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The News Air - Breaking News - Jammu Landslide Breaking News: NH-44 पूरी तरह बंद, भारी तबाही

Jammu Landslide Breaking News: NH-44 पूरी तरह बंद, भारी तबाही

जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर करोल ब्रिज और चंद्रकोट के बीच भारी भूस्खलन हुआ। हिंगनी-शालगढ़ी सुरंग क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित। सैकड़ों वाहन फंसे। प्रशासन ने यात्रियों को अनावश्यक सफर से बचने की सलाह दी।

The News Air Team by The News Air Team
सोमवार, 6 अप्रैल 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय
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Jammu Landslide
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Jammu Landslide Breaking News की ताजा जानकारी के अनुसार NH-44 (Jammu-Srinagar National Highway) पर भारी तबाही का माहौल है। पहाड़ों से भारी पत्थर गिरने और मिट्टी खिसकने से सड़क के दोनों तरफ का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। फिलहाल जम्मू से श्रीनगर जाने वाली और श्रीनगर से जम्मू आने वाली दोनों तरफ की गाड़ियां जहां की तहां रुकी हुई हैं।

करोल ब्रिज और चंद्रकोट के बीच हुए इस भूस्खलन ने पूरे क्षेत्र में अफरातफरी मचा दी है। प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है और मलबा हटाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। लेकिन लगातार हो रही बारिश और गिरते पत्थरों की वजह से राहत कार्य में रुकावट आ रही है। अगर आप आज Jammu-Srinagar मार्ग पर सफर करने की सोच रहे हैं तो सावधान हो जाइए।

करोल ब्रिज-चंद्रकोट सेक्शन में भारी तबाही

Jammu Landslide की सबसे गंभीर स्थिति करोल ब्रिज और चंद्रकोट के बीच देखी गई है। यहां पहाड़ों से भारी पत्थर और मलबा सड़क पर आ गिरा है। कई टन वजनी चट्टानें राजमार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर चुकी हैं।

सड़क के दोनों तरफ का रास्ता ब्लॉक होने से सैकड़ों वाहन फंस गए हैं। यात्रियों को खुले आसमान के नीचे घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को खासी परेशानी हो रही है। स्थानीय लोग यात्रियों को पानी और खाने की व्यवस्था में मदद कर रहे हैं।

हिंगनी-शालगढ़ी सुरंग क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित

NH-44 पर हिंगनी और शालगढ़ी सुरंग क्षेत्र भूस्खलन से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। सुरंग क्षेत्रों के आसपास पत्थर गिरने और मिट्टी धंसने की घटनाएं भी सामने आई हैं। यह इलाका भौगोलिक रूप से संवेदनशील माना जाता है।

सुरंग के पास भूस्खलन खासतौर पर खतरनाक है क्योंकि यहां बचाव कार्य में देरी हो सकती है। प्रशासन ने दोनों सुरंगों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। केवल आपातकालीन वाहनों को ही सुरक्षा जांच के बाद जाने की अनुमति दी जा रही है।

मेहर के पास भी रास्ता बाधित

इसके अलावा मेहर के पास भी भूस्खलन होने से रास्ता बाधित हुआ है। यह इलाका रामबन जिले में आता है जो पिछले कुछ वर्षों में बार-बार भूस्खलन की चपेट में आ चुका है। मिट्टी की अस्थिर परत और भारी बारिश इसका मुख्य कारण है।

मेहर सेक्शन में कई ट्रक और यात्री वाहन घंटों से फंसे हुए हैं। ड्राइवर और यात्री थक चुके हैं। प्रशासन ने यहां भी राहत शिविर लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। स्थानीय प्रशासन यात्रियों को आश्वस्त कर रहा है कि जल्द ही रास्ता साफ हो जाएगा।

भारी बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें

Weather Update के अनुसार जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। लगातार हो रही बारिश की वजह से मिट्टी नरम हो गई है और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।

रामबन जिले के कई इलाकों में यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पहाड़ी इलाकों में विजिबिलिटी भी कम हो गई है, जिससे राहत कार्य में दिक्कत आ रही है। मौसम का खराब मिजाज भूस्खलन के लिए सबसे बड़ा कारण बना हुआ है।

