Ram Mandir Donation Theft Case ने जब से सुर्खियां बटोरना शुरू किया है, तब से अयोध्या की राजनीति और धार्मिक गलियारों में तूफान मचा हुआ है। राम जन्मभूमि परिसर में चढ़ावे के पैसों में कथित घोटाले के आरोपी रामशंकर यादव की पत्नी पूनम यादव ने पहली बार मीडिया के सामने आकर अपना पक्ष रखा। आंखों में आंसू लिए पूनम ने कहा कि उनके पति को बदनाम करने की साजिश रची गई है। 50 करोड़ की संपत्ति, होटल, लग्जरी गाड़ियों और सोने के आरोप पूरी तरह निराधार हैं।
देखा जाए तो, यह केवल एक पारिवारिक बयान नहीं है। पूनम का यह दर्द भरा संबोधन उस व्यक्ति की पत्नी का है जो 1992 से राम आंदोलन से जुड़ा रहा है, जो कार सेवक था और जिसने 32 साल तक राम जन्मभूमि ट्रस्ट में सेवा दी। अब जब उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) का गठन कर दिया है, तो पूनम को उम्मीद है कि सच्चाई सामने आएगी।
समझने वाली बात है कि Ram Mandir Donation Theft Case में अभी तक कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है। लेकिन आरोप इतने गंभीर हैं कि पूरे देश में चर्चा हो रही है।
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पूनम यादव ने क्या कहा? पूरा बयान
पूनम यादव ने मीडिया के सामने भावुक होकर अपने पति का पक्ष रखा। उनके बयान की मुख्य बातें:
1. साजिश और बदनामी:
“यह सब निराधार है। एक फंसाने की साजिश है। ऐसा कुछ भी नहीं है। कोई ठोस सबूत है किसी के पास? खाली बदनाम करना जा रहा है।”
2. 50 करोड़ की संपत्ति का खंडन:
“बताया जा रहा है 50 करोड़ की संपत्ति है, हॉस्टल है, होटल है, लग्जरी गाड़ी है। ऐसा कुछ भी नहीं है। अगर होता तो क्या बाबूजी सुबह जाते और रात 11 बजे घर आते? उन्हें इतना परिश्रम करने की क्या जरूरत?”
3. सोने की बरामदगी का खंडन:
“लोग यहां तक कह रहे हैं कि घर से सोना लेकर निकली। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। अगर ले जाया होता तो मैं तो चिल्लाती, रोती कि मेरा सोना ले गए। ऐसा कुछ नहीं। कोई भी नहीं आया है।”
4. 15 दिनों का मानसिक तनाव:
“15 दिन से हम लोग कितने तनाव में हैं। मानसिक तनाव दिया जा रहा है। जो छवि देखकर, जो नाम देखकर, जो चित्र देखकर इतना हमको कष्ट है कि हम आपसे क्या बताएं।”
5. 2008 में खरीदा था मकान:
“जो मकान की बात हो रही है, वह 2008 में खरीदा गया था। राम मंदिर का फैसला आने से पहले 2015 में बन गया। और जो मेरे पास है, वह सब पारदर्शी है। कोई घोटाला नहीं किया है।”
दिलचस्प बात यह है कि पूनम ने बार-बार यह कहा कि उनके पति देवता जैसे इंसान हैं और उन्होंने कभी कोई बेईमानी नहीं की।
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32 साल की सेवा पर बदनामी का दाग
पूनम ने बताया कि रामशंकर यादव 1992 से राम आंदोलन और राम जन्मभूमि से जुड़े हुए हैं।
रामशंकर यादव का सफर:
| समयावधि | भूमिका |
|---|---|
| 1992 | कार सेवक, अशोक सिंघल और परमहंस दास के साथ |
| 2000 के दशक | मुकदमे की देखरेख (त्रिलोकीनाथ पांडे के बाद) |
| 2019 के बाद | राम जन्मभूमि निर्माण में सक्रिय भूमिका |
| कोरोना काल | मंदिर निर्माण के लिए रात-दिन एक, मजदूरों को भोजन की व्यवस्था |
पूनम ने कहा:
“उन्होंने हमेशा सेवा ही की है। कोरोना काल में घर भी नहीं आए। रात-दिन वहीं रहते थे। मजदूरों को स्वयं भोजन बनवाकर खिलाते थे। ठंडी, गर्मी, बरसात हमेशा संघर्ष ही किया है।”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि चंपत राय (ट्रस्ट के महासचिव) ने रामशंकर को उनकी ईमानदारी और परिश्रम देखकर जिम्मेदारी दी थी।
आरोप क्या-क्या लगाए गए हैं?
मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर जो आरोप लगाए जा रहे हैं:
1. चढ़ावे में चोरी:
- काउंटिंग के दौरान सोना-चांदी की चोरी
- नकदी गायब करना
2. संपत्ति:
- 50 करोड़ की अघोषित संपत्ति
- होटल, हॉस्टल, 50 कमरे
- लग्जरी गाड़ियां
3. कर्मचारियों को फंसाना:
- काउंटिंग में पकड़े गए कर्मचारियों को बचाना
लेकिन पूनम का कहना है कि इनमें से कोई भी आरोप सबूतों के साथ नहीं है। वे बस अफवाहें हैं।
2021 का मामला, 4 साल बाद क्यों उठा?
