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The News Air - Breaking News - Ladki Bahin Yojana: 73 लाख महिलाओं को लगा झटका, देखें नई लिस्ट

Ladki Bahin Yojana: 73 लाख महिलाओं को लगा झटका, देखें नई लिस्ट

महाराष्ट्र सरकार ने ई-केवाईसी सत्यापन के बाद योजना से बड़े पैमाने पर नाम हटाए, जानें क्या है पूरा मामला

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
मंगलवार, 2 जून 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, काम की बातें
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Ladki Bahin Yojana
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Ladki Bahin Yojana: महाराष्ट्र की चर्चित मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना को लेकर बड़ा उलटफेर सामने आया है। राज्य सरकार द्वारा चलाए गए ई-केवाईसी सत्यापन अभियान के बाद करीब 73 लाख महिलाओं के नाम योजना की सूची से बाहर कर दिए गए हैं। यह आंकड़ा चौंकाने वाला है, क्योंकि कुछ महीने पहले तक इस योजना का लाभ लेने वाली महिलाओं की संख्या 2 करोड़ 40 लाख से अधिक थी। लेकिन अब यह घटकर महज 1 करोड़ 70 लाख रह गई है।

देखा जाए तो, यह कटौती राज्य सरकार की उस मुहिम का नतीजा है जिसके तहत केवल पात्र महिलाओं को ही योजना का लाभ देने का फैसला लिया गया था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खुद इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि 80 लाख लाभार्थियों को योजना से बाहर किया गया है। उन्होंने बताया कि जांच में पता चला कि इनमें से 14,000 लाभार्थी तो पुरुष थे, 5 लाख सरकारी कर्मचारी थे, 10 लाख आयकर दाता थे और 4 से 5 लाख ऐसे लोग थे जिनके पास चार पहिया वाहन था।

सवाल उठता है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में अपात्र लोग इस योजना में कैसे शामिल हो गए? और क्या सरकार की यह कार्रवाई वाकई पारदर्शिता लाने के लिए है या इसके पीछे कोई और मकसद है?

🔍 यह भी पढ़ें- Ladki Bahin Yojana: महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम

ई-केवाईसी अभियान: सत्यापन का सबसे बड़ा दौर

महाराष्ट्र सरकार ने सितंबर 2025 में एक विशेष ई-केवाईसी अभियान की शुरुआत की थी, जो अप्रैल 2026 के अंत तक चला। इस दौरान सभी लाभार्थियों की जानकारी और पात्रता की दोबारा जांच की गई।

अगर गौर करें, तो यह अभियान सिर्फ औपचारिकता नहीं था। बल्कि इसमें परिवहन विभाग के रिकॉर्ड, आयकर विभाग के डेटा, और अन्य सरकारी योजनाओं के डेटाबेस को भी खंगाला गया। यानी, cross-verification की एक मजबूत प्रक्रिया अपनाई गई।

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दिलचस्प बात यह है कि जांच में सबसे ज्यादा नाम ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी न करने के कारण कटे। करीब 50 लाख महिलाओं ने समय पर ई-केवाईसी पूरी नहीं की या फिर सत्यापन के दौरान उनके दस्तावेज़ नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए।

🔍 यह भी पढ़ें- Hostel में Suitcase से निकली Ladki! Sonepat की University में Film जैसा Drama

आय सीमा से बाहर निकले 12 लाख परिवार

योजना के नियमों के मुताबिक, लाभार्थी परिवार की सालाना आय ₹2.5 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए। लेकिन सत्यापन में करीब 12 लाख महिलाओं के परिवार इस सीमा से ऊपर पाए गए।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि कई परिवारों ने शुरुआती आवेदन के समय अपनी आय कम दिखाई थी, लेकिन जब आयकर विभाग और अन्य सरकारी रिकॉर्ड से मिलान किया गया, तो असलियत सामने आ गई। इसी वजह से उनका लाभ बंद कर दिया गया।