प्रशासन की चेतावनी: फेक न्यूज से बचें

प्रशासन ने सलाह दी है कि सोशल मीडिया पर चल रही किसी भी गलत जानकारी पर भरोसा न करें। कई लोग अफवाहें फैला रहे हैं जिससे अनावश्यक घबराहट हो रही है। आधिकारिक सूचनाओं के लिए ट्रैफिक कंट्रोल रूम या जिला प्रशासन की वेबसाइट देखें।

Highway Authority ने एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है जहां यात्री वर्तमान स्थिति की जानकारी ले सकते हैं। किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या एडमिनिस्ट्रेशन से संपर्क करें। सही जानकारी ही सुरक्षा की पहली शर्त है।

मलबा हटाने में जुटी मशीनें

Highway Authority और प्रशासन मलबा हटाने के काम में जुटे हुए हैं। भारी मशीनें और जेसीबी लगातार काम कर रही हैं। लेकिन लगातार हो रही बारिश और गिरते पत्थरों की वजह से काम में रुकावट आ रही है।

कई जगहों पर मलबा इतना ज्यादा है कि उसे हटाने में कई घंटे लग सकते हैं। राहत कार्य में लगे कर्मचारियों की जान को भी खतरा बना हुआ है क्योंकि कभी भी दोबारा पत्थर गिर सकते हैं। फिर भी प्रशासन पूरी ताकत से काम कर रहा है।

सैकड़ों वाहन फंसे, यात्री परेशान

फिलहाल सैकड़ों ट्रक और यात्री वाहन रास्ते में फंसे हुए हैं। कई परिवार जो श्रीनगर घूमने जा रहे थे, वे बीच रास्ते में अटक गए हैं। बच्चे रो रहे हैं और बुजुर्गों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो रही हैं।

कुछ यात्रियों के पास खाने-पीने का सामान खत्म हो गया है। जम्मू और श्रीनगर दोनों तरफ से प्रशासन राहत सामग्री भेज रहा है। स्थानीय लोग भी हर संभव मदद कर रहे हैं। लेकिन लंबे इंतजार ने यात्रियों को बेहद परेशान कर दिया है।

यात्रियों के लिए सुरक्षा सलाह

यात्रियों को सलाह दी गई है कि सफर करने से पहले मौसम का मिजाज देख लें और अगर आवश्यक न हो तो यात्रा करने से बचें। अगर यात्रा जरूरी है तो पर्याप्त खाना-पानी, दवाइयां और गर्म कपड़े साथ रखें।

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रात में यात्रा करने से बचें क्योंकि अंधेरे में भूस्खलन का पता नहीं चलता। हमेशा अपने मोबाइल फोन चार्ज रखें और परिवार को अपनी लोकेशन बताते रहें। वाहन में फर्स्ट एड किट जरूर रखें। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ इस समय यात्रा से बचना ही बेहतर है।

NH-44 की रणनीतिक अहमियत

Jammu-Srinagar National Highway केवल एक सड़क नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर की जीवनरेखा है। यह राजमार्ग घाटी को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। सेना की आवाजाही के लिए भी यह सड़क बेहद महत्वपूर्ण है।

इस राजमार्ग पर रोजाना हजारों वाहन चलते हैं। व्यापारियों के लिए यह एकमात्र जमीनी मार्ग है। अगर यह सड़क लंबे समय तक बंद रही तो श्रीनगर और अन्य इलाकों में आवश्यक सामानों की किल्लत हो सकती है। इसलिए प्रशासन इसे जल्द से जल्द खोलने में जुटा है।

भूस्खलन क्यों हो रहा है?

