Odisha Hospital Fire में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। ओडिशा के कटक शहर में स्थित SCB मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के ट्रॉमा केयर विभाग के ICU में सोमवार तड़के करीब 3 बजे भीषण आग लग गई, जिसमें कम से कम 10 मरीजों की जलकर मौत हो गई है। पांच अन्य मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। अस्पताल की पहली मंजिल पर ट्रॉमा केयर इमरजेंसी डिपार्टमेंट में अचानक भड़की इस आग का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और मृतकों के परिजनों के लिए ₹25 लाख मुआवजे की घोषणा की है।
रात 3 बजे ICU में भड़की आग, 7 मरीजों की मौत अंदर ही हुई
Odisha Hospital Fire की यह दिल दहला देने वाली घटना तब हुई जब सोमवार तड़के करीब 3 बजे SCB Medical College के ट्रॉमा केयर ICU में अचानक आग भड़क उठी। ICU में उस वक्त कई गंभीर मरीज भर्ती थे जो हिलने-डुलने की स्थिति में नहीं थे। आग इतनी तेजी से फैली कि सात मरीजों की मौत ICU के अंदर ही हो गई।
तीन अन्य मरीजों की मौत बचाव अभियान के दौरान हुई, जब उन्हें अन्य वार्डों में ले जाया जा रहा था। धुएं और आग की लपटों के बीच उन्हें बचाया नहीं जा सका। कई जगह यह आशंका भी जताई जा रही है कि मृतकों की संख्या 10 से ज्यादा भी हो सकती है। पांच घायल मरीजों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है, जिनका इलाज जारी है।
शॉर्ट सर्किट बना मौत का कारण, सेफ्टी स्टैंडर्ड पर उठे सवाल
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बताया कि Odisha Hospital Fire की वजह ट्रॉमा केयर ICU में शॉर्ट सर्किट है। ICU जैसी जगह जहां वेंटिलेटर, मॉनिटर और दूसरे इलेक्ट्रिकल उपकरण लगातार चलते रहते हैं, वहां शॉर्ट सर्किट होना बेहद खतरनाक साबित होता है। बिस्तर पर पड़े गंभीर मरीज न तो खुद उठ सकते हैं और न ही भाग सकते हैं।
SCB Medical College जैसे बड़े सरकारी अस्पताल में इतनी बड़ी त्रासदी होने के बाद लोग अस्पतालों में सेफ्टी स्टैंडर्ड और फायर सेफ्टी सिस्टम पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। सवाल यह है कि क्या ICU में फायर अलार्म काम कर रहा था? क्या स्प्रिंकलर सिस्टम लगा हुआ था? क्या रात की ड्यूटी में पर्याप्त स्टाफ मौजूद था? ये सभी सवाल जांच के दायरे में हैं।
23 कर्मचारी भी हुए बीमार, धुएं से सांस लेने में हुई तकलीफ
Odisha Hospital Fire के दौरान SCB Medical College के 23 कर्मचारियों ने बेहद साहस दिखाते हुए आग की लपटों के बीच मरीजों को बचाने का काम किया। लेकिन भारी धुएं के कारण इन बहादुर कर्मचारियों को खुद सांस लेने में गंभीर तकलीफ हुई और वे स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त हो गए। फिलहाल ये 23 कर्मचारी अस्पताल में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है।
दमकल कर्मियों और अस्पताल स्टाफ ने मिलकर आग पर काबू पाने के लिए तेजी से कार्रवाई की। ICU में भर्ती क्रिटिकल मरीजों को फौरन बाहर निकाला गया और गंभीर हालत वाले मरीजों को अस्पताल के न्यू मेडिसिन ICU में शिफ्ट कर दिया गया। अगर स्टाफ ने समय रहते कार्रवाई न की होती तो यह हादसा और भी भयावह हो सकता था।
CM माझी ने किया अस्पताल का दौरा, ₹25 लाख मुआवजे का ऐलान
Odisha Hospital Fire की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सोमवार सुबह कटक में SCB Medical College का दौरा किया। उन्होंने अस्पताल के अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों से विस्तार से बातचीत की। सीएम न्यू मेडिसिन बिल्डिंग में पीड़ित मरीजों से मिलने भी गए और उनके हालचाल जाने।
