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The News Air - Breaking News - Nirmala Sitharaman 3F: Fuel-Fertilizer-Forex पर बड़ी चेतावनी, कीमतें Unimaginable

Nirmala Sitharaman 3F: Fuel-Fertilizer-Forex पर बड़ी चेतावनी, कीमतें Unimaginable

वित्त मंत्री ने SIDBI कार्यक्रम में West Asia संकट के कारण 3F चुनौतियों पर चेतावनी दी, Crude Oil-Fertilizer की कीमतें अभूतपूर्व स्तर पर, ₹1 लाख करोड़ की स्थिरीकरण व्यवस्था तैयार।

Ajay Kumar by Ajay Kumar
मंगलवार, 26 मई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, बिज़नेस
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Nirmala Sitharaman
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Nirmala Sitharaman 3F की चेतावनी ने भारतीय अर्थव्यवस्था की कमजोरियों को स्पष्ट कर दिया है। SIDBI के 37वें स्थापना दिवस पर बोलते हुए, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जबकि भारत की आंतरिक आर्थिक बुनियाद अत्यधिक लचीली बनी हुई है, चल रहे पश्चिम एशिया संकट ने बाहरी मोर्चे पर गंभीर दबाव पैदा किया है। सरकार ने “3F” – Fuel (ईंधन), Fertiliser (उर्वरक), और Foreign Exchange (विदेशी मुद्रा) – को प्राथमिक चैनलों के रूप में पहचाना है जिनके माध्यम से वैश्विक अस्थिरता घरेलू बाजार में फैल रही है।

अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों, अभूतपूर्व उर्वरक लागत, और सोने के आयात से विदेशी मुद्रा भंडार की निकासी के साथ, सरकार ने अर्थव्यवस्था को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के टूटने से बचाने के लिए ₹1 लाख करोड़ का स्थिरीकरण कुशन स्थापित किया है।

🔍 यह भी पढ़ें- Budget 2026 में क्या सस्ता क्या महंगा? Nirmala Sitharaman का रिकॉर्ड नौवां बजट

एक नजर में 3F संकट

देखा जाए तो यह केवल तीन शब्द नहीं हैं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के तीन सबसे कमजोर बिंदु हैं।

3F क्षेत्रवर्तमान स्थितिप्रभाव
Fuel (ईंधन)Crude oil 85-90% आयात, पेट्रोल-डीजल 2 हफ्ते में ₹7+ बढ़ेपरिवहन लागत, मुद्रास्फीति, राजकोषीय घाटा
Fertilizer (उर्वरक)2025-26 में $14.5 billion आयात (पिछले साल से दोगुना), unimaginable price levelsकृषि लागत, खाद्य मुद्रास्फीति, सब्सिडी बोझ
Foreign ExchangeForex reserves $700B से नीचे, एक हफ्ते में $8B गिरावटCurrent Account Deficit, रुपये का कमजोर होना
पहला F: Fuel – सबसे बड़ा और सबसे दिखने वाला खतरा

अगर गौर करें, तो ईंधन सबसे बड़ा खतरा है क्योंकि यह अधिक दिखाई देता है और राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील मुद्दा है।

और बस यहीं से शुरू हुई आम आदमी की परेशानी की असली कहानी… भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में से एक है। जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो:

  • पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते हैं
  • LPG महंगा हो जाता है
  • परिवहन लागत बढ़ती है
  • विनिर्माण लागत बढ़ती है

और आप देख ही सकते हैं – पिछले दो हफ्तों में चार बार वृद्धि हुई है। लगभग ₹7 से अधिक पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी हुई है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि डीजल विशेष रूप से मायने रखता है क्योंकि डीजल से ही सब कुछ चलता है – ट्रक, बस, ट्रैक्टर, सिंचाई पंप। अगर डीजल के दाम बढ़ते हैं तो:

  • खाद्य कीमतें बढ़ती हैं
  • लॉजिस्टिक लागत बढ़ती है
  • औद्योगिक लागत बढ़ती है
  • मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ता है

भारत ईंधन की कीमतों को नियंत्रित क्यों नहीं कर पाता?

