अब पंजाब में किसान व कांग्रेस सरकार आमने-सामने,32 संगठनों के नेताओं की चंडीगढ़ में मीटिंग


The News Air- (चंडीगढ़) विवादित कृषि क़ानून पर केंद्र से ज़ंग जीतकर दिल्ली से लौटे किसान अब पंजाब सरकार से लड़ाई के लिए तैयार हैं। पंजाब में कांग्रेस सरकार का पूर्ण क़र्ज़ माफ़ी का वादा अभी तक अधूरा है, जिसे देखते हुए बुधवार को पंजाब के 32 किसान संगठनों ने चंडीगढ़ में मीटिंग बुला ली है। इस मीटिंग में किसान नेता आगे की रणनीति तैयार करेंगे।

कल किसान संगठनों की पंजाब के CM चरणजीत चन्नी से भी मीटिंग होनी है। सरकार के किस रूख पर क्या रणनीति रहेगी, इसका फ़ैसला आज हो जाएगा। पंजाब में विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र किसी भी दिन आचार संहिता लग सकती है। ऐसे में किसान उससे पहले सरकार को वादा पूरा करने के लिए मजबूर करने की कोशिश में हैं।

पिछली मीटिंग रही थी बेनतीजा

पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह की जगह CM बने चरणजीत चन्नी ने किसान नेताओं के साथ मीटिंग की थी। जिसमें सरकार और किसान नेताओं के बीच 18 मुद्दों पर सहमति बन गई थी। हालांकि क़र्ज़ माफ़ी के मुद्दे पर कोई फ़ैसला नहीं हुआ। सीएम चन्नी ने इसके लिए समय मांगा था, लेकिन फिर मीटिंग नहीं हुई। जैसे ही किसान आंदोलन ख़त्म हुआ तो पंजाब सरकार हरकत में आई और किसानों को मीटिंग का न्योता भेज दिया।

2017 में कैप्टन ने किया था वादा

पंजाब में किसानों की क़र्ज़ माफ़ी का वादा कांग्रेस पार्टी का था, जिसकी घोषणा कैप्टन अमरिंदर सिंह ने की थी। उन्होंने बैंकों और कोऑपरेटिव संस्थाओं के साथ आढ़तियों से लिया क़र्ज़ा भी माफ़ करने की घोषणा की थी। कैप्टन ने कहा था कि यह क़र्ज़ा पंजाब सरकार देगी।

कैप्टन का दावा है कि उन्होंने सरकार बनने के बाद साढ़े 4 साल में 5.64 लाख किसानों के 4 हज़ार 624 करोड़ रुपया क़र्ज़ माफ़ किया। इसके अलावा 2.85 लाख भूमिहीन मज़दूरों का 520 करोड़ रुपए क़र्ज़ माफ़ किया गया। इसी वजह से कांग्रेस की मुश्किल बढ़ी हुई है।

कांग्रेस की दोहरी मुसीबत: किसान मुद्दा छिना, अब मुसीबत भी बना

कांग्रेस अभी तक किसान आंदोलन के मुद्दे पर पंजाब में सियासत कर रही थी। इसमें वह भाजपा से ज़्यादा पंजाब में अकाली सरकार को घेर रही थी। जिस वक़्त विवादित कृषि सुधार क़ानून बने थे, अकाली दल भी केंद्र सरकार के साथ था। पंजाब कांग्रेस प्रधान नवजोत सिद्धू इसमें दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार को भी घेर रहे थे कि उन्होंने एक क़ानून नोटिफाई किया।

हालांकि अचानक केंद्र ने क़ानून वापस ले लिए तो कांग्रेस के हाथ से मुद्दा छिन गया। वहीं, अब कांग्रेस की मुसीबत बढ़ गई है क्योंकि अब किसान संगठन क़र्ज़ माफ़ी को लेकर संघर्ष की तैयारी कर चुके हैं। ख़ास बात यह है कि इस बार आंदोलन के चलते सभी संगठन एकजुट होकर चन्नी सरकार को घेरेंगे।


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