पूनम ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया:
“यह 2021 का मामला बताया जा रहा है। तो 4 साल तक चुप क्यों थे? अचानक याद क्यों आया?”
उन्होंने आरोप लगाया कि यह रामपाल (या किसी अन्य व्यक्ति) की साजिश है। और दिलचस्प बात यह है कि जो व्यक्ति आरोप लगा रहा है, वह 15 दिन पहले अयोध्या दर्शन करने आया था।
यह इशारा साफ था कि किसी आंतरिक दुश्मनी या प्रतिस्पर्धा के कारण यह मामला उछाला गया है।
कोरोना काल में भी फंसाया गया था
पूनम ने याद दिलाया:
“कोरोना काल में भी इनको फंसाया गया। एक हफ्ते के लिए क्वारेंटाइन कर दिया गया, जबकि किसी को कोरोना नहीं था। ना परिवार को था, ना हमको था। हमेशा बड़े लोगों ने परेशान करने की कोशिश की।”
यह दर्शाता है कि रामशंकर यादव को पहले भी निशाना बनाया गया है।
SIT जांच से क्या उम्मीद?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) का गठन कर दिया है।
पूनम ने SIT से गुहार लगाई:
“उम्मीद यही है कि जो सच्चाई है, वो सामने आए। इनकी 32 साल की सेवा पर बदनामी का दाग लगा है, इसको साफ किया जाए। जैसे गंदी खबरें फैलाई गईं, वैसे अच्छी खबरें डाली जाएं कि ये सारी चीजें गलत हैं।”
उन्होंने यह भी कहा:
“किसी के दबाव में आकर, किसी के कहने में आकर ऐसा नहीं करना चाहिए। पहले सच्चाई जांच करनी चाहिए। झूठ-रूप का आरोप लगाकर मानसिक तनाव देना, किसी को परेशान करना सब क्या है? केवल बदनाम करना।”
सबकी जांच हो, केवल छोटे लोगों की नहीं
पूनम ने एक और गंभीर बात कही:
“परिसर में बहुत सारे लोग हैं। जहां कहिए हम चलेंगे। जो भी जांच करनी है, कराइए। लेकिन और सारे लोग हैं जो बड़े-बड़े लोग हैं। छोटे लोगों को फंसाकर बड़े लोगों को बचाओ? सबकी जांच होनी चाहिए। किसके पास कितनी संपत्ति है, वो तो ज्ञान होना चाहिए।”
यह बयान संकेत करता है कि ट्रस्ट में और भी लोग हैं जिनकी जांच होनी चाहिए, लेकिन केवल रामशंकर को ही निशाना बनाया जा रहा है।
चंपत राय से क्या रिश्ता था?
पूनम ने बताया कि चंपत राय (राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव) ने रामशंकर को बहुत मानते थे।
“जब त्रिलोकीनाथ जी अस्वस्थ हो गए, तब इनको मुकदमा देखने के लिए लगाया गया। इनकी ईमानदारी देखकर, परिश्रम देखकर, रात-दिन का लगन देखकर तब इनको बताया गया।”
लेकिन अब सवाल उठता है: अगर चंपत राय ने इन्हें इतनी जिम्मेदारी दी थी, तो अचानक यह आरोप क्यों?
दाल-रोटी खाने वाले, कोई हाई-फाई नहीं
पूनम ने अपनी सादगी का जिक्र करते हुए कहा:
“हम साधारण व्यक्ति हैं। दाल-रोटी खाने वाले। जिसके पास 50 करोड़ की संपत्ति होगा, वह ऐसे रहेगा?”
उन्होंने यह भी कहा कि रामशंकर को जो सैलरी मिलती है, वह सभी को मिलती है। कोई अतिरिक्त लाभ नहीं लेते।
राम जन्मभूमि ट्रस्ट की प्रतिक्रिया अभी नहीं आई
अभी तक राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट या चंपत राय की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
लेकिन सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है और SIT को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है।
जनता की प्रतिक्रिया: विभाजित राय
सोशल मीडिया पर इस मामले में जनता की राय बंटी हुई है:
समर्थन में:
- “32 साल सेवा की, अब बदनाम कर रहे हैं”
- “बिना सबूत के आरोप गलत है”
- “पूनम का दर्द सच लग रहा है”
आरोपों के पक्ष में:
- “अगर निर्दोष हैं तो जांच से क्यों डरें?”
- “राम मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं”
- “SIT ही सच बताएगी”
मुख्य बातें (Key Points)
✔ राम मंदिर चढ़ावा घोटाले के आरोपी रामशंकर यादव की पत्नी पूनम यादव ने पहली बार मीडिया के सामने बोला।
✔ पूनम ने कहा कि 50 करोड़ की संपत्ति, होटल, सोना जैसे सभी आरोप निराधार हैं और साजिश के तहत लगाए गए हैं।
✔ उन्होंने बताया कि उनका मकान 2008 में खरीदा गया था, राम मंदिर फैसले से पहले ही बन गया था।
✔ रामशंकर यादव 1992 से कार सेवक रहे हैं और 32 साल से राम आंदोलन से जुड़े हुए हैं।
✔ पूनम ने SIT से गुहार लगाई कि सच्चाई सामने लाई जाए और उनके पति की 32 साल की सेवा पर लगा बदनामी का दाग मिटाया जाए।
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