Punjab DA Case: पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (DA) के मामले में गुरुवार (5 नवंबर) को सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने DA से जुड़े दोनों अवमानना मामलों की कार्यवाही पर रोक लगा दी है।
ये आपराधिक और दीवानी अवमानना की कार्यवाहियां पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव के खिलाफ शुरू की थीं। फिलहाल दोनों मामलों में सरकार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी।
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जस्टिस नागरत्ना की पीठ ने क्या कहा
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने सुनवाई में बताया कि उसने हाईकोर्ट के 12 अक्टूबर 2026 और 30 अक्टूबर 2026 के आदेश पढ़े हैं। बाद वाले आदेश में मुख्य सचिव को गुरुवार को हाईकोर्ट में खुद पेश होने को कहा गया था।
पीठ ने कहा कि उसे दोनों पक्षों के विवाद की पृष्ठभूमि भी बताई गई है। इसके बाद आपराधिक अवमानना की आगे की कार्यवाही पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई। दीवानी अवमानना में भी सरकार के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने के निर्देश दिए गए।
राहत के साथ शर्त भी: 1 दिसंबर तक लिक्विडेशन प्लान
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि कोर्ट ने सिर्फ राहत नहीं दी, सरकार से हिसाब भी मांगा है। पंजाब सरकार को 1 दिसंबर तक लिक्विडेशन प्लान का ब्योरा देना होगा। साथ ही 31 मार्च 2027 तक कर्मचारियों को होने वाले भुगतान की जानकारी भी देनी होगी।
कोर्ट ने बताया कि फिलहाल DA 53% की दर से दिया जा रहा है। सरकार से यह भी पूछा गया कि वह बकाया रकम में से कितना भुगतान करने को तैयार है। कोर्ट ने कहा कि राहत मिली है, इसलिए अगली सुनवाई पर सरकार सकारात्मक जवाब लेकर आए। अगली सुनवाई दिसंबर में होगी।
एक नजर में: पूरी टाइमलाइन
| तारीख | क्या हुआ |
|---|---|
| 3 अगस्त | हाईकोर्ट ने लंबित DA और महंगाई राहत की किस्तें तुरंत जारी करने को कहा |
| 12 अक्टूबर 2026 | हाईकोर्ट का आदेश (सुप्रीम कोर्ट ने अध्ययन किया) |
| 30 अक्टूबर 2026 | मुख्य सचिव को आपराधिक अवमानना में पेशी का निर्देश |
| 5 नवंबर | सुप्रीम कोर्ट ने दोनों अवमानना मामलों पर रोक लगाई |
| 1 दिसंबर तक | सरकार को लिक्विडेशन प्लान का ब्योरा देना है |
| 31 मार्च 2027 तक | भुगतान को लेकर सरकार से जानकारी मांगी गई |
| दिसंबर | अगली सुनवाई |
हाईकोर्ट ने 3 अगस्त को क्या आदेश दिया था
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से कहा था कि वह सभी कर्मचारियों और पेंशनरों को महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की लंबित किस्तें तुरंत जारी करे। ये किस्तें राज्य में तैनात अखिल भारतीय सेवाओं (IAS, IPS और IFS) के अधिकारियों को दी जा रही दरों के बराबर देनी थीं।
कोर्ट ने यह भी कहा था कि जब तक बकाया भुगतान नहीं हो जाता, सरकार प्रिंट और सोशल मीडिया में बड़े विज्ञापन अभियान जैसे गैर-जरूरी खर्च नहीं करेगी। पंजाब सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। आदेश का पालन न होने पर सरकार के खिलाफ दीवानी और आपराधिक अवमानना की याचिकाएं दायर हुई थीं।
राहत किसे मिली और इंतजार किसका बढ़ा
अगर गौर करें तो यह राहत फिलहाल की है। रोक “अगले आदेश तक” है, यानी मामला खत्म नहीं हुआ। सरकार को मुख्य सचिव की पेशी और अवमानना की तलवार से मोहलत मिली है। लेकिन कर्मचारियों और पेंशनरों का बकाया अब भी जस का तस है।
दिलचस्प बात यह है कि कोर्ट ने एक तरफ रोक लगाई, दूसरी तरफ भुगतान की पूरी योजना भी मांग ली। इससे साफ होता है कि अदालत चाहती है कि सरकार बकाया चुकाने का ठोस रास्ता दिखाए।
आम कर्मचारी और पेंशनर के लिए इसका असर
जिन परिवारों की मासिक आमदनी DA पर टिकी है, उनके लिए अगली सुनवाई अहम होगी। अगर सरकार ठोस प्लान रखती है तो बकाया भुगतान की तस्वीर साफ हो सकती है। न रखे तो दिसंबर के बाद फिर कठोर सवाल उठ सकते हैं।
जानें पूरा मामला
पंजाब सरकार और कर्मचारी-पेंशनर DA के बकाए पर आमने-सामने हैं। हाईकोर्ट ने 3 अगस्त को लंबित किस्तें तुरंत जारी करने का आदेश दिया था। सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जबकि आदेश न मानने पर अवमानना याचिकाएं दायर हुईं। अब सुप्रीम कोर्ट ने उन पर रोक लगाते हुए भुगतान की योजना मांगी है।
मुख्य बातें (Key Points)
- सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिव के खिलाफ आपराधिक और दीवानी, दोनों अवमानना कार्यवाहियों पर रोक लगाई।
- पंजाब सरकार को 1 दिसंबर तक लिक्विडेशन प्लान और 31 मार्च 2027 तक के भुगतान की जानकारी देनी है।
- फिलहाल DA 53% की दर से दिया जा रहा है, और कोर्ट ने पूछा है कि सरकार बकाए में से कितना देने को तैयार है।
- मामले की अगली सुनवाई दिसंबर में होगी।













