Iran Nuclear Threat ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। पश्चिम एशिया में तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने साफ शब्दों में कह दिया है कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो वह परमाणु बम बनाएगा और जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल भी करेगा। यह धमकी ऐसे वक्त आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा कर रहे थे कि सीजफायर वेंटिलेटर पर है। देखा जाए तो इस बयान ने वैश्विक शांति के लिए नया खतरा खड़ा कर दिया है।
तेहरान की यह धमकी केवल शब्दों तक सीमित नहीं है। ईरानी संसद के प्रवक्ता इब्राहिम रिजाई ने खुलेआम कहा है कि उनके पास पहले से ही 440 किलो यूरेनियम मौजूद है जो 60% तक एनरिच्ड है। परमाणु बम बनाने के लिए इसे बस 90% तक एनरिच करना होगा। और यहां ध्यान देने वाली बात है कि यह काम ईरान कुछ ही दिनों में पूरा कर सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि जहां एक तरफ अमेरिका ईरान पर दबाव बना रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान ने बातचीत के लिए पांच सख्त शर्तें रख दी हैं। इन शर्तों में युद्ध को हर स्तर पर खत्म करना, सभी प्रतिबंध हटाना, फ्रीज संपत्ति जारी करना, युद्ध के आर्थिक नुकसान की भरपाई और सबसे महत्वपूर्ण – स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर ईरान के अधिकार को मान्यता देना शामिल है।
ईरान की परमाणु धमकी ने दुनिया को किया सतर्क
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। अगर गौर करें तो ट्रंप प्रशासन जहां सीजफायर की बात कर रहा था, वहीं ईरान ने बातचीत से ज्यादा अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने पर जोर दिया है। ईरानी संसद प्रवक्ता इब्राहिम रिजाई का बयान साफ संदेश देता है कि तेहरान अब पीछे हटने के मूड में नहीं है।
रिजाई ने कहा, “अगर ईरान पर दोबारा हमला होता है तो हम अपने यूरेनियम का 90% संवर्धन भी कर सकते हैं। इस पर संसद में समीक्षा की जाएगी।” यह बयान सुनकर ट्रंप प्रशासन ने इसे ईरान का डर बताया है। लेकिन समझने वाली बात यह है कि पर्दे के पीछे अमेरिका खुद इस धमकी से घबराया हुआ दिख रहा है।
वाशिंगटन चाहता है कि ईरान अपना एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को सौंप दे। लेकिन तेहरान सीधे बातचीत तक करने को तैयार नहीं है। ईरान की पांच शर्तें ऐसी हैं जिन्हें मानने से अमेरिका साफ मना कर चुका है। ऐसे में यह टकराव और गहराता नजर आ रहा है।
सऊदी अरब और यूएई भी शामिल थे ईरान पर हमले में
अब तक यही माना जा रहा था कि ईरान पर सिर्फ अमेरिका और इजराइल ने हमला किया था। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि अब खुलासा हुआ है कि सऊदी अरब और यूएई भी इस युद्ध में सीधे शामिल थे।
वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक यूएई ने भी ईरान पर हवाई हमले किए थे। वहीं अब यह भी सामने आया है कि सऊदी वायुसेना ने मार्च के आखिर में ईरान के कई ठिकानों को निशाना बनाया था। दोनों देशों ने इस बारे में अब तक चुप्पी साध रखी है।
दावा किया जा रहा है कि तेहरान ने पहले सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे, जिसके जवाब में सऊदी अरब ने यह कार्रवाई की। यह जानकारी साफ करती है कि अगर दोबारा युद्ध शुरू होता है तो इसमें सऊदी अरब और यूएई भी सीधे शामिल हो सकते हैं।
कुवैत पर भी ईरान का हमला, बूबियन आइलैंड पर झड़प
सीजफायर के दौरान भी ईरान शांत नहीं बैठा है। कुवैत सरकार ने दावा किया है कि आईआरजीसी (इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के लड़ाकों ने बूबियन आइलैंड पर घुसपैठ की कोशिश की थी। यहां कुवैत की सेना और ईरानी लड़ाकों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुई।
