Rib Removal Surgery: वजन घटाने के लिए इंसान क्या कुछ नहीं करता – घंटों जिम में बिताता है, मेहनत करता है, डाइटिंग करता है। लेकिन अब एक नया और खतरनाक ट्रेंड चल रहा है – पतली कमर पाने के लिए पसलियां तुड़वाना। ऐसे लोग जिनका वजन पहले से ही कम है, वो और स्लिम दिखने के लिए Rib Removal Surgery करवा रहे हैं।
यह शरीर के लिए मेडिकली बिल्कुल भी ठीक नहीं है। जुपिटर हॉस्पिटल, पुणे में प्लास्टिक सर्जरी की कंसल्टेंट डॉ. स्वप्ना आठवले ने इस सर्जरी के खतरों और बेहतर विकल्पों के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। आइए जानते हैं कि यह सर्जरी कैसे की जाती है, इसके क्या खतरे हैं और पतली कमर पाने के सुरक्षित तरीके क्या हैं।
कैसे की जाती है रिब रिमूवल सर्जरी?
Rib Removal Surgery का ट्रेंड इंटरनेट पर तेजी से फैल रहा है। डॉ. स्वप्ना आठवले बताती हैं कि यह सर्जरी जनरल एनेस्थीसिया देकर की जाती है। यह सर्जरी एक से दो घंटे चलती है। इसमें लोअर रिब्स यानी 11वीं और 12वीं फ्लोटिंग रिब्स निकाली जाती हैं।
यह सर्जरी स्मॉल इंसीजन यानी छोटे चीरे से की जाती है और इसे आमतौर पर प्लास्टिक सर्जन ही करते हैं। यह एक एस्थेटिक प्रोसीजर है जो सिर्फ एस्थेटिक यानी दिखावट के लिए की जाती है।
सबसे पहले समझने वाली बात यह है कि इस सर्जरी का इंडिकेशन बहुत स्पष्ट होना चाहिए। यह सर्जरी बहुत पतली लड़कियों में ही की जाती है। मोटे या ओबीस मरीजों में रिब रिमूव करके कोई भी रिजल्ट नहीं आएगा।
पतली लड़कियों में अगर रिब रिमूव करना है तो यह ओनली फॉर द एस्थेटिक रीजन यानी केवल दिखावट के लिए होता है। यह मेडिकल जरूरत नहीं है।
क्या हैं इस सर्जरी के खतरे?
Dr. Swapna Athavale बताती हैं कि 11वीं और 12वीं रिब रिमूव करने का एक बड़ा रिस्क है। डायफ्राम नाम की एक मसल है जो थोरैक्स यानी छाती और एब्डोमेन यानी पेट को अलग करती है। यह मसल 11वीं और 12वीं रिब से अटैच रहती है।
अगर ये रिब्स निकाल दी जाएं तो इस मसल में डिस्टर्बेंस की समस्या आ सकती है। हालांकि यह मेजर रिस्क नहीं है लेकिन फिर भी एक जटिलता है।
दूसरा और सबसे बड़ा खतरा यह है कि ये रिब्स किडनी को प्रोटेक्ट करती हैं। 11वीं और 12वीं रिब पोस्टीरियरली यानी पीछे की तरफ से किडनी को सुरक्षा प्रदान करती हैं। अगर ये रिब्स निकाल दी जाएं तो किडनी का बैक साइड से प्रोटेक्शन कम हो जाता है।
किसी भी चोट, दुर्घटना या झटके में किडनी को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। यह एक स्थायी जोखिम है जो जीवन भर बना रहता है।
पसलियां शरीर के लिए क्यों जरूरी हैं?
