चंडीगढ़, 1 नवंबर (The News Air) आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद मलविंदर सिंह कंग ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए पंजाब यूनिवर्सिटी के बारे में जारी ताजा नोटिफिकेशन को “पंजाब के संवैधानिक, भावनात्मक और ऐतिहासिक अधिकारों पर एक बेशर्म, असंवैधानिक और बदले की भावना से किया गया हमला” करार दिया है।
कंग ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 28 अक्टूबर को पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट और सिंडिकेट का पुनर्गठन करने का नोटिफिकेशन पूरी तरह से गैर-कानूनी और असंवैधानिक है, क्योंकि यूनिवर्सिटी का गठन पंजाब यूनिवर्सिटी एक्ट, 1947 के तहत किया गया था, जिसे पंजाब विधानसभा द्वारा पास किया गया था। कंग ने कहा, “राज्य के कानून (एक्ट) द्वारा गठित संस्था को सिर्फ एक केंद्रीय मंत्रालय द्वारा नोटिफिकेशन जारी करके रद्द या बदला नहीं जा सकता। यह संविधान का घोर उल्लंघन है और संघवाद पर सीधा हमला है।”
उन्होंने कहा कि भाजपा ने पंजाब दिवस का दिन चुना है, जो पंजाब की एकता, कुर्बानी और पहचान का जश्न मनाने का दिन है, ताकि पंजाबियों को एक क्रूर ‘तोहफा’ दिया जा सके- उनकी ऐतिहासिक यूनिवर्सिटी की चोरी।
कंग ने कहा कि 1882 में लाहौर में स्थापित पंजाब यूनिवर्सिटी को बंटवारे के बाद चंडीगढ़ स्थानांतरित कर दिया गया था। इसकी सीनेट और सिंडिकेट 1947 के एक्ट के तहत दशकों से लोकतांत्रिक तरीके से काम कर रही हैं। हालांकि, केंद्र का नया नोटिफिकेशन चुने हुए पदों को खत्म करता है, उनकी जगह मनोनीत (नामज़द) सदस्यों को लाता है और यूनिवर्सिटी के फैसला लेने वाले निकायों में पंजाब के प्रतिनिधित्व को खत्म कर देता है।
पहले, पंजाब के पास स्पष्ट और निष्पक्ष प्रतिनिधित्व था। 8 प्रिंसिपल सीटों में से 7 पंजाब से थीं, 8 लेक्चरार सीटों में से 7 पंजाब से थीं, 3 तकनीकी शिक्षा प्रिंसिपल सीटों में से 2 पंजाब से थीं और 15 में से 14 ग्रेजुएट हलके के सदस्य पंजाब से चुने जाते थे। कंग ने कहा कि उन्होंने खुद 8 साल तक इनमें से एक सीट के सदस्य के तौर पर सेवा निभाई है।
कंग ने कहा कि अब यह सभी लोकतांत्रिक सीटें खत्म कर दी गई हैं। भाजपा सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पंजाब की आवाज अब उसकी अपनी यूनिवर्सिटी में नहीं सुनी जाएगी।
उन्होंने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी पुनर्गठन एक्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि जब तक नया कानून नहीं बनाया जाता, केंद्र सरकार सिर्फ प्रशासनिक दिशा-निर्देश जारी कर सकती है, लेकिन यूनिवर्सिटी के बुनियादी लोकतांत्रिक ढांचे में दखल नहीं दे सकती।
कंग ने कहा कि हरियाणा पहले ही खुद को पंजाब यूनिवर्सिटी से अलग कर चुका है और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी बना चुका है, जबकि आज पंजाब यूनिवर्सिटी के पंजाब में 200 और कुछ चंडीगढ़ में एफिलिएटेड कॉलेज हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले दो सालों से केंद्र सरकार जानबूझकर सीनेट चुनावों को रोक रही है, हालांकि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रधानमंत्री को बार-बार पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि पंजाब के राज्यपाल को यूनिवर्सिटी का चांसलर नियुक्त किया जाए, न कि भारत के उपराष्ट्रपति को।
