Iran US War के बीच तनाव एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। एक तरफ अमेरिका ईरान के पावर ग्रिड पर हमले की तैयारी कर रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान ने धमकी दी है कि वह कुछ ही मिनटों में पूरे मिडिल ईस्ट को अंधेरे में धकेल देगा। इसी बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने देर रात ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियान (Dr. Masoud Pezeshkian) से सीधे बात की और इस गंभीर संकट पर चर्चा की। 90 लाख से ज्यादा भारतीय नागरिक गल्फ देशों में रहते हैं, जिनकी सुरक्षा भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता बन गई है।
ईरान की बड़ी धमकी: मिनटों में पूरा मिडिल ईस्ट हो जाएगा अंधेरा
Iran US War में एक नया और खतरनाक मोड़ तब आया जब कई रिपोर्ट्स सामने आईं कि अमेरिकी सेना ईरान के पावर ग्रिड को नष्ट करने की योजना बना रही है। इसके जवाब में ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने चेतावनी दे दी कि अगर अमेरिका और इजराइल (Israel) ने ईरान के इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड को तबाह किया, तो ईरान कुछ ही मिनटों के अंदर पूरे मिडिल ईस्ट के पावर ग्रिड को ध्वस्त कर देगा।
आधुनिक युद्ध में इलेक्ट्रिसिटी इंफ्रास्ट्रक्चर एक बेहद अहम स्ट्रेटेजिक टारगेट माना जाता है। बिजली के बिना मिलिट्री बेस, मिसाइल सिस्टम, रडार, एयर डिफेंस, कम्युनिकेशन नेटवर्क और ट्रांसपोर्टेशन सब कुछ ठप पड़ जाता है। अगर किसी देश का इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड खत्म हो जाए, तो मिलिट्री कमांड पूरी तरह कोलैप्स हो सकती है, वेपन सिस्टम काम करना बंद कर सकते हैं और पूरा लॉजिस्टिक सिस्टम टूट सकता है।
गल्फ देशों पर कैसे मंडरा रहा है खतरा
Iran US War का सबसे डरावना पहलू यह है कि ईरान सिर्फ अमेरिका या इजराइल को नहीं, बल्कि पूरे गल्फ रीजन को निशाने पर ले सकता है। सऊदी अरब (Saudi Arabia), संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत (Kuwait), बहरेन (Bahrain) और कतर (Qatar) जैसे देशों का पूरा एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर काफी सेंट्रलाइज्ड है, जिसे ईरान आसानी से टारगेट कर सकता है।
इन गल्फ देशों में कोई बड़ी नदी नहीं है। यहां पीने का पानी डिसेलिनेशन प्लांट्स से निकाला जाता है, जो पर्शियन गल्फ के तट पर लगे हुए हैं। अगर ईरान इनके इलेक्ट्रिसिटी इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह कर दे, तो डिसेलिनेशन प्लांट काम करना बंद कर देंगे और लाखों लोगों को पानी मिलना मुश्किल हो जाएगा। पूरे मिडिल ईस्ट में भयंकर मानवीय संकट खड़ा हो सकता है।
इजराइल का इलेक्ट्रिसिटी नेटवर्क भले ही हाईली एडवांस्ड है, लेकिन वह भी कंसंट्रेटेड है। ईरान तेल अवीव (Tel Aviv) के पावर प्लांट्स, नेशनल ग्रिड कंट्रोल सिस्टम और मेडिटेरेनियन में गैस प्लेटफॉर्म को भी टारगेट कर सकता है।
मुजतबा खमेनी का पहला कड़ा संदेश: US बेस बंद करो, हरमूज ब्लॉक रहेगा
Iran US War के बीच ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खमेनी (Mojtaba Khamenei) ने अपना पहला भाषण दिया, जो बेहद कड़े तेवरों वाला रहा। मुजतबा खमेनी मरहूम अयातुल्लाह खमेनी (Ayatollah Khamenei) के बेटे हैं और उनसे भी ज्यादा हार्डलाइनर माने जाते हैं।
उनके भाषण के दो मुख्य बिंदु थे। पहला, स्ट्रेट ऑफ हरमूज (Strait of Hormuz) को ब्लॉक रखने का ऐलान। दुनिया के क्रूड ऑयल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से गुजरता है। इसे ब्लॉक रखकर ईरान अमेरिका पर इकोनॉमिक प्रेशर बनाना चाहता है, क्योंकि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। भारत में भी इसकी वजह से क्रूड ऑयल और एलपीजी की कीमतों को लेकर संकट गहरा रहा है।
दूसरा, मुजतबा खमेनी ने मांग की कि पूरे मिडिल ईस्ट में जितने भी अमेरिकी मिलिट्री बेस हैं, उन्हें तुरंत बंद किया जाए। यूएई, कतर, बहरेन, कुवैत, सऊदी अरब और ओमान, लगभग हर गल्फ देश में अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं। ईरान ने साफ कह दिया कि अगर ये बेस बंद नहीं किए गए, तो वह इन देशों पर सीधे हमला करेगा। दुबई और अबू धाबी जैसे शहरों पर हमले इसी रणनीति का हिस्सा हैं, ताकि ये देश डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) पर ईरान के खिलाफ कार्रवाई रोकने का दबाव बनाएं।
ईरान की तीन बड़ी शर्तें: ट्रंप को मांगनी होगी माफी
Iran US War को रोकने के लिए ईरान ने तीन बड़ी शर्तें रखी हैं। पहली, ईरान को जो भी नुकसान हुआ है, उसकी पूरी भरपाई (Reparation) अमेरिका को करनी होगी। पहले ही तेहरान की राजधानी में जिस तरह से भीषण बमबारी की गई, ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह किया गया और तेहरान में दिन के समय काले बादल छा गए थे, उसकी भरपाई ईरान चाहता है।
