National Monetisation Pipeline 2.0 : केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज (23 फरवरी 2026) राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन 2.0 (एनएमपी 2.0) का शुभारंभ किया। यह परिसंपत्ति मुद्रीकरण का दूसरा चरण है, जिसके तहत वित्त वर्ष 2026 से 2030 तक की पांच साल की अवधि में कुल 16.72 लाख करोड़ रुपये की मुद्रीकरण क्षमता का अनुमान लगाया गया है। इसमें केंद्रीय मंत्रालयों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (PSU) की परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण के तहत निजी क्षेत्र का 5.8 लाख करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।
नीति आयोग द्वारा विकसित एनएमपी 2.0, विकसित भारत @2047 के विजन के अनुरूप है और केंद्रीय बजट 2025-26 में की गई घोषणा के अनुसार ‘परिसंपत्ति मुद्रीकरण योजना 2025-30’ के कार्यादेश पर आधारित है। इस पाइपलाइन को अवसंरचना से जुड़े मंत्रालयों के परामर्श से तैयार किया गया है।
कैसे रहा NMP 1.0 का प्रदर्शन?
शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने एनएमपी 1.0 के कार्यान्वयन की सराहना की। उन्होंने बताया कि 4 वर्षों के लिए निर्धारित 6 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य का लगभग 90 प्रतिशत हासिल किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि एनएमपी 1.0 के अनुभव और सीख एनएमपी 2.0 के लिए मार्गदर्शक का काम करेंगी, ताकि संसाधनों और अवसरों का बेहतर उपयोग कर समयबद्ध तरीके से परिणाम प्राप्त किए जा सकें।
एनएमपी 2.0 के तहत किन क्षेत्रों पर फोकस?
एनएमपी 2.0 में कुल 16.72 लाख करोड़ रुपये के मुद्रीकरण लक्ष्य को विभिन्न क्षेत्रों में बांटा गया है। सबसे अधिक हिस्सेदारी राजमार्ग क्षेत्र की है, जबकि रेलवे, बिजली, पत्तन और कोयला क्षेत्र भी प्रमुख योगदानकर्ता होंगे।
राजमार्ग, एमएमएलपी, रोपवे: 4,42,000 करोड़ रुपये (26%)
विद्युत: 2,76,500 करोड़ रुपये (17%)
रेलवे: 2,62,300 करोड़ रुपये (16%)
पत्तन: 2,63,700 करोड़ रुपये (16%)
कोयला: 2,16,000 करोड़ रुपये (13%)
खान: 1,00,000 करोड़ रुपये (6%)
शहरी अवसंरचना: 52,000 करोड़ रुपये (3%)
नागरिक उड्डयन: 27,500 करोड़ रुपये (2%)
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस: 16,300 करोड़ रुपये (1%)
भंडारण और गोदाम: 10,000 करोड़ रुपये (1%)
दूरसंचार: 4,800 करोड़ रुपये (0.3%)
पर्यटन: 1,200 करोड़ रुपये (0.1%)
क्या है मुद्रीकरण का फ्रेमवर्क?
एनएमपी 2.0, एनएमपी 1.0 में प्रस्तुत परिसंपत्ति मुद्रीकरण की अवधारणा का ही अनुसरण करेगा। इसमें सीमित अवधि के लिए संपत्तियों का हस्तांतरण, अतिरिक्त पूंजी जुटाने के लिए सूचीबद्ध संस्थाओं के हिस्सों का विनिवेश, नकदी प्रवाह का प्रतिभूतिकरण या रणनीतिक व्यावसायिक नीलामी जैसे तत्व शामिल होंगे।
मुद्रीकरण से प्राप्त आय का आवंटन कहां होगा?
परिसंपत्ति मुद्रीकरण परियोजनाओं से प्राप्त आय को चार अलग-अलग मदों में आवंटित किया जाएगा, जो परियोजना की कार्यान्वयन एजेंसी और मुद्रीकरण के तरीके पर निर्भर करेगा:
भारत की संचित निधि: केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित परियोजनाओं से होने वाला राजस्व (राजस्व हिस्सेदारी, प्रीमियम, लीज किराया, रॉयल्टी) यहां जमा होगा।
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम/पत्तन प्राधिकरण: PSU और प्रमुख पत्तन प्राधिकरणों द्वारा की गई मुद्रीकरण गतिविधियों से प्राप्त आय संबंधित संस्था को ही मिलेगी।
राज्य संचित निधि: खानों और कोयला क्षेत्रों से संबंधित परियोजनाओं (रॉयल्टी भुगतान) से होने वाली आय राज्य सरकारों के खाते में जाएगी।
प्रत्यक्ष निवेश (निजी): उन मुद्रीकरण परियोजनाओं में निजी क्षेत्र द्वारा किए गए निवेश को शामिल किया जाएगा, जिनमें निर्माण और/या बड़े पैमाने पर रखरखाव घटक शामिल हैं।
क्या है आगे की राह?
कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में संपत्ति मुद्रीकरण पर सचिवों का एक सशक्त कोर समूह (सीजीएएम) इस कार्यक्रम की प्रगति की निगरानी करेगा। सरकार की प्रतिबद्धता है कि बेहतर अवसंरचना गुणवत्ता और संचालन एवं रखरखाव के माध्यम से परिसंपत्ति मुद्रीकरण कार्यक्रम को सार्वजनिक क्षेत्र और निजी निवेशकों दोनों के लिए मूल्य संवर्धक प्रस्ताव बनाया जाए।
मुख्य बातें (Key Points)
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने NMP 2.0 लॉन्च किया, 2026-30 के लिए 16.72 लाख करोड़ का मुद्रीकरण लक्ष्य।
राजमार्ग क्षेत्र में सबसे अधिक 4.42 लाख करोड़ का लक्ष्य, रेलवे-बिजली-बंदरगाह भी अहम।
निजी क्षेत्र से 5.8 लाख करोड़ के निवेश का अनुमान, PSU और केंद्रीय मंत्रालयों की संपत्तियों का होगा मुद्रीकरण।
NMP 1.0 का 90% लक्ष्य हासिल, अब नए चरण में 2.6 गुना अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य।