बूबियन आइलैंड कुवैत का सबसे बड़ा द्वीप है। यह फारस की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम कोने में स्थित है और इसका क्षेत्रफल करीब 333 वर्ग मील है। कुवैत की सुरक्षा के लिए यह द्वीप बेहद अहम माना जाता है। यहां अमेरिका के अस्थाई सैन्य बेस होने की भी चर्चा है।
फायरिंग में कुवैत आर्मी के एक जवान के घायल होने की जानकारी मिली है। यह घटना बताती है कि ईरान सीजफायर के बावजूद अपनी आक्रामक रणनीति पर कायम है। जंग के दौरान ईरान ने कुवैत पर करीब 1500 हमले किए थे, जो यूएई के बाद सबसे ज्यादा थे।
ईरान की सैन्य तैयारियां युद्ध की ओर इशारा
ईरान केवल मौखिक धमकियां नहीं दे रहा, बल्कि जमीन पर भी पूरी तैयारी कर चुका है। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने समुद्र में 15 से 20 गदीर क्लास की पनडुब्बियां उतार दी हैं। इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में ईरान ने पहले से माइंस बिछा रखे हैं।
अगर युद्ध शुरू होता है तो ईरान और तेजी से हॉर्मुज जलडमरूमध्य में माइंस बिछा सकता है। इससे यहां से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो जाएगी। और बस यहीं से शुरू होगी दुनिया के लिए असली मुसीबत।
ईरान के विदेश मंत्री ने कुछ दिन पहले बयान दिया था कि सीजफायर के दौरान ईरान ने अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमता पहले से ज्यादा बढ़ा ली है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हॉर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान की 33 मिसाइल साइट्स में से 30 को फिर से तैयार कर लिया गया है।
इन साइट्स पर अमेरिका और इजराइल ने जबरदस्त हमले किए थे। लेकिन अब ईरान ने इन्हें पहले से ज्यादा सुरक्षित बना लिया है। इन ठिकानों पर अब मोबाइल लांचर का इस्तेमाल हो सकता है, जिनसे मिसाइलों को दूसरी जगह ले जाकर दागा जा सकता है।
ट्रंप की चीन यात्रा और ईरान मुद्दा
इस पूरे तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन की यात्रा पर रवाना हो गए हैं। 13 से 15 मई तक ट्रंप चीन में रहेंगे और इस दौरान वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे।
यह यात्रा केवल व्यापारिक डील तक सीमित नहीं रहेगी। कहा जा रहा है कि ट्रंप ईरान के मुद्दे पर भी शी जिनपिंग से विस्तार से बात करेंगे। क्योंकि इस वक्त ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के चलते वैश्विक तेल बाजार में भारी चिंता है।
ट्रंप ने चीन रवाना होने से पहले कहा, “हम राष्ट्रपति शी के साथ कई अलग-अलग चीजों पर बात करेंगे। सबसे ज्यादा यह व्यापार पर होगी। शी जिनपिंग मेरे दोस्त रहे हैं। यह बहुत रोमांचक यात्रा होने वाली है।”
ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप ने आगे कहा, “हम इस पर लंबी बात करेंगे। लेकिन मुझे नहीं लगता कि हमें ईरान के मामले में किसी की मदद की जरूरत है। हम किसी ना किसी तरह जीतेंगे ही। उनकी नेवी खत्म हो चुकी है। उनकी वायुसेना खत्म हो चुकी है।”
ट्रंप ने धमकी देते हुए आगे कहा, “ईरान को अब सही रास्ता चुनना होगा। वरना अमेरिका कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है।”
चीन ने खींची चार रेड लाइन
लेकिन ट्रंप की इस यात्रा से पहले चीन ने अपनी चार रेड लाइन साफ कर दी हैं। बीजिंग ने कहा है कि इन्हें किसी भी हालत में चुनौती नहीं दी जानी चाहिए।
चीन की चार रेड लाइन:
| क्रमांक | रेड लाइन |
|---|---|
| 1 | ताइवान का सवाल |
| 2 | लोकतंत्र और मानव अधिकार |
| 3 | चीन का राजनीतिक सिस्टम |
| 4 | चीन के विकास का अधिकार |