दूसरी शर्त यह है कि भविष्य में अमेरिका कभी भी ईरान पर हमला नहीं करेगा, इसकी गारंटी दी जाए। और तीसरी सबसे बड़ी शर्त यह है कि ट्रंप को अपनी गलती मानते हुए ईरान से माफी मांगनी होगी। ईरान के अधिकारियों ने साफ कह दिया है कि जब तक ट्रंप सॉरी नहीं बोलेंगे, तब तक ईरान उन्हें छोड़ेगा नहीं।
यहां गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिका जैसा देश दुनिया के सामने झुके, यह लगभग नामुमकिन दिखता है। खासकर ट्रंप जैसे नेता से माफी की उम्मीद करना, यह Iran US War को और ज्यादा एस्केलेट करने वाला साबित हो सकता है।
PM Modi ने क्यों की ईरान के राष्ट्रपति से बात
Iran US War के बीच भारत की चिंताएं बेहद गहरी हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने रात 11:09 बजे ट्वीट कर बताया कि उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियान से बातचीत की है और क्षेत्र में बनी गंभीर स्थिति पर चर्चा की है।
PM Modi के इस फोन कॉल के पीछे चार बड़ी वजहें थीं। सबसे पहले, युद्ध के बढ़ते एस्केलेशन को लेकर गंभीर चिंता। जिस तरह यह संघर्ष फुल-स्केल रीजनल वॉर की तरफ बढ़ रहा है, उसको लेकर भारत ने अपनी चिंता जताई।
दूसरा, ह्यूमैनिटेरियन कंसर्न। सिविलियन कैजुअल्टीज, इंफ्रास्ट्रक्चर का विनाश और मानवीय संकट को लेकर PM Modi ने अपनी बात रखी। भारत हमेशा से किसी भी संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर रहा है।
90 लाख भारतीयों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती
Iran US War में भारत की सबसे बड़ी चिंता गल्फ देशों में रहने वाले करोड़ों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा है। गल्फ रीजन में करीब 90 लाख (9 मिलियन) भारतीय रहते हैं। सबसे ज्यादा 35 लाख भारतीय संयुक्त अरब अमीरात में, 26 लाख सऊदी अरब में और 10 लाख से ज्यादा कुवैत में रहते हैं।
जब भी इस युद्ध में कोई हमला होता है, तो उसमें कहीं न कहीं भारतीय नागरिक भी प्रभावित हो रहे हैं। ईरान ने हाल ही में एक अमेरिकी टैंकर को उड़ाया, जिसमें एक भारतीय नागरिक की भी मौत हो गई। PM Modi ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत करके भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहते थे।
एनर्जी सिक्योरिटी और जयशंकर की कूटनीति
Iran US War से भारत की एनर्जी सिक्योरिटी भी गंभीर खतरे में है। स्ट्रेट ऑफ हरमूज के ब्लॉक होने से भारत आने वाले तेल और गैस की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इससे पहले एक शिप जो गुजरात आ रहा था, उस पर हमला हो गया था।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने ईरान के कई अधिकारियों से बातचीत करके यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि भारत आने वाले जहाजों को स्ट्रेट ऑफ हरमूज से गुजरने दिया जाए। ईरान ने इसकी अनुमति भी दे दी। PM Modi ने भी ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत में भारत की एनर्जी सिक्योरिटी का मुद्दा उठाया और कूटनीतिक बातचीत व डिप्लोमैटिक नेगोशिएशन के जरिए इस युद्ध को रोकने की अपील की।
युद्ध रुकने की गुंजाइश कहीं नहीं दिख रही
Iran US War में एक तरफ अमेरिका लगातार धमकी दे रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान उससे भी बड़ी धमकी दे रहा है। अमेरिका ने पहले तेहरान पर बमबारी की, ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह किया, अब पावर ग्रिड पर हमले की तैयारी कर रहा है। जवाब में ईरान पूरे मिडिल ईस्ट को अंधेरे में धकेलने, हरमूज बंद रखने और अमेरिकी बेस वाले देशों पर हमले की धमकी दे रहा है।
गेम थ्योरी के मुताबिक युद्ध में दोनों पक्ष यह देखते हैं कि सामने वाला कितना एस्केलेट करने को तैयार है। इस Iran US War में दोनों पक्ष लगातार दांव बढ़ा रहे हैं और कहीं से भी युद्ध रुकने की कोई गुंजाइश नहीं दिख रही। ट्रंप जैसे नेता पीछे हटने वाले नहीं हैं और ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खमेनी अपने पिता से भी ज्यादा हार्डलाइनर हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह संघर्ष और तेजी से बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और गल्फ में रहने वाले 90 लाख भारतीयों पर पड़ेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- PM Modi ने देर रात ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियान से Iran US War पर बातचीत की।
- ईरान ने धमकी दी कि अगर अमेरिका ने पावर ग्रिड पर हमला किया तो वह मिनटों में पूरे मिडिल ईस्ट को अंधेरे में धकेल देगा।
- नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खमेनी ने स्ट्रेट ऑफ हरमूज ब्लॉक रखने और US मिलिट्री बेस बंद करने की मांग की।
- गल्फ रीजन में 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा और एनर्जी सिक्योरिटी भारत की सबसे बड़ी चिंता है।







