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The News Air - Breaking News - NTA Tender Controversy: कैसे बदले गए नियम, छात्रों को भुगतना पड़ा खामियाजा

NTA Tender Controversy: कैसे बदले गए नियम, छात्रों को भुगतना पड़ा खामियाजा

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के टेंडर में नियम बदलने के बाद एडिक्विटी ने TCS को हराया, फिर परीक्षा में हुई गड़बड़ी से हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा

The News Air Team by The News Air Team
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NTA Tender Controversy
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NTA Tender Controversy: जब परीक्षा की बात आती है तो लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा होता है। लेकिन क्या हो जब टेंडर देने की प्रक्रिया में ही गड़बड़ी हो जाए? जब नियमों को इस तरह बदला जाए कि एक बार अयोग्य घोषित हो चुकी कंपनी अचानक योग्य हो जाए और TCS जैसी दिग्गज कंपनी को हराकर टेंडर जीत जाए? फिर उस कंपनी द्वारा परीक्षा आयोजन में इतनी गड़बड़ियां हों कि छात्रों को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़े।

National Testing Agency (NTA) भारत में JEE Main, NEET, CUET जैसी बड़े पैमाने की प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करती है। लेकिन जब इसी एजेंसी के टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं की बात सामने आती है, तो सवाल उठना लाजमी है। देखा जाए तो यह मामला सिर्फ एक टेंडर का नहीं, बल्कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का है।

आज हम आपको बताएंगे कि कैसे एक कंपनी जो पहले टेंडर में पहले ही राउंड में बाहर हो गई थी, कैसे नियम बदलने के बाद दोबारा जीत गई। और फिर कैसे परीक्षा आयोजन में ऐसी खामियां हुईं कि छात्रों को अदालत तक जाना पड़ा।

पहला टेंडर: जब एडिक्विटी हुई अयोग्य

NTA ने अपनी परीक्षाओं के आयोजन के लिए एक टेंडर निकाला। यह कोई छोटा-मोटा टेंडर नहीं था – इसमें देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं का जिम्मा देना था। Addequate (एडिक्विटी) नामक कंपनी ने 7 दिसंबर 2020 को इस टेंडर में आवेदन किया।

दिलचस्प बात यह है कि इस टेंडर में TCS जैसी दिग्गज IT कंपनियां भी थीं। टेंडर प्रक्रिया के अनुसार दो राउंड होने थे – Technical और Financial।

जब कंपनियों का मूल्यांकन शुरू हुआ तो एडिक्विटी के Technical Parameters इतने कम थे कि वह न्यूनतम आवश्यकता का मानदंड ही पूरा नहीं कर पाई। NTA ने इस टेंडर के पहले राउंड में ही एडिक्विटी को अयोग्य घोषित कर दिया।

Technical Scoring और Result की कॉपी इस बात की गवाह है। अब जब एडिक्विटी बाहर हो गई, तो TCS और NSEIT बची थीं और इनमें से एक को NTA का टेंडर मिलना था।

अचानक टेंडर हुआ रद्द

अब यहां से कहानी में ट्विस्ट आता है। इससे पहले कि TCS और NSEIT में से कोई विजेता घोषित होता, एडिक्विटी के बाहर होने के बाद पूरा टेंडर ही रद्द कर दिया गया।

समझने वाली बात है कि जब एक कंपनी पहले ही राउंड में fail हो चुकी थी और बाकी योग्य कंपनियां मौजूद थीं, तो टेंडर रद्द करने की क्या जरूरत थी?

और फिर टेंडर रद्द करने के 4 महीने बाद 29 अप्रैल 2021 को NTA ने दोबारा टेंडर निकाला। लेकिन इस बार कुछ बदल गया था – नियम।

नियम बदलने का खेल: एक-एक करके एडिक्विटी को मिला फायदा

जब NTA ने नया टेंडर निकाला, तो कई महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव किए गए। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि हर बदलाव एडिक्विटी को फायदा पहुंचाने वाला था।

पहला बदलाव – IT Staff की संख्या:

पुराना नियम (2020 टेंडर)नया नियम (2021 टेंडर)एडिक्विटी की स्थिति
IT Staff 500 से कम = 0 अंकIT Staff 251 से ज्यादा = 8 अंक (Full marks)एडिक्विटी के पास 496 employees थे (2024 data के अनुसार, 2020 में और भी कम)

पुराने टेंडर के Page 38, Point 1.1 में स्पष्ट लिखा था कि अगर किसी vendor company की IT staff की संख्या 500 से कम है तो उसे Zero marks मिलेंगे।

लेकिन नए टेंडर में इसे बदलकर यह कर दिया गया कि अगर IT staff 251 से ज्यादा है तो Full 8 marks मिलेंगे।

कई Auditing websites के अनुसार, 7 अप्रैल 2024 तक एडिक्विटी की employee strength 496 थी। यानी 500 से कम। और यह 2024 का डेटा है – 2020 में तो इससे भी कम रही होगी।

