Sawan 2026 Start Date की जानकारी के लिए करोड़ों शिव भक्त बेताब हैं। सावन का महीना आते ही देशभर के शिव मंदिरों में रौनक बढ़ जाती है। हर तरफ “हर हर महादेव” और “बम बम भोले” के जयकारे गूंजने लगते हैं। भगवान शिव को समर्पित यह महीना हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि सावन में की गई पूजा, व्रत और उपासना का कई गुना फल प्राप्त होता है। यही वजह है कि करोड़ों श्रद्धालु पूरे साल सावन का इंतजार करते हैं।
देखा जाए तो सावन का महीना केवल एक धार्मिक अवसर नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति और आध्यात्मिकता का संगम है। इस बीच लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि साल 2026 में सावन कब शुरू होगा और पहला सावन सोमवार किस तारीख को पड़ेगा?
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कब से शुरू होगा Sawan 2026?
धार्मिक पंचांग के अनुसार Sawan 2026 की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से होगी। यह पावन महीना 28 अगस्त 2026 तक चलेगा। यानी पूरे एक महीने तक शिव भक्त भक्ति, साधना और पूजा-पाठ में लीन रहेंगे। इस दौरान शिव मंदिरों में विशेष आयोजन होंगे, रुद्राभिषेक किए जाएंगे और कांवड़ यात्रा का आयोजन किया जाएगा।
दिलचस्प बात यह है कि माना जाता है कि सावन के महीने में भगवान शिव पृथ्वी पर अपने भक्तों के बेहद करीब होते हैं और सच्चे मन से मांगी गई प्रार्थनाएं स्वीकार करते हैं।
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सावन सोमवार का खास महत्व
हालांकि सावन का हर दिन शुभ माना जाता है, लेकिन सोमवार को विशेष महत्व दिया जाता है। क्योंकि सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन माना गया है और यही कारण है कि सावन के सोमवार पर व्रत रखने और शिवलिंग का जलाभिषेक करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
कई श्रद्धालु पूरे सावन में सोमवार व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग पहले सोमवार से 16 सोमवार व्रत की शुरुआत भी करते हैं। समझने वाली बात यह है कि इन व्रतों का धार्मिक और आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टि से बहुत महत्व है।
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Sawan 2026 में कितने सोमवार?
साल 2026 में सावन के चार सोमवार पड़ रहे हैं। यहां ध्यान देने वाली बात है कि हर सोमवार का अपना विशेष महत्व है:
| सोमवार क्रमांक | तारीख | महत्व |
|---|---|---|
| पहला सोमवार | 3 अगस्त 2026 | सावन की आध्यात्मिक शुरुआत |
| दूसरा सोमवार | 10 अगस्त 2026 | भक्ति का मध्य चरण |
| तीसरा सोमवार | 17 अगस्त 2026 | संकल्प सिद्धि का समय |
| चौथा सोमवार | 24 अगस्त 2026 | समापन पूर्व अंतिम सोमवार |
पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026
पहला सोमवार 3 अगस्त 2026 को पड़ेगा। इसी दिन शिव भक्तों के विशेष व्रत और अनुष्ठान का सिलसिला तेज हो जाएगा। मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलेंगी। भगवान शिव का गंगाजल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र से अभिषेक किया जाएगा।
अगर गौर करें तो पहले सावन सोमवार का महत्व इसलिए भी अधिक माना जाता है क्योंकि यह पूरे सावन मास की आध्यात्मिक शुरुआत का प्रतीक होता है। इस दिन कई भक्त अपने जीवन की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए विशेष पूजा करते हैं।
ज्योतिषीय दृष्टि से पहला सोमवार
ज्योतिषीय दृष्टि से भी इस बार पहला सावन सोमवार बेहद खास माना जा रहा है। पंचांग के अनुसार यह व्रत श्रावण कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर पड़ रहा है। इस दिन उत्तर भाद्रपद और रेवती नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। इसके साथ ही सुकर्म और धृति योग का भी शुभ संयोग बनेगा। चंद्रमा मीन राशि में स्थित रहेगा, जिससे दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ जाएगा।
पहले सावन सोमवार के शुभ मुहूर्त
पहले सावन सोमवार (3 अगस्त 2026) पर पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं:
| मुहूर्त का नाम | समय | उपयोग |
|---|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 4:26 से 5:14 तक | प्रातःकालीन पूजा, ध्यान |
| अभिजीत मुहूर्त | दोपहर 12:07 से 12:59 तक | विशेष संकल्प, महत्वपूर्ण पूजा |
| अमृतकाल | शाम 5:07 से 6:44 तक | शिवलिंग अभिषेक, आरती |
जिससे पूजा-पाठ के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
सावन सोमवार की पूजा विधि
सावन सोमवार व्रत की सही विधि जानना बेहद जरूरी है:
1. सुबह की तैयारी: सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2. शिवलिंग अभिषेक: शिवलिंग पर गंगाजल, दूध और स्वच्छ जल से अभिषेक करना चाहिए।
3. प्रसाद अर्पण: भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग और चंदन अर्पित करना शुभ माना जाता है।
4. मंत्र जाप: पूजा के दौरान घी का दीपक जलाकर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना चाहिए। श्रद्धालु महामृत्युंजय मंत्र का पाठ भी कर सकते हैं।
5. आरती: अंत में भगवान शिव की आरती कर पूजा संपन्न की जाती है।
कांवड़ यात्रा का महत्व
सावन के महीने में Kanwar Yatra का विशेष आयोजन होता है। लाखों कांवड़िए गंगा से जल लेकर पैदल चलते हुए अपने-अपने क्षेत्र के शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं। यह यात्रा भक्ति, समर्पण और तप का अद्भुत प्रदर्शन होती है।
क्यों खास है सावन?
सावन का महीना इसलिए भी खास है क्योंकि:
- समुद्र मंथन की याद: माना जाता है कि समुद्र मंथन से निकले विष को भगवान शिव ने पिया था।
- प्रकृति का श्रृंगार: सावन में वर्षा ऋतु होती है, जो प्रकृति को हरा-भरा कर देती है।
- आध्यात्मिक उन्नति: इस महीने में साधना का विशेष फल मिलता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- सावन 2026 की शुरुआत 30 जुलाई से, समापन 28 अगस्त को
- पहला सावन सोमवार 3 अगस्त 2026 को
- कुल चार सोमवार: 3, 10, 17, 24 अगस्त
- ब्रह्म मुहूर्त, अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल में पूजा शुभ
- उत्तर भाद्रपद और रेवती नक्षत्र का शुभ संयोग
- शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र अर्पित करें
- “ॐ नमः शिवाय” और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें













