Iran THAAD Radar Destroyed : ईरान ने वो कर दिखाया है जिसे दुनिया असंभव मान रही थी। अमेरिका जिस डिफेंस सिस्टम को लेकर सबसे ज्यादा गर्व करता था, ईरान ने उसी की आंखें फोड़ दी हैं। बात हो रही है THAAD (Terminal High Altitude Area Defense) के रडार सिस्टम की, जिसे दुनिया का सबसे बेहतरीन बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम माना जाता है। जॉर्डन के मुआफक सालती एयरबेस में तैनात इस रडार सिस्टम की कीमत करीब 300 मिलियन डॉलर (लगभग 2,500 करोड़ रुपये) है और इसे ईरान ने तबाह कर दिया है। दुनिया भर में THAAD की सिर्फ सात से आठ बैटरीज मौजूद हैं, ऐसे में एक का भी नष्ट होना अमेरिका के लिए बेहद बड़ा झटका है।
THAAD क्या है: दुनिया का सबसे ताकतवर मिसाइल डिफेंस सिस्टम
Iran THAAD Radar Destroyed की खबर को समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर THAAD है क्या और यह इतना खास क्यों माना जाता है। THAAD का फुल फॉर्म है Terminal High Altitude Area Defense, यानी यह एक ऐसा सिस्टम है जो दुश्मन देश की बैलिस्टिक मिसाइलों को उनकी उड़ान के आखिरी चरण (टर्मिनल फेज) में नष्ट कर देता है। इसे लॉकहीड मार्टिन ने यूनाइटेड स्टेट्स मिसाइल डिफेंस एजेंसी के लिए बनाया है।
किसी भी बैलिस्टिक मिसाइल की उड़ान तीन चरणों में होती है। पहला चरण है बूस्ट फेज, जब मिसाइल लॉन्च होकर अपनी स्पीड बढ़ाती है। दूसरा चरण है मिड-कोर्स फेज, जब मिसाइल वायुमंडल से बाहर निकलकर अंतरिक्ष में यात्रा करती है। और तीसरा चरण है टर्मिनल फेज, जब मिसाइल वापस वायुमंडल में प्रवेश करके अपने लक्ष्य पर गिरती है। THAAD इसी आखिरी चरण में मिसाइल को नष्ट करने की क्षमता रखता है।
150 किलोमीटर की ऊंचाई तक मार: कोई मुकाबला नहीं
Iran THAAD Radar Destroyed की खबर इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि THAAD की क्षमताएं किसी भी दूसरे डिफेंस सिस्टम से कहीं आगे हैं। यह सिस्टम पृथ्वी की सतह से 150 किलोमीटर की ऊंचाई तक जाकर मिसाइल को नष्ट कर सकता है। तुलना के लिए देखें तो भारत का S-400 सिस्टम मुश्किल से 30 से 40 किलोमीटर की ऊंचाई तक जा सकता है, इजराइल का मशहूर आयरन डोम सिर्फ 10 किलोमीटर तक, और अमेरिका का ही पैट्रियट PAC-3 सिस्टम 20 से 30 किलोमीटर तक। यानी THAAD इन सबसे कई गुना ऊंचाई तक जाकर मिसाइल को खत्म कर सकता है।
THAAD की रेंज लगभग 200 किलोमीटर है और इसकी स्पीड मैक 8 से ज्यादा यानी ध्वनि की गति से 8 गुना तेज है, जो लगभग 9,000 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। एक THAAD इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत 12 से 15 मिलियन डॉलर आती है और पूरी बैटरी का खर्च करीब 1 बिलियन डॉलर (लगभग 8,500 करोड़ रुपये) है।
हिट-टू-किल टेक्नोलॉजी: सीधी टक्कर से तबाही
