Rahul Gandhi Bhopal Speech: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को जिन मुद्दों पर बोलने से रोका गया, वही सारे मुद्दे उन्होंने सोमवार को भोपाल की किसान महापंचायत में जनता के बीच रख दिए। एप्सटीन फाइल्स में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम, पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवाने की किताब में चीन सीमा विवाद के दौरान प्रधानमंत्री के “गायब” होने का खुलासा, और अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील पर बिना कैबिनेट की मंजूरी के एकतरफा फैसले का आरोप — राहुल गांधी ने एक-एक मसले को विस्तार से उठाते हुए सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा।
लोकसभा में रोके गए, तो भोपाल की जनता के बीच पूरा किया भाषण
राहुल गांधी ने भोपाल में किसान महापंचायत की शुरुआत ही इस बात से की कि हिंदुस्तान के इतिहास में पहली बार लोकसभा में लीडर ऑफ अपोजिशन को बोलने नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने लोकसभा में भाषण शुरू किया तो बार-बार रोका गया। पहले उन्होंने एक मैगजीन का आर्टिकल कोट करना चाहा — कहा गया कि मैगजीन कोट नहीं कर सकते। अगले दिन किताब ले आए — कहा गया किताब कोट नहीं कर सकते। फिर कहा कि बोलकर बता देते हैं — तो बोलने भी नहीं दिया गया।
राहुल गांधी ने कहा कि चार-पांच घंटे तक यह सिलसिला चला। नियमों का हवाला देकर लोकसभा स्पीकर ने व्यवस्था दे दी कि जनरल नरवाने की किताब की समीक्षा का अंश सदन में नहीं पढ़ा जा सकता। लेकिन जो बात लोकसभा के रिकॉर्ड पर नहीं आ सकी, वह अब भोपाल की किसान महापंचायत के जरिए जनता के बीच रिकॉर्ड का दर्जा हासिल करने लगी है।
जनरल नरवाने की किताब — “जब चीन के टैंक आ रहे थे, प्रधानमंत्री गायब हो गए”
राहुल गांधी ने जनरल नरवाने की किताब का विस्तार से हवाला देते हुए बताया कि जब चीन के टैंक भारत की सीमा के अंदर आ रहे थे, तब सेनाध्यक्ष नरवाने ने सबसे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को फोन किया और पूछा कि मेरा ऑर्डर क्या है — कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को फोन किया — कोई जवाब नहीं। फिर विदेश मंत्री एस. जयशंकर को फोन किया — वहां से भी कोई जवाब नहीं आया।
राहुल गांधी ने बताया कि दो घंटे बाद नरवाने ने फिर से रक्षा मंत्री को कॉल किया और कहा कि आप प्रधानमंत्री से पूछिए, मेरा ऑर्डर क्या है। राहुल ने समझाया कि चीनी सेना पर फायर करने का निर्णय प्रधानमंत्री को लेना होता है — यह सैन्य नहीं, राजनीतिक फैसला होता है। लेकिन प्रधानमंत्री ने आर्मी चीफ से सीधे बात नहीं की। राजनाथ सिंह ने जब प्रधानमंत्री को फोन किया तो उन्होंने रक्षा मंत्री से कहा कि “आर्मी चीफ को बताओ, जो वह उचित समझे वह करे।”
राहुल गांधी ने किसानों से कहा कि सेनाध्यक्ष ने अपनी किताब में लिखा है कि “उस दिन मुझे हिंदुस्तान की सरकार ने, प्रधानमंत्री ने अकेला छोड़ दिया।” राहुल ने कहा कि जब चीनी टैंक रोकने का ऑर्डर देने का समय आया, हमारे प्रधानमंत्री गायब हो गए।
“जैसे ही मैंने बोला, अमित शाह खड़े हो गए” — संसद में क्या हुआ था?