तो जहां पुराने टेंडर में एडिक्विटी को Zero marks मिल रहे थे, वहीं नियम बदलने के बाद उसे Full 8 marks मिल गए।

दूसरा बदलाव – Average Turnover:

पुराना नियमनया नियमएडिक्विटी का Turnover
Last 3 years average minimum 50 करोड़Last 3 years average minimum 10 करोड़34.27 करोड़ (Financial Report के अनुसार)

पुराने टेंडर में Last 3 years का average turnover minimum 50 करोड़ होना चाहिए था, जो एडिक्विटी का नहीं था। एडिक्विटी की Financial Report के अनुसार, उनका last 3 years का average 34.27 करोड़ था।

नए टेंडर में इस 50 करोड़ की requirement को घटाकर 10 करोड़ कर दिया गया।

अगर गौर करें तो TCS का turnover तो already 50 करोड़ से ऊपर था, तो उसे कोई फर्क नहीं पड़ा। लेकिन एडिक्विटी को इस बदलाव से सीधा फायदा मिला। यह बदलाव Page 38, Point 3.1 में देखा जा सकता है।

तीसरा बदलाव – परीक्षा आयोजन का अनुभव:

पुराना नियमनया नियमप्रभाव
Single shift में 1 लाख से ज्यादा students का CBT कराया होSingle shift में 35,000 students का CBT कराया होRequirement में 65% की कमी

पहले वाले टेंडर में नियम था कि vendor company ने past में single shift में 1 लाख से ज्यादा students का computer based test कराया हो।

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नए टेंडर में इसे बदलकर 35,000 कर दिया गया। यहां भी TCS ने पहले से ही पुराना criteria fulfill कर रखा था। फिर से फायदा एडिक्विटी को मिला।

नियम बदलने के बाद: एडिक्विटी की जीत

इस तरह कई नियम बदले गए। और जो एडिक्विटी पुराने टेंडर में पहले राउंड में अयोग्य हो चुकी थी, वह दोबारा इस नए टेंडर में आवेदन करती है।

एडिक्विटी और TCS जैसी कंपनियों का assessment शुरू होता है। और 5 महीने बाद 23 नवंबर 2021 को NTA के इस नए टेंडर का परिणाम आता है।

कहने का मतलब साफ है – जो एडिक्विटी पहले वाले टेंडर में first round में बाहर हो गई थी, वह नियम बदलने के बाद:

  1. Technical Round clear कर लेती है
  2. Financial Round में TCS से कम bid करके जीत लेती है

पुराने टेंडर को cancel करके, नियम बदलकर, जो नया टेंडर लाया गया, उसमें एडिक्विटी ने TCS जैसी दिग्गज कंपनी को हराकर पूरा टेंडर जीत लिया।

यहां सवाल उठता है – DGT (Directorate General of Training) जो बहुत छोटे पैमाने पर परीक्षा कराती है, उसमें एडिक्विटी ineligible घोषित की गई। लेकिन NTA जो बड़े पैमाने पर JEE, NEET जैसी परीक्षाएं कराती है, उसमें TCS को हराकर टेंडर जीत गई?

टेंडर जीतने के बाद एडिक्विटी और NTA के बीच MOU साइन हुआ।

असली परेशानी: परीक्षा आयोजन में गड़बड़ियां

अब टेंडर की बात तो हो गई। लेकिन असली समस्या तब शुरू हुई जब एडिक्विटी ने NTA की परीक्षाएं आयोजित करना शुरू किया।

Technical Glitches की बाढ़:

परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी खामियां सामने आने लगीं। चौकसी कॉलेज, बिलासपुर के परीक्षा केंद्र में 50% प्रश्न load ही नहीं हो पा रहे थे। सोचिए उन छात्रों की स्थिति जो महीनों की तैयारी के बाद परीक्षा देने पहुंचे और आधे प्रश्न स्क्रीन पर आए ही नहीं।

रांची के एक कॉलेज में server down होने के कारण second shift पूरी की पूरी cancel करनी पड़ी। सैकड़ों छात्रों की एक दिन की मेहनत बर्बाद।

Admit Card में Pakistan Border का पता!

और हैरान करने वाली बात – Admit card में परीक्षा का address Pakistan border की पट्टी में mention था, जबकि Advance Information Slip में कुछ और address था। छात्र समझ नहीं पा रहे थे कि जाएं कहां?