समझने वाली बात यह है कि जो भी हम तेल आयात करते हैं, उसे अमेरिकी डॉलर में भुगतान करना होता है। तो भारत के लिए दो बड़ी समस्याएं हैं:

  1. कच्चे तेल का दाम अधिक: यह तो समझ में आता है
  2. रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है: दोनों चीजें एक साथ होने लगें तो भारत का ऊर्जा आयात और अधिक महंगा हो जाता है

इसे Imported Inflation (आयातित मुद्रास्फीति) कहते हैं।

ईंधन कर की दुविधा:

सरकार के पास एक कठिन दुविधा है:

  • अगर टैक्स ऊंचे रखे: राजस्व सुरक्षित रहेगा, लेकिन लोगों का गुस्सा होगा और मुद्रास्फीति बढ़ेगी
  • अगर टैक्स कम करे: ईंधन की कीमतें गिरेंगी, लेकिन राजकोषीय घाटा बढ़ेगा

निर्मला सीतारमण ने कहा है कि अगर excise duty हटा दें तो सरकार का ₹1 लाख करोड़ खत्म हो जाएगा। राजकोषीय घाटा बढ़ेगा तो विकास पर, पूंजीगत व्यय पर असर पड़ेगा।

दिलचस्प बात यह है कि यह सबसे कठिन आर्थिक trade-off में से एक है।

दूसरा F: Fertilizer – छिपा हुआ रणनीतिक संकट

वित्त मंत्री ने कहा कि उर्वरक की कीमतें “unimaginable level” तक पहुंच गई हैं। और यह एक गुप्त (Hidden) लेकिन बहुत बड़ा संकट है।

भारत का कृषि तंत्र उर्वरकों पर भारी निर्भर है। और भारत उर्वरक पर बाहरी देशों पर निर्भर क्यों है? क्योंकि इसका कच्चा माल – पोटाश, फॉस्फेट, अमोनिया, LNG और यूरिया उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली प्राकृतिक गैस – हम आयात करते हैं।

इनमें से कई आपूर्तियां Strait of Hormuz (होर्मुज जलडमरूमध्य) से गुजरने वाले खाड़ी व्यापार मार्गों से जुड़ी हैं। अगर होर्मुज का जलडमरूमध्य प्रभावित होता है, तो:

  • उर्वरक की उपलब्धता कम हो जाएगी
  • शिपिंग लागत बढ़ेगी
  • प्राकृतिक गैस की कीमतें बढ़ेंगी

उर्वरक और खाद्य सुरक्षा का संबंध:

चिंता का विषय यह है कि उर्वरक सीधे खाद्य उत्पादन से जुड़ा है:

  • अगर उर्वरक महंगा हुआ: खेती की लागत बढ़ेगी
  • अगर फसल उपज की बात करें: अगर आप उर्वरक का इस्तेमाल नहीं करेंगे एक बार में रोक देंगे, तो उपज गिर जाएगी
  • अगर उत्पादन गिरा: खाद्य कीमतें बढ़ेंगी और खाद्य मुद्रास्फीति होगी, जो सबसे खतरनाक हो सकती है

आपको याद होगा 2 साल पहले श्रीलंका से खबर आई थी कि उन्होंने प्राकृतिक खेती की ओर अचानक से ही push कर दिया। कोई भी चीज बहुत धीरे-धीरे होती है। ऐसा नहीं है एक सेकंड में कह दें कि उर्वरक इस्तेमाल ही मत करो। उससे उपज गिर जाएगी। हाहाकार मच सकता है।

खाद्य मुद्रास्फीति राजनीतिक रूप से खतरनाक क्यों है?

  • गरीब व्यक्ति पर अधिक असर होता है
  • ग्रामीण आबादी पर अधिक असर होता है
  • Luxury inflation (महंगी BMW गाड़ियों के दाम बढ़ें) से कोई बहुत फर्क नहीं आएगा, लेकिन रोजमर्रा की चीजों पर दाम बढ़े तो बड़ा संकट हो सकता है

आंकड़े देखें:

2025-26 में भारत ने 28 million tonnes उर्वरक आयात किया, जिसकी कीमत $14.5 billion थी। सिर्फ एक साल पहले 2024-25 में हमने सिर्फ $7.2 billion भुगतान किया था।

लगभग दोगुना हो गया।

उर्वरक सब्सिडी का बोझ:

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि उर्वरक सब्सिडी का बोझ बहुत अधिक होता है। क्यों?

