Rajoana Mercy Plea: 1995 के बेअंत सिंह हत्याकांड में मौत की सजा काट रहे Balwant Singh Rajoana की दया याचिका पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पत्ता साफ कर दिया है। केंद्र ने राजोआणा की मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग का सीधा विरोध किया है। 30 साल से ज्यादा वक्त से हिरासत में बंद राजोआणा के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है। अगर गौर करें तो यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक और भावनात्मक भी है, क्योंकि इसमें पंजाब की सुरक्षा स्थिति का हवाला दिया गया है।
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केंद्र ने क्यों किया विरोध: राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला
बुधवार को केंद्र की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने जस्टिस विक्रम नाथ की अगवाई वाली बेंच के सामने साफ कहा कि केंद्र को इस मांग पर इतराज है। उनकी दलील थी कि पंजाब में मौजूदा स्थिति को देखते हुए कोई भी फैसला लेना अनुकूल नहीं होगा। यह बात अपने आप में बहुत भारी है। इसका मतलब है कि केंद्र सरकार मानती है कि राजोआणा की सजा कम करने से पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है।
नटराज ने केस की तैयारी के लिए समय मांगा, जिसके बाद अदालत ने सुनवाई 28 अक्टूबर के लिए तय कर दी। जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की बेंच ने कहा कि वे मामले की गुणवत्ता (मेरिट) पर सुनवाई जारी रखेंगे।
30 साल पुराना खौफनाक हत्याकांड: 17 लोगों की गई थी जान
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह मामला 31 अगस्त 1995 की उस भयानक घटना से जुड़ा है जब तत्कालीन पंजाब मुख्यमंत्री Beant Singh को चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा सिविल सचिवालय के बाहर मानव बम धमाके में उड़ा दिया गया था। इस धमाके में दिलवावर सिंह सहित 17 अन्य लोग भी मारे गए थे। बब्बर खालसा से जुड़े राजोआणा को इस हत्याकांड में उनकी भूमिका के लिए दोषी पाया गया।
एक विशेष अदालत ने जुलाई 2007 में राजोआणा को मौत की सजा सुनाई। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 2010 में इस सजा को बरकरार रखा। फांसी की तारीख 31 मार्च 2012 तय की गई थी। लेकिन और बस यहीं से कहानी ने नया मोड़ लिया।
SGPC की एंट्री और फांसी पर रोक
जब फांसी का फंदा करीब आ रहा था, SGPC ने राजोआणा की तरफ से दया याचिका दाखिल कर दी। इसके बाद फांसी पर रोक लग गई। साल 2019 में एक बड़ा मोड़ आया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पुरब से जुड़े उपरालों के हिस्से के तौर पर राजोआणा की मौत की सजा कम करने के फैसले का ऐलान किया। यह खबर उस वक्त बड़ी राहत की बात लगी थी।
लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने सबको हैरान कर दिया। दया याचिका पर कोई फैसला नहीं आया। सालों बीत गए, लेकिन फाइल धूल खाती रही। इसी देरी के आधार पर राजोआणा ने 2020 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। CBI और केंद्र ने राहत देने का विरोध किया, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और पंजाब में कानून-व्यवस्था का हवाला दिया गया।
2023 में SC ने किया इनकार, 2024 में फिर दस्तक
3 मई 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने राजोआणा की मौत की सजा कम करने से इनकार कर दिया और इसे दया याचिका से निपटने वाले सक्षम अधिकारी पर छोड़ दिया। लेकिन राजोआणा ने हार नहीं मानी। 2024 में उन्होंने फिर से सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। इस बार उनकी दलील थी कि दया याचिका पर फैसला करने में हुई लंबी देरी ने संविधान की धारा 21 के तहत उनके जीवन के अधिकार का उल्लंघन किया है। यह दलील कानूनी तौर पर काफी मजबूत मानी जाती है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई मामलों में अत्यधिक देरी को सजा कम करने का आधार मान चुका है।
जानें पूरा मामला
बलवंत सिंह राजोआणा को 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या में दोषी पाया गया था। 2007 में मौत की सजा सुनाई गई, 2012 में फांसी तय हुई लेकिन SGPC की दया याचिका के बाद रोक लग गई। 2019 में केंद्र ने सजा कम करने का ऐलान किया लेकिन फैसला नहीं आया। 2023 में SC ने इनकार किया, 2024 में राजोआणा ने फिर याचिका दाखिल की। अब केंद्र ने विरोध किया है और अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- केंद्र ने राजोआणा की मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने का सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया
- 1995 के बेअंत सिंह हत्याकांड में 17 लोग मारे गए थे, राजोआणा को 2007 में फांसी की सजा मिली
- 2019 में केंद्र ने सजा कम करने का ऐलान किया था, लेकिन फैसला आज तक नहीं आया
- अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को, राजोआणा ने धारा 21 के उल्लंघन का हवाला दिया












