Ram Mandir Donation Case: अयोध्या के राम मंदिर से जुड़ा चढ़ावा चोरी मामला अब देश भर में चर्चा का विषय बन चुका है। एक तरफ विशेष जांच टीम (SIT) लगातार जांच कर रही है तो दूसरी तरफ आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा है कि 15 दिनों के भीतर SIT की जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। जबकि विपक्ष लगातार सरकार और ट्रस्ट पर सवाल उठा रहा है।
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20 जून को बड़ी पूछताछ
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी कार्रवाई और तेज कर दी है। 20 जून को टीम ने सात गणना कर्मियों यानी दान पात्रों में आने वाली रकम की गिनती करने वाले कर्मचारियों से पूछताछ की।
सूत्रों के मुताबिक इन कर्मचारियों से नगदी की गिनती, रिकॉर्ड तैयार करने, रकम बैंक तक पहुंचाने और पूरी प्रक्रिया में शामिल लोगों को लेकर कई सवाल पूछे गए।
दिलचस्प बात यह है कि जानकारी के अनुसार SIT अब तक ट्रस्ट से जुड़े कई कर्मचारियों, बैंक कर्मियों, गणना कर्मियों और ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों से पूछताछ कर चुकी है।
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पूर्व इंजीनियर के बड़े आरोप
जांच के पांचवें दिन एक और बड़ा मोड़ तब सामने आया जब ट्रस्ट के पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा मीडिया के सामने आए। उन्होंने ट्रस्ट के एक सदस्य ट्रस्टी डॉ. अनिल कुमार मिश्र पर 40% कमीशन लेने का आरोप लगा दिया।
उनका आरोप है कि सब कुछ जानते हुए भी महासचिव चंपत राय अनजान बने रहे और जमकर लूटखसोट होती रही। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और SIT इन्हीं पहलुओं की जांच कर रही है।
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SIT की टीम और पूछताछ
पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा के आरोपों के चलते SIT में शामिल लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत, IG लखनऊ रेंज किरण एस और विशेष सचिव वित्त विभाग नील रतन कुमार ने 19 जून को सुबह 10 बजे परिसर में पहुंचकर राम मंदिर के पीछे बने ग्रीन हाउस में बारी-बारी से कर्मियों से विभिन्न बिंदुओं पर पूछताछ की।
खबर है कि ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र सुबह 11 बजे ही पहुंच गए थे। उनसे इससे पहले भी पूछताछ की गई थी। उनसे राम शंकर यादव यानी टिन्नू के बयानों की तस्दीक करने के साथ नगदी की गणना से जुड़े अन्य बिंदुओं पर लगभग 3 घंटे तक जानकारी ली गई।
महासचिव चंपत राय से भी पूछताछ
SIT ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को फिर बुलाया और उनसे कई दौर की पूछताछ की। बताया जा रहा है कि दोनों यानी डॉ. अनिल और चंपत राय के बयान वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए दर्ज किए गए हैं।
जांच टीम पुराने रिकॉर्ड, नगदी के हिसाब-किताब और दान पात्रों की गिनती से जुड़ी पूरी व्यवस्था को खंगाल रही है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पूछताछ के लिए टिन्नू यादव, मनीष यादव, केडी तिवारी और सुभाष श्रीवास्तव के साथ-साथ अन्य संदिग्ध कर्मचारियों को भी बुलाया गया था।
SIT द्वारा पूछताछ में शामिल लोग
| व्यक्ति का नाम | पद/भूमिका | पूछताछ का विषय |
|---|---|---|
| डॉ. अनिल कुमार मिश्र | ट्रस्टी | 40% कमीशन के आरोप |
| चंपत राय | महासचिव | पूरी प्रक्रिया की जानकारी |
| राम शंकर यादव (टिन्नू) | संदिग्ध | चोरी में संलिप्तता |
| 7 गणना कर्मी | कर्मचारी | नगदी गिनती प्रक्रिया |
| सुभाष श्रीवास्तव | रिटायर्ड बैंक कर्मी | बैंकिंग लेनदेन |
| केडी तिवारी | आभूषण देखभाल | संग्रह प्रबंधन |
CM योगी का बयान
इसी बीच 19 जून को मुख्यमंत्री रामनगरी पहुंचे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर के विषय पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को आइना दिखाया।
CM ने कहा: “प्रभु श्री राम के अस्तित्व को नकारने वाले, राम भक्तों पर लाठी गोलियां चलाने वाले उपदेश दे रहे हैं। अयोध्या को अपमानित करने का प्रयास कर रहे हैं।”