मान लीजिए यूरिया की एक बोरी को सरकार ₹5,000 में बेचती है (फिक्स्ड प्राइस)। लेकिन उस बोरी को बनाने का कुल लागत ₹20,000 है। तो सरकार ₹15,000 प्रति बोरी का नुकसान सब्सिडी के रूप में उठाती है।

इसकी वजह से:

  • राजकोषीय घाटा बढ़ता है
  • उधार की जरूरत बढ़ती है
  • सार्वजनिक ऋण पर दबाव पड़ता है

यहां भी दुविधा है:

  • अगर सरकार सब्सिडी देती है: किसान सुरक्षित रहेंगे, लेकिन राजकोषीय तनाव बढ़ेगा
  • अगर सब्सिडी गिरा दें: पैसे बचेंगे, लेकिन ग्रामीण गुस्सा बढ़ेगा, किसान नाराज होंगे

प्राकृतिक गैस की भूमिका:

समझने वाली बात यह है कि नाइट्रोजन उर्वरक (जैसे यूरिया) प्राकृतिक गैस से बनता है। अगर LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) की कीमतें बढ़ती हैं, तो उर्वरक उत्पादन की लागत तेजी से बढ़ती है।

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हाल ही में कतर पर हमले हुए, जिससे उसकी 20% उत्पादन क्षमता बर्बाद हो गई। इसकी वजह से अचानक उर्वरक में मुद्रास्फीति हुई जो सीधे भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डाल रही है।

तीसरा F: Foreign Exchange – मौन युद्धक्षेत्र

यह केवल विदेशी मुद्रा से नहीं देखना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि बाहर थोड़ा कम जाओ, सोना थोड़ा कम खरीदो, एक साल तक खरीद मत करो।

बेसिकली Foreign Exchange में US Dollar, Gold reserves, Foreign Exchange assets – सब होता है।

Forex reserves की गिरावट:

समयForex Reserves
पहले$700+ billion
वर्तमान$688 billion (नीचे)
पिछले हफ्ते$8 billion की गिरावट

भारत के लिए Forex reserves क्यों महत्वपूर्ण हैं?

  • अचानक आयात बिल का भुगतान करना हो
  • रुपये को स्थिर करना हो
  • निवेशकों को आश्वस्त करना हो

भारत बड़ी मात्रा में आयात करता है – तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोना। अब जैसे सोना – अगर हम एक बार नहीं खरीदेंगे तो काम चल जाएगा। लेकिन crude oil बंद तो नहीं कर सकते।

इसीलिए PM Modi ने कहा था सोने को एक बार के लिए रोक दो।

Current Account Deficit का खतरा:

जितना अधिक डॉलर बाहर जाएगा, जितना अधिक हम आयात करेंगे – Current Account Deficit बढ़ेगा। और CAD बढ़ेगा मतलब:

  • रुपया और कमजोर होगा
  • निवेशक डरेंगे
  • वे भारत से भागने की कोशिश करेंगे

एक दुष्चक्र (Vicious Cycle) बन जाता है:

  • तेल पहले से महंगा है → डॉलर की मांग बढ़ी → रुपया कमजोर हुआ → तेल और महंगा हो गया
Fear-Mongering की चेतावनी क्यों?

निर्मला सीतारमण ने कहा कि हमें डर नहीं फैलाना है। क्योंकि आर्थिक मनोविज्ञान (Economic Psychology) बहुत मायने रखती है।

अगर लोगों को लगे कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई है, तो क्या करेंगे?

  • ईंधन जमाखोरी शुरू कर देंगे
  • सोना खरीद लेंगे
  • डॉलर में बदलने लगेंगे

यह सब हमारी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा नहीं होगा।

1973 Oil Shock से तुलना

1973 में Oil Shock आया था और कुछ वैसी ही स्थिति दिख रही है:

  • भू-राजनीतिक युद्ध
  • तेल आपूर्ति में व्यवधान
  • मुद्रास्फीति में वृद्धि

International Energy Agency ने कहा है कि 2026 में जो हो रहा है, वह “one of the biggest supply disruptions in modern energy history” है।

Stagflation का खतरा

सबसे बड़ा डर है Stagflation। इसका मतलब है:

  • विकास (Growth) भी धीमी हो रही है
  • मुद्रास्फीति (Inflation) बढ़ती जा रही है

सामान्य रूप से मुद्रास्फीति बढ़ती है तो विकास भी होती है। लेकिन यहां उल्टा हो रहा है – विकास कम होगी और मुद्रास्फीति बढ़ेगी।

यह सरकार के लिए प्रबंधन करना अत्यंत कठिन है।

💡 यह भी पढ़ें- ATM Cash Withdrawal Rules: बिजली गई तो क्या अटक जाएंगे पैसे?

