Putin Iran Call ने ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध के बीच कूटनीतिक हलचल को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बातचीत की है। खास बात यह है कि इससे ठीक 24 घंटे पहले पुतिन ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी फोन पर बातचीत की थी। यानी 24 घंटे के अंदर पुतिन ने युद्ध के दोनों पक्षों से बात की है, जो इस बात का साफ संकेत है कि रूस इस संघर्ष में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।
क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति कार्यालय) ने जानकारी दी है कि पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति से बातचीत के दौरान अपने रुख को दोहराया और स्पष्ट कहा कि इस संघर्ष का समाधान राजनीतिक और कूटनीतिक तरीकों से ही निकाला जाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में बमबारी जारी है और वैश्विक ऊर्जा बाजार बुरी तरह प्रभावित हो चुका है।
एक हफ्ते में दूसरी बार हुई पुतिन-पेजेश्कियान की बातचीत
Putin Iran Call की सबसे अहम बात यह है कि पिछले एक हफ्ते में पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान के बीच दो बार फोन पर बातचीत हो चुकी है। पहली बातचीत 6 मार्च को हुई थी, जो ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद हुई थी। उस बातचीत में पुतिन ने खामेनेई की मौत पर गहरा दुख जताया था।
अब दूसरी बार फिर से दोनों नेताओं ने फोन पर बात की है। इतने कम समय में बार-बार हो रही यह बातचीत बताती है कि रूस ईरान की स्थिति को लेकर कितना गंभीर है। क्रेमलिन के प्रेस ऑफिस ने बताया कि इस बातचीत में ईरान के खिलाफ इजराइल और अमेरिका की आक्रामकता के संदर्भ में मध्य पूर्व की स्थिति पर विस्तृत चर्चा फिर से शुरू हुई है।
पुतिन ने किया राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान का आह्वान
Putin Iran Call में पुतिन ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल के युद्ध के लिए जल्द से जल्द राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान का आह्वान किया है। पुतिन की यह मांग बताती है कि रूस इस युद्ध को सैन्य तरीके से नहीं, बल्कि बातचीत की मेज पर खत्म करना चाहता है।
हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि फिलहाल दोनों पक्ष बातचीत के मूड में नहीं दिख रहे। ईरान के विदेश मंत्री पहले ही कह चुके हैं कि अमेरिका के साथ बातचीत का रास्ता बंद है, जबकि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि युद्ध का मकसद ईरान की सरकार को हटाना है। ऐसे में पुतिन की कूटनीतिक कोशिशों का कितना असर होगा, यह आने वाले दिनों में पता चलेगा।
ट्रंप से बातचीत में ईरान और यूक्रेन दोनों पर हुई चर्चा
Putin Iran Call से पहले सोमवार रात को पुतिन ने ट्रंप से फोन पर बातचीत की थी। ट्रंप ने खुद इस बातचीत की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों नेताओं ने ईरान युद्ध और यूक्रेन के हालात पर विस्तृत चर्चा की। यह बातचीत इसलिए भी अहम है क्योंकि अमेरिका और रूस इस समय कई मोर्चों पर आमने-सामने हैं, यूक्रेन मुद्दे पर तो पहले से ही और अब ईरान मुद्दे पर भी।
ट्रंप-पुतिन बातचीत के बाद एक दिलचस्प संकेत सामने आया। ट्रंप ने इशारा दिया कि आने वाले समय में वह रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों में छूट दे सकते हैं। आपको बता दें कि इससे पहले ट्रंप ने रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाए थे और जो भी देश रूस से तेल खरीद रहे थे, उन पर एक्स्ट्रा टैरिफ भी लगाया था। अब युद्ध के कारण वैश्विक तेल संकट गहराने पर ट्रंप का रुख नरम होता दिख रहा है।
पुतिन का यूरोप को बड़ा ऑफर: फिर से तेल बेचने को तैयार
Putin Iran Call और ट्रंप से बातचीत के बीच पुतिन ने एक बड़ा ऑफर भी दिया है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार को सीधे प्रभावित कर सकता है। पुतिन ने सोमवार को कहा था कि ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि अगर यूरोपीय ग्राहक दीर्घकालिक सहयोग की ओर लौटना चाहते हैं, तो रूस उनके साथ फिर से काम करने के लिए तैयार है।