राहुल गांधी ने भोपाल में लोकसभा के उस दृश्य को भी बयान किया जो सदन में घटा था। उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्होंने ये बातें बोलना शुरू किया, नरेंद्र मोदी ने अमित शाह की ओर देखा और अमित शाह तुरंत खड़े हो गए। उनके साथ बीजेपी के अन्य नेता भी खड़े हो गए और राहुल को बोलने नहीं दिया गया।
राहुल ने कहा कि मजे की बात यह नहीं है कि उन्हें रोका गया — मजे की बात यह है कि इसी भाषण के अंदर कुछ और भी छिपा हुआ था जो वे सदन में रखना चाहते थे।
अमेरिका-भारत ट्रेड डील — “बिना कैबिनेट से पूछे, मोदी ने ट्रंप को फोन किया”
इसके बाद राहुल गांधी ने अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि चार महीने तक यह डील रुकी हुई थी क्योंकि अमेरिका अपनी बड़ी कंपनियों के लिए भारत में सोया, कपास और मक्का के बाजार खुलवाना चाहता था। भारत के किसान नहीं चाहते थे, कोई राजनेता नहीं चाहता था और सरकार भी नहीं चाहती थी — इसलिए चार महीने तक चर्चा बंद रही।
राहुल गांधी ने कहा कि उनका लोकसभा भाषण खत्म होते ही प्रधानमंत्री सदन से चले गए और उसी शाम — बिना राजनाथ सिंह से पूछे, बिना शिवराज सिंह चौहान से पूछे, बिना नितिन गडकरी से पूछे, बिना कैबिनेट की मंजूरी लिए — सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन कर दिया और कहा कि वे यूएस-इंडिया ट्रेड डील साइन करने को तैयार हैं।
राहुल ने कहा कि ट्रंप ने खुद ट्वीट किया कि हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री ने मुझे फोन किया और डील साइन करने की बात कही। राहुल ने सवाल उठाया कि चार महीने से कुछ नहीं हिला और फिर अचानक प्रधानमंत्री ने फोन करके हिंदुस्तान के किसानों को बेच दिया।
“लिया क्या? एक चीज बता दो जो भारत ने हासिल की” — राहुल की चुनौती
राहुल गांधी ने डील की शर्तों पर एक-एक कर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस डील में नरेंद्र मोदी ने एग्रीकल्चर दे दिया, भारत का डेटा अमेरिका के हवाले कर दिया, टेक्सटाइल इंडस्ट्री को खत्म करने का रास्ता खोल दिया, और इंपोर्ट्स पर भी समझौता कर लिया — लेकिन बदले में भारत को कुछ नहीं मिला।
राहुल ने कहा कि अमेरिका बांग्लादेश को टेक्सटाइल में 0% टैरिफ दे रहा है, भारत का मंत्री कहता है कि अगर हम अमेरिका से कपास खरीदें तो हम पर भी टैक्स जीरो। जबकि कपास भारत में उगाई जाती है — तो भारतीय कपास किसानों और पूरी टेक्सटाइल इंडस्ट्री का क्या होगा? उन्होंने कहा कि ट्रंप ने कहा है कि हर साल भारत को लाखों करोड़ का माल अमेरिका से खरीदना पड़ेगा — पांच साल तक। राहुल ने पूछा कि भारत की इंडस्ट्री और फैक्ट्रियों का क्या होगा?
राहुल ने कहा कि पहले से ज्यादा टैक्स भारत देगा, कोई इंपोर्ट की गारंटी नहीं मिली, सारा कुछ अमेरिका को दे दिया गया। उन्होंने खुली चुनौती दी — “मुझे एक चीज बता दो जो हिंदुस्तान ने इस डील में हासिल की है।”
“दबाव में है प्रधानमंत्री, अपनी छवि बचाने के लिए देश बेचा” — सबसे बड़ा आरोप
राहुल गांधी ने अपना सबसे बड़ा और सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि वे लिखकर दे सकते हैं कि अगर प्रधानमंत्री मोदी पर दबाव नहीं होता, अगर धमकी नहीं होती, तो वे यह डील कभी नहीं करते। उन्होंने कहा कि जो कुछ किया गया — हिंदुस्तान को जो बेचा गया — वह अपनी छवि बचाने के लिए, अपने राजनीतिक भविष्य को बचाने के लिए और धमकी से बचने के लिए किया गया है।
यह आरोप इसलिए गंभीर है क्योंकि राहुल गांधी ने इसे एप्सटीन फाइल्स के संदर्भ से जोड़ दिया। उनका कहना था कि अमेरिका में 30 लाख एप्सटीन फाइलें बंद पड़ी हुई हैं — जिनमें ईमेल, मैसेज और वीडियो सब कुछ है। अभी जो रिलीज हुआ है वह “धमकाने के लिए” किया गया है — यह संदेश देने के लिए कि अगर भारत ने अमेरिका की बात नहीं मानी तो उन फाइलों में से और माल निकलेगा।
एप्सटीन फाइल्स — “पुरी 2014 में 9 बार मिले, फिर भी इस्तीफा नहीं”
राहुल गांधी ने एप्सटीन फाइल्स में हरदीप सिंह पुरी और अनिल अंबानी के नाम आने का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि हरदीप सिंह पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि एप्सटीन से सिर्फ तीन-चार बार मुलाकात हुई। लेकिन कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि अकेले 2014 में हरदीप सिंह पुरी एप्सटीन से नौ बार मिले।
राहुल ने तुलना करते हुए कहा कि ब्रिटेन में एप्सटीन से संबंध को लेकर पूर्व राजकुमार को गिरफ्तार किया गया है — छह साल पहले उनका मामला सामने आया था, इस बार अरेस्ट कर लिए गए। ब्रिटेन में लेबर पार्टी के नेता और अमेरिका में ब्रिटेन के पूर्व राजदूत मेंडलसन को भी गिरफ्तार किया गया है। एप्सटीन के कारण ही बिल गेट्स का एआई समिट में भाषण तक नहीं हुआ। लेकिन भारत में हरदीप सिंह पुरी का इस्तीफा तक नहीं हुआ और प्रधानमंत्री मोदी ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
राहुल ने कहा कि अनिल अंबानी एप्सटीन फाइल में हैं, हरदीप पुरी एप्सटीन फाइल में हैं, और इन फाइलों में और भी नाम छिपे हुए हैं जो अभी सामने नहीं आए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से सीधा सवाल पूछा — “नरेंद्र मोदी जी, आप देश को बताइए कि अनिल अंबानी के साथ आपका क्या रिश्ता है?”
