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The News Air - Breaking News - Delhi Excise Policy Case: जज के खिलाफ केजरीवाल-सिसोदिया की बड़ी गुहार

Delhi Excise Policy Case: जज के खिलाफ केजरीवाल-सिसोदिया की बड़ी गुहार

आबकारी नीति केस में जज पर पूर्वाग्रह का आरोप लगाते हुए केजरीवाल और सिसोदिया ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर बेंच ट्रांसफर की मांग की।

The News Air Team by The News Air Team
बुधवार, 11 मार्च 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, नई दिल्ली, सियासत
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Arvind Kejriwal
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Delhi Excise Policy Case को लेकर दिल्ली के कानूनी और राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर जबरदस्त हलचल मच गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तथा पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में दोनों नेताओं ने आबकारी नीति मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत से हटाकर किसी अन्य निष्पक्ष बेंच को ट्रांसफर करने की मांग की है।

ट्रायल कोर्ट से मिली थी बड़ी राहत, सीबीआई ने दी हाई कोर्ट में चुनौती

Delhi Excise Policy Case में यह नया मोड़ तब आया है जब इसी मामले में 27 फरवरी को राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने केजरीवाल, सिसोदिया समेत कुल 23 आरोपियों को सीबीआई के मामले से बरी कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने अपने 601 पन्नों के विस्तृत आदेश में सीबीआई की पूरी जांच को ‘अनुचित’ करार दिया और साफ शब्दों में कहा कि एजेंसी का केस न्यायिक कसौटी पर खरा नहीं उतर सका।

हालांकि, सीबीआई ने इस फैसले को स्वीकार नहीं किया और दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर कर दी। इस अपील पर सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच में चल रही है, और यही वह बिंदु है जहां से पूरा विवाद खड़ा हो गया है।

जस्टिस शर्मा पर पूर्वाग्रह का आरोप: सबूत होने का दावा

केजरीवाल और सिसोदिया का आरोप है कि Delhi Excise Policy Case में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ उनके पास पूर्वाग्रह (Bias) के ठोस सबूत मौजूद हैं। उनका कहना है कि इसी मामले में पहले भी जस्टिस शर्मा ने जो आदेश दिए थे, उनमें से कई को सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया है।

ऐसे में दोनों नेताओं को यह आशंका है कि इस केस की सुनवाई पूर्वाग्रह से प्रभावित हो सकती है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में आम जनता का विश्वास कमजोर होगा। इसी वजह से उन्होंने चीफ जस्टिस से गुजारिश की है कि यह केस किसी दूसरी निष्पक्ष बेंच को सौंपा जाए।

9 मार्च की सुनवाई ने बढ़ाई चिंता

दरअसल, 9 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा ने सीबीआई की उस दलील पर सहमति जताई कि ट्रायल कोर्ट का आदेश ‘प्रथमदृष्टया त्रुटिपूर्ण’ (Prima Facie Erroneous) है। इसके साथ ही उन्होंने ट्रायल कोर्ट द्वारा सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ की गई कड़ी टिप्पणियों और विभागीय कार्रवाई के आदेश पर 16 मार्च तक रोक भी लगा दी।

इसी सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तो यहां तक कह दिया कि ट्रायल कोर्ट का फैसला ‘आपराधिक कानून को उलटने’ जैसा है। यही वह पूरा घटनाक्रम है जिसने केजरीवाल और सिसोदिया की आशंकाओं को और गहरा कर दिया और उन्होंने चीफ जस्टिस को पत्र लिखने का फैसला लिया।

सिसोदिया बोले: अदालत का सम्मान करते हैं, कानूनी प्रक्रिया का करेंगे पालन

इस बीच, जम्मू में पत्रकारों से बातचीत में मनीष सिसोदिया ने न्यायपालिका में अपना पूरा भरोसा जताया। उन्होंने कहा: “अदालत की जो भी प्रक्रियाएं हैं, हम अदालत का सम्मान करते हैं और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करेंगे।”