THAAD को बाकी डिफेंस सिस्टम से जो चीज सबसे अलग बनाती है वो है इसकी “हिट-टू-किल” टेक्नोलॉजी। पुराने डिफेंस सिस्टम में क्या होता था कि डिफेंस मिसाइल दुश्मन की मिसाइल के पास जाकर खुद ब्लास्ट होती थी ताकि उसके टुकड़े और धमाके से दुश्मन की मिसाइल नष्ट हो जाए। लेकिन THAAD इससे बिल्कुल अलग काम करता है। इसकी मिसाइल सीधे दुश्मन की मिसाइल से जाकर टकराती है और सिर्फ काइनेटिक एनर्जी यानी टक्कर की ऊर्जा से ही टारगेट को पूरी तरह तबाह कर देती है। इसके लिए किसी विस्फोटक की जरूरत नहीं होती।
THAAD की पूरी बैटरी में कई कॉम्पोनेंट होते हैं। इसमें इंटरसेप्टर मिसाइलें होती हैं, जो हर लॉन्चर में आठ-आठ लगी रहती हैं और बेहद मैन्यूवरेबल होती हैं यानी किसी भी दिशा में, जिगजैग तरीके से, जैसे भी जरूरत हो, मुड़कर जा सकती हैं। फिर ट्रक-माउंटेड लॉन्चर होते हैं जिन्हें कहीं भी ले जाया जा सकता है, बिल्कुल S-400 की तरह। फायर कंट्रोल एंड कम्यूनिकेशन यूनिट होती है जो पूरे सिस्टम को कोऑर्डिनेट करती है। लेकिन इन सबमें सबसे महत्वपूर्ण है रडार सिस्टम, जो इस पूरे सिस्टम की आंख है और ईरान ने इसी आंख को फोड़ दिया है।
AN/TPY-2 रडार: THAAD की आंख जिसे ईरान ने तबाह किया
Iran THAAD Radar Destroyed की कहानी का केंद्र है AN/TPY-2 रडार, जिसे “आइज ऑफ THAAD” यानी THAAD की आंखें कहा जाता है। यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली मोबाइल बैटरी रडार्स में से एक है। इसे रेथियॉन टेक्नोलॉजीज ने डेवलप किया है और इसकी कीमत करीब 300 मिलियन डॉलर है। इसकी डिटेक्शन रेंज 800 से 1,000 किलोमीटर है, यानी अगर 1,000 किलोमीटर दूर से भी कोई मिसाइल आपकी तरफ आ रही है तो यह रडार उसे पकड़ लेगा।
यह रडार एक्स-बैंड फेज्ड एरे टेक्नोलॉजी पर काम करता है, जो इसे कई मायनों में खास बनाती है। पहली बात, इसका रिजोल्यूशन बेहद हाई है। एक्स-बैंड फ्रीक्वेंसी पर काम करने की वजह से यह छोटी से छोटी मिसाइल को भी डिटेक्ट कर लेता है। दूसरी बात, यह असली वॉरहेड और डिकॉय (नकली मिसाइल) में फर्क कर सकता है, ताकि दुश्मन कोई धोखा न दे सके। तीसरी बात, आम रडार गोल-गोल घूमकर स्कैन करते हैं, लेकिन यह रडार हजारों इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमीटर्स का इस्तेमाल करता है जिससे यह बिना घूमे ही एक साथ कई दिशाओं में नजर रख सकता है और मल्टीपल टारगेट्स को एक साथ डिटेक्ट कर सकता है।
जॉर्डन का मुआफक सालती एयरबेस: यहां तैनात था THAAD रडार
Iran THAAD Radar Destroyed की खबर में एक अहम सवाल यह है कि यह रडार सिस्टम कहां तैनात था। यह रडार जॉर्डन के मुआफक सालती एयरबेस पर डिप्लॉय किया गया था। जॉर्डन अमेरिका का मित्र देश है और अमेरिका ने जानबूझकर यहां THAAD रडार तैनात किया था ताकि पूरे मिडिल ईस्ट रीजन को सुरक्षा कवर मिल सके। इस रडार के जरिए अमेरिका को पता चल जाता था कि कहां से मिसाइल लॉन्च हो रही है, कितनी मिसाइलें आ रही हैं और उनका लक्ष्य क्या है। यह रीजनल मिसाइल सर्विलांस का सबसे बड़ा हथियार था।
