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The News Air - Breaking News - पंजाब DA बकाया मामला: हाईकोर्ट का सख्त रुख, सरकार को सुप्रीम कोर्ट में तुरंत पैरवी का आदेश

पंजाब DA बकाया मामला: हाईकोर्ट का सख्त रुख, सरकार को सुप्रीम कोर्ट में तुरंत पैरवी का आदेश

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तकनीकी खामियों का बहाना बनाकर महंगाई भत्ता रोकने से रोका, एक हफ्ते में सुप्रीम कोर्ट से फैसला लेने की सख्त हिदायत

The News Air Team by The News Air Team
गुरूवार, 10 सितम्बर 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, पंजाब
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Punjab and Haryana High Court

Punjab and Haryana High Court

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Punjab DA Arrears Case पंजाब सरकार और उसके कर्मचारियों के बीच महंगाई भत्ता (DA) बकाया भुगतान को लेकर चल रहे विवाद में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह बकाया महंगाई भत्ते के भुगतान संबंधी हाईकोर्ट के आदेशों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई अपील की तुरंत पैरवी करे।

देखा जाए तो यह मामला अब सिर्फ महंगाई भत्ते तक सीमित नहीं रहा। यह सरकार की न्यायिक आदेशों के प्रति प्रतिबद्धता और कर्मचारियों के अधिकारों का सवाल बन गया है। दिलचस्प बात यह है कि अदालत ने सरकार की कार्यशैली पर बेहद सख्त टिप्पणी की है।

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“अदालत से खेल न खेलें”: कोर्ट की सख्त चेतावनी

चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की डिवीजन बेंच ने सरकार की कार्यगुजारी पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “अदालत के साथ खेल खेलने या आंखों में धूल झोंकने की कोशिश न की जाए। आपको अपील करने का पूरा अधिकार है, कृपया उस अधिकार का उपयोग करते हुए अदालत से फैसला लें।”

समझने वाली बात यह है कि कोर्ट ने सरकार के अपील के अधिकार पर सवाल नहीं उठाया, बल्कि मामले को लटकाने की कोशिश पर आपत्ति जताई है। अदालत ने साफ किया कि राज्य सरकार अपनी विशेष इजाजत पिटीशन (SLP) में तकनीकी खामियों को बहाना बनाकर हाईकोर्ट के निर्देशों को लटका कर नहीं रख सकती।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अदालत ने “खेल खेलने” और “आंखों में धूल झोंकने” जैसे सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया। यह दर्शाता है कि कोर्ट को सरकार की मंशा पर संदेह है।

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एक हफ्ते की आखिरी मोहलत

कोर्ट ने मामले को सिर्फ एक हफ्ते के लिए स्थगित किया है और सरकार से कहा है कि अगले हफ्ते तक सुप्रीम कोर्ट में अपनी अपील पर सुनवाई करवाए, नहीं तो अदालत इस मामले में अगली कार्रवाई करेगी।

अगर गौर करें तो यह एक अल्टीमेटम है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सवाल उठता है कि अगर सरकार अगले हफ्ते तक सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं करवा पाती तो क्या होगा? क्या कोर्ट अवमानना की कार्रवाई शुरू करेगा?

तकनीकी खामियों का बहाना नहीं चलेगा

सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने बताया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील की तकनीकी खामियों को दूर करने की प्रक्रिया में है और अपील के लिए 90 दिन की अवधि उपलब्ध है।

इस पर बेंच ने कहा कि सरकार के अपील के अधिकार पर कोई सवाल नहीं है, लेकिन मामले को इस तरह लटकाकर नहीं रखा जा सकता। देखा जाए तो सरकार समय खरीदने की कोशिश कर रही है, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया।

समझने वाली बात यह है कि हालांकि कानूनी तौर पर सरकार के पास 90 दिन की अवधि है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह इस अवधि का इस्तेमाल जानबूझकर मामला लटकाने के लिए करे।

