PM Kisan Urea Subsidy को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले में एक बड़ा और महत्वपूर्ण खुलासा किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों में मची उथल-पुथल और वैश्विक तनाव के बावजूद, केंद्र सरकार ने किसानों को आर्थिक मार से बचाने के लिए यूरिया की प्रति बोरी लगभग ₹2700 की सीधी सब्सिडी देने का फैसला किया है। इसका सीधा मतलब है कि जिस 45 किलो यूरिया बैग की वैश्विक उत्पादन और आयात लागत करीब ₹3000 तक पहुंच चुकी है, वह भारतीय अन्नदाताओं को दुकानों पर महज ₹300 के आसपास ही उपलब्ध कराया जा रहा है।
अगर गौर करें तो सरकार का स्पष्ट संदेश है कि दुनिया भर में चाहे जो भी संकट आए, देश के किसानों पर खेती की बढ़ती लागत का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने दिया जाएगा।
🔍 यह भी पढ़ें- PM Kisan 23rd Installment: ₹2000 नहीं आए? जानें क्यों रुकी किस्त और कैसे मिलेगा पैसा
‘यूरिया की कीमतों का असली गणित और सरकारी सहायता’
देखा जाए तो पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर कोरोना महामारी के झटकों और पश्चिम एशिया में उपजे भू-राजनीतिक तनाव के चलते फर्टिलाइजर सेक्टर की सप्लाई चेन बुरी तरह चरमरा गई थी। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक यूरिया बैग की लागत बढ़कर ₹3000 तक पहुंच गई।
समझने वाली बात यह है कि इस भारी बढ़ोतरी के बाद भी भारत सरकार ने घरेलू स्तर पर कीमतें स्थिर रखीं। आज भी 45 किलो यूरिया की तय आधार कीमत लगभग ₹242 रखी गई है। इसमें अगर नीम कोटिंग और मामूली स्थानीय कर मिला दिए जाएं, तो भी किसान को यह बोरी करीब ₹300 में मिल जाती है। बाकी का बचा हुआ ₹2700 का बड़ा खर्च केंद्र सरकार सीधे उर्वरक कंपनियों और आयातकों को सब्सिडी के रूप में जारी कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का प्राथमिक उद्देश्य यही है कि फसल उत्पादन की मूल लागत नियंत्रण में रहे।
‘खाद सब्सिडी और किसान खर्च का तुलनात्मक विवरण’
यूरिया की वास्तविक लागत और किसानों को मिलने वाली छूट को नीचे दिए गए विवरण से आसानी से समझा जा सकता है:
| विवरण | राशि / मात्रा | मुख्य बिंदु |
|---|---|---|
| यूरिया बैग का वजन | 45 किलोग्राम | मानक सरकारी पैकिंग |
| अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित लागत | ₹3,000 प्रति बैग | वैश्विक संकट के समय की लागत |
| केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी | ₹2,700 प्रति बैग | सीधे कंपनियों को भुगतान |
| किसान के लिए निर्धारित खुदरा मूल्य | लगभग ₹300 प्रति बैग | नीम कोटिंग व मामूली टैक्स सहित |
| यूरिया की आधार तय कीमत | लगभग ₹242 प्रति बैग | सब्सिडी पूर्व तय बेस रेट |
‘पीएम किसान की 24वीं किस्त: पिता और पुत्र के लिए क्या हैं नियम?’