सिसोदिया का यह बयान ऐसे नाजुक वक्त पर आया है जब दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीआई की याचिका पर केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य 21 आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 16 मार्च को तय की गई है।

बेंच ट्रांसफर की मांग के राजनीतिक और कानूनी मायने

Delhi Excise Policy Case लंबे समय से AAP और BJP के बीच राजनीतिक टकराव का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। AAP लगातार इसे ‘राजनीतिक बदले की कार्रवाई’ बताती रही है, जबकि BJP इसे ‘भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा सबूत’ करार देती है।

अब बेंच ट्रांसफर की इस मांग ने मामले में एक बिल्कुल नया अध्याय जोड़ दिया है। अगर चीफ जस्टिस इस पत्र पर गंभीरता से विचार करते हैं और केस दूसरी बेंच को ट्रांसफर होता है, तो इसका सीधा असर सुनवाई की दिशा और रफ्तार दोनों पर पड़ सकता है। वहीं अगर यह मांग खारिज हो जाती है, तो केजरीवाल और सिसोदिया के पास सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का रास्ता खुला रहेगा।

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आम नागरिकों के लिए यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि यह न्यायिक निष्पक्षता और जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता दोनों पर एक साथ सवाल खड़ा करता है। ट्रायल कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी किया और अब हाई कोर्ट उसे चुनौती दे रहा है: यह पूरा टकराव भारतीय न्यायिक व्यवस्था के लिए एक बड़ी मिसाल बन सकता है।

क्या है पूरा मामला?

दिल्ली सरकार की आबकारी नीति 2021-22 में कथित अनियमितताओं को लेकर सीबीआई और ईडी ने अलग-अलग केस दर्ज किए थे। जांच एजेंसियों का आरोप था कि इस शराब नीति को बनाने में रिश्वत ली गई और इससे प्राप्त अवैध धन का इस्तेमाल गोवा विधानसभा चुनाव में किया गया। इस मामले में केजरीवाल और सिसोदिया दोनों को गिरफ्तार किया गया था और दोनों ने लंबा वक्त जेल में बिताया। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने सबूतों की कमी का हवाला देते हुए सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया। सीबीआई ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है और अब केजरीवाल-सिसोदिया की बेंच ट्रांसफर की मांग ने इस Delhi Excise Policy Case में बिल्कुल नई राजनीतिक और कानूनी बहस छेड़ दी है।


मुख्य बातें (Key Points)
  • अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर Delhi Excise Policy Case दूसरी बेंच को ट्रांसफर करने की मांग की है।
  • उनका आरोप है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ पूर्वाग्रह के सबूत हैं और सुप्रीम कोर्ट ने उनके पिछले आदेश पलटे हैं।
  • सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के 27 फरवरी के डिस्चार्ज आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी है, अगली सुनवाई 16 मार्च को तय है।
  • मनीष सिसोदिया ने कहा कि वह न्यायपालिका का सम्मान करते हैं और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करेंगे।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. Delhi Excise Policy Case में केजरीवाल-सिसोदिया ने जज ट्रांसफर की मांग क्यों की?

केजरीवाल और सिसोदिया का आरोप है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ पूर्वाग्रह के ठोस सबूत हैं। उनका कहना है कि इसी मामले में जस्टिस शर्मा के पहले के कई आदेशों को सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया, जिससे निष्पक्ष सुनवाई पर गंभीर सवाल उठते हैं।

2. Delhi Excise Policy Case में अगली सुनवाई कब होगी?

दिल्ली हाई कोर्ट में सीबीआई की अपील पर अगली सुनवाई 16 मार्च को तय की गई है। इस सुनवाई में सभी 23 आरोपियों से जवाब मांगा गया है।

3. Delhi Excise Policy Case क्या है?

दिल्ली सरकार की शराब नीति 2021-22 में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर सीबीआई और ईडी ने मामला दर्ज किया था। आरोप था कि नीति बनाने में रिश्वत ली गई और अवैध धन का इस्तेमाल गोवा चुनाव में किया गया। ट्रायल कोर्ट ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।

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