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The News Air - Breaking News - रक्षाबंधन 2026 पर Chandra Grahan का साया! क्या लगेगा सूतक?

रक्षाबंधन 2026 पर Chandra Grahan का साया! क्या लगेगा सूतक?

28 अगस्त को राखी के साथ ही आंशिक चंद्र ग्रहण, जानें क्या होगा असर और किन देशों में दिखेगा यह खगोलीय नजारा

Ajay Kumar by Ajay Kumar
बुधवार, 17 जून 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, धर्म
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Chandra Grahan 2026
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Chandra Grahan 2026: साल 2026 का रक्षाबंधन इस बार कुछ अलग ही रंग लेकर आ रहा है। भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का यह त्योहार एक दुर्लभ खगोलीय घटना के साथ मनाया जाएगा। 28 अगस्त 2026 को जब देशभर में राखी बांधी जा रही होगी, उसी समय आसमान में चंद्र ग्रहण भी लग रहा होगा। लेकिन राहत की बात यह है कि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए किसी प्रकार का सूतक काल भी लागू नहीं होगा।

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रक्षाबंधन और चंद्र ग्रहण का अनोखा संयोग

देखा जाए तो यह संयोग काफी दुर्लभ है। हिंदू पंचांग के मुताबिक रक्षाबंधन हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। 2026 में यह तिथि 28 अगस्त को पड़ रही है। संयोग से इसी दिन चंद्र ग्रहण भी हो रहा है।

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और धार्मिक मंचों पर इस विषय को लेकर काफी चर्चा हो रही थी। लोग जानना चाह रहे थे कि क्या ग्रहण की वजह से राखी बांधने में कोई रुकावट आएगी? क्या शुभ कार्य रुकेंगे?

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि केवल ग्रहण का लगना ही काफी नहीं होता। असली सवाल यह है कि वह ग्रहण किन क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है।

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भारत में नहीं दिखेगा यह ग्रहण

खगोलीय गणनाओं के अनुसार 28 अगस्त 2026 को लगने वाला यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। और जब ग्रहण दिखाई ही नहीं देगा, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल भी लागू नहीं होगा।

हिंदू धर्म में यह मान्यता है कि सूतक काल केवल उन्हीं क्षेत्रों में मान्य होता है जहां ग्रहण प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देता है। चूंकि यह ग्रहण भारतीय क्षेत्र से बाहर होगा, इसलिए यहां के लोगों को किसी प्रकार की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

दिलचस्प बात यह है कि इस बार बहनें अपने भाइयों की कलाई पर बिना किसी धार्मिक बाधा के राखी बांध सकेंगी। पूजा-पाठ, आरती, तिलक और रक्षासूत्र बांधने जैसे सभी रस्मो-रिवाज सामान्य रूप से संपन्न हो सकेंगे।

🔍 यह भी पढ़ें- Chandra Grahan 2026: 500 साल बाद होली पर चंद्रग्रहण! भारत पर ज्योतिषीय प्रभाव, सूतक नियम, लाभकारी राजयोग

कितने समय तक रहेगा ग्रहण का प्रभाव

यह एक आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। इस दौरान पृथ्वी की छाया चंद्रमा के एक बड़े हिस्से को ढक लेगी, लेकिन पूरा चांद अंधेरे में नहीं जाएगा।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह ग्रहण सुबह करीब 6:52 बजे शुरू होगा और दोपहर लगभग 12:32 बजे तक जारी रहेगा। यानी यह खगोलीय घटना करीब 5 घंटे से अधिक समय तक प्रभावी रहेगी।

इतनी लंबी अवधि के कारण दुनिया के कई हिस्सों में इसे देखने का मौका मिलेगा। आकाश प्रेमियों के लिए यह एक दुर्लभ अवसर होगा।

चंद्रमा का रंग हो सकता है लाल

ग्रहण के समय चंद्रमा का रंग सामान्य से अलग दिखाई दे सकता है। कई बार ऐसे अवसर पर चांद हल्का लाल या तांबे जैसा रंग धारण कर लेता है।

अगर गौर करें तो यह वैज्ञानिक कारणों से होता है। जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरने वाली लाल रोशनी चंद्रमा पर पड़ती है, जिससे वह लाल दिखाई देता है।

इसी कारण इसे कई जगहों पर “ब्लड मून” के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि भारत में यह नजारा नहीं दिख पाएगा, लेकिन अन्य देशों में लोग इस अद्भुत दृश्य का आनंद ले सकेंगे।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से क्या है महत्व

ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में होगा। ज्योतिष के जानकारों का मानना है कि ग्रहण का प्रभाव हर व्यक्ति की जन्म कुंडली और ग्रह स्थिति के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।

समझने वाली बात यह है कि किसी एक सामान्य निष्कर्ष को सभी लोगों पर लागू नहीं किया जा सकता। हर व्यक्ति की राशि, नक्षत्र और ग्रह स्थिति अलग होती है, इसलिए प्रभाव भी भिन्न हो सकते हैं।

कुछ ज्योतिषी सलाह देते हैं कि कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र वालों को इस दिन विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। हालांकि चूंकि ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका प्रभाव बेहद कम माना जा रहा है।

भद्राकाल का रखें विशेष ध्यान

धार्मिक विद्वान एक बात का विशेष ध्यान रखने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि ग्रहण भले ही भारत में दिखाई न दे, लेकिन रक्षाबंधन के दिन भद्राकाल की स्थिति पर जरूर ध्यान देना चाहिए।

हिंदू धर्म में भद्राकाल को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इसलिए राखी बांधने का समय तय करते समय भद्राकाल से बचना अधिक महत्वपूर्ण बताया गया है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि पंडित और ज्योतिषी राखी बांधने का शुभ मुहूर्त अलग से बताएंगे, जो भद्राकाल से मुक्त होगा।

किन देशों में दिखेगा यह खगोलीय नजारा

खगोलीय विशेषज्ञों के अनुसार यह चंद्र ग्रहण अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और प्रशांत व अटलांटिक महासागर के आसपास के क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा।

इन क्षेत्रों में रहने वाले लोग इस दुर्लभ खगोलीय घटना का प्रत्यक्ष अनुभव कर पाएंगे। चंद्रमा का बदला हुआ स्वरूप देखने को मिलेगा, जो आकाश प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा।

कई देशों में वेधशालाओं और विज्ञान केंद्रों में इस ग्रहण को देखने के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। नासा समेत कई अंतरिक्ष एजेंसियां इसकी लाइव स्ट्रीमिंग भी कर सकती हैं।

2026 का यह दूसरा चंद्र ग्रहण

खगोलीय गणना के अनुसार यह वर्ष 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण होगा। इससे पहले साल में एक चंद्र ग्रहण पहले ही हो चुका होगा।

दिलचस्प बात यह है कि आमतौर पर हर साल दो से तीन चंद्र ग्रहण होते हैं। लेकिन उनमें से सभी हर जगह दिखाई नहीं देते। किसी खास क्षेत्र में कौन सा ग्रहण दिखेगा, यह पृथ्वी की स्थिति और समय पर निर्भर करता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है।

त्योहार की तैयारियां रहेंगी जारी

चूंकि ग्रहण का कोई प्रभाव भारत में नहीं होगा, इसलिए रक्षाबंधन की सभी तैयारियां पूरे जोश और उत्साह के साथ जारी रहेंगी।

बाजारों में राखियों की दुकानें सजेंगी, मिठाइयों की खरीदारी होगी और परिवार के सदस्य इस पवित्र पर्व को मनाने के लिए एक-दूसरे से मिलने आएंगे।

समझने वाली बात यह है कि धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोण से इस बार रक्षाबंधन पर किसी प्रकार की कोई बाधा नहीं है। लोग निश्चिंत होकर इस त्योहार का आनंद ले सकते हैं।


मुख्य बातें (Key Points)

• 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के दिन आंशिक चंद्र ग्रहण होगा

• यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक काल लागू नहीं होगा

• ग्रहण सुबह 6:52 से दोपहर 12:32 तक (5+ घंटे) रहेगा

• अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका में यह ग्रहण दिखाई देगा

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• कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में होगा यह ग्रहण

• राखी बांधते समय भद्राकाल का ध्यान रखना जरूरी होगा


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या 2026 में रक्षाबंधन पर राखी बांध सकते हैं?

हां, बिल्कुल। चूंकि चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक काल भी लागू नहीं होगा। आप सामान्य रूप से राखी बांध सकते हैं, बस भद्राकाल का ध्यान रखें।

प्रश्न 2: रक्षाबंधन 2026 किस तारीख को है?

रक्षाबंधन 2026 में 28 अगस्त को मनाया जाएगा। यह श्रावण पूर्णिमा का दिन होगा।

प्रश्न 3: चंद्र ग्रहण 2026 किन देशों में दिखेगा?

यह ग्रहण अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और प्रशांत तथा अटलांटिक महासागर के आसपास के क्षेत्रों में दिखाई देगा। भारत में यह दिखाई नहीं देगा।

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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