना चाहिए।

ममता बनर्जी ने SC में क्या कहा?

ममता बनर्जी का तर्क है कि:

  • TMC उन्होंने बनाई है: 1998 में कांग्रेस छोड़कर ममता ने TMC की स्थापना की थी
  • संगठन उनके नियंत्रण में: पार्टी की राष्ट्रीय और राज्य कमेटियाँ उनके साथ हैं
  • EC का फैसला गलत: प्रतीक और नाम फ्रीज करना अनुचित है
  • उपचुनाव सामने: 6 अक्टूबर के चुनाव में यह भ्रम पैदा करेगा
सुप्रीम कोर्ट क्या तय करेगा?

अब सुप्रीम कोर्ट यह नहीं तय करेगा कि असली TMC कौन है। वह सिर्फ यह देखेगा:

  • क्या EC का प्रतीक फ्रीज करने का फैसला सही है?
  • क्या यह लंबे समय तक फ्रीज रखा जा सकता है?

दिलचस्प बात यह है कि SC ने पहले भी कहा है कि EC बहुत लंबे समय तक प्रतीक फ्रीज नहीं रख सकता। अंततः किसी न किसी को यह देना ही होगा।

महाराष्ट्र में शिवसेना का उदाहरण

2022-23 में शिवसेना में भी ऐसा ही विभाजन हुआ था:

  • उद्धव ठाकरे गुट: कम विधायक लेकिन पार्टी संस्थापक का परिवार
  • एकनाथ शिंदे गुट: ज्यादा विधायक

अंत में EC ने एकनाथ शिंदे को असली शिवसेना माना और “धनुष-बाण” प्रतीक उन्हें दिया। उद्धव ठाकरे को नया नाम और प्रतीक लेना पड़ा।

यही पैटर्न यहां भी दोहराया जा सकता है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति की खासियत

पश्चिम बंगाल में एक अनोखी राजनीतिक संस्कृति है:

  • जो पार्टी सत्ता में आती है, वह लंबे समय तक रहती है
  • जमीनी स्तर से लेकर ऊपर तक सभी नेता सत्ताधारी पार्टी में शामिल होना चाहते हैं
  • हिंसा और संघर्ष चुनावों का हिस्सा बन गए हैं

यही कारण है कि जैसे ही TMC कमजोर पड़ी, कई विधायक राइवल गुट में शामिल हो गए।

आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट जल्द ही सुनवाई करेगा। संभावनाएं:

  1. EC का फैसला बरकरार: दोनों गुट अस्थायी नाम से चुनाव लड़ेंगे
  2. ममता को राहत: TMC का प्रतीक अस्थायी रूप से ममता को मिल सकता है
  3. और समय: SC मामले को विस्तार से सुनने के लिए समय ले सकता है
मुख्य बातें (Key Points)
  • TMC में आंतरिक विभाजन के बाद EC ने पार्टी का नाम और प्रतीक फ्रीज किया
  • ममता बनर्जी गुट के पास 15 विधायक हैं जबकि राइवल गुट के पास 65
  • EC ने अस्थायी रूप से ममता को “फुटबॉल प्लेयर” और राइवल गुट को “लिफाफा” प्रतीक दिया
  • 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर में उपचुनाव होने हैं
  • ममता ने SC में EC के आदेश को चुनौती दी है

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: TMC में विभाजन क्यों हुआ?

उत्तर: पश्चिम बंगाल में हाल के चुनावों में TMC की हार के बाद कई विधायक असंतुष्ट हो गए। रीता ब्रता बनर्जी के नेतृत्व में 65 विधायकों ने अलग गुट बना लिया।

प्रश्न 2: क्या सिर्फ संख्या से फैसला होगा?

उत्तर: नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने 2023 के शिवसेना मामले में कहा था कि चुनाव आयोग को सिर्फ विधायकों की संख्या नहीं, बल्कि पार्टी संविधान, संगठनात्मक नियंत्रण आदि भी देखना चाहिए।

प्रश्न 3: उपचुनाव में किस प्रतीक पर लड़ेंगे?

उत्तर: अभी के लिए ममता बनर्जी “फुटबॉल प्लेयर” प्रतीक और राइवल गुट “लिफाफा” प्रतीक पर चुनाव लड़ेंगे। मूल TMC प्रतीक फ्रीज है।

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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