Nepal Floods Death Toll 2026: Nepal के रसूवा जिले में 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई भयानक बाढ़ के बाद तबाही का मंजर बरकरार है। नेपाल पुलिस के अनुसार अब तक 616 मृत शरीर बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 2,301 लोगों को घायल हालत में रेस्क्यू करके बचाया गया है।
हैरान करने वाली बात यह है कि सबसे ज्यादा 233 मौतें चितवन जिले में हुई हैं। इसके अलावा नवलपरासी (पूर्व) में 158, गोरखा में 48, नवलपरासी (पश्चिम) में 47, धादिंग में 45, नुवाकोट में 41, तनहुं में 31 और रसूवा में 13 लोगों की जान गई है।
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बचाव अभियान में जुटे हजारों जवान
देखा जाए तो यह नेपाल के इतिहास में सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से पुलिस ने नुवाकोट से 1,422, रसूवा से 676 और धादिंग से 3 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है।
राहत और बचाव कार्यों के लिए कुल 4,811 पुलिस जवानों को तैनात किया गया है। यह सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमें दिन-रात काम कर रही हैं।
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मुर्दाघरों में जगह की भारी कमी
समझने वाली बात यह है कि देश भर के मुर्दाघरों में सिर्फ 350 लाशें रखने की क्षमता है जबकि अब तक 616 शव बरामद हो चुके हैं। इस कारण लाशों की शिनाख्त और संभाल में भारी दिक्कतें आ रही हैं।
चितवन और पोखरा के अस्पतालों में जगह कम होने के कारण प्रशासन को एयर कंडीशन वातावरण वाले अस्थायी केंद्र बनाने पड़े हैं। यह दर्शाता है कि तबाही का स्तर कितना बड़ा है।
जिलेवार मृतकों का आंकड़ा
| जिला | मृतकों की संख्या | बचाए गए लोग |
|---|---|---|
| Chitwan | 233 | – |
| Nawalparasi (पूर्व) | 158 | – |
| Nuwakot | 41 | 1,422 |
| Gorkhा | 48 | – |
| Nawalparasi (पश्चिम) | 47 | – |
| Dhading | 45 | 3 |
| Tanhun | 31 | – |
| Rasuwa | 13 | 676 |
| कुल | 616 | 2,301+ |
मौसम की खराबी से बचाव कार्य प्रभावित
चिंता का विषय यह है कि कई क्षेत्रों में लगातार पड़ रही भारी बारिश और नदी के बढ़ते स्तर के कारण बचाव कार्यों को अस्थायी तौर पर रोकना पड़ा है। हेलीकॉप्टर सेवाएं भी ठप हो गई हैं।
अगर गौर करें तो खराब मौसम की वजह से कई गांव अभी भी कटे हुए हैं। वहां पहुंचना मुश्किल है और यह आशंका है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।
नदी के आसपास के इलाके खाली कराए जा रहे
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रशासन ने नदी के आसपास के इलाकों को खाली कराना शुरू कर दिया है। खराब मौसम को देखते हुए यह एक सही कदम है क्योंकि किसी भी समय फिर से बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
दूसरी ओर, काठमांडू और मुगलिंग के बीच सड़क यातायात को पूरी तरह बहाल कर दिया गया है। यह राहत की बात है क्योंकि अब राहत सामग्री आसानी से पहुंचाई जा सकती है।
अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत
दिलचस्प बात यह है कि इतनी बड़ी आपदा से निपटने के लिए नेपाल को अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत है। भारत, चीन और दूसरे पड़ोसी देशों ने मदद का भरोसा दिलाया है।
उम्मीद की किरण यह है कि अगले कुछ दिनों में मौसम सुधरने की संभावना है। इससे बचाव कार्यों में तेजी आएगी और बाकी लापता लोगों को ढूंढा जा सकेगा।
क्यों आई इतनी भयानक बाढ़?
विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार तीन दिनों तक हुई भारी बारिश के कारण भोटेकोशी नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर से ऊपर चला गया। इससे तटबंध टूट गए और पानी बस्तियों में घुस गया।
इसके अलावा, पहाड़ी इलाकों में हुए भूस्खलन ने नदी के प्रवाह को रोक दिया, जिससे अचानक बहुत ज्यादा पानी एक साथ बहने लगा। यही कारण रहा कि लोगों को चेतावनी देने का समय नहीं मिला।
मुख्य बातें (Key Points):
• Nepal में भोटेकोशी नदी की बाढ़ से अब तक 616 मौतें
• सबसे ज्यादा 233 मौतें Chitwan जिले में
• 2,301 लोगों को घायल हालत में बचाया गया
• 4,811 पुलिस जवान बचाव कार्यों में लगे हुए
• मुर्दाघरों में सिर्फ 350 लाशों की क्षमता, AC केंद्र बनाए गए
• काठमांडू-मुगलिंग सड़क बहाल