सीधे शब्दों में कहें तो पुतिन ने यूरोप को फिर से कच्चे तेल का निर्यात करने का ऑफर दिया है। यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप ने रूसी तेल और गैस से काफी हद तक दूरी बना ली थी। लेकिन अब जब ईरान युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है, तो पुतिन ने यह मौका भांपकर यूरोप को अपनी ओर खींचने की चाल चली है।
पुतिन ने चेतावनी भी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले परिवहन पर निर्भर तेल उत्पादन जल्दी ठप हो सकता है। इसके जरिए पुतिन यह संकेत दे रहे हैं कि अगर यूरोप को महंगाई पर कंट्रोल पाना है, तो रूस से सहयोग करना ही एकमात्र रास्ता है।
पुतिन ने कहा: विश्वसनीय साझेदारों को ऊर्जा आपूर्ति जारी रखेंगे
Putin Iran Call के संदर्भ में पुतिन ने अपने बयान में यह भी कहा कि “हम उन देशों को ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति जारी रखेंगे जो हमारे विश्वसनीय साझेदार हैं।” यह बयान सीधे भारत और चीन जैसे देशों के लिए सकारात्मक संकेत है, जो यूक्रेन युद्ध के बाद भी रूस से बड़ी मात्रा में तेल आयात करते रहे हैं।
पुतिन ने रूसी कंपनियों से भी कहा कि उन्हें मौजूदा स्थिति का लाभ उठाना चाहिए। इसका मतलब साफ है कि रूस ईरान युद्ध से पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट को अपने लिए एक बड़े आर्थिक अवसर के रूप में देख रहा है। जब मिडिल ईस्ट से तेल सप्लाई बाधित है, तो रूस दुनिया का प्रमुख वैकल्पिक तेल सप्लायर बनकर उभर सकता है।
रूस ने अमेरिका-इजराइल की बमबारी को बताया अकारण आक्रामकता
Putin Iran Call के बीच रूस ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल के बमबारी अभियान की कड़ी निंदा की है। रूस ने इसे “सोची-समझी और अकारण की गई आक्रामकता” बताया है। पुतिन ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या को “नैतिकता और अंतरराष्ट्रीय कानून का निंदनीय उल्लंघन” करार दिया था।
यह बयान बेहद कड़ा है और इससे साफ है कि रूस इस युद्ध में अप्रत्यक्ष तौर पर ईरान के साथ खड़ा है। इस पूरे युद्ध क्रम में रूस और चीन दोनों ईरान के पक्ष में दिखाई दिए हैं। हालांकि, दोनों देशों ने सीधे सैन्य हस्तक्षेप से परहेज किया है, लेकिन कूटनीतिक और राजनीतिक स्तर पर ईरान का समर्थन जारी है।
पुतिन की कूटनीति का असली मकसद क्या है
Putin Iran Call और 24 घंटे में ट्रंप-पेजेश्कियान दोनों से बातचीत को अगर गहराई से देखा जाए, तो पुतिन की रणनीति बहुत साफ नजर आती है। एक तरफ वह ईरान के साथ अपनी दोस्ती और गठबंधन को मजबूत बनाए रखना चाहते हैं। दूसरी तरफ, वह ट्रंप से बातचीत करके यूक्रेन मुद्दे पर कुछ राहत और रूसी तेल प्रतिबंधों में ढील हासिल करना चाहते हैं। तीसरी तरफ, वह यूरोप को फिर से तेल बेचने का ऑफर देकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करना चाहते हैं।
पुतिन ने ईरान युद्ध को एक ऐसे अवसर के रूप में भांपा है जहां वह एक साथ कई लक्ष्य साध सकते हैं। शांति का आह्वान करते हुए वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर जिम्मेदार नेता की छवि बना रहे हैं, जबकि पर्दे के पीछे वह वैश्विक ऊर्जा बाजार में रूस की हिस्सेदारी बढ़ाने और अमेरिकी प्रतिबंधों से राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं। दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि पुतिन की यह कूटनीतिक चाल कितनी कामयाब होती है और क्या सच में इस युद्ध का राजनीतिक समाधान निकल पाता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- पुतिन ने 24 घंटे के अंदर ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान दोनों से फोन पर बात की, राजनीतिक-कूटनीतिक समाधान का आह्वान किया।
- एक हफ्ते में पुतिन-पेजेश्कियान के बीच दूसरी बार बातचीत हुई, पहली बात 6 मार्च को खामेनेई की मौत के बाद हुई थी।
- पुतिन ने यूरोप को फिर से तेल बेचने का ऑफर दिया, कहा कि ईरान युद्ध से वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हुआ है।
- रूस ने अमेरिका-इजराइल की बमबारी की कड़ी निंदा की, खामेनेई की हत्या को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया।