यानी चीन ने सीधे तौर पर चेतावनी दे दी है कि ये मुद्दे उसके लिए संवेदनशील हैं। सवाल उठता है कि क्या चीन अमेरिका की मदद करेगा? क्योंकि पिछले कुछ सालों से दोनों देशों के बीच तनाव काफी गहरा रहा है। ऐसे में इस बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रूस की सरमात मिसाइल ने बढ़ाई अमेरिका की चिंता
जब दुनिया ईरान-अमेरिका तनाव पर ध्यान केंद्रित किए हुए है, तब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक और चौंकाने वाला ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि इस साल के अंत तक रूस अपनी नई सरमात रणनीतिक परमाणु मिसाइल तैनात करेगा।
यह मिसाइल दुनिया की सबसे शक्तिशाली मिसाइल होगी जिसकी काट किसी के पास नहीं है। पुतिन ने बताया कि रूस सरमात मिसाइल का सफल परीक्षण कर चुका है जिसकी रेंज 35,000 किलोमीटर है।
सरमात मिसाइल की खासियतें:
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| रेंज | 35,000 किलोमीटर |
| पेलोड क्षमता | 10 मेट्रिक टन |
| परमाणु बम | 15 से 20 एक साथ |
| तकनीक | MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल रीएंट्री व्हीकल) |
| कवरेज | पूरे यूरोप, एशिया, अफ्रीका और अमेरिकी महाद्वीप |
राहत की बात नहीं है कि एक सरमात मिसाइल अपने साथ दर्जनों परमाणु वॉरहेड ले जा सकती है और इन्हें अलग-अलग ठिकानों पर दाग सकती है। यानी रूस अगर मॉस्को से इस मिसाइल को दागे तो यह पूरे यूरोप के साथ एशिया, अफ्रीका और अमेरिकी महाद्वीप में कहीं भी हमला कर सकती है।
इस मिसाइल की काट अमेरिका के पास भी नहीं है। सिर्फ हवा ही नहीं, पानी में भी रूस ने अमेरिका पर बढ़त बना ली है। रूस का न्यूक्लियर टॉर्पिडो ‘पोसाइडन’ भी चर्चा में आ गया है जो समुद्र में सुनामी लेकर आ सकता है।
पोसाइडन टॉर्पिडो: समुद्र में तबाही का हथियार
रूस के पोसाइडन टॉर्पिडो की ताकत को पुतिन ने अपनी सरमात मिसाइल से भी ज्यादा बताया है। इस सुपर टॉर्पिडो के विस्फोट से 500 मीटर तक ऊंची रेडियोधर्मी लहरें उठ सकती हैं जो पूरे शहरों को समुद्र में डुबो देंगी और सदियों तक रेडिएशन फैलाएगी।
यह टॉर्पिडो लगभग 70 नॉट्स यानी 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है। 1 किलोमीटर तक गहराई में जा सकता है और मिनिएचर न्यूक्लियर रिएक्टर की वजह से इसकी रेंज लगभग अनलिमिटेड है।
इसे ले जाने वाली पनडुब्बी खबरोस्का अब रूसी आर्कटिक के सेवरोदस् शिपयार्ड में फिटिंग के आखिरी चरण में है। खबरोस्का और पोसाइडन का यह मेल अमेरिका के लिए बड़ी चिंता बन गया है।
वेनेजुएला की रहस्यमयी मैराकाइबो झील
चलते-चलते एक दिलचस्प बात। क्या आप ऐसी जगह की कल्पना कर सकते हैं जहां रात होते ही हजारों बार बिजलियां गिरती हों? दरअसल दुनिया में वाकई एक ऐसी जगह है जहां ताबड़तोड़ बिजलियां गिरती हैं।
हम बात कर रहे हैं वेनेजुएला की मैराकाइबो झील की। यहां बिजली गिरना कोई कुदरती इत्तेफाक नहीं बल्कि हर रात का नियम है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यहां एक ही रात में हजारों बार बिजली गिरती है। इसे स्थानीय लोग ‘कैटा टुंबो लाइटनिंग’ कहते हैं।
इसका राज छिपा है यहां की भौगोलिक बनावट में। इस झील के तीन तरफ ऊंचे पहाड़ हैं। पहाड़ों से आने वाली ठंडी हवा जब झील की गर्म और नम हवा से मिलती है तो धमाका होता है। यह झील एक तूफान जनरेटर की तरह काम करती है।
पहले लोग मानते थे कि अफ्रीका का कांगो सबसे ज्यादा बिजली वाला इलाका है। लेकिन NASA के नए सैटेलाइट डाटा ने सच सामने ला दिया। अब मैराकाइबो झील वो जगह बन चुकी है जहां सबसे ज्यादा बिजलियां गिरती हैं।
हैरानी की बात यह है कि जहां पूरी दुनिया में बिजली दिन की गर्मी से पैदा होती है और रात को शांत हो जाती है, वहीं इस झील में यह नजारा रात को ही देखने को मिलता है। वैज्ञानिकों के लिए यह जलवायु और मौसम समझने का सबसे बड़ा जरिया है।
इस संकट का आम आदमी पर क्या असर?