भारत के लिए सबक और रास्ता

राहत की बात तो यह होनी चाहिए थी कि स्थिति सुधरे, लेकिन हकीकत यह है कि भारत को कई सबक मिले हैं:

सबक:

  • हम तेल, गैस, उर्वरक पर पूरी तरह निर्भर नहीं रह सकते
  • आक्रामक रूप से Renewable Energy, Ethanol Blending की ओर जाना होगा
  • ऊर्जा सुरक्षा लगभग राष्ट्रीय सुरक्षा के बराबर है

उम्मीद की किरण यह है कि सरकार ने ₹1 लाख करोड़ का stabilization cushion बनाया है। लेकिन यह पश्चिम एशिया में इतनी दूर कहीं पर कुछ हो रहा है और उसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर इतने बड़े स्तर पर आ रहा है – यह दिखाता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था कितनी आपस में जुड़ी हुई है।

जानें पूरा मामला

Nirmala Sitharaman 3F का यह पूरा मामला दिखाता है कि भारत की आंतरिक अर्थव्यवस्था मजबूत है, लेकिन बाहरी कारकों के प्रति हम कमजोर हैं। Fuel, Fertilizer, Forex – ये तीन F हमारी सबसे बड़ी कमजोरियां हैं जो पश्चिम एशिया संकट में और उजागर हो गई हैं।

🔍 यह भी पढ़ें- Budget 2026: क्या FD और Mutual Fund पर टैक्स होगा एक समान? Nirmala Sitharaman के सामने उठी मांग

मुख्य बातें (Key Points)
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने West Asia crisis के कारण 3F (Fuel, Fertilizer, Forex) को प्रमुख बाहरी चुनौतियों के रूप में चिह्नित किया।
  • Crude oil 85-90% आयात, पेट्रोल-डीजल 2 हफ्ते में ₹7+ बढ़े, ईंधन कर दुविधा – सब्सिडी vs राजकोषीय घाटा।
  • उर्वरक कीमतें “unimaginable level” पर, 2025-26 में $14.5 billion आयात (पिछले साल से दोगुना), सब्सिडी बोझ भारी।
  • Forex reserves $700B से $688B गिरे, Current Account Deficit बढ़ने का खतरा, Stagflation की चिंता, सरकार ने ₹1 लाख करोड़ stabilization fund बनाया।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: Nirmala Sitharaman ने 3F क्या बताया है?

उत्तर: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 3F को Fuel (ईंधन), Fertilizer (उर्वरक) और Foreign Exchange (विदेशी मुद्रा) के रूप में परिभाषित किया है। यह तीन क्षेत्र हैं जिनके माध्यम से पश्चिम एशिया संकट का प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

प्रश्न 2: उर्वरक की कीमतें इतनी अधिक क्यों बढ़ गई हैं?

उत्तर: उर्वरक का कच्चा माल (पोटाश, फॉस्फेट, अमोनिया, प्राकृतिक गैस) भारत आयात करता है, जो मुख्य रूप से खाड़ी देशों से आता है। पश्चिम एशिया संकट, विशेष रूप से Strait of Hormuz में तनाव और कतर जैसे देशों पर हमलों के कारण आपूर्ति बाधित हुई है और कीमतें “unimaginable levels” तक पहुंच गई हैं। 2025-26 में भारत ने $14.5 billion का उर्वरक आयात किया, जो पिछले साल ($7.2 billion) से लगभग दोगुना है।

प्रश्न 3: Forex reserves कम होने से क्या खतरा है?

उत्तर: Forex reserves $700 billion से $688 billion तक गिर गए हैं। यह खतरनाक है क्योंकि भारत को आयात बिल (विशेष रूप से तेल, उर्वरक) का भुगतान डॉलर में करना पड़ता है। Forex कम होने से रुपया कमजोर होता है, Current Account Deficit बढ़ता है, और निवेशकों का विश्वास कम होता है। यह एक दुष्चक्र बनाता है जो Stagflation (कम विकास + उच्च मुद्रास्फीति) की ओर ले जा सकता है।

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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