मद्रास हाई कोर्ट (Madras HC) की तरफ से सुनाए गए खंडित फैसले के मद्देनजर हाई कोर्ट ने मंगलवार को अदालत को निर्देश दिया कि वह तमिलनाडु (Tamil Nadu) के गिरफ्तार मंत्री वी सेंथिल बालाजी (Senthil Balaji) की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को “जल्द से जल्द” तीन जजों के सामने रखे। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से ये भी कहा कि बालाजी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर नई बेंच जल्द से जल्द फैसला ले।
इससे पहले दिन में मद्रास हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने बालाजी की याचिका पर खंडित आदेश दिया था। जस्टिस जे. निशा बानू और जस्टिस डी. भरत चक्रवर्ती ने बालाजी की पत्नी की ओर से अपने पति को कथित तौर पर ‘अवैध तरीके से हिरासत’ में लिए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया। जस्टिस जे. निशा बानू ने बालाजी को रिहा करने को कहा, तो जस्टिस डी. भरत चक्रवर्ती ने इससे असहमति जताई।
इसके बाद खंडपीठ ने रजिस्ट्री को मुख्य न्यायाधीश के सामने मामला रखने का निर्देश दिया ताकि इसे तीन जजों वाली बेंच के सामने रखा जाए।
सुनवाई की शुरुआत में प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत की बेंच से कहा कि क्योंकि हाई कोर्ट ने खंडित फैसला सुनाया है, इसलिए मामले को अंतिम फैसले के लिए शीर्ष अदालत में ट्रांसफर किया जाना चाहिए।
बालाजी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि एक खंडपीठ के खंडित फैसले के बाद, मामला तीन जजों की बेंच के सामने रखा गया है और उन्होंने मेहता के अनुरोध का विरोध किया।
बेंच ने कहा कि वह हाई कोर्ट से कानून के सवालों पर जल्द से जल्द फैसला देने का अनुरोध करेगी और मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को तय की।
बालाजी को राहत देते हुए शीर्ष अदालत ने 21 जून को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की अपील के बावजूद उन्हें इलाज के लिए एक प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति देने वाले मद्रास हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
ED ने राज्य के परिवहन विभाग में कथित नौकरी के बदले नकदी घोटाले के सिलसिले में बालाजी को गिरफ्तार किया था। उसने मद्रास हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था।
47 साल के बालाजी की बुधवार को चेन्नई के एक प्राइवेट अस्पताल में कोरोनरी बाईपास सर्जरी की गई और बताया जाता है कि उनकी हालत ठीक है।