“लोकसभा में बहस होती तो देश को पता चलता — सरकार का पक्ष क्या है”
ट्रेड डील पर लोकसभा में अगर खुली बहस होती तो यह ज्यादा बेहतर होता — देश को पता चलता कि सरकार का पक्ष क्या है और विपक्ष क्या कह रहा है। लेकिन इसकी जगह युवा कांग्रेस के प्रदर्शन के नाम पर राजनीतिक टकराव पैदा किए गए ताकि असली सवाल पीछे चले जाएं।
अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की कम से कम एक प्रेस कॉन्फ्रेंस तो होनी चाहिए थी — लेकिन वह भी नहीं हुई। हरदीप सिंह पुरी एआई समिट पर लेख लिख रहे हैं, लेकिन एप्सटीन फाइल्स में अपने नाम पर कुछ नहीं लिख रहे। लोकसभा में जब राहुल उनका नाम लेना चाहते थे तो रोके गए — उस दिन पुरी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आ गए। लेकिन भोपाल में राहुल ने जो कहा, उस पर क्या अब वे जवाब देने आएंगे?
किसानों पर सीधा असर — सोया, कपास और मक्का का बाजार दांव पर
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा असर भारत के किसानों पर पड़ने वाला है। राहुल गांधी ने भोपाल की किसान महापंचायत में यही बात रेखांकित की कि अमेरिका अपनी बड़ी कंपनियों के लिए भारत में सोया, कपास और मक्का का बाजार खुलवाना चाहता है। अगर अमेरिकी कपास भारत में बिना टैक्स के आती है तो भारतीय कपास किसानों का क्या होगा? अगर हर साल लाखों करोड़ का माल अमेरिका से खरीदना पड़ा तो भारतीय इंडस्ट्री और फैक्ट्रियों में काम करने वाले लाखों मजदूरों का क्या होगा? ये सवाल अभी जवाब मांग रहे हैं और सरकार की चुप्पी इन सवालों को और बड़ा बना रही है।
मुख्य बातें (Key Points)
- राहुल गांधी ने भोपाल की किसान महापंचायत में वे सभी मुद्दे उठाए जो लोकसभा में उठाने से रोके गए — जनरल नरवाने की किताब, एप्सटीन फाइल्स और अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर विस्तार से बोले।
- जनरल नरवाने की किताब का हवाला देते हुए कहा कि चीनी टैंक सीमा के अंदर आ रहे थे — सेनाध्यक्ष घंटों फोन करते रहे लेकिन प्रधानमंत्री ने सीधे बात नहीं की और “जो उचित समझे वह करे” कहकर छोड़ दिया।
- अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर आरोप लगाया कि बिना कैबिनेट की मंजूरी के प्रधानमंत्री ने ट्रंप को फोन करके डील साइन करने की बात कही — चार महीने से रुकी डील अचानक क्यों मान ली गई, इसका जवाब मांगा।
- एप्सटीन फाइल्स में हरदीप सिंह पुरी और अनिल अंबानी का नाम आने पर सवाल उठाए — ब्रिटेन में गिरफ्तारियां हो रही हैं लेकिन भारत में इस्तीफा तक नहीं, यह विरोधाभास रेखांकित किया।








