Seafood Export : भारत सरकार 21 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में समुद्री खाद्य निर्यात को नई रफ्तार देने के लिए एक बड़े कूटनीतिक और कारोबारी कदम की तैयारी कर रही है। इस दिन राजदूतों और उच्चायुक्तों के साथ एक विशेष गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसका मकसद द्विपक्षीय व्यापार को मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भारतीय समुद्री उत्पादों की पहुंच बढ़ाना है।
21 जनवरी 2026 को होने वाला यह गोलमेज सम्मेलन मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग द्वारा आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह करेंगे। इस अवसर पर जॉर्ज कुरियन और एस.पी. सिंह बघेल की मौजूदगी भी रहेगी।
भारत की समुद्री ताकत पर दुनिया की नजर
भारत आज जलीय कृषि उत्पादों का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और मछली व जलीय खाद्य पदार्थों के अग्रणी वैश्विक उत्पादकों में शामिल है। यह क्षेत्र अब केवल जीविका आधारित गतिविधि नहीं रह गया, बल्कि एक मजबूत, व्यावसायिक और निर्यातोन्मुख उद्योग बन चुका है, जिसमें मत्स्यपालन, चारा, प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स और मूल्यवर्धन शामिल हैं।
निर्यात के आंकड़े जो कहानी कहते हैं
लक्षित योजनाओं और सुनियोजित नीतियों के चलते भारत आज मछली और मत्स्य उत्पादों का छठा सबसे बड़ा निर्यातक है। वर्ष 2024-25 में समुद्री खाद्य पदार्थों का निर्यात 16.98 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा, जिसकी कीमत 62,408 करोड़ रुपये यानी 7.45 बिलियन अमेरिकी डॉलर रही। यह भारत के कुल कृषि निर्यात का करीब 18 प्रतिशत है।
83 देशों की भागीदारी, वैश्विक मंच तैयार
इस सम्मेलन में एशिया, अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी अमेरिका, ओशेनिया और लैटिन अमेरिका एवं कैरिबियन क्षेत्र के 83 साझेदार देशों के राजदूत और उच्चायुक्त शामिल होंगे। साथ ही विदेश मंत्रालय, वाणिज्य विभाग, विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT), खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय और Marine Products Export Development Authority जैसी संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मजबूत मौजूदगी
सम्मेलन में खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO), एजेंस फ्रांसेज़ डी डेवलपमेंट (AFD), ड्यूश गेसेलशाफ्ट फर इंटरनेशनेल ज़ुसामेनार्बीट (GIZ), बे ऑफ बंगाल प्रोग्राम (BOBP), एशियाई विकास बैंक (ADB) और अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी हिस्सा लेंगी। यह मंच समुद्री खाद्य व्यापार, बाजार पहुंच और नियामक सहयोग पर संरचित संवाद को आगे बढ़ाएगा।
क्या होगा चर्चा का फोकस
विचार-विमर्श का मुख्य उद्देश्य दीर्घकालिक और मूल्यवर्धित समुद्री खाद्य व्यापार को बढ़ावा देना है। इसके साथ निवेश, संयुक्त उद्यम, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के अवसरों की पहचान पर भी जोर रहेगा। जलवायु और बाजार जोखिमों के बीच समुद्री खाद्य मूल्य श्रृंखला को मजबूत बनाने पर भी चर्चा होगी।
बदलते वैश्विक रुझान, भारत के लिए अवसर
उभरते वैश्विक बाजारों में उच्च गुणवत्ता वाले, प्रमाणित और टिकाऊ स्रोतों से प्राप्त समुद्री उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। उत्तरी अमेरिका, यूरोप और पूर्वी एशिया में मत्स्य आधारित प्रोटीन की खपत बढ़ रही है, वहीं रेडी-टू-कुक, रेडी-टू-ईट और पोषण आधारित प्रीमियम उत्पादों की श्रेणी का विस्तार हो रहा है। ये रुझान भारत के लिए बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने का बड़ा मौका हैं।
विश्लेषण: क्यों अहम है यह सम्मेलन
यह गोलमेज सम्मेलन सिर्फ निर्यात बढ़ाने की कवायद नहीं है, बल्कि यह भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूती से स्थापित करने की रणनीति है। कूटनीति, निवेश और तकनीक के मेल से भारत न केवल विदेशी बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत कर सकता है, बल्कि लाखों मछुआरों और किसानों की आजीविका को भी सुरक्षित कर सकता है।
आम लोगों पर असर
इस पहल से मत्स्य पालन से जुड़े छोटे और सीमांत मछुआरों को बेहतर दाम, स्थिर मांग और नई तकनीकों तक पहुंच मिलने की उम्मीद है, जिससे उनकी आय और जीवन स्तर में सुधार हो सकता है।
जानें पूरा मामला
नई दिल्ली में होने वाला यह गोलमेज सम्मेलन समुद्री खाद्य व्यापार, बाजार विविधीकरण और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को नई दिशा देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
मुख्य बातें (Key Points)
- 21 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में समुद्री खाद्य निर्यात पर सम्मेलन
- 83 देशों के राजदूत और उच्चायुक्त होंगे शामिल
- 2024-25 में 62,408 करोड़ रुपये का समुद्री निर्यात
- निवेश, तकनीक और मूल्यवर्धन पर रहेगा खास फोकस








