ISRO Bihar Lightning Warning System: बिहार में अब आसमानी बिजली गिरने की घटनाओं से होने वाली जनहानि को कम करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपना हाथ बढ़ा दिया है। मंगलवार को बिहार विधान परिषद में “न्यू फ्रंटियर टेक्नोलॉजी इन स्पेस” विषय पर आयोजित एक विशेष सत्र में इसरो के निदेशक नीलेश एस देसाई ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसरो जल्द ही राज्य में एक ऐसा उन्नत (एडवांस) सिस्टम स्थापित करेगा, जो बिजली गिरने से लगभग एक से डेढ़ घंटे पहले सटीक चेतावनी दे सकेगा। यह तकनीक न सिर्फ लोगों की जान बचाने में मददगार होगी, बल्कि संपत्ति के नुकसान को भी काफी हद तक कम करेगी।
अपने संबोधन में नीलेश देसाई ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में हुई प्रगति, नई तकनीकों और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से कम लागत में उपग्रह (सैटेलाइट) प्रक्षेपण के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है। एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) तेजी और कम लागत में लॉन्च कर रही है, वहीं नासा (NASA) के सहयोग से अंतरिक्ष मिशनों की गति और बढ़ी है। इसके बावजूद, भारत आने वाले समय में और अधिक सस्ते और उच्च गुणवत्ता वाले उपग्रह प्रक्षेपण की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।
बिहार के लिए ISRO की बड़ी योजनाएं
नीलेश देसाई ने बताया कि बिहार के लिए इसरो की कई अहम योजनाएं हैं। राज्य में मौसम सेवाओं को मजबूत करना, आपदा प्रबंधन प्रणाली को बेहतर बनाना और प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना इसरो की प्राथमिकताओं में शामिल है। इस कड़ी में सबसे बड़ी पहल आकाशीय बिजली से सुरक्षा को लेकर है। इसरो, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) के साथ मिलकर इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। बिजली गिरने से पहले मिलने वाली चेतावनी से लोग समय रहते सुरक्षित स्थानों पर जा सकेंगे, जिससे मौतों की संख्या में भारी कमी आएगी।
इसके अलावा, बड़े आयोजनों, खासकर धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए भी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (स्पेस टेक्नोलॉजी) का इस्तेमाल किया जाएगा। उपग्रह तस्वीरों और डेटा के जरिए भीड़ की आवाजाही पर नजर रखी जा सकेगी, जिससे किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने में मदद मिलेगी।
छात्रों के लिए खास पहल: स्टूडेंट स्पेस लैब
इसरो ने बिहार के युवाओं में विज्ञान और अंतरिक्ष के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए भी एक महत्वपूर्ण योजना शुरू की है। निदेशक ने बताया कि राज्य में ‘स्टूडेंट स्पेस लैब’ (Student Space Lab) स्थापित करने की योजना है। इस लैब का उद्देश्य छात्रों को अंतरिक्ष अनुसंधान और नई तकनीकों से जोड़ना है, जिससे भविष्य में युवा वैज्ञानिक और शोधकर्ता तैयार हो सकें। यह पहल बिहार के छात्रों के लिए एक सुनहरा अवसर साबित होगी, जिससे वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकेंगे।
नीलेश देसाई ने स्पष्ट किया कि इसरो अब सिर्फ अंतरिक्ष मिशनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संगठन राज्यों के विकास, आपदा प्रबंधन और शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी तकनीक का विस्तार कर रहा है। बिहार में शुरू की जाने वाली ये परियोजनाएं इसी दिशा में एक बड़ा कदम हैं। आने वाले समय में इन तकनीकों का लाभ आम नागरिकों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे जीवन अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
ISRO बिहार में बिजली गिरने से एक घंटे पहले चेतावनी देने वाला एडवांस सिस्टम लगाएगा।
यह परियोजना बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) के सहयोग से शुरू की जाएगी।
धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन के लिए भी अंतरिक्ष तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
राज्य में छात्रों के लिए ‘स्टूडेंट स्पेस लैब’ स्थापित करने की योजना है, जिससे विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ेगी।
ISRO अब राज्यों के विकास और आपदा प्रबंधन में भी अपनी तकनीक का विस्तार कर रहा है।