रामबन जिला भौगोलिक रूप से बेहद संवेदनशील है। यहां पहाड़ों की मिट्टी कमजोर है और भारी बारिश में खिसक जाती है। NH-44 के निर्माण और विस्तार के दौरान पहाड़ों में ब्लास्टिंग हुई थी, जिससे चट्टानें अस्थिर हो गई हैं।

जलवायु परिवर्तन के कारण बेमौसम भारी बारिश हो रही है। पेड़ों की कटाई से मिट्टी को पकड़ने वाली जड़ें नहीं रहीं। विकास परियोजनाओं में पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों की अनदेखी भी एक बड़ा कारण है। इन सभी कारणों से भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं।

दीर्घकालिक समाधान की जरूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि अब केवल मलबा हटाने से काम नहीं चलेगा। पहाड़ों को स्थिर करने के लिए रॉक बोल्टिंग और शॉटक्रीटिंग जैसी तकनीकें अपनाई जानी चाहिए। बरसात के मौसम से पहले संभावित खतरनाक जगहों की पहचान कर वहां सुरक्षा उपाय करने होंगे।

अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाना बेहद जरूरी है ताकि भूस्खलन से पहले यात्रियों को सचेत किया जा सके। पहाड़ों पर हरियाली बढ़ाने और वनीकरण को बढ़ावा देना होगा। सरकार को इस पर गंभीरता से काम करना होगा अन्यथा यह समस्या बढ़ती ही जाएगी।

जानें पूरा मामला

पिछले 24 घंटों में जम्मू-कश्मीर में भारी से अत्यधिक भारी बारिश हुई है। मौसम विभाग ने पहले ही चेतावनी जारी की थी, लेकिन बारिश की तीव्रता अनुमान से ज्यादा रही। रात भर हुई बारिश ने पहाड़ों की मिट्टी को ढीला कर दिया।

सुबह करीब 6 बजे करोल ब्रिज के पास पहली बार पत्थर गिरने की सूचना मिली। धीरे-धीरे भूस्खलन का दायरा बढ़ता गया और कई जगहों पर सड़क अवरुद्ध हो गई। प्रशासन ने तुरंत दोनों तरफ से यातायात रोक दिया। सुबह 10 बजे तक स्थिति पूरी तरह बिगड़ चुकी थी और NH-44 पूरी तरह बंद हो गया।

मुख्य बातें (Key Points)
  • NH-44 पर करोल ब्रिज-चंद्रकोट सेक्शन में भारी Jammu Landslide
  • हिंगनी-शालगढ़ी सुरंग क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित, दोनों तरफ ट्रैफिक पूरी तरह बंद
  • मेहर के पास भी भूस्खलन, सैकड़ों वाहन फंसे
  • रामबन जिले में भारी बारिश जारी, मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया
  • प्रशासन ने सोशल मीडिया पर फेक न्यूज से सावधान रहने की सलाह दी
  • मलबा हटाने का काम युद्ध स्तर पर जारी लेकिन बारिश से रुकावट
  • यात्रियों को अनावश्यक सफर से बचने की सलाह दी गई है

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: Jammu-Srinagar Highway कब खुलेगा?

उत्तर: प्रशासन मलबा हटाने में जुटा है लेकिन लगातार बारिश और पत्थर गिरने से काम में रुकावट आ रही है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, अगर मौसम सुधरा तो अगले 12-24 घंटों में कुछ सेक्शन खोले जा सकते हैं। यात्रियों को सलाह है कि यात्रा से पहले ट्रैफिक कंट्रोल रूम से संपर्क करें।

प्रश्न 2: NH-44 पर सबसे ज्यादा भूस्खलन कहां हुआ है?

उत्तर: NH-44 पर सबसे गंभीर स्थिति करोल ब्रिज-चंद्रकोट सेक्शन, हिंगनी-शालगढ़ी सुरंग क्षेत्र और मेहर के पास है। ये तीनों जगहें रामबन जिले में हैं जो भौगोलिक रूप से संवेदनशील इलाका है। यहां भारी मात्रा में पत्थर और मलबा गिरा है जिसे हटाने में समय लग रहा है।

प्रश्न 3: फंसे हुए यात्रियों के लिए क्या व्यवस्था है?

उत्तर: प्रशासन राहत शिविर लगा रहा है और फंसे यात्रियों को खाना-पानी मुहैया करा रहा है। स्थानीय लोग भी मदद कर रहे हैं। मेडिकल टीमें मौके पर तैनात हैं। आपातकालीन स्थिति में हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क किया जा सकता है। बीमार और बुजुर्गों को प्राथमिकता के आधार पर वैकल्पिक मार्ग से भेजने की कोशिश की जा रही है।

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