छात्रों को सुप्रीम कोर्ट की शरण

पूरी परीक्षा को इस तरह कराया गया कि स्थिति यह हो गई कि छात्रों को Supreme Court का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

सुप्रीम कोर्ट ने कुछ छात्रों के लिए re-exam के आदेश दिए। लेकिन राहत की बात यह नहीं थी – बाकी जो हजारों छात्र थे, उनकी re-exam नहीं हो पाई।

कई सारे protests हुए। छात्र सड़कों पर उतरे। लेकिन कुछ खास नहीं हो पाया। उन छात्रों का एक साल बर्बाद हो गया जिन्होंने अपना सब कुछ दांव पर लगाकर तैयारी की थी।

सवाल जो अनुत्तरित रहे

यह पूरा मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है:

  1. क्यों रद्द किया गया पहला टेंडर? जब योग्य कंपनियां मौजूद थीं, तो पूरा टेंडर cancel करने की क्या जरूरत थी?
  2. नियम बदलने का औचित्य क्या था? हर बदलाव एक ही कंपनी को फायदा पहुंचाने वाला क्यों था?
  3. छोटे scale की परीक्षा में अयोग्य, बड़े scale में योग्य कैसे? DGT में fail होने वाली कंपनी NTA में TCS को कैसे हरा सकती है?
  4. Technical failures के बाद भी कोई कार्रवाई क्यों नहीं? जब इतनी गड़बड़ियां हुईं, तो contract terminate क्यों नहीं किया गया?
  5. छात्रों का भविष्य किसकी जिम्मेदारी है? जिन हजारों छात्रों का साल बर्बाद हुआ, उनका क्या?
व्यवस्था पर सवाल

देखा जाए तो यह मामला सिर्फ एक टेंडर या एक कंपनी का नहीं है। यह हमारी पूरी शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है।

जब crores of rupees के टेंडर में ऐसी अनियमितताएं हो सकती हैं, जब नियमों को मनमाने तरीके से बदला जा सकता है, जब छात्रों के भविष्य से इस तरह खिलवाड़ हो सकता है – तो फिर transparency और accountability कहां है?

NTA जैसी संस्था जिस पर देश के लाखों छात्रों को भरोसा है, अगर उसी की प्रक्रिया में सवाल हों, तो यह चिंता का विषय है।

आगे की राह

इस पूरे प्रकरण से कुछ सबक लेने की जरूरत है:

पारदर्शिता अनिवार्य है: टेंडर प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता होनी चाहिए। कोई भी नियम बदलाव तर्कसंगत होना चाहिए और सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए।

Performance monitoring जरूरी है: टेंडर देने के बाद vendor की performance की continuous monitoring होनी चाहिए। अगर गड़बड़ियां हों तो तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।

छात्र हित सर्वोपरि: किसी भी निर्णय में छात्रों का हित सबसे ऊपर होना चाहिए। उनके साल, उनकी मेहनत, उनके सपने – इन सबकी कीमत समझनी होगी।

जवाबदेही तय हो: अगर गड़बड़ी होती है तो जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। छात्रों के साथ हुए अन्याय का हिसाब किसी को देना होगा।

उम्मीद की जानी चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों और परीक्षा व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

मुख्य बातें (Key Points)
  • NTA ने परीक्षा आयोजन के लिए निकाले टेंडर में एडिक्विटी पहले राउंड में अयोग्य घोषित हुई
  • पहला टेंडर cancel कर 4 महीने बाद नए नियमों के साथ दूसरा टेंडर निकाला गया
  • IT staff requirement 500 से घटाकर 251, turnover 50 करोड़ से घटाकर 10 करोड़ किया गया
  • नियम बदलने के बाद एडिक्विटी ने TCS को हराकर टेंडर जीता
  • परीक्षा आयोजन में technical glitches, server down, admit card में गलत address जैसी गड़बड़ियां हुईं
  • छात्रों को Supreme Court जाना पड़ा, कुछ को re-exam मिला लेकिन हजारों छात्रों का साल बर्बाद हुआ
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: NTA टेंडर विवाद क्या है?

NTA ने JEE, NEET जैसी परीक्षाओं के आयोजन के लिए टेंडर निकाला था। पहले टेंडर में Addequate कंपनी अयोग्य घोषित हुई, लेकिन नियम बदलने के बाद दूसरे टेंडर में TCS को हराकर जीत गई। इसके बाद परीक्षा आयोजन में भारी गड़बड़ियां हुईं जिससे छात्रों को परेशानी हुई।

प्रश्न 2: NTA टेंडर में कौन से नियम बदले गए?

मुख्य रूप से तीन नियम बदले गए – IT staff की requirement 500 से घटाकर 251 कर दी गई, average turnover 50 करोड़ से घटाकर 10 करोड़ किया गया, और single shift exam capacity 1 लाख से घटाकर 35,000 students कर दी गई। हर बदलाव Addequate को फायदा पहुंचाने वाला था।

प्रश्न 3: NTA परीक्षा में क्या गड़बड़ियां हुईं?

Addequate द्वारा परीक्षा आयोजन में कई technical glitches हुए – 50% प्रश्न load नहीं हो रहे थे, server down हो गए, admit card में Pakistan border का गलत address छपा था, और कई exam centers पर दूसरी shift cancel करनी पड़ी। छात्रों को Supreme Court जाना पड़ा।

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