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The News Air - Breaking News - Punjab MC Elections में EVM Controversy खत्म, मशीनें रास्ते में, एक दिन में तैयारी संभव

Punjab MC Elections में EVM Controversy खत्म, मशीनें रास्ते में, एक दिन में तैयारी संभव

चुनाव आयोग ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट को बताया कि राजस्थान से EVMs रवाना, 27 मई की नगर निगम चुनावों से सिर्फ 5 दिन पहले बड़ा दावा

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
गुरूवार, 21 मई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, पंजाब
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Punjab MC Elections
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Punjab Municipal Elections 2025: पंजाब में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों की चुनावों से महज पांच दिन पहले एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने गुरुवार को पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट को बताया कि मांगी गई EVM मशीनें राजस्थान से पंजाब के लिए “इन ट्रांजिट” यानी रास्ते में हैं और इन्हें तैयार करने की पूरी प्रक्रिया “महज एक दिन” में पूरी की जा सकती है।

यह बयान उस समय आया है जब पंजाब राज्य चुनाव आयोग (SEC) ने बैलट पेपर से चुनाव कराने का फैसला किया था और दावा किया था कि 27 मई 2025 की चुनावों से पहले EVMs की तैनाती संभव नहीं है। और बस यहीं से शुरू हुआ एक कानूनी घमासान जो अब पंजाब की लोकल बॉडी चुनावों की सबसे बड़ी सुर्खी बन चुका है।

देखा जाए तो यह सिर्फ EVMs और बैलट पेपर का विवाद नहीं है। यह केंद्रीय चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयोग के बीच एक अधिकार क्षेत्र की लड़ाई, टाइमलाइन का विवाद और अंततः लाखों मतदाताओं के मताधिकार का सवाल है।

क्या है पूरा मामला? बैलट पेपर से EVM तक का सफर

समझने वाली बात यह है कि पंजाब में 27 मई 2025 को नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों की चुनाव होने हैं। यह स्थानीय निकाय चुनाव हैं, जिनका आयोजन राज्य चुनाव आयोग (SEC) करता है।

लेकिन EVMs केंद्रीय चुनाव आयोग के पास होती हैं। राज्य चुनाव आयोगों को इन्हें ECI से मांगना पड़ता है।

टाइमलाइन देखें:

पंजाब SEC ने शुरू में EVM मांगी। लेकिन जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आए, SEC ने कहा कि अब समय नहीं बचा और उसने बैलट पेपर से चुनाव कराने का फैसला ले लिया।

यह निर्णय विवादित हो गया। कुछ याचिकाकर्ताओं ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की और SEC के बैलट पेपर वाले फैसले को चुनौती दी।

हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई शुरू की और चीफ जस्टिस शील नागू की अगुवाई वाली बेंच ने दोनों पक्षों से स्पष्टीकरण मांगा।

बुधवार की सुनवाई: SEC का दावा – 15-18 दिन लगेंगे

बुधवार को हुई सुनवाई में पंजाब राज्य चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखा:

“अगर EVMs उपलब्ध भी करवा दी जाएं, तो उन्हें तैयार करने (कमिशनिंग), फर्स्ट-लेवल चेकिंग और तैनाती की पूरी प्रक्रिया में 15 से 18 दिन लगेंगे।”

SEC ने कहा कि चुनाव से एक हफ्ते से भी कम समय बचा होने के कारण EVM-आधारित मतदान “अव्यवहारिक” है।

इसलिए SEC ने बैलट पेपर का फैसला लिया।

दिलचस्प बात यह है कि हाई कोर्ट ने इस दावे पर सवाल उठाए और भारतीय चुनाव आयोग से भी जवाब मांगा।

गुरुवार का बड़ा खुलासा: ECI का पलटवार – “एक दिन में हो जाएगा काम”

गुरुवार को चीफ जस्टिस शील नागू की अगुवाई वाली बेंच के सामने पेश होते हुए भारतीय चुनाय आयोग के वकील प्रतीक गुप्ता ने धमाकेदार दावा किया:

