हरियाणा के प्राइवेट स्कूलों के लिए नए नियम: भरना होगा फॉर्म 6; 10.13% से अधिक फ़ीस नहीं बढ़ा सकेंगे

The News Air- हरियाणा के प्राइवेट स्कूलों के लिए नए नियम जारी किए गए हैं। प्राइवेट स्कूलों को अब एक फरवरी तक फॉर्म 6 भरना होगा, जिसमें स्कूल सभी अनिवार्य गतिविधियों की प्रोस्पेक्टस में जानकारी देंगे। स्कूल 10.13% से अधिक फ़ीस भी नहीं बढ़ा पाएंगे। हालांकि अभी निदेशालय फॉर्म-6 का लिंक जारी करने से पहले ट्रायल कर रहा है, लेकिन स्कूलों को आदेश पहुंच चुके हैं।

प्रदेश में 6200 से अधिक मान्यता प्राप्त स्कूल हैं, जो अब पुराने बच्चों की फ़ीस तभी बढ़ा पाएंगे, जब अध्यापकों के वेतन में औसतन वृद्धि होगी। यह नियम लागू होने से जहां अभिभावकों को यह पता रहेगा कि अगले साल बच्चे की कितनी स्कूल फ़ीस देनी होगी, वहीं वे स्कूलों द्वारा अनिवार्य शुल्क बताकर बेवजह वसूले जाने वाले अतिरिक्त चार्ज से भी बच सकेंगे।

जानकारी न देने वाले नहीं बढ़ा पाएंगे फ़ीस

स्कूल सभी अनिवार्य फ़ीस घटक फार्म-6 में भरेंगे। ऐसा न करने पर स्कूल को उस शैक्षणिक सत्र के लिए फ़ीस बढ़ाने से रोक दिया जाएगा। किसी भी छात्र को मान्यता प्राप्त स्कूल द्वारा दुकानों से पुस्तकें, कार्य पुस्तिकाएं, लेखन सामग्री, जूते, जुराब, वर्दी लेने के लिए भी बाध्य नहीं किया जाएगा। स्कूल लगातार 5 शैक्षणिक वर्षों से पहले अपनी वर्दी में बदलाव नहीं करेंगे।

नए एडमिशन लेने वाले बच्चों के लिए ज़रूरी बात

शिक्षा विभाग के निदेशक जे गणेशन का कहना है कि प्राइवेट स्कूल किसी विशिष्ट शैक्षणिक सत्र में किसी कक्षा, ग्रेड या स्तर पर नए एडमिशन के इच्छुक छात्रों के लिए नियमानुसार फ़ीस निर्धारित करने में स्वतंत्र होंगे। परंतु आगामी वर्षों के लिए नए नियम के अनुसार ही वृद्धि होगी। स्कूलों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उसके द्वारा अर्जित आय का उपयोग केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

शिकायत मिलने पर कमेटी करेगी जांच

फ़ीस वृद्धि क़ानून की अवहेलना की शिकायत मिलने पर फ़ीस रेगुलेटरी कमेटी जांच करेगी, जिसमें स्कूल और शिकायतकर्ता को सुनवाई का उचित अवसर दिया जाएगा। जांच का दायरा तीन माह तक सीमित होगा। जांच में दोषी मिलने पर कमेटी स्कूल पर जुर्माना भी लगा सकती है। पहली शिकायत में क़ानून की अवहेलना साबित होने पर प्राथमिक स्कूलों पर 30 हज़ार, मिडिल स्तर के स्कूलों पर 50 हज़ार और माध्यमिक व वरिष्ठ माध्यमिक स्तर के स्कूलों पर एक लाख रुपए जुर्माना लगाया जा सकता है।

दूसरी शिकायत में क़ानून की अवहेलना साबित होने पर प्राथमिक स्कूलों पर 60 हज़ार, मिडिल स्तर के स्कूलों पर एक लाख और माध्यमिक व वरिष्ठ माध्यमिक स्तर के स्कूलों पर दो लाख रुपए जुर्माना किया जा सकता है। तीसरी शिकायत में क़ानून की अवहेलना साबित होने पर कमेटी स्कूल की मान्यता वापस लेने के लिए निदेशक को सिफ़ारिश कर सकती है, जिसके बारे में तीन मास के भीतर सुनवाई होगी।

स्कूलों को भी अपील करने का अधिकार

कमेटी के किसी आदेश के ख़िलाफ़ निदेशक को भी अपील करने का अधिकार है। निदेशक के किसी आदेश के ख़िलाफ़ अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव शिक्षा विभाग को अपील की जा सकती है। दंड के भुगतान के बाद ही अपील प्राधिकारी को की जा सकती है। अगर अपील की सुनवाई के दौरान अवहेलना आदेश निरस्त कर दिया गया है तो वह भुगतान स्कूल को वापस कर दिया जाएगा। अपील केवल 30 दिनों के भीतर की जा सकती है।

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