दिलचस्प बात यह है कि खाद सब्सिडी के साथ-साथ प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के करोड़ों लाभार्थी अब अपनी 24वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं। योजना के तहत पात्र किसानों को सालाना ₹6000 की आर्थिक मदद ₹2000 की तीन बराबर किस्तों में दी जाती है। इस कैलेंडर वर्ष में 22वीं किस्त 13 मार्च को और 23वीं किस्त 20 जून 2026 को भेजी गई थी। 20 अक्टूबर को 4 महीने का समय पूरा होने से किसानों में इस तारीख को लेकर चर्चा तेज है, हालांकि सरकार ने अभी तक आधिकारिक तारीख की औपचारिक घोषणा नहीं की है।
यहां ध्यान देने वाली बात पिता और पुत्र के पात्रता नियमों को लेकर है। योजना के नियमों के अनुसार परिवार (पति, पत्नी और नाबालिग बच्चे) को एक इकाई माना जाता है। यदि पिता और पुत्र एक ही राशन कार्ड में दर्ज हैं, तो परिवार में केवल एक ही व्यक्ति (पिता) को ₹2000 की किस्त मिलेगी। लेकिन यदि बेटा बालिग है, उसका अलग राशन कार्ड बना हुआ है और राजस्व रिकॉर्ड में उसके नाम पर अलग कृषि योग्य जमीन दर्ज है, तो वह स्वतंत्र रूप से अलग आवेदन कर योजना का लाभ ले सकता है। सिर्फ खेती में हाथ बंटाना अलग किस्त पाने का आधार नहीं बनता।
‘किसान क्रेडिट कार्ड और आसान ऋण की व्यवस्था’
किसानों को संस्थागत ऋण से जोड़ने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीएम किसान लाभार्थियों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की सुविधा उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया है। केसीसी के जरिए किसानों को बीज, खाद, कीटनाशक और सिंचाई जैसे खेती के दैनिक खर्चों के लिए सस्ती ब्याज दर पर कार्यशील पूंजी मिलती है।
केसीसी के तहत कुल क्रेडिट लिमिट ₹5 लाख तक हो सकती है। हालांकि, बैंक हर किसान को सीधे ₹5 लाख नहीं देता। बैंक किसान की कुल जमीन, उगाई जाने वाली फसल, अनुमानित लागत और ऋण पात्रता का आकलन करके वास्तविक लिमिट तय करता है। बिना किसी गारंटी के मिलने वाले कृषि ऋण की सीमा ₹2 लाख तक तय है, जिसे कुछ विशेष मामलों में ₹3 लाख तक बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा देश भर में फार्मर रजिस्ट्री अभियान भी चल रहा है, लेकिन केवल फार्मर आईडी न होने के कारण किस्त रुकने की बात अभी पक्की नहीं है।
‘कृषि लागत नियंत्रण और खाद्य सुरक्षा का सीधा संबंध’
अगर भारत जैसे बड़े कृषि प्रधान देश में खाद की कीमतें पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार के भरोसे छोड़ दी जाएं, तो छोटे और सीमांत किसानों के लिए फसल उगाना आर्थिक रूप से घाटे का सौदा बन जाएगा। उत्पादन लागत बढ़ते ही बाजार में खाद्यान्न की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिससे आम जनता पर महंगाई का दोहरा प्रहार होगा। सरकार की ओर से दी जा रही यह भारी सब्सिडी सीधे तौर पर देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायित्व प्रदान करती है। हालांकि, जमीनी स्तर पर यह भी सुनिश्चित करना उतना ही जरूरी है कि रियायती खाद की कोई किल्लत या कालाबाजारी न हो और हर जरूरतमंद किसान को समय पर सही मूल्य पर खाद उपलब्ध हो सके।
‘क्या है पृष्ठभूमि’
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल, गैस और रासायनिक उर्वरकों की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा गया है। भारत अपनी यूरिया और अन्य उर्वरक आवश्यकताओं के लिए बड़े पैमाने पर वैश्विक आपूर्ति पर निर्भर रहता है। आयात बिल में भारी उछाल के बावजूद केंद्र सरकार ने यह नीतिगत फैसला बरकरार रखा कि किसानों पर वैश्विक महंगाई का असर नहीं पड़ने दिया जाएगा। इसी रणनीति के तहत सरकार यूरिया पर प्रति बैग लगभग ₹2700 की सब्सिडी वहन कर रही है और साथ ही पीएम किसान व केसीसी जैसी वित्तीय योजनाओं के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत सहारा दे रही है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- भारी सब्सिडी: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ₹3000 लागत होने के बावजूद 45 किलो यूरिया की बोरी किसानों को करीब ₹300 में दी जा रही है, जिस पर सरकार ₹2700 प्रति बोरी सब्सिडी दे रही है।
- पिता-पुत्र पात्रता नियम: बालिग बेटे के नाम पर अलग कृषि भूमि का वैध राजस्व रिकॉर्ड और अलग राशन कार्ड होने पर ही उसे पिता से अलग पीएम किसान का लाभ मिलेगा।
- केसीसी ऋण सीमा: किसान क्रेडिट कार्ड पर अधिकतम क्रेडिट लिमिट ₹5 लाख तक है, जबकि ₹2 लाख तक (कुछ मामलों में ₹3 लाख) का ऋण बिना गारंटी मिलता है।
- 24वीं किस्त का इंतजार: पीएम किसान की 24वीं किस्त को लेकर किसानों में 20 अक्टूबर की संभावना पर चर्चा है, हालांकि आधिकारिक तिथि की घोषणा अभी बाकी है।