“मशीनें रास्ते में हैं। जैसे हम बात कर रहे हैं, वे रास्ते में हैं।”

ECI ने कोर्ट को बताया:

  • EVMs राजस्थान से पंजाब के लिए पहले ही रवाना कर दी गई हैं
  • पंजाब के अधिकारियों ने खुद मशीनें उठाने में झिझक दिखाई, इसलिए ECI ने उन्हें डिस्पैच कर दिया
  • मशीनें मोहाली, पंजाब तक पहुंचाई जा रही हैं

और सबसे बड़ा दावा:

“कमिशनिंग की पूरी प्रक्रिया महज एक दिन की है। सिर्फ एक दिन में सब तैयार हो जाएगा।”

यह सुनकर कोर्ट में हलचल मच गई। SEC ने 15-18 दिन कहा था, ECI कह रहा है सिर्फ 1 दिन!

ECI का पत्र: 20 मई को क्या लिखा था?

ECI के वकील ने 20 मई 2025 को SEC को भेजे गए एक पत्र का हवाला दिया।

इस पत्र में ECI ने कहा था:

  • SEC की चिंताओं का समाधान कर दिया गया है
  • EVMs उपलब्ध हैं और भेजी जा रही हैं
  • First-Level Checking (FLC) और कमिशनिंग की सुविधा भी ECI देगा
  • पंजाब को बस डिलीवरी की जगह तय करनी है और मशीनें प्राप्त करने के लिए अधिकृत अधिकारी की पहचान करनी है

अगर गौर करें तो ECI का यह रुख SEC के दावों को पूरी तरह खारिज करता है।

मुद्दाSEC का दावाECI का जवाब
EVMs की उपलब्धतासमय पर नहीं मिलेंगीराजस्थान से रवाना, रास्ते में हैं
कमिशनिंग का समय15-18 दिनसिर्फ 1 दिन
FLC और तैनाती27 मई तक असंभवECI खुद सुविधा देगा
जिम्मेदारीECI ने समय पर नहीं दींSEC ने खुद उठाने में देरी की
कोर्ट ने क्या कहा? SEC से हलफनामा मांगा

हाई कोर्ट ने बुधवार को पंजाब राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि वह अपनी स्थिति और ECI के साथ हुए पत्र-व्यवहार को रिकॉर्ड पर लाने के लिए हलफनामा (Affidavit) दायर करे।

कोर्ट चाहता है कि पूरी टाइमलाइन स्पष्ट हो:

  • SEC ने EVMs कब मांगी?
  • ECI ने कब जवाब दिया?
  • किसकी ओर से देरी हुई?
  • क्या 27 मई तक EVMs से चुनाव संभव है?

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अदालत किसी भी पक्ष का पक्षपात नहीं कर रही। वह सिर्फ तथ्य चाहती है।

पंजाब के एडवोकेट जनरल का तर्क: याचिका सुनवाई योग्य नहीं

पंजाब के एडवोकेट जनरल मनिंदरजीत सिंह बेदी ने याचिका की सुनवाई योग्यता (Maintainability) पर ही सवाल उठाया।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए तर्क दिया:

“चुनाव नोटिफिकेशन जारी होने के बाद इस प्रक्रिया में दखल नहीं दिया जा सकता।”

बेदी का कहना है कि SEC ने पहले ही बैलट पेपर से चुनाव का फैसला ले लिया है और अधिसूचना जारी हो चुकी है। अब इसमें बदलाव करना चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप होगा।

लेकिन याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि EVM से मतदान मतदाताओं का मौलिक अधिकार है और बैलट पेपर की जगह EVM का इस्तेमाल ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित है।

सीनियर एडवोकेट चेतन मित्तल और अमित झांझी याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए और उन्होंने ECI के दावों का समर्थन किया।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला? EVM vs बैलट पेपर की बहस

सवाल उठता है कि आखिर इतना विवाद क्यों है? EVM हो या बैलट पेपर, चुनाव तो होगा ही।

लेकिन दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं:

EVM के फायदे:

  • तेज मतगणना
  • कम जगह की जरूरत
  • धांधली की कम संभावना (तकनीकी सुरक्षा)
  • पर्यावरण के अनुकूल (कागज नहीं)

बैलट पेपर के फायदे:

  • पारदर्शिता (भौतिक रूप से वोट दिखाई देता है)
  • तकनीकी खराबी का डर नहीं
  • रीकाउंटिंग आसान
  • लोगों का ज्यादा भरोसा (कुछ मामलों में)

EVM के खिलाफ तर्क:

  • कुछ राजनीतिक दल EVM में हेरफेर का आरोप लगाते हैं
  • तकनीकी खराबी की संभावना

बैलट पेपर के खिलाफ तर्क:

  • मतगणना में समय लगता है
  • बूथ कैप्चरिंग और धांधली की संभावना ज्यादा
  • भारी लॉजिस्टिक्स

चिंता का विषय यह है कि पंजाब में यह मुद्दा राजनीतिक भी हो गया है। कुछ दल EVM चाहते हैं, कुछ बैलट पेपर।

किसकी जिम्मेदारी है यह देरी? ECI vs SEC का टकराव

अगर गौर करें तो यह मामला अधिकार क्षेत्र की लड़ाई भी बन गया है।

ECI का पक्ष:

  • हमने समय पर जवाब दिया
  • SEC ने मशीनें उठाने में देरी की
  • हम खुद मोहाली तक पहुंचा रहे हैं
  • 1 दिन में कमिशनिंग हो जाएगी

SEC का पक्ष:

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  • ECI ने समय पर मशीनें नहीं दीं
  • अब 27 मई तक तैयारी असंभव है
  • बैलट पेपर से चुनाव ही व्यवहारिक विकल्प है
  • चुनाव की अधिसूचना जारी हो चुकी है

हैरान करने वाली बात यह है कि दोनों संवैधानिक संस्थाएं एक-दूसरे पर दोषारोपण कर रही हैं।

27 मई तक क्या होगा? चुनाव टलेंगे या होंगे?

अब सबसे बड़ा सवाल: 27 मई 2025 को चुनाव होंगे या नहीं?

संभावित परिदृश्य:

1. EVM से चुनाव (अगर कोर्ट आदेश दे):

  • मशीनें आ चुकी हैं या आने वाली हैं
  • ECI के अनुसार 1 दिन में कमिशनिंग हो जाएगी
  • 27 मई तक तैयारी संभव है

2. बैलट पेपर से चुनाव (अगर SEC का फैसला बरकरार रहे):

  • SEC की तैयारी पहले से चल रही है
  • 27 मई को चुनाव हो सकते हैं
  • EVM विवाद टल जाएगा

3. चुनाव टल सकते हैं (अगर कोर्ट और समय मांगे):

  • पूरी जांच के बाद फैसला
  • नई तारीख घोषित हो सकती है

राहत की बात यह है कि हाई कोर्ट जल्द फैसला देने की कोशिश कर रहा है ताकि चुनाव प्रक्रिया प्रभावित न हो।

पंजाब की जनता का क्या? मतदाताओं का नजरिया

आम आदमी के लिए यह सब क्या मायने रखता है?

पंजाब के नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में लाखों मतदाता हैं। उन्हें सिर्फ यह चाहिए कि चुनाव समय पर, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हों।

लेकिन ECI और SEC के बीच यह विवाद उनके मताधिकार को प्रभावित कर रहा है।

कुछ मतदाताओं का कहना है:
“हमें क्या फर्क पड़ता है EVM या बैलट पेपर से? बस ईमानदार चुनाव हो।”

दूसरों का मानना है:
“EVM ज्यादा सुरक्षित है। धांधली नहीं हो सकती। बैलट पेपर में बूथ कैप्चरिंग का डर है।”

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया: किसका क्या स्टैंड?

दिलचस्प बात यह है कि अलग-अलग राजनीतिक दल अलग-अलग मत रख रहे हैं:

कुछ दल EVM का समर्थन कर रहे हैं, कुछ बैलट पेपर का।

हालांकि आधिकारिक रूप से सभी दल चुप हैं और हाई कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

अगली सुनवाई कब? कोर्ट का फैसला कब आएगा?

