Punjab Horticulture Investment 1300 Crore: पंजाब के किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। राज्य के बागवानी मंत्री मोहिंदर भगत ने बुधवार को बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि पंजाब सरकार बागवानी क्षेत्र में लगभग 1300 करोड़ रुपये का निवेश करने जा रही है। इस निवेश का मकसद किसानों की आय को दोगुना करना और उन्हें निर्यात के नए अवसर प्रदान करना है। खास बात यह है कि पंजाब अब महाराष्ट्र के सफल बागवानी मॉडल को अपनाएगा, जिससे राज्य के किसान संगठित खेती, प्रोसेसिंग और बेहतर बाजार पहुंच के जरिए अधिक मुनाफा कमा सकेंगे।
यह फैसला बागवानी मंत्री मोहिंदर भगत के हाल ही में महाराष्ट्र के नासिक स्थित सहियाद्री किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड के दौरे के बाद लिया गया है। इस दौरे में एक प्रतिनिधिमंडल ने वहां की आधुनिक खेती, पैकहाउस, प्रोसेसिंग यूनिट और निर्यात प्रक्रिया का बारीकी से अध्ययन किया।
महाराष्ट्र मॉडल से क्या सीखा?
बागवानी मंत्री मोहिंदर भगत ने बताया कि महाराष्ट्र के नासिक में सहियाद्री किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड का दौरा बेहद सफल रहा। यहां प्रतिनिधिमंडल ने देखा कि कैसे किसान उत्पादन, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, प्रोसेसिंग और निर्यात को बेहतर बनाने के लिए किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से सामूहिक रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सहियाद्री 30,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में हजारों किसानों के साथ काम कर रहा है और 42 देशों को फल एवं सब्जियों का निर्यात कर रहा है।
मंत्री ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने आधुनिक पैकहाउस, प्रोसेसिंग यूनिट्स, रिसर्च फार्म और प्रशिक्षण केंद्रों का दौरा किया, जहां उन्होंने किसानों और विशेषज्ञों से सीधे बातचीत की। उन्होंने कहा कि पंजाब के किसान भी महाराष्ट्र की तरह वैज्ञानिक फसल योजना, बेहतर गुणवत्ता नियंत्रण और मजबूत बाजार संपर्कों से लाभ उठा सकते हैं।
एफपीओ को मजबूत करने के लिए समझौता
इस दौरे का सबसे अहम नतीजा यह रहा कि पंजाब सरकार ने प्रशिक्षण और संस्थागत सहायता के जरिए राज्य में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को मजबूत करने के लिए सहियाद्री के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। मोहिंदर भगत ने बताया कि यह समझौता पंजाब में मजबूत किसान समूह बनाने, प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन प्रदान करने में मदद करेगा। इससे किसान सामूहिक रूप से काम करके लाभ उठा सकेंगे और अपने उत्पादों की बेहतर कीमतें प्राप्त कर सकेंगे।
1300 करोड़ के निवेश से क्या होगा?
बागवानी मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित 1300 करोड़ रुपये के निवेश से पंजाब में बागवानी क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। इस निवेश का इस्तेमाल आधुनिक पैकहाउस, कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने में किया जाएगा। इससे न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि राज्य में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार बागवानी क्षेत्र में फसल विविधता को प्रोत्साहित करने, फसलों के मूल्य में वृद्धि करने और किसानों के लिए टिकाऊ आय के अवसर पैदा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में पंजाब पूरे देश में एक अग्रणी बागवानी हब के रूप में उभरेगा।
किसानों को क्या होगा फायदा?
इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा पंजाब के किसानों को होगा। फिलहाल पंजाब में गेहूं-धान का चक्र चल रहा है, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति घट रही है और भूजल स्तर नीचे जा रहा है। बागवानी को बढ़ावा देने से किसान फसल विविधीकरण की ओर बढ़ेंगे। साथ ही, एफपीओ के जरिए सामूहिक खेती करने से उनकी लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा।
सबसे बड़ी बात यह है कि सहियाद्री मॉडल की तरह पंजाब के किसान भी अपने उत्पादों का निर्यात कर सकेंगे। इससे उन्हें स्थानीय बाजार से कहीं ज्यादा कीमत मिलेगी। 42 देशों में निर्यात का रास्ता खुलने से किसानों की कमाई में जबरदस्त इजाफा हो सकता है।
क्या है पूरा मामला?
पंजाब के बागवानी मंत्री मोहिंदर भगत के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र के नासिक स्थित सहियाद्री किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड का दौरा किया। यह कंपनी 30,000 एकड़ में खेती करवा रही है और 42 देशों को निर्यात कर रही है। प्रतिनिधिमंडल ने वहां की आधुनिक तकनीकों और एफपीओ मॉडल का अध्ययन किया। इसके बाद पंजाब सरकार ने राज्य में भी इसी मॉडल को लागू करने का फैसला किया। इसके लिए करीब 1300 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है और सहियाद्री के साथ एक समझौता भी किया गया है, जिसके तहत वे पंजाब के किसानों और एफपीओ को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता देंगे।
मुख्य बातें
पंजाब सरकार बागवानी क्षेत्र में 1300 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
राज्य में महाराष्ट्र के सहियाद्री मॉडल को अपनाया जाएगा, जिससे किसानों को निर्यात का मौका मिलेगा।
एफपीओ को मजबूत करने के लिए सहियाद्री के साथ समझौता किया गया है।
सहियाद्री 30,000 एकड़ में खेती करवा रहा है और 42 देशों को निर्यात कर रहा है।