Rib Removal से पहले यह समझना बेहद जरूरी है कि रिब्स यानी पसलियां शरीर के लिए कितनी महत्वपूर्ण हैं। डॉ. आठवले समझाती हैं कि रिब्स बेसिकली हमारे लंग्स यानी फेफड़ों और हार्ट यानी दिल को प्रोटेक्ट करने के लिए प्रकृति ने दिया हुआ एक नेचुरल नेट है।
इसमें अंदर लंग्स और हार्ट सुरक्षित रहते हैं। लेकिन जो लोअर रिब्स हैं – 11वीं और 12वीं रिब – वो कंप्लीट नहीं होतीं। मतलब ये आगे की तरफ से स्टर्नम यानी छाती की हड्डी से नहीं जुड़ी होतीं। इसलिए इन्हें फ्लोटिंग रिब्स भी कहते हैं।
लंग्स और हार्ट के प्रोटेक्शन में इन रिब्स का इतना योगदान नहीं है। इसलिए एस्थेटिक कारणों से इन्हें रिमूव किया जा सकता है। लेकिन इनका एक और महत्वपूर्ण काम है – किडनी को बैक साइड से प्रोटेक्ट करना।
दुनिया भर में प्लास्टिक सर्जन इस बात पर सहमत हैं कि सिर्फ दिखावट के लिए शरीर के किसी भी अंग को निकालना विवादास्पद है। हमारे शरीर का हर अंग किसी न किसी उद्देश्य के लिए है।
पतली कमर पाने के बेहतर और सुरक्षित तरीके
Rib Removal Surgery की जगह डॉ. स्वप्ना आठवले कुछ बेहतर और सुरक्षित विकल्प सुझाती हैं। सबसे पहली बात – पतली कमर पाने के लिए आपका ओवरऑल BMI यानी बॉडी मास इंडेक्स कम होना चाहिए।
पतली कमर और ओवरऑल बॉडी ओबेसिटी – यह कैलकुलेशन नहीं जमेगा। पतली कमर होने के लिए पहले BMI कम होना चाहिए ताकि आपका ओवरऑल बॉडी फैट कम हो जाए। तभी आपकी कमर का कर्वेचर यानी घुमाव दिखेगा।
सबसे पहले वेट लॉस ट्रीटमेंट करनी चाहिए। वेट लॉस के लिए सर्जिकल और नॉन-सर्जिकल बहुत सारे ऑप्शन उपलब्ध हैं। आजकल तो नॉन-सर्जिकल ऑप्शन में Manjaro, Ozempic जैसे बहुत सारे ड्रग्स के ऑप्शन उपलब्ध हैं।
पहले आप वेट लॉस करवा लें। वेट लॉस के बाद अगर आपको इंचेस लॉस करवाना है, वो भी खासतौर से कमर के आसपास, तो लाइपोसक्शन सबसे बेहतर तकनीक है।
लाइपोसक्शन – सबसे सुरक्षित विकल्प
Liposuction में आप एक्सेस फैट जो आपकी कमर के आसपास या पेट के आसपास जमा हुआ है, उसे लाइपोसक्शन तकनीक से निकलवा सकते हैं। यह बहुत बेहतर प्रोसीजर है और बेहद मिनिमली इनवेसिव यानी कम से कम चीरफाड़ वाला है।
Liposuction की रिकवरी टाइम बहुत कम है। डॉक्टर को यह तकनीक रिब सर्जरी से कहीं बेहतर लगती है। अगर आपको कमर के लिए डेफिनेशन यानी शेप चाहिए तो लाइपोसक्शन सबसे बेहतर तकनीक है।
लाइपोसक्शन में छोटे-छोटे इंसीजन यानी चीरे लगाए जाते हैं। फिर एक पतली ट्यूब डालकर एक्स्ट्रा फैट को सक्शन यानी खींचकर बाहर निकाल दिया जाता है। यह एक आउटपेशेंट प्रोसीजर है यानी आप उसी दिन घर जा सकते हैं।
रिकवरी में कुछ हफ्ते लगते हैं लेकिन परिणाम बहुत अच्छे और प्राकृतिक दिखते हैं। सबसे बड़ी बात – इसमें शरीर का कोई अंग स्थायी रूप से निकाला नहीं जाता।
डाइट और एक्सरसाइज – सबसे प्राकृतिक तरीका
किसी भी सर्जरी से पहले सबसे पहला और सबसे सुरक्षित तरीका है – डाइट और एक्सरसाइज। नियमित व्यायाम, खासकर कोर स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज और कार्डियो से कमर की चर्बी कम की जा सकती है।
संतुलित आहार जिसमें प्रोटीन, फाइबर और जरूरी पोषक तत्व हों, वजन कंट्रोल में मदद करता है। प्रोसेस्ड फूड, शुगर और अनहेल्दी फैट से दूर रहना चाहिए।
योगासन जैसे नौकासन, धनुरासन और भुजंगासन भी कमर की मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं और शेप में लाने में मदद करते हैं। ये सभी प्राकृतिक तरीके हैं जो बिना किसी खतरे के परिणाम देते हैं।
एक्सपर्ट की सलाह
डॉ. स्वप्ना आठवले का कहना है कि लोग एस्थेटिक कारणों से Rib Removal Surgery करा रहे हैं लेकिन उनकी सलाह है कि आपको ऐसी कोई भी सर्जरी सिर्फ लुक्स के लिए नहीं करवानी चाहिए।
पसलियां शरीर के लिए बहुत जरूरी हैं। वे सिर्फ दिखावट का हिस्सा नहीं हैं बल्कि महत्वपूर्ण अंगों की सुरक्षा करती हैं। इन्हें निकालना एक स्थायी बदलाव है जिसे वापस नहीं किया जा सकता।
सोशल मीडिया पर दिखने वाली परफेक्ट बॉडी के पीछे भागने की जगह अपनी प्राकृतिक बॉडी टाइप को स्वीकार करना और उसे स्वस्थ तरीके से बेहतर बनाना ज्यादा समझदारी है।
मुख्य बातें (Key Points):
• Rib Removal Surgery में 11वीं और 12वीं पसली निकाली जाती है, 1-2 घंटे की प्रक्रिया
• इससे किडनी का प्रोटेक्शन कम हो जाता है, डायफ्राम मसल में दिक्कत आ सकती है
• Liposuction और वेट लॉस ड्रग्स बेहतर और सुरक्षित विकल्प हैं
• सिर्फ लुक्स के लिए शरीर का कोई अंग निकालना खतरनाक है