समझने वाली बात है कि सरकार की यह कार्रवाई उन गरीब और वास्तविक जरूरतमंद महिलाओं को राहत देने के लिए है, जिन्हें इस ₹1500 मासिक सहायता की सबसे ज्यादा जरूरत है।

चार पहिया वाहन मालिकों पर शिकंजा

सरकार ने परिवहन विभाग के रिकॉर्ड भी खंगाले। जांच में लगभग 5 लाख महिलाओं या उनके परिवारों के पास चार पहिया वाहन पाए गए।

योजना के नियमों के तहत, ऐसे परिवार पात्रता की श्रेणी में नहीं आते। इसलिए उनके नाम भी सूची से हटा दिए गए। और बस यहीं से शुरू हुई असली सफाई।

कई लोगों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कुछ परिवारों के पास पुरानी गाड़ियां हो सकती हैं जो चलती भी नहीं हैं। लेकिन सरकार का तर्क साफ है – नियम सभी के लिए एक समान।

दोहरे लाभ पर सख्ती: नमो शेतकरी योजना से जुड़ीं 5 लाख महिलाएं बाहर

योजना से बाहर होने वाली महिलाओं में वे भी शामिल हैं जो पहले से किसी अन्य सरकारी सहायता योजना का लाभ ले रही थीं। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 5 लाख महिलाएं नमो शेतकरी योजना से लाभान्वित हो रही थीं, जिसके चलते उन्हें इस योजना से अपात्र माना गया।

यह नीति सरकार की “एक परिवार, एक योजना” की सोच को दर्शाती है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था कुछ जरूरतमंद परिवारों को नुकसान भी पहुंचा सकती है।

उम्र सीमा का उल्लंघन: 4.5 लाख महिलाएं अयोग्य

उम्र सीमा भी कई महिलाओं के लिए बाधा बनी। जांच में करीब 4.5 लाख महिलाएं निर्धारित अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष से अधिक पाई गईं। नियमों के अनुसार, ऐसी महिलाओं को भी योजना से बाहर कर दिया गया।

योजना का लाभ 21 से 65 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं को दिया जाता है। लेकिन कई बार आवेदन के समय उम्र में हेराफेरी की गई थी, जो अब सामने आई है।

14,000 पुरुष भी ले रहे थे लाभ!

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि 14,000 लाभार्थी तो पुरुष ही थे। यह कैसे संभव हुआ?

दरअसल, कई जगह फर्जी दस्तावेजों के सहारे या तकनीकी खामियों का फायदा उठाते हुए पुरुषों के नाम पर भी आवेदन किए गए थे। जब अलग-अलग डाटाबेस से दस्तावेजों की जांच की गई, तो यह गड़बड़ी पकड़ में आई।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

5 लाख सरकारी कर्मचारी और 10 लाख आयकर दाता भी शामिल

जांच में यह भी पता चला कि 5 लाख सरकारी कर्मचारी और 10 लाख आयकर दाता इस योजना का लाभ ले रहे थे। यह साफ तौर पर नियमों का उल्लंघन था।

सरकारी कर्मचारियों को एक निश्चित वेतन मिलता है, और आयकर दाता वे होते हैं जिनकी आय कर योग्य सीमा से अधिक होती है। ऐसे में, इन्हें इस कल्याणकारी योजना का लाभ देना न्यायसंगत नहीं था।

शिकायतें भी आईं: पात्र महिलाओं को भी परेशानी

हालांकि, दूसरी तरफ कई महिलाओं ने शिकायत भी की है कि ई-केवाईसी और दस्तावेज़ सत्यापन पूरे होने के बावजूद उनके खातों में राशि नहीं पहुंच रही है।

प्रशासन का कहना है कि ऐसे मामलों की अलग से जांच की जा रही है और तकनीकी समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। कुछ मामलों में बैंक खाते से जुड़ी समस्याएं हैं, तो कुछ में आधार लिंकिंग का मुद्दा।

राहत की बात यह है कि सरकार ने आश्वासन दिया है कि किसी भी पात्र महिला को वंचित नहीं किया जाएगा।

क्या है मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना?

मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना महाराष्ट्र सरकार की प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं में शामिल है। इसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना, उनकी सामाजिक भागीदारी बढ़ाना और परिवार में उनकी भूमिका को सशक्त करना है।

इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹1500 की वित्तीय सहायता सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। सालाना आधार पर देखें तो यह ₹18,000 की मदद होती है, जो एक गरीब परिवार के लिए काफी मायने रखती है।

पारदर्शिता या राजनीति? विपक्ष के सवाल

विपक्षी दलों ने इस बड़े पैमाने की कटौती पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि यह कदम राजनीतिक है और सरकार चुनाव से पहले लोकप्रिय हुई योजना को अब कमजोर कर रही है।

हालांकि, सरकार का पक्ष साफ है। उनका कहना है कि सत्यापन अभियान का मकसद किसी पात्र महिला को वंचित करना नहीं है, बल्कि योजना में पारदर्शिता लाना है और गलत तरीके से लाभ लेने वालों को चिह्नित करना है।

इससे साफ होता है कि सरकार की नीयत साफ है, लेकिन क्रियान्वयन में कुछ चुनौतियां जरूर हैं।

आगे क्या होगा?

आने वाले समय में भी लाभार्थियों के रिकॉर्ड की नियमित समीक्षा जारी रह सकती है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि हर छह महीने में एक बार लाभार्थियों का सत्यापन किया जाएगा।

इसका मतलब यह है कि यदि कोई परिवार बाद में आय सीमा को पार कर जाता है या उसकी आर्थिक स्थिति में सुधार होता है, तो उसे योजना से बाहर किया जा सकता है।

यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करने के लिए है कि योजना का लाभ वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक ही पहुंचे।

लाभार्थियों के लिए क्या करना जरूरी?

जिन महिलाओं के नाम अभी भी सूची में हैं, उन्हें नियमित रूप से अपनी ई-केवाईसी अपडेट करते रहना चाहिए। साथ ही, यदि किसी को लगता है कि उनका नाम गलती से हटा दिया गया है, तो वे संबंधित विभाग में शिकायत दर्ज करा सकती हैं।

सरकार ने एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है, जहां लाभार्थी अपनी समस्याओं की जानकारी दे सकते हैं।


मुख्य बातें (Key Points)

• महाराष्ट्र की लाडकी बहिन योजना से 73 लाख महिलाओं के नाम हटाए गए, लाभार्थी संख्या 2.40 करोड़ से घटकर 1.70 करोड़ रह गई

• सबसे ज्यादा 50 लाख महिलाएं ई-केवाईसी पूरी न करने के कारण बाहर हुईं, जबकि 12 लाख आय सीमा से अधिक पाए जाने पर हटाईं गईं

• मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि 14,000 पुरुष, 5 लाख सरकारी कर्मचारी और 10 लाख आयकर दाता भी इस योजना का गलत लाभ ले रहे थे

• योजना के तहत 21-65 वर्ष की महिलाओं को ₹1500 प्रति माह मिलते हैं, लेकिन परिवार की वार्षिक आय ₹2.5 लाख से कम होनी चाहिए


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: लाडकी बहिन योजना से नाम क्यों हटाए गए?

उत्तर: ई-केवाईसी पूरी न करना, आय सीमा से अधिक होना, चार पहिया वाहन होना, अन्य सरकारी योजना का लाभ लेना और उम्र सीमा से बाहर होना मुख्य कारण हैं।

प्रश्न 2: अगर मेरा नाम गलती से हटा दिया गया है तो क्या करूं?

उत्तर: आप संबंधित विभाग में शिकायत दर्ज करा सकती हैं और सरकार द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकती हैं। सभी दस्तावेज़ों के साथ पुनः आवेदन करें।

प्रश्न 3: लाडकी बहिन योजना में कितनी राशि मिलती है?

उत्तर: इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹1500 की वित्तीय सहायता सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है, यानी सालाना ₹18,000।

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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