“अयोध्या के बारे में समाचार पत्रों से जो जानकारी मिली उसके बाद ट्रस्ट के अनुरोध पर हमने SIT जांच बैठाई है। SIT दूध का दूध और पानी का पानी करके रहेगी। इसमें कोई संदेह नहीं है।”
अगर गौर करें तो उन्होंने यह भी कहा कि “SIT की रिपोर्ट आने तक ऐसी कोई बयानबाजी ना हो जो राम भक्तों की भावनाओं को आहत करती हो। यदि किसी के पास साक्ष्य हो तो SIT को उपलब्ध करा दे।”
मामले की टाइमलाइन
7 जून: पहली बार आरोप सार्वजनिक हुए। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने X (Twitter) पर पोस्ट किया और पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडे ने मीडिया से बात करते हुए चढ़ावे से ₹5 करोड़ से ₹7.5 करोड़ की चोरी बताई।
इसी दिन ट्रस्ट ने सफाई दी। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्टीकरण जारी कर आंतरिक अंकेक्षण चलाने की बात कही।
8 जून: भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग उठाई। इसी दिन PMO ने मामले का संज्ञान ले लिया और राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा देर शाम अयोध्या पहुंच गए।
9 जून: नृपेंद्र मिश्रा ने राम जन्मभूमि परिसर में गोपनीय बैठक कर ट्रस्टियों से विस्तृत जानकारी ली। दिल्ली रवाना होते समय पत्रकारों से बातचीत में इसे ट्रस्ट का आंतरिक मामला बताकर खारिज किया।
10 जून: इस पूरे मामले ने उस समय बड़ा रूप लिया जब राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महीपाल सिंह का एक वीडियो सामने आ गया जिसमें उन्होंने 2021-22 में कार्यरत रहते हुए पूर्व में भी लाखों रुपए के नोटों की गड्डियों की चोरी पकड़ने का दावा किया।
11 जून: ट्रस्टियों की बैठक में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों से प्रकरण की जांच कराने का निर्णय लिया गया।
13 जून 2026: राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय SIT का गठन कर दिया। लखनऊ मंडल के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में गठित जांच दल में लखनऊ रेंज के IG किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार को शामिल किया गया।
हाई कोर्ट में जनहित याचिका
यह मामला अब अदालत यानी कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। इस संबंध में दाखिल जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में 22 जून 2026 को सुनवाई होनी है।
याचिका में स्वतंत्र जांच और पूरे मामले का ऑडिट कराने की मांग की गई है। मामले में दाखिल जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में 18 जून गुरुवार को सुनवाई नहीं हो सकी।
समझने वाली बात यह है कि मोहित अशोक की ओर से दाखिल उक्त याचिका में स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठाई गई है। साथ ही नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) से पूरे मामले का ऑडिट कराने की भी मांग की गई है।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
ध्यान देने वाली बात यह है कि राम जन्मभूमि परिसर देश के सबसे सुरक्षित धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। लगभग 70 एकड़ के राम जन्मभूमि परिसर में त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है।
यहां CRPF, पुलिस, PAC, SSF के साथ कई सुरक्षा एजेंसियों के हजारों जवान तैनात रहते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि कोई गड़बड़ी हुई है तो वह कैसे हुई और जिम्मेदार कौन है।
फिलहाल पूरे देश की नजर SIT की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और जांच में क्या-क्या खुलासे सामने आते हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT ने 20 जून को 7 गणना कर्मियों से पूछताछ की
- पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र पर 40% कमीशन का आरोप लगाया
- CM योगी ने कहा – 15 दिन में SIT दूध का दूध और पानी का पानी करेगी
- 22 जून को इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई तय
- विपक्ष ने CAG ऑडिट की मांग की