हालांकि अमेरिका ने अभी तक आधिकारिक रूप से इस बात की पुष्टि नहीं की है कि THAAD रडार नष्ट हुआ है, लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में यह खबर सामने आ रही है कि ईरान ने इसे तबाह कर दिया है।
ईरान ने कैसे तबाह किया: तीन संभावित तरीके
Iran THAAD Radar Destroyed कैसे हुआ, इसके तीन संभावित तरीके सामने आ रहे हैं। पहला तरीका है बैलिस्टिक मिसाइल अटैक। ईरान के पास फतेह-110 और जुल्फिकार जैसी बैलिस्टिक मिसाइलें हैं जिनकी रेंज 300 किलोमीटर से लेकर 2,000 किलोमीटर तक है। इनसे सीधे रडार सिस्टम पर हमला किया जा सकता है।
दूसरा तरीका है क्रूज मिसाइल अटैक। ईरान के पास सोमार और पावे जैसी क्रूज मिसाइलें हैं। क्रूज मिसाइलों की खासियत यह है कि ये जमीन के काफी करीब यानी बहुत कम ऊंचाई पर उड़ती हैं, जिसकी वजह से इन्हें रडार से डिटेक्ट करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
तीसरा और सबसे संभावित तरीका है ड्रोन स्वार्म अटैक। ईरान के पास शाहिद-136 जैसे ड्रोन हैं जिनकी रेंज 2,000 किलोमीटर से ज्यादा है और कीमत सिर्फ 20,000 से 50,000 डॉलर के आसपास है। ईरान की रणनीति यह होती है कि वह एक साथ 25 से 100 ड्रोन लॉन्च कर देता है। जब इतनी बड़ी संख्या में ड्रोन एक साथ आते हैं तो रडार सिस्टम ओवरवेल्म हो जाता है, यानी वह तय ही नहीं कर पाता कि किसे पहले रोके और किसे बाद में। हाल ही में दुबई और मिडिल ईस्ट के अन्य हिस्सों में जो हमले हुए हैं, उनमें भी ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है, इसलिए संभावना यही ज्यादा है कि ड्रोन स्वार्म अटैक से ही THAAD रडार को तबाह किया गया।
रडार को ही क्यों बनाया जाता है पहला निशाना
Iran THAAD Radar Destroyed की खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि किसी भी जंग में रडार सिस्टम सबसे पहला और सबसे जरूरी निशाना होता है। रडार किसी भी डिफेंस सिस्टम की आंख होता है। अगर सामने वाले दुश्मन के पास रडार ही नहीं होगा तो वह पहचान ही नहीं पाएगा कि कितनी मिसाइलें लॉन्च हो रही हैं, कहां से आ रही हैं और कहां गिरने वाली हैं। रडार खत्म करो तो बाकी पूरा डिफेंस सिस्टम अंधा हो जाता है।
इसका ताजा उदाहरण ऑपरेशन सिंदूर में भी देखने को मिला, जब भारत ने पाकिस्तान के लाहौर में तैनात चीनी डिफेंस सिस्टम के रडार को पूरी तरह उड़ा दिया था। इससे भारत को पाकिस्तान की रक्षा प्रणाली में एक बड़ा रास्ता मिल गया था। ठीक उसी तरह ईरान ने अमेरिका की आंख फोड़कर अपने लिए रास्ता खोल लिया है।
दुनिया में सिर्फ 7-8 THAAD बैटरीज: एक का नष्ट होना कितना बड़ा नुकसान
Iran THAAD Radar Destroyed इसलिए भी रेयर और चर्चा का विषय है क्योंकि पूरी दुनिया में THAAD बैटरीज की संख्या बेहद सीमित है। वर्तमान में दक्षिण कोरिया, जापान, गुआम, मिडिल ईस्ट और अमेरिका में मिलाकर कुल सात से आठ THAAD बैटरीज तैनात हैं। अगर इनमें से एक भी नष्ट होती है तो यह अमेरिका के लिए एक बड़ा स्ट्रेटेजिक नुकसान है, क्योंकि नई बैटरी बनाने में समय, अरबों डॉलर और भारी तकनीकी मेहनत लगती है।
