8th Pay Commission: लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बुरी खबर आई है। कोविड-19 के दौरान रोके गए महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) के एरियर को लेकर जो उम्मीद पिछले छह सालों से बनी हुई थी, वह अब टूट चुकी है। वित्त मंत्रालय ने 15 अप्रैल 2026 को एक ताजा बयान जारी करके साफ कर दिया है कि फिलहाल इस एरियर का भुगतान संभव नहीं है।
देखा जाए तो यह फैसला उन लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ा झटका है, जो पिछले कई सालों से इस बकाया राशि का इंतजार कर रहे थे। यह सिर्फ पैसे का मामला नहीं, बल्कि उनके हक और उम्मीद का सवाल था।
कोविड काल में क्या हुआ था
दरअसल, कोविड-19 महामारी के समय केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया था। उस दौरान आर्थिक हालात काफी दबाव में थे। देश भर में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और राहत योजनाओं पर भारी खर्च किया जा रहा था।
ऐसे में सरकार ने DA और DR की तीन किस्तों को फ्रीज करने का निर्णय लिया। ये तीन किस्तें 1 जनवरी 2020, 1 जुलाई 2020 और 1 जनवरी 2021 से लागू होनी थीं। लेकिन महामारी के चलते इन्हें रोक दिया गया।
समझने वाली बात यह है कि उस समय यह कदम अस्थाई बताया गया था और उम्मीद थी कि हालात सामान्य होने पर बकाया रकम जारी कर दी जाएगी।
वित्त मंत्रालय ने क्या कहा
15 अप्रैल 2026 को जारी वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के पत्र में साफ शब्दों में कहा गया है कि उस समय लिया गया फैसला आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए जरूरी था।
मंत्रालय के मुताबिक, महामारी का असर सिर्फ एक साल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके बाद भी वित्तीय दबाव बना रहा। सरकार का कहना है कि उस दौर में स्वास्थ्य और कल्याण योजनाओं पर बड़े पैमाने पर खर्च किया गया, जिससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।
अगर गौर करें तो यह जवाब उस आवेदन के संदर्भ में दिया गया जिसमें डिफेंस रिकॉग्नाइज्ड एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए एरियर जारी करने की मांग की थी।
कर्मचारियों की मांग और सरकार का रुख
कर्मचारी संगठनों ने पिछले छह सालों में कई बार इस मुद्दे को उठाया। सरकार से गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी।
दिलचस्प बात यह है कि कर्मचारियों को उम्मीद थी कि शायद इस बार कोई राहत मिल जाएगी। लेकिन सरकार के रुख ने साफ कर दिया कि फिलहाल ऐसा संभव नहीं है।
यह फैसला केवल नीति का नहीं, बल्कि सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं को भी दर्शाता है।
18 महीने का एरियर कितना बड़ा है
तीन किस्तों को मिलाकर कुल 18 महीने का DA और DR रोका गया था। अगर एक औसत केंद्रीय कर्मचारी या पेंशनर की बात करें तो यह राशि लाखों रुपए तक पहुंच सकती है।
हैरान करने वाली बात यह है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि लाखों लोगों की बकाया राशि है। इसलिए सरकार के लिए भी इतनी बड़ी रकम एकमुश्त देना आसान नहीं है।
क्या है कर्मचारियों का तर्क
कर्मचारियों का कहना है कि यह उनका अधिकार है। उन्होंने उस दौरान भी काम किया, खासकर स्वास्थ्य कर्मी, पुलिस और अन्य आवश्यक सेवाओं में काम करने वाले लोगों ने जान जोखिम में डालकर ड्यूटी की।
उनके मुताबिक, सरकार ने बाद में DA की किस्तें तो बहाल कर दीं, लेकिन रुके हुए एरियर का भुगतान नहीं किया गया। यह उनके साथ अन्याय है।
सरकार की आर्थिक मजबूरी
सरकार का तर्क आर्थिक मजबूरी है। कोविड के दौरान और उसके बाद भी सरकारी खजाने पर भारी दबाव रहा। टीकाकरण अभियान, मुफ्त राशन योजना, स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में निवेश जैसे कदमों पर खरबों रुपए खर्च हुए।
ऐसे में, यदि सरकार 18 महीने का DA-DR एरियर दे दे तो खजाने पर और बोझ पड़ेगा। यही कारण है कि सरकार इस मामले में अड़ी हुई है।
आगे क्या होगा
हालांकि यह मुद्दा खत्म नहीं हुआ है। कर्मचारी संगठन अब भी अपनी मांग पर कायम हैं और आगे भी इस पर दबाव बनाने की तैयारी में हैं।
लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह साफ है कि निकट भविष्य में किसी तरह की राहत की उम्मीद बहुत कम है। यह लंबी प्रतीक्षा अब और लंबी होती नजर आ रही है।
क्या कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे कर्मचारी
कुछ कर्मचारी संगठन इस मामले को अदालत में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका तर्क है कि यह उनका वैधानिक अधिकार है और सरकार इसे नहीं रोक सकती।
अगर यह मामला अदालत पहुंचता है तो यह लंबा कानूनी संघर्ष बन सकता है। लेकिन अभी तक कोई बड़ी कानूनी चुनौती सामने नहीं आई है।
मुख्य बातें (Key Points)
• वित्त मंत्रालय ने 18 महीने के DA-DR एरियर देने से इनकार किया
• कोविड काल में 1 जनवरी 2020, 1 जुलाई 2020 और 1 जनवरी 2021 की तीन किस्तें रोकी गई थीं
• सरकार का तर्क: आर्थिक मजबूरी और स्वास्थ्य खर्च पर भारी बोझ
• कर्मचारी संगठन 6 सालों से मांग कर रहे हैं लेकिन कोई राहत नहीं
• निकट भविष्य में एरियर मिलने की उम्मीद बेहद कम













