नई दिल्ली (New Delhi), 31 जनवरी (The News Air) भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना (Sanjiv Khanna) न्यायपालिका में ऐतिहासिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं। देशभर की अदालतों में वर्षों से लंबित पड़े मामलों के तेजी से निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा 1 फरवरी को एक महत्वपूर्ण सम्मेलन (Conference) आयोजित किया जाएगा।
इस सम्मेलन में न्यायिक प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने, डिजिटल सुधारों को अपनाने, और शाम की अदालतें (Evening Courts) शुरू करने जैसे कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। वर्तमान में, सुप्रीम कोर्ट (SC) में 82,445 से अधिक मामले लंबित हैं, जबकि देशभर की निचली अदालतों में लाखों केस पेंडिंग हैं।
शाम की अदालतों का प्रस्ताव – न्यायिक प्रक्रिया में नया मोड़?
इस सम्मेलन में, न्यायपालिका के कई विशेषज्ञ शाम की अदालतें (Evening Courts) शुरू करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर सकते हैं। यह कदम उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है जो दिन के समय कानूनी प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकते। यदि इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिलती है, तो यह भारतीय न्याय प्रणाली के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव साबित हो सकता है।
चार सत्रों में होगी न्यायिक सुधारों पर चर्चा
यह सम्मेलन चार प्रमुख सत्रों (Sessions) में विभाजित होगा, जिनमें न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने और लंबित मामलों के निपटारे की रणनीतियों पर चर्चा होगी।
➤ पहला सत्र: (National Court Management System Review)
- CJI संजीव खन्ना (Sanjiv Khanna) इस सत्र की अध्यक्षता करेंगे।
- 2024 के लिए राष्ट्रीय न्यायालय प्रबंधन प्रणाली (NCMS) की समीक्षा होगी।
- लंबित मामलों की संख्या कम करने की रणनीतियों पर चर्चा होगी।
- शाम की अदालतें (Evening Courts) शुरू करने की व्यवहार्यता पर विचार होगा।
- वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए नए सुझाव दिए जाएंगे।
➤ दूसरा सत्र: (Technology in Judiciary)
- न्यायमूर्ति भूषण आर गवई (Justice Bhushan R. Gavai) अध्यक्षता करेंगे।
- डिजिटल कोर्ट (Digital Courts) का विस्तार और ई-फाइलिंग प्रणाली (E-Filing System) को बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
- वर्चुअल कोर्ट (Virtual Courts) के प्रभावी उपयोग के लिए नई योजनाओं पर विचार होगा।
- वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Conferencing) को न्यायिक प्रक्रिया में अधिक प्रभावी रूप से लागू करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
➤ तीसरा सत्र: (Human Resource & Judiciary Management)
- न्यायमूर्ति सूर्यकांत (Justice Surya Kant) इस सत्र का नेतृत्व करेंगे।
- न्यायिक अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर चर्चा होगी।
- स्थायी आईटी और डेटा कैडर (Permanent IT & Data Cadre) बनाने के लिए प्रस्ताव पेश किए जाएंगे।
➤ चौथा सत्र: (Judicial Training & Development)
- CJI संजीव खन्ना (Sanjiv Khanna) फिर से इस सत्र की अध्यक्षता करेंगे।
- वकीलों (Lawyers) और न्यायिक अधिकारियों (Judicial Officers) के प्रशिक्षण कार्यक्रम को मजबूत करने की रणनीति बनाई जाएगी।
- पूरे देश में न्यायिक प्रशिक्षण (Judicial Training) के लिए एक समान पाठ्यक्रम तैयार करने पर विचार किया जाएगा।
शीर्ष न्यायाधीश होंगे शामिल
इस ऐतिहासिक सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के वरिष्ठ न्यायाधीश, हाई कोर्ट (High Court) के मुख्य न्यायाधीश, और जिला न्यायपालिका (District Judiciary) के अनुभवी जज शामिल होंगे। इस सूची में न्यायमूर्ति अभय एस ओक (Justice Abhay S. Oka), न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना (Justice BV Nagarathna), न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता (Justice Dipankar Datta), न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा (Justice PS Narasimha), न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन (Justice KV Viswanathan), न्यायमूर्ति जेके महेश्वरी (Justice JK Maheshwari), न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया (Justice Sudhanshu Dhulia), न्यायमूर्ति विक्रम नाथ (Justice Vikram Nath), न्यायमूर्ति एमएम सुंद्रेश (Justice MM Sundresh), और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी (Justice Bela M. Trivedi) शामिल हैं।
क्या होगा इस सम्मेलन का प्रभाव?
यह सम्मेलन भारतीय न्यायपालिका (Indian Judiciary) में ऐतिहासिक सुधार लाने के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। शाम की अदालतों (Evening Courts) की शुरुआत और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसी पहलें भारतीय न्यायिक प्रक्रिया को अधिक तेज और पारदर्शी बना सकती हैं। यदि ये सुधार लागू होते हैं, तो इससे लाखों लंबित मामलों का जल्द निपटारा संभव हो सकता है।








