NIA की खालिस्तानी संगठन ‘SFJ’ पर नकेल कसने की तैयारी


नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (The News Air)
Drugs माफ़िया, आतंकवादियों के मददगारों के बाद अब केंद्र सरकार खालिस्तान पर नकेल कसने के लिए सख़्त Action में आई है। आजतक के अनुसार राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) खालिस्तानी संगठन सिख फार जस्टिस (Sikhs for Justice-SFJ) की जांच करने कनाडा जाएगी। बता दें कि इस संगठन ने ही 26 जनवरी को लाल क़िले पर हुई हिंसा की साज़िश रची थी। यह किसान आंदोलन की आड़ में भी अपनी साज़िशों को अंजाम देने में लगा है। लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर को हुई हिंसा में भी इसके कार्यकर्ताओं की मौजूदगी की ख़बर थी।

पहले भी NIA इससे जुड़े लोगों को नोटिस भेज चुकी है-कृषि क़ानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन की आड़ में SFJ की हिंसक गतिविधियां सामने आई हैं। दिल्ली के लाल क़िले पर हुई हिंसा के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इससे जुड़े 40 से अधिक लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा था। बता दें कि इसका हेड क्वार्टर अमेरिका के न्यूयॉर्क में है। माना जा रहा है कि यह संगठन ही किसान आंदोलन को गैर क़ानूनी तरीक़े से फंडिंग कर रहा है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

NIA मानता है कि यह हिंसा फैला रहा-दिल्ली के लाल क़िले पर हुई हिंसा के बाद NIA ने FIR दर्ज़ की थीं। इसमें कहा गया कि यह संगठन सरकार के ख़िलाफ़ विद्रोह के लिए लोगों को उकसाने का काम करता है। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी और अन्य देशों में ज़मीनी स्तर पर अभियान चलाकर फ़ंड जुटाया जा रहा है। इस संगठन से जुड़े गुरपतवंत सिंह पन्नू, परमजीत सिंह पम्मा, हरदीप सिंह निज्जर NIA की नज़र में हैं।

SFJ ने रची थी लाल क़िले पर हिंसा की साज़िश-गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी के दिन जो लाल क़िले पर खालिस्तान का झंडा फहराएगा उसे 2.5 लाख अमेरिकी डॉलर (क़रीब 1.82 करोड़ रुपए) दिया जाएगा। यह घोषणा भारत में प्रतिबंधित ग्रुप एसएफजे ने की थी। अमेरिका में स्थित यह ग्रुप खालिस्तान के रूप में भारत से पंजाब के अलगाव का समर्थन करता है। मुख्य रूप से वकील गुरपतवंत सिंह पन्नून इस ग्रुप का सक्रिय सदस्य है।

2019 में बैन कर दिया गया था-SFJ को भारत में 2019 में प्रतिबंधित कर दिया गया था। पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर भी इस संगठन ने ऐसी ही एक अपील की थी, जिसके चलते पंजाब के कुछ इलाक़ों में लोगों ने डिप्टी कमिश्नर के ऑफ़िस में खालिस्तानी झंडा भी फहरा दिया था। इन लोगों के ख़िलाफ़ तब IPC की विभिन्न धाराओं में मुक़दमा भी दर्ज़ किया गया था।


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