Jharkhand LPG Cylinder Strike Distributors: अगर आप झारखंड में रहते हैं और एलपीजी रसोई गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। आने वाले महीनों में झारखंड के कई हिस्सों में एलपीजी गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत और सप्लाई की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (LDAI) के देशव्यापी आह्वान पर राज्य के एलपीजी डीलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स अगले महीने से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। इस संभावित हड़ताल के चलते झारखंड के साहिबगंज समेत कई जिलों में घरों तक पहुंचने वाले रसोई गैस सिलेंडरों की होम डिलीवरी और रिफिल सप्लाई पूरी तरह से ठप रहने की आशंका जताई जा रही है।
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आंदोलन की पूरी रूपरेखा और तारीखों को लेकर एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन ने स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है। डिस्ट्रीब्यूटर्स अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 26 अक्टूबर को देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर एक विशाल धरना-प्रदर्शन करने जा रहे हैं।
26 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर धरना
दिल्ली के इस बड़े प्रदर्शन के दौरान ही डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन की ओर से पूरे देश और राज्य में पूर्ण हड़ताल के आधिकारिक तारीखों का औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा।
साहिबगंज जिले की ही बात करें तो यहां कुल 15 गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स हैं, जिनके पास लगभग 2,60,000 से अधिक पंजीकृत उपभोक्ता मौजूद हैं। वहीं पूरे देश में इन डिस्ट्रीब्यूटर्स की संख्या लगभग 26,000 के आसपास है।
दिलचस्प बात यह है कि अगर हड़ताल लंबी खींचती है तो आम नागरिकों की रसोई का बजट और पूरी तरह से रोजाना का खाना पकाने का चक्र बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है।
चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति
दरअसल, एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स अपनी मांगों को लेकर अचानक सड़क पर नहीं उतरे हैं, बल्कि यह पिछले कुछ महीनों से चरणबद्ध तरीके से अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष बी सिंह के मुताबिक, राज्यभर में गैस वितरक 1 सितंबर से ही अलग-अलग तरीकों से विरोध दर्ज कर रहे हैं।
आंदोलन के पहले चरण में सभी डिस्ट्रीब्यूटर्स ने काली पट्टी बांधकर अपना विरोध प्रकट किया। इसके बाद दूसरे चरण में राष्ट्रपति के नाम अपनी मांगों का एक ज्ञापन जिले के उपायुक्तों यानी DC को सौंपा गया।
6 अक्टूबर से ‘नो मनी नो इंडेंट’ अभियान
अब आंदोलन को और तेज करते हुए 6 अक्टूबर को डिस्ट्रीब्यूटर्स ‘नो मनी नो इंडेंट’ अभियान चलाने की तैयारी में हैं। इसके तहत डीलर कंपनियों के पास पैसा जमा नहीं करेंगे और न ही बॉटलिंग प्लांट से सिलेंडरों का उठाव करेंगे, जिससे सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ सकता है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह अभियान सीधे तौर पर उपभोक्ताओं को प्रभावित करेगा क्योंकि जब डिस्ट्रीब्यूटर्स प्लांट से सिलेंडर नहीं उठाएंगे, तो घरों तक डिलीवरी रुक जाएगी।
डिस्ट्रीब्यूटर्स की मुख्य मांगें
अब सवाल उठता है कि आखिर एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स की मुख्य मांगें क्या हैं, जिसके लिए वह हड़ताल पर जाने को मजबूर हैं?
पहली मांग – डिलीवरी शुल्क में बढ़ोतरी:
डिस्ट्रीब्यूटर्स की सबसे पहली और बड़ी मांग यह है कि पिछले काफी समय से रुके हुए प्रशासनिक शुल्क और होम डिलीवरी शुल्क में तुरंत बढ़ोतरी की जाए। बढ़ती महंगाई के कारण गैस सिलेंडरों की घर-घर डिलीवरी की लागत काफी बढ़ गई है।
दूसरी मांग – e-KYC का मेहनताना:
सरकार द्वारा अनिवार्य किए गए उपभोक्ता e-KYC के लिए डिस्ट्रीब्यूटर्स को अलग से मेहनताना या शुल्क दिया जाए।
तीसरी मांग – कमर्शियल सामान बेचने का दबाव बंद हो:
ऑयल कंपनियों द्वारा गैस डीलरों पर दूसरे कमर्शियल सामान बेचने का जो अनुचित दबाव बनाया जाता है, उसे पूरी तरह बंद किया जाए।
आम जनता पर असर
अगर गौर करें तो यह हड़ताल सीधे तौर पर आम आदमी की रसोई को प्रभावित करेगी। झारखंड के लाखों परिवार जो रोजाना LPG गैस पर निर्भर हैं, उन्हें खाना पकाने में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
खासकर शहरी इलाकों में जहां लकड़ी या चूल्हे का विकल्प नहीं है, वहां यह हड़ताल बड़ी मुसीबत बन सकती है। त्योहारों के सीजन में यह समस्या और भी गंभीर हो सकती है।
सरकार और कंपनियों से अपेक्षा
डिस्ट्रीब्यूटर्स का कहना है कि उनकी मांगें उचित हैं और महंगाई के इस दौर में उनके लिए व्यवसाय चलाना मुश्किल हो गया है। उन्हें उम्मीद है कि 26 अक्टूबर के धरने के बाद सरकार और तेल कंपनियां उनकी बात सुनेंगी।
हालांकि, अभी तक सरकार या तेल कंपनियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मुख्य बातें (Key Points)
• झारखंड में एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स अनिश्चितकालीन हड़ताल की तैयारी में
• 26 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना, उसके बाद हड़ताल की तारीख का ऐलान
• 1 सितंबर से चरणबद्ध आंदोलन चल रहा, 6 अक्टूबर से ‘नो मनी नो इंडेंट’ अभियान
• मुख्य मांग – डिलीवरी शुल्क में बढ़ोतरी, e-KYC का मेहनताना और कमर्शियल दबाव बंद हो