तीन बड़े स्ट्रेटेजिक नतीजे: अमेरिका के लिए खतरे की घंटी
Iran THAAD Radar Destroyed के तीन बड़े स्ट्रेटेजिक नतीजे निकलते हैं। पहला, अमेरिका का मिसाइल डिफेंस कमजोर हो गया है। THAAD सिस्टम अमेरिका के मिलिट्री बेसेस, इजराइल, जॉर्डन और गल्फ देशों के सहयोगियों को मिसाइल हमलों से बचाने का काम करता था। अब यह सुरक्षा कवच कमजोर पड़ गया है।
दूसरा, एयर स्पेस खुल गया है। जब मिसाइल डिफेंस का रडार ही डिसेबल हो गया तो ईरानी मिसाइलों के लिए दुश्मन देश में घुसने के रास्ते और आसान हो गए हैं। अब ईरान की मिसाइलों के पास इस रीजन में पेनिट्रेट करने की बहुत ज्यादा संभावनाएं बन गई हैं।
तीसरा और शायद सबसे बड़ा नतीजा है साइकोलॉजिकल वॉरफेयर। 300 मिलियन डॉलर का सिस्टम, दुनिया का सबसे एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम, जिस पर अमेरिका को सबसे ज्यादा गर्व था, अगर ईरान ने उसे नष्ट कर दिया तो यह मनोवैज्ञानिक रूप से अमेरिका और उसके सहयोगियों पर भारी दबाव बनाता है। यह संदेश पूरी दुनिया में गया है कि ईरान की मिसाइल ताकत को कम आंकना खतरनाक हो सकता है।
भारत के लिए क्या सबक: S-400 की सीमाएं और THAAD का सच
Iran THAAD Radar Destroyed की घटना भारत जैसे देशों के लिए भी एक बड़ा सबक है। भारत ने रूस से S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदा है, जिसकी अधिकतम ऊंचाई 30 किलोमीटर तक है। THAAD 150 किलोमीटर तक जाकर मिसाइल नष्ट कर सकता था, फिर भी ईरान ने उसे तबाह कर दिया। इससे साफ है कि कोई भी डिफेंस सिस्टम अजेय नहीं है और ड्रोन स्वार्म जैसी सस्ती तकनीक महंगे से महंगे सिस्टम को भी बेकार कर सकती है। आधुनिक युद्ध में रडार सिस्टम की सुरक्षा उतनी ही जरूरी है जितनी खुद मिसाइल डिफेंस, और यह बात हर देश को गंभीरता से लेनी होगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- THAAD रडार तबाह: ईरान ने जॉर्डन के मुआफक सालती एयरबेस में तैनात 300 मिलियन डॉलर के AN/TPY-2 रडार सिस्टम को नष्ट कर दिया, जो THAAD की आंख माना जाता है और जिसकी डिटेक्शन रेंज 800-1000 किलोमीटर है।
- दुनिया का सबसे ताकतवर सिस्टम: THAAD 150 किलोमीटर ऊंचाई तक मिसाइल नष्ट कर सकता है, जबकि आयरन डोम सिर्फ 10 किलोमीटर, पैट्रियट PAC-3 सिर्फ 20-30 किलोमीटर और S-400 सिर्फ 30 किलोमीटर तक जा सकता है।
- सिर्फ 7-8 बैटरीज: पूरी दुनिया में THAAD की बेहद सीमित संख्या में बैटरीज हैं, एक का नष्ट होना अमेरिका के लिए भारी स्ट्रेटेजिक नुकसान है।
- तीन संभावित तरीके: ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइल (फतेह-110, जुल्फिकार), क्रूज मिसाइल (सोमार, पावे) या शाहिद-136 ड्रोन स्वार्म अटैक से रडार तबाह किया हो सकता है।








