Punjab Permanent DGP Appointment — पंजाब की AAP सरकार को विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा झटका लगा है। UPSC ने पंजाब से स्थायी DGP नियुक्ति के लिए पैनल मांग लिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार यह पत्र 18 फरवरी को भेजा गया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के 5 फरवरी के आदेश का हवाला दिया गया है। इसके बाद पंजाब गृह विभाग ने DGP ऑफिस से योग्य अफसरों के नाम तलब कर लिए हैं। अभी गौरव यादव पंजाब के कार्यकारी DGP के तौर पर काम कर रहे हैं।
साढ़े 3 साल से कार्यकारी DGP — अब UPSC ने कसी नकेल
1992 बैच के IPS अधिकारी गौरव यादव 4 जुलाई 2022 से पंजाब के कार्यकारी DGP पद पर हैं। यह सिलसिला करीब साढ़े 3 साल से चल रहा है। Punjab DGP Appointment को लेकर पंजाब सरकार ने UPSC को नियमित DGP नियुक्ति के लिए कभी पैनल नहीं भेजा। यहाँ तक कि 2023 में पंजाब सरकार ने Police Act में संशोधन करके UPSC को बायपास करने की कोशिश भी की थी, लेकिन बात नहीं बनी।
अब सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद UPSC ने खुद पहल करते हुए पंजाब सरकार से पैनल की माँग कर ली है। इससे तय है कि अगले विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब पुलिस को स्थायी DGP मिल जाएगा।
कुर्सी की दौड़ में कौन-कौन से बड़े चेहरे?
Punjab DGP Race 2026 में इस वक्त पंजाब में 17 अधिकारी DGP रैंक पर कार्यरत हैं। इनमें संजीव कालड़ा सबसे वरिष्ठ हैं, लेकिन उनकी सेवानिवृत्ति 28 फरवरी को है — वे 6 महीने के न्यूनतम कार्यकाल की शर्त पूरी नहीं कर पाएंगे।
दौड़ में जो चार प्रमुख नाम सामने आ रहे हैं वे हैं — शरद सत्य चौहान, हरप्रीत सिद्धू, कुलदीप सिंह और कार्यकारी DGP गौरव यादव। पंजाब कैडर के RAW चीफ पराग जैन का नाम भी चर्चा में है, लेकिन उनके वापस लौटने की संभावना कम मानी जा रही है।
क्या है UPSC की नियुक्ति प्रक्रिया?
UPSC DGP Selection Process के तहत राज्य सरकार वरिष्ठता के आधार पर UPSC को नाम भेजती है। UPSC उनमें से 3 सर्वश्रेष्ठ नाम चुनकर सरकार को लौटाती है। इनमें से किसी एक को राज्य सरकार को स्थायी DGP नियुक्त करना होता है। इस पूरी प्रक्रिया में पंजाब सरकार के साथ केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल होंगे।
सुप्रीम कोर्ट का वह आदेश जिसने सब बदल दिया
CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की पीठ ने 5 फरवरी को राज्यों में कार्यकारी DGP नियुक्त करने की प्रथा पर कड़ी आपत्ति जताई थी। कोर्ट ने कहा कि यह तरीका प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। इससे कई योग्य और वरिष्ठ IPS अधिकारी बिना DGP बने ही सेवानिवृत्त हो जाते हैं।
कोर्ट ने UPSC को अधिकृत किया कि वह खुद राज्यों को पत्र लिखे और यदि राज्य पैनल न भेजें तो UPSC सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटा सकती है। साथ ही कोर्ट ने चेताया कि ऐसे मामलों में संबंधित राज्यों की जवाबदेही तय की जाएगी।
तेलंगाना से उठी चिंगारी, पंजाब तक पहुंची चोट
यह पूरा मामला तेलंगाना के खिलाफ दायर एक अपील से शुरू हुआ। तेलंगाना के अंतिम नियमित DGP अनुराग शर्मा 2017 में सेवानिवृत्त हुए थे और उसके बाद राज्य सरकार ने अप्रैल 2025 तक UPSC को कोई सिफारिश नहीं भेजी — यानी 8 साल की देरी।
UPSC ने साफ कहा कि तेलंगाना अकेला नहीं है, कई राज्य यही देरी की रणनीति अपना रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने UPSC की चिंता से सहमति जताते हुए कहा कि ऐसी देरी से वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के करियर पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
क्या है पूरा संदर्भ
पंजाब में AAP सरकार लंबे समय से कार्यकारी DGP की व्यवस्था चला रही थी, जिससे सरकार को पुलिस प्रमुख पर अधिक प्रभाव बना रहता है। अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और UPSC की सक्रियता के बाद यह खेल खत्म होता दिख रहा है। प्रकाश सिंह केस में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस सुधारों के लिए जो दिशा-निर्देश 2006 में दिए थे, राज्य सरकारें दशकों से उनकी अनदेखी करती आई हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- UPSC ने 18 फरवरी को पंजाब से Permanent DGP पैनल माँगा — Supreme Court के 5 फरवरी के आदेश का हवाला।
- Gaurav Yadav साढ़े 3 साल से कार्यकारी DGP, पंजाब सरकार ने 2023 में Police Act बदलकर UPSC बायपास की थी कोशिश।
- कुर्सी की दौड़ में Sharad Satya Chauhan, Harpreet Sidhu, Kuldeep Singh और Gaurav Yadav के नाम प्रमुख।
- सुप्रीम कोर्ट ने चेताया — राज्यों की जवाबदेही तय होगी, UPSC को सीधे SC में आवेदन का अधिकार।