जैसे राज्यपाल चंडीगढ़ के प्रशासक हैं, वैसे ही उन्हें यूनिवर्सिटी का चांसलर भी होना चाहिए। लेकिन भाजपा की मानसिकता पंजाब के प्रति भेदभावपूर्ण है; वे पंजाब की हर चीज पर कब्जा करना चाहते हैं।
कंग ने कहा कि भाजपा की यह कार्रवाई देशभर में चल रहे एक बड़े पैटर्न का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य संघीय शिक्षा प्रणाली को खत्म करना, क्षेत्रीय भाषाओं को दबाना और हर चीज पर केंद्रीय नियंत्रण लगाना है।
उन्होंने कहा कि 59 सालों में, यूनिवर्सिटी की गवर्निंग बॉडी पर कभी भी केंद्र सरकार का प्रतिनिधि नहीं रहा। सदस्यों को सिर्फ वाइस-चांसलर की सिफारिश पर मनोनीत किया जाता था। लेकिन अब, केंद्र सरकार ने सिंडिकेट में अपना उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त किया है, भले ही वह सीनेट का सदस्य भी नहीं है। यह शासन का मजाक है और पंजाब की सर्वोच्च शिक्षा संस्था पर कब्जा करने की चाल है।
कंग ने सवाल किया कि अगर केंद्र सरकार यूजीसी को फंड देती है, तो क्या इसका मतलब यह है कि वह हर यूनिवर्सिटी की मालिक बन जाएगी? फंडिंग का मतलब मालिकाना हक नहीं है।
उन्होंने भाजपा के नोटिफिकेशन को “लोकतंत्र, पंजाब की पहचान और विधानसभा की शान पर सीधा हमला” कहा।
उन्होंने कहा कि सीनेट एक लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई संस्था थी जिसमें हर वर्ग की आवाजें शामिल थीं, शिक्षक, प्रिंसिपल, ग्रेजुएट और विधायक। इसे खत्म करके, भाजपा ने जनता की आवाज को दबा दिया है और इसकी जगह राजनीतिक नियुक्तियों को दे दी है।
कंग ने कहा कि यह कदम पंजाब की संस्कृति, स्वायत्तता और पहचान के प्रति भाजपा की गहरी नफरत को स्पष्ट तौर पर दिखाता है।
उन्होंने कहा कि पंजाब ने हमेशा देश के लिए कुर्बानियां दी हैं। हमारे किसान भोजन प्रदान करते हैं, हमारे सैनिक सीमाओं की रक्षा करते हैं, हमारे नौजवान देश की तरक्की में योगदान देते हैं। लेकिन भाजपा बदले में पंजाब के साथ धोखा कर रही है; हमारी संस्थाओं, हमारे अधिकारों और हमारी आवाज को छीन रही है।
कंग ने ऐलान किया कि ‘आप’ और पंजाब सरकार किसी भी हालत में इस गैर-कानूनी नोटिफिकेशन को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि हम इसे हर कानूनी, राजनीतिक और लोकतांत्रिक स्तर पर चुनौती देंगे। केंद्र सरकार को इस असंवैधानिक हुक्म को तुरंत वापस लेना चाहिए और सीनेट के लोकतांत्रिक ढांचे को बहाल करना चाहिए।
कंग ने कहा कि आज, जब हम पंजाब दिवस मना रहे हैं, भाजपा ने पंजाब की विरासत का अपमान किया है। लेकिन यह याद रखो पंजाब यूनिवर्सिटी पंजाब की है, और कोई भी इसे हमसे छीन नहीं सकता। पंजाब के लोग इसका सख्त विरोध करेंगे।
उन्होंने पंजाब भाजपा के नेताओं सुनील जाखड़, अश्विनी शर्मा और रवनीत सिंह बिट्टू से सवाल किया कि क्या वे पंजाब के साथ खड़े होंगे या दिल्ली के आगे झुकेंगे। यदि उनमें पंजाब के प्रति कोई स्वाभिमान या वफादारी है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए और इस विश्वासघात की निंदा करनी चाहिए।








