दुनिया देखती रह गई, वो भाले की नोक पर सोना टांग लाया


Sandeep-Pandit
पंडित संदीप

दुनिया का सबसे बड़ा खेल युद्ध खिलाड़ियों की बड़ी-बड़ी सेना से सजा खेल रण क्षेत्र, एक से एक बड़े बलशाली, रणनीतिकार, जुझारू, जांबाज सब देखते रह गए और वो महाराणा का वंशज भाले की नोक पर सोना टांग लाया, दुनिया उसे उसके खेल कौशल उसके साहस उसके विश्वास उसके परिश्रम को देखती रह गई। एक 23 साल के रणबांकुरे नौजवान ने भारत मां के तीन रंगों वाले आंचल को आसमान की बुलंदी पर इतना ऊंचा फहरा दिया कि पूरा विश्व अभिभूत हो बस देखता ही रह गया, भारत मां के इस स्वर्णिम शान की अभूतपूर्व सफलता को। यह 23 साल की उम्र भी गजब है, इसी उम्र में आजादी को दुल्हन बना एक नौजवान ने भारत माँ की बेड़ियाँ काटने के लिए फांसी के फंदे को चूम झूम गया था, आज फिर इसी उम्र का एक और लड़ाका माँ भारती के लिए दुनिया को ललकार सोने का खजाना हिंदुस्तान के नाम कर हर हिंदुस्तानी धड़कनों में सुनहरी साँसें पिरो गया। स्वाभिमान, सम्मान की ये स्वर्णिम लाली पानीपत के लाल नीरज का अनमोल तोहफा है, जिसके लिए एक सदी से ज्यादा करोड़ों आँखों को इंतजार है, हम खुशनसीब हैं जो वो भाला, वो भाले वाला, वो सोने का तगमा, वो शान की पताका निहार सके जिसे देखने का सपना पीढ़ियां आँखों में सजाए पाले देखते देखते मुंद गई।

एक गरीब किसान का बेटा जिस पर आज पूरा भारत मेहरबान है ये उसकी मेहरबानी है कि जापान में जन गण मन गूंज गया। कोई भी नीरज यूं ही नहीं खिलता कमल खुद को कीचड़ से ऊपर रख, साधना के सरोवर में, खुद को पालता, पोसता खुद की पहरेदारी करता है फिर वह जलज जब खिलकर खिलखिलाता है तो उस मोहक रूप पर सर्वस्व निछावर करने की आतुरता देखते ही बनती है, जिसे हम आज देख ही रहे हैं। परिश्रम की पराकाष्ठा, संयम का संचय, साधना की आराधना के दम पर श्रेष्ठता का प्रदर्शन कर नीरज ने ना सिर्फ अपना सपना साकार  किया बल्कि उनके इस भाले की नोक ने सोना समेट करोड़ों आँखों के निशाने को एक हाथ से भेद दिया। यह सदियों से आस लगाए बैठे उस हिंदुस्तान की जीत है जो जनबल, धनबल में दुनिया के सैकड़ों देशों से बहुत आगे खड़ा है पर खेल बल में छोटे-छोटे मुल्कों से कोसों दूर एक आदद सोने के तगमे को तरसता ओलंपिक मैदान से हर बार, बार बार निराश लौटता रहा है निराशा की इसी राह को नीरज ने नया मोड़ दे, स्वर्ण पथ की ओर राष्ट्र का मुंह मोड़ दिया है। नई सुबह, नये इतिहास की आभा से आज चमक दमक रही है। एक किसान बाप का एक जवान बेटा सरहद पार से सोने की फसल काट लाया है। सच मायने में शास्त्री जी का “जय जवान, जय किसान” आज एक बार फिर गुंजायमान हो उठा है।

एक प्रेरणा बन गई है नीरज कि यह विश्वास भरी जीत, ये स्वर्णिम सफलता। इस जीत को मंजिल मान भरोसे से भरे भारत के कई लाडले निसंदेह अब आगे बढ़ेंगे, कई माँ-बाप जो खेल के मैदान से बच्चों को धकेल घरों में समेट किताबों के पन्नों में सजाएं रहते हैं, वह भी उन नौनिहालों को किताबों के बोझिल संसार से निकाल अब भाला, तलवार, हॉकी, चक्का थमा बोलेंगे जा जीत ले दुनिया बन जा नीरज। नीरज अब एक मात्र नाम भर ही नहीं सफलता की सबसे बड़ी मात्रा बन गया है। ये नाम अब खुली आँखों का चमकता ख्वाब है, हर उस कोच के लिए, हर उस खिलाड़ी के लिए, हर उस मां-बाप के लिए जो अपने जिगर के टुकड़ों को खेल के मैदान में इस अरमान से छोड़ते हैं कि एक दिन यह देश के सम्मान को शान, तिरंगे को बुलंदी, वतन को सोने का मेडल देगा, नीरज नसों में रच बस गए हैं उन सभी खिलाड़ियों के जिनके रगों में जीत दौड़ती फिरती हैं। धन्य है नीरज की जननी, धन्य है नीरज के पिता, धन्य धन्य हैं वह सभी जिन्होंने नीरज की राह को आसान कर आसमान से भी बड़ी जीत को साकार करने में नीरज का संघर्ष के दिनों में साथ दिया। धन्य है नीरज जिनकी हर एक साँस सोना जीतने में सिमटी रही, जिनका बहता पसीना सोने को संवारता सहेजता रहा, जिनकी साधना सोने को कुंदन बना पल-पल दमकाती चमकाती रही।

गुरबत को गहना बना भारत माँ के मुकुट को सजा दिया नीरज ने, पर क्या सब खिलाड़ी गरीबी से जीत इस आसमान को छू पाते हैं? सोचना ही होगा इस मजबूर सच्चाई को। आज पूरा भारत उन पर मेहरबान है रुपए बरस रहे हैं खजानो का मुँह खुल गया है पर कभी ऐसा भी समय था जब नीरज एक अलग जैवलिन खरीदने को तरसते थे देशवासियों पेड़ को सींचने से नहीं नए पौधे रोपने सहेजने संभालने से सोना बरसेगा सोच बदलो इंडिया, इंडिया के कई नीरज सोने का सपना ले बांस की तलवार, बांस का धनुष, बांस का भाला बना आज भी भवानी और दीपिका की तरह मैदानों में खड़े सुनते हैं उनकी और देखो खेल का बजट बढ़ाओ पालो नौनिहालों के सपने को उनको साधन सामान मैदान दो फिर मेडल ना बरसे तो कहना। आज की संभावना आज का सच नीरज कल के कई नियमों की संभावना बन चमक रहा है नवीन पटनायक बनना होगा सरकार को खेल का हाथ थामना होगा खिलाड़ियों के लिए वरदान बनना होगा 28 राज्य के मुख्यमंत्री एक एक खेल भी गोद ले लें तो भारत माँ की गोद सोने चांदी से भर जाएगी भारत खेल के मैदान में भी ताज बन जाएगा सच तो ये भी है न नीरज बनना आसान है न नवीन ।


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