हाई कोर्ट ने SEC से हलफनामा मांगा है। अगली सुनवाई जल्द होगी।

चूंकि चुनाव 27 मई को होने हैं, इसलिए कोर्ट को अगले 2-3 दिनों में फैसला देना होगा।

समझने वाली बात यह है कि यह केवल पंजाब का मामला नहीं है। यह पूरे देश में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए एक मिसाल बन सकता है।

क्या कहते हैं कानूनी विशेषज्ञ?

संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है:

“ECI का दावा कि 1 दिन में कमिशनिंग हो जाएगी, तकनीकी रूप से सही हो सकता है। लेकिन लॉजिस्टिक्स, ट्रेनिंग और डिप्लॉयमेंट के लिए भी समय चाहिए।”

“SEC ने जो 15-18 दिन कहा था, वह सभी प्रक्रियाओं को मिलाकर था। ECI सिर्फ कमिशनिंग की बात कर रहा है।”

“हाई कोर्ट को तथ्यों के आधार पर फैसला लेना होगा, न कि किसी संस्था के दावे के आधार पर।”

मुख्य बातें (Key Points)
  • भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने हाई कोर्ट को बताया कि EVMs राजस्थान से पंजाब के लिए “रास्ते में” हैं
  • 27 मई 2025 की पंजाब नगर निगम चुनावों से सिर्फ 5 दिन पहले यह दावा किया गया
  • ECI का बड़ा दावा: कमिशनिंग प्रक्रिया सिर्फ 1 दिन में पूरी हो सकती है
  • पंजाब SEC ने पहले कहा था कि 15-18 दिन लगेंगे, इसलिए बैलट पेपर से चुनाव कराने का फैसला लिया
  • चीफ जस्टिस शील नागू की बेंच में सुनवाई जारी
  • ECI ने 20 मई को पत्र में SEC की सभी चिंताओं का समाधान बताया था
  • मशीनें मोहाली, पंजाब तक पहुंचाई जा रही हैं
  • पंजाब के एडवोकेट जनरल ने याचिका की सुनवाई योग्यता पर सवाल उठाया
  • हाई कोर्ट ने SEC से हलफनामा दायर करने को कहा
  • यह ECI vs SEC का अधिकार क्षेत्र विवाद भी बन गया है

 

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. Punjab Municipal Elections 2025 कब होंगे और विवाद क्या है?

पंजाब में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के चुनाव 27 मई 2025 को होने हैं। विवाद इस बात पर है कि चुनाव EVM से होंगे या बैलट पेपर से। पंजाब राज्य चुनाव आयोग ने बैलट पेपर का फैसला लिया था लेकिन भारतीय चुनाव आयोग ने हाई कोर्ट में कहा कि EVMs समय पर उपलब्ध हैं और 1 दिन में तैयार हो सकती हैं।

Q2. ECI और SEC में टाइमलाइन पर क्या विवाद है?

पंजाब SEC ने दावा किया कि EVMs की कमिशनिंग और तैनाती में 15-18 दिन लगेंगे, इसलिए 27 मई तक EVM-आधारित चुनाव असंभव है। लेकिन भारतीय चुनाव आयोग ने कहा कि मशीनें राजस्थान से रवाना हो चुकी हैं और कमिशनिंग प्रक्रिया “सिर्फ 1 दिन” की है। ECI ने SEC पर देरी का आरोप लगाया।

Q3. Punjab में EVM vs बैलट पेपर में क्या बेहतर है?

EVM के फायदे: तेज मतगणना, कम धांधली, पर्यावरण-अनुकूल। बैलट पेपर के फायदे: पारदर्शिता, तकनीकी खराबी का डर नहीं। कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों के अपने फायदे हैं लेकिन EVM ज्यादा सुरक्षित और आधुनिक है। हाई कोर्ट जल्द इस विवाद पर फैसला देगा।

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अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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