मुख्यमंत्री ने मृतक मरीजों के परिवारों के लिए ₹25 लाख प्रति परिवार अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। यह मुआवजा परिवारों की तत्काल मदद के लिए दिया जाएगा। हालांकि कोई भी रकम उन परिवारों के दर्द को कम नहीं कर सकती जिन्होंने अपने प्रियजनों को इलाज के लिए भेजा था और उनके शव लौटे।
न्यायिक जांच के आदेश, लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई
Odisha Hospital Fire की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस पूरी घटना की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। सीएम ने साफ कहा कि जिम्मेदार पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी, चाहे वो कोई भी हो।
जांच में यह पता लगाया जाएगा कि आग कैसे लगी, किसकी लापरवाही थी, फायर सेफ्टी सिस्टम काम क्यों नहीं कर पाया और क्या अस्पताल ने सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया था। घटना के बाद स्वास्थ्य सचिव, कटक के जिला कलेक्टर और डीसीपी भी तुरंत मौके पर पहुंच गए और स्थिति का जायजा लिया।
सरकारी अस्पतालों में फायर सेफ्टी: बार-बार क्यों दोहराती है त्रासदी
यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े सरकारी अस्पताल में आग लगने से मरीजों की जान गई हो। देश के कई हिस्सों में पहले भी ऐसे हादसे हो चुके हैं, लेकिन हर बार जांच, मुआवजा और कुछ दिनों की चर्चा के बाद मामला ठंडा पड़ जाता है। जमीनी स्तर पर अस्पतालों में फायर सेफ्टी ऑडिट, फायर एस्केप रूट, स्प्रिंकलर सिस्टम और नियमित इलेक्ट्रिकल जांच जैसे बुनियादी इंतजाम लागू नहीं हो पाते।
ICU में भर्ती मरीज सबसे ज्यादा कमजोर और असहाय होते हैं। वे न चल सकते हैं, न भाग सकते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह अस्पताल प्रशासन पर होती है। SCB Medical College जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में अगर ऐसी लापरवाही होती है तो छोटे और जिला अस्पतालों का हाल क्या होगा, यह सोचने वाली बात है। जब तक सरकारी अस्पतालों में फायर सेफ्टी को सिर्फ कागजों पर नहीं बल्कि जमीन पर गंभीरता से लागू नहीं किया जाता, ऐसी त्रासदियां दोहराती रहेंगी।
आम परिवारों का दर्द: इलाज के लिए भेजा, शव लौटे
Odisha Hospital Fire का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि जिन मरीजों की मौत हुई, वे पहले से ही गंभीर हालत में ट्रॉमा केयर ICU में भर्ती थे। उनके परिवार पहले से ही अपने प्रियजनों की सेहत को लेकर चिंतित थे। वे उम्मीद लेकर अपने घर के सदस्यों को इलाज के लिए लाए थे, लेकिन अस्पताल की लापरवाही ने उनसे उनके अपने छीन लिए।
₹25 लाख का मुआवजा भले ही आर्थिक मदद दे, लेकिन जो परिवारों ने खोया है उसकी भरपाई कोई रकम नहीं कर सकती। यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
मुख्य बातें (Key Points)
- SCB Medical College, कटक के ट्रॉमा केयर ICU में सोमवार तड़के करीब 3 बजे शॉर्ट सर्किट से भीषण आग लगी, 10 मरीजों की मौत हुई।
- 7 मरीजों की मौत ICU के अंदर और 3 की बचाव के दौरान हुई, 5 मरीजों की हालत अभी भी गंभीर, 23 कर्मचारी भी अस्पताल में भर्ती।
- CM मोहन चरण माझी ने अस्पताल का दौरा किया, मृतकों के परिजनों को ₹25 लाख मुआवजे की घोषणा की और न्यायिक जांच के आदेश दिए।
- सेफ्टी स्टैंडर्ड पर गंभीर सवाल उठे, सीएम ने कहा कि जिम्मेदार पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।