3 अगस्त का आदेश: सरकार ने नहीं मानी बात

अदालत उस मामले पर सुनवाई कर रही थी जिसमें पंजाब सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) द्वारा केंद्र सरकार की तर्ज पर बकाया DA/DR की किश्तें जारी करने के 3 अगस्त के आदेशों की पालना नहीं करने से संबंधित अर्जियां थीं।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि 3 अगस्त को कोर्ट ने साफ आदेश दिया था कि दो हफ्ते के अंदर बकाया DA जारी किया जाए। लेकिन सरकार ने इस आदेश का पालन नहीं किया। इसी के चलते कर्मचारियों ने अवमानना की अर्जियां दायर कीं।

पूरे मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद 8 अप्रैल के हाईकोर्ट के सिंगल बेंच के फैसले से शुरू हुआ था, जिसमें पंजाब सरकार को अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स को केंद्र सरकार के पैटर्न पर DA और DR (महंगाई राहत) जारी करने के निर्देश दिए गए थे।

इसके बाद 3 अगस्त को जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की डिवीजन बेंच ने सरकार और PSPCL की अपीलों को खारिज करते हुए सिंगल बेंच के आदेशों की पुष्टि की और दो हफ्ते के अंदर बकाया DA जारी करने का आदेश दिया।

अगर गौर करें तो यह एक सीधा-सादा मामला है। सिंगल बेंच ने आदेश दिया, डिवीजन बेंच ने पुष्टि कर दी। लेकिन सरकार अभी तक आदेश का पालन नहीं कर रही। सवाल उठता है कि आखिर क्यों?

कर्मचारियों ने शुरू की अवमानना कार्रवाई

सरकारी वकील ने अदालत के ध्यान में लाया कि मूल याचिकाकर्ताओं ने पहले ही नियमित बेंच के सामने अदालती अवमानना की कार्रवाइयां शुरू कर दी हैं, जिससे मामलों की संख्या बढ़ रही है।

यह एक महत्वपूर्ण विकास है। जब सरकार कोर्ट के आदेश नहीं मानती तो कर्मचारियों के पास अवमानना का रास्ता अपनाने के अलावा कोई चारा नहीं रहता। देखा जाए तो यह स्थिति किसी के लिए भी अच्छी नहीं है।

दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए सीनियर वकील चेतन मित्तल ने जोर दिया कि पंजाब सरकार को आदेशों की पालना या सुप्रीम कोर्ट में अपील की मौजूदा स्थिति के बारे में हलफनामा (Affidavit) दायर करना चाहिए।

केंद्र सरकार के पैटर्न पर DA की मांग

मामले की जड़ में यह मुद्दा है कि पंजाब के सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स केंद्र सरकार के पैटर्न पर DA और DR चाहते हैं। केंद्र सरकार नियमित रूप से महंगाई भत्ता बढ़ाती है, लेकिन पंजाब सरकार ने यह नहीं किया।

समझने वाली बात यह है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है। जब केंद्रीय कर्मचारियों को महंगाई भत्ता मिलता है तो पंजाब के कर्मचारियों को क्यों नहीं मिलना चाहिए? यह न्याय का सवाल है।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बकाया DA/DR की रकम काफी बड़ी हो गई है और कई कर्मचारी आर्थिक तंगी झेल रहे हैं। उनका तर्क है कि यह उनका कानूनी और संवैधानिक अधिकार है।

सरकार का पक्ष: वित्तीय संकट

हालांकि सरकार ने अदालत में अपना पक्ष विस्तार से नहीं रखा है, लेकिन जानकारों का मानना है कि सरकार वित्तीय संकट का हवाला देकर DA भुगतान में देरी कर रही है।

पंजाब की वित्तीय स्थिति किसी से छिपी नहीं है। राज्य पर भारी कर्ज है और राजस्व सीमित है। ऐसे में बकाया DA देना सरकार के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है।

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लेकिन सवाल यह है कि क्या वित्तीय संकट कर्मचारियों के वैध अधिकारों को रोकने का बहाना बन सकता है? कोर्ट का जवाब स्पष्ट है – नहीं।

अगर गौर करें तो सरकार को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी होंगी। अगर दूसरे खर्चों पर नियंत्रण रखा जाए तो शायद कर्मचारियों के हक दिए जा सकते हैं।

