Sukhpal Khaira Suspended : पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन, शुक्रवार 23 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ में वो हुआ जिसकी उम्मीद शायद खुद कांग्रेस खेमे को भी नहीं थी। कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा को सदन की बाकी बची पूरी अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। प्रस्ताव वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने रखा, और स्पीकर कुलतार सिंह संधवां की अध्यक्षता में यह सर्वसम्मति से पारित हो गया।
और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी। सुबह कार्यवाही शुरू होते ही गले में काले कपड़े डालकर पहुंचे कांग्रेस विधायकों ने मांग रखी कि पहले राज्य से जुड़े मुद्दों पर बहस हो। स्पीकर ने भरोसा तो दिया, लेकिन प्रश्नकाल शुरू कर दिया। नारेबाजी तेज हुई। माहौल गरमा गया।
🔍 यह भी पढ़ें- Sukhpal Khaira Defamation Case: कांग्रेस नेता पर 6 लाख जुर्माना, हाईकोर्ट ने कहा- न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग
‘चीमा का हमला : मिस्टर परगट सिंह, यू आर द मेंबर ऑफ चिट्टा पार्टी’
विपक्ष के शोर के बीच वित्तमंत्री हरपाल चीमा अपनी सीट से खड़े हुए और सीधा निशाना साधा कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह पर। उनके शब्द थे : “मिस्टर परगट सिंह, यू आर द मेंबर ऑफ चिट्टा पार्टी।”
चीमा यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि तख्त दमदमा साहिब, तलवंडी साबो में नशा खत्म करने की झूठी कसम खाई गई थी। आरोप लगाया कि परगट सिंह पहले शिरोमणि अकाली दल और भाजपा का हिस्सा रहे हैं, और पंजाब में चिट्टे का नाम पहली बार उसी दौर में सुना गया।
देखा जाए तो यह सिर्फ एक बयान नहीं था : यह 2027 के चुनावी मैदान की पहली गोलाबारी थी।
‘1984 से लेकर नकोदर तक : सदन में उठे पुराने जख्म’
चीमा ने कांग्रेस को घेरते हुए 1984 के सिख विरोधी दंगों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों में सिखों के गले में टायर डालकर जलाया गया, और यह पूरा देश जानता है। कांग्रेस नेताओं को उन्होंने जगदीश टाइटलर से जोड़ा और श्री अकाल तख्त साहिब पर हमले का आरोप भी दोहराया।
इसके बाद उन्होंने नकोदर कांड का जिक्र किया। चीमा का कहना था कि जब नकोदर में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी हुई, उस वक्त सुखपाल खैहरा के पिता सरकार में मंत्री थे और वहां उनके रिश्तेदार एसएचओ तैनात थे। उन्होंने मांग की कि वह रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
चीमा ने नशा तस्करी के पुराने मामलों का हवाला देते हुए गुरदेव सिंह दैवी का नाम भी लिया और उसे खैहरा का दोस्त बताया। सदन में तल्खी इस हद तक बढ़ी कि “तेरी हिस्ट्री को पंजाब जानता है” जैसे शब्द गूंजने लगे।
‘खैहरा का पलटवार : आवाज उठाना गुनाह है तो रोज उठाऊंगा’
निलंबन के बाद खैहरा का तेवर जरा भी नरम नहीं पड़ा। उन्होंने साफ कहा कि स्पीकर ने वित्त मंत्री हरपाल चीमा के निर्देश पर उन्हें निलंबित किया है।
उनका बयान था कि अगर पंजाब की आवाज उठाना, परमिंदर झोटा के लिए न्याय मांगना, या गुलजार दिरबा की मौत के मामले में हरपाल चीमा को आरोपी बताना अपराध है : तो वे यह काम हर दिन, हर जगह करते रहेंगे। उन्होंने इसे आम आदमी पार्टी सरकार की बदले की कार्रवाई बताया।
दिलचस्प बात यह है कि खैहरा अपने उस विवादित बयान पर भी कायम रहे, जिसमें उन्होंने ‘आप’ के मंत्रियों और विधायकों के लिए ‘बंधुआ मजदूर’ शब्द इस्तेमाल किया था। चीमा ने सदन में यही आधार बनाया : वेल में आकर चेयर के प्रति आपत्तिजनक शब्द कहे गए और ‘बंधुआ मजदूर’ कहकर मजदूरों का अपमान किया गया।
‘सदन में पानी, सेहत और आम आदमी के असली सवाल’
हंगामे के शोर में कुछ ऐसे सवाल भी उठे जो सीधे आम आदमी की जेब और जिंदगी से जुड़े हैं। डेराबस्सी के विधायक कुलजीत सिंह रंधावा ने नहरी पानी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उनके हलके के किसान और आम लोग तरस रहे हैं।
उनकी बात में चुभन थी : “जहां लोग सीएम को जलदेवता कहते हैं, लेकिन हमें पानी नहीं मिला।” रंधावा ने बताया कि 2025 के सत्र में चार महीने का भरोसा मिला था, मगर 19 महीने बाद भी काम सिर्फ कागजों में है। उन्होंने कहा कि जीरकपुर की आबादी छह लाख है और पानी 1500 फुट गहराई तक चला गया है। मंत्री का जवाब आया कि योजना बड़ी है और जल्द जमीन एक्वायर करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