ईरान-अमेरिका तनाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर दुनिया भर के आम लोगों पर पड़ेगा। अगर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद हो जाता है तो दुनिया की 21% तेल आपूर्ति रुक जाएगी। इससे पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू सकते हैं।
युद्ध का मतलब है वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी असर। भारत जैसे देशों को जो अपनी तेल जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करते हैं, उन्हें भारी नुकसान हो सकता है। इसके अलावा परमाणु युद्ध की स्थिति में तो पूरी दुनिया को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
चिंता का विषय यह है कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन बंद करे। वहीं ईरान की मांग है कि पहले प्रतिबंध हटाए जाएं और नुकसान की भरपाई की जाए।
आगे क्या होगा?
इस वक्त जब सीजफायर सिर्फ कागजों पर चल रहा है, एक छोटी सी गलती बड़ी जंग का रूप ले सकती है। और जिस तरह से ईरान ने अब परमाणु बम की धमकी दी है, उससे यह पूरी दुनिया को महायुद्ध में झोंक सकती है जिसका नतीजा आने वाली पीढ़ियों को भी भुगतना पड़ सकता है।
ट्रंप की चीन यात्रा से शायद कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन चीन की चार रेड लाइन और अमेरिका की सख्त स्थिति के बीच समझौता आसान नहीं दिखता। सवाल यह है कि क्या चीन मध्यस्थता करेगा या फिर अमेरिका अकेले ही ईरान से निपटने की कोशिश करेगा?
दूसरी ओर, रूस की बढ़ती सैन्य ताकत ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। सरमात मिसाइल और पोसाइडन टॉर्पिडो के साथ रूस ने अमेरिका और यूरोप के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
ऐसे में अगले कुछ हफ्ते बेहद अहम होंगे। दुनिया की नजरें ट्रंप-शी मुलाकात पर टिकी हैं। क्या यह बैठक शांति का रास्ता खोल पाएगी या फिर स्थिति और बिगड़ेगी, यह वक्त ही बताएगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- ईरान ने धमकी दी है कि अमेरिकी हमले की स्थिति में वह परमाणु बम बनाएगा और इसका इस्तेमाल भी करेगा
- ईरान के पास पहले से 440 किलो यूरेनियम मौजूद है जो 60% तक एनरिच्ड है, इसे 90% तक एनरिच करने में कुछ दिन ही लगेंगे
- सऊदी अरब और यूएई ने भी ईरान पर हमले किए थे, यह जानकारी पहली बार सामने आई है
- ईरान ने बातचीत के लिए पांच सख्त शर्तें रखी हैं जिनमें प्रतिबंध हटाना और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर अधिकार शामिल है
- डोनाल्ड ट्रंप चीन दौरे पर हैं और शी जिनपिंग से ईरान मुद्दे पर बात करेंगे
- रूस ने 35,000 किलोमीटर रेंज वाली सरमात मिसाइल तैयार की है जो 15-20 परमाणु बम एक साथ ले जा सकती है
- ईरान ने समुद्र में 15-20 पनडुब्बियां उतारी हैं और हॉर्मुज स्ट्रेट में माइंस बिछा रखे हैं
- अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की 33 में से 30 मिसाइल साइट्स फिर तैयार हो गई हैं