लटकते मामले और न्याय में देरी

यह मामला अप्रैल से चल रहा है और अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। सिंगल बेंच ने आदेश दिया, डिवीजन बेंच ने पुष्टि की, लेकिन सरकार अपील पर अपील दायर कर रही है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जब तक मामला अदालत में है, कर्मचारियों को उनका हक नहीं मिलता। और न्याय में देरी न्याय से वंचित करने जैसा है।

कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि सरकार जानबूझकर मामला लटका रही है ताकि DA देने में और देरी हो सके। तकनीकी खामियों का बहाना इसी रणनीति का हिस्सा है।

PSPCL कर्मचारी भी प्रभावित

इस मामले में सिर्फ सरकारी कर्मचारी नहीं, बल्कि पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन के कर्मचारी भी शामिल हैं। PSPCL पंजाब की बिजली वितरण कंपनी है और इसके हजारों कर्मचारी हैं।

PSPCL भी वित्तीय संकट से जूझ रहा है। कंपनी पर भारी कर्ज है और बिजली चोरी की समस्या गंभीर है। ऐसे में DA देना मुश्किल हो रहा है।

लेकिन कोर्ट का कहना है कि यह कर्मचारियों की समस्या नहीं है। अगर कंपनी प्रबंधन सही नहीं है तो उसे सुधारा जाना चाहिए, लेकिन कर्मचारियों को उनका हक दिया जाना चाहिए।

राजनीतिक दांवपेच

यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील है। सरकारी कर्मचारी एक बड़ा वोट बैंक हैं। अगर AAP सरकार उनके DA में देरी करती है तो यह चुनावों में सरकार के खिलाफ जा सकता है।

विपक्षी दल इस मुद्दे को उठा रहे हैं। कांग्रेस और भाजपा ने सरकार पर कर्मचारियों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया है।

दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि वह कर्मचारियों के हित में काम कर रही है लेकिन वित्तीय सीमाओं के कारण कुछ देरी हो रही है।

अब क्या होगा?

कोर्ट ने एक हफ्ते का समय दिया है। अब सरकार के पास दो विकल्प हैं:

विकल्प 1: सुप्रीम कोर्ट में अपील की तुरंत सुनवाई करवाए और फैसला ले

विकल्प 2: हाईकोर्ट के आदेश को मानते हुए बकाया DA जारी करे

अगर सरकार दोनों में से कोई कदम नहीं उठाती तो हाईकोर्ट “अगली कार्रवाई” कर सकता है, जिसमें अवमानना की कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।

देखा जाए तो सरकार के लिए स्थिति मुश्किल है। वित्तीय संकट से जूझते हुए बड़ी रकम का DA देना आसान नहीं। लेकिन कोर्ट के आदेश को नजरअंदाज करना भी संभव नहीं।


मुख्य बातें (Key Points)

• पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बकाया DA मामले में सुप्रीम कोर्ट में तुरंत पैरवी का आदेश दिया

• कोर्ट ने कहा “अदालत के साथ खेल न खेलें”, तकनीकी खामियों का बहाना नहीं चलेगा

• 3 अगस्त को कोर्ट ने दो हफ्ते में बकाया DA जारी करने का आदेश दिया था जिसका अभी तक पालन नहीं हुआ

• कर्मचारियों ने अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी है, सरकार को एक हफ्ते की आखिरी मोहलत


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: पंजाब DA बकाया मामला क्या है?

पंजाब के सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स केंद्र सरकार के पैटर्न पर महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) की मांग कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने 8 अप्रैल और 3 अगस्त को सरकार को यह देने का आदेश दिया, लेकिन सरकार ने अभी तक पालन नहीं किया।

Q2: हाईकोर्ट ने सरकार को क्या आदेश दिया है?

हाईकोर्ट ने सरकार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी अपील की एक हफ्ते में सुनवाई करवाने या हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि तकनीकी खामियों का बहाना बनाकर मामला नहीं लटकाया जा सकता।

Q3: अगर सरकार एक हफ्ते में पालन नहीं करती तो क्या होगा?

कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार एक हफ्ते में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं करवाती तो “अगली कार्रवाई” की जाएगी, जिसमें अदालती अवमानना की कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।

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