वहीं मोहाली के विधायक कुलवंत सिंह के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह ने बड़ी जानकारी दी : सरकार के कार्यकाल में बन रहे अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के 50 फीसदी बेड मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत रिजर्व रखे जा रहे हैं, जो लोगों के लिए मुफ्त होंगे।
कुलवंत सिंह ने मांग रखी कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 फीसदी ओपीडी और 5 फीसदी इनडोर इलाज मुफ्त होना चाहिए। उन्होंने अस्पतालों में झगड़े और डेडबॉडी न देने जैसी शिकायतों पर रेगुलेटरी अथॉरिटी का सवाल भी उठाया, जिस पर मंत्री ने कहा कि अथॉरिटी बनाई जा चुकी है और कार्रवाई होगी।
‘एक नजर में : सत्र का पूरा गणित’
| विषय | स्थिति |
|---|---|
| पहले दिन (22 अक्टूबर) कार्यवाही | सिर्फ 9 मिनट 6 सेकंड चली |
| श्रद्धांजलि | परविंदर सिंह झोटा और संगरूर हादसे के 8 मृतक |
| दूसरे दिन (23 अक्टूबर) | 11 रिपोर्ट और एक प्रस्ताव पेश |
| खैहरा पर कार्रवाई | शेष सत्र के लिए निलंबित |
| 24-25 अक्टूबर | शनिवार-रविवार की छुट्टी |
| 26 अक्टूबर | राजपत्रित अवकाश |
| 27 अक्टूबर | दोपहर 2 बजे कार्यवाही, फिर अनिश्चितकाल स्थगन प्रस्ताव |
‘विपक्ष का मूड और सत्र का असली एजेंडा’
विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने सत्र शुरू होने से पहले ही तेवर दिखा दिए थे। उनका कहना था कि सरकार ने विशेष सत्र के नाम पर मजाक बना रखा है और विपक्ष मुख्यमंत्री को लानत पत्र सौंपेगा।
अगर गौर करें तो इस सत्र का एजेंडा सिर्फ तीखी बयानबाजी नहीं था। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में पात्र मतदाताओं के नाम कटने का मुद्दा, नशा, कानून-व्यवस्था, सरकारी कर्मचारियों की लंबित मांगें और राज्य पर बढ़ता कर्ज : ये सारे विषय विपक्ष के तरकश में थे।
चर्चा यह भी रही कि पंजाब के नदी जल अधिकार और बांध सुरक्षा कानून से जुड़े मुद्दे एजेंडे में शामिल हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाला प्रस्ताव लाने की बात भी सामने आई।
‘इस पूरे घटनाक्रम के मायने क्या हैं’
समझने वाली बात है कि यह निलंबन महज सदन के अनुशासन का मामला नहीं दिखता। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, और कांग्रेस की कमान परगट सिंह के हाथ में आते ही सत्ताधारी दल ने सीधे उन्हीं को निशाने पर ले लिया।
इससे साफ होता है कि आने वाले महीनों में ‘नशा’ और ‘बेअदबी’ : ये दो शब्द ही पंजाब की सियासत का केंद्र बनने जा रहे हैं। चिंता का विषय यह है कि जिन मुद्दों पर आम आदमी को जवाब चाहिए : नहरी पानी, मुफ्त इलाज, कर्ज : वे आरोप-प्रत्यारोप के शोर में दब जाते हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि खैहरा के निलंबन के बाद विपक्ष के पास 27 अक्टूबर की बैठक ही आखिरी मौका बचा है, क्योंकि उसी दिन सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव तय है। सत्र आगे बढ़ने की संभावना फिलहाल कम बताई जा रही है।
और सवाल उठता है : क्या बचे हुए एक दिन में पानी, सेहत और SIR जैसे मुद्दों पर कोई ठोस जवाब मिल पाएगा? आम पाठक के लिए असर सीधा है : डेराबस्सी-जीरकपुर जैसे इलाकों में नहरी पानी का इंतजार अभी और लंबा खिंच सकता है, जबकि मुख्यमंत्री सेहत योजना के 50 फीसदी रिजर्व बेड वाला ऐलान राहत की बात जरूर है : बशर्ते जमीन पर उतरे।
‘जानें पूरा मामला’
पंजाब विधानसभा का यह विशेष सत्र 22 अक्टूबर को शुरू हुआ था। पहले दिन सिर्फ श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जिसमें एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा और संगरूर सड़क हादसे में जान गंवाने वाले आठ लोग शामिल थे, और कार्यवाही 9 मिनट में ही स्थगित हो गई। दूसरे दिन कांग्रेस काले कपड़े पहनकर पहुंची, राज्य के मुद्दों पर पहले चर्चा की मांग रखी, प्रश्नकाल शुरू होते ही नारेबाजी हुई और अंततः सुखपाल खैहरा को शेष सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा पंजाब विधानसभा के शेष सत्र के लिए निलंबित, प्रस्ताव वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने रखा और सर्वसम्मति से पारित हुआ।
- चीमा ने कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह पर हमला बोलते हुए कहा : “मिस्टर परगट सिंह, यू आर द मेंबर ऑफ चिट्टा पार्टी।”
- खैहरा ने निलंबन को ‘आप’ सरकार की बदले की कार्रवाई बताया और ‘बंधुआ मजदूर’ वाले बयान पर कायम रहने की बात दोहराई।
- सदन में डेराबस्सी के नहरी पानी और मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 50% मुफ्त बेड जैसे अहम मुद्दे भी उठे; सदन अब 27 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे बैठेगा।













