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The News Air - Breaking News - AI Summit से क्या हासिल होगा? Nvidia-Anthropic के सामने भरभरा गया भारत का IT सेक्टर

AI Summit से क्या हासिल होगा? Nvidia-Anthropic के सामने भरभरा गया भारत का IT सेक्टर

दिल्ली में शुरू हुए एक सप्ताह के AI सम्मेलन में 3000 वक्ता बोलेंगे, लेकिन सवाल यह है कि 30-40 साल के अनुभव के बाद भी भारत की IT कंपनियां AI रेस में पीछे क्यों रह गईं?

The News Air Team by The News Air Team
सोमवार, 16 फ़रवरी 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, टेक्नोलॉजी, स्पेशल स्टोरी
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AI Summit
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AI Summit India : भारत में AI पर एक सप्ताह का विशाल सम्मेलन शुरू हो गया है जिसमें हजारों वक्ता अपनी बात रखेंगे। लेकिन इस भव्य आयोजन के बीच एक कड़वी सच्चाई यह है कि तीस से चालीस साल के अनुभव वाला भारत का IT सेक्टर अमेरिका के AI सेक्टर के सामने भरभरा गया है।

नीति आयोग ने सम्मेलन से पहले AI पर एक रिपोर्ट तैयार की है, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि AI की रेस में पिछड़ चुका भारत इस शिखर सम्मेलन से क्या हासिल करना चाहता है और उसके पास दिखाने के लिए क्या है?

3000 वक्ता, 500 सत्र – लेकिन नतीजा क्या होगा?

दिल्ली, गोवा, तेलंगाना और ओडिशा में 500 प्रकार के सत्र होंगे और इनमें 3000 से ज्यादा वक्ता भाषण देंगे। ऐसा लग रहा है जैसे जो भी बोल सकता है, उसे बुला लिया गया है। लेकिन सवाल यह है कि इतने सत्रों और इतने वक्ताओं की बातों को कौन सुनेगा और उनके विचारों को कौन समेटेगा?

आलोचकों का कहना है कि यह सम्मेलन खुलकर विचार-विमर्श का केंद्र नहीं बन पाएगा। फ्लाई ओवर को रंग देने और डिवाइडर पर गमले लगा देने से शिखर सम्मेलन का माहौल तो बन जाता है, लेकिन क्या इससे कोई ठोस परिणाम निकलेगा?

भारत की IT कंपनियां AI में क्यों पिछड़ीं?

भारत की पांच बड़ी IT कंपनियों – Infosys, Wipro, HCL, TCS – का अनुभव अब 40 से 45 साल का होने जा रहा है। हाई स्केल लेबर और ग्लोबल अनुभव के बाद भी इनमें से किसी का भी नाम AI के मोर्चे पर टॉप 10 या टॉप 20 में नहीं सुना गया है।

दूसरी तरफ Nvidia, Microsoft, Google की Alphabet, Amazon, OpenAI, Anthropic, Tesla, Databricks, Meta – ज्यादातर कंपनियां अमेरिका की हैं। केवल Mistral फ्रांस की और DeepSeek तथा MiniMax चीन की कंपनी हैं। इनके AI टूल दुनिया भर में कोहराम मचा रहे हैं और भारत की IT कंपनियों का कहीं नाम तक नहीं।

Nvidia के आगे फीका पड़ गया भारत का पूरा IT सेक्टर

इन 10 से 12 कंपनियों का जो आकार है, उसके सामने भारत का पूरा IT सेक्टर मामूली नजर आने लगा है। फरवरी 2026 में Nvidia का मार्केट कैप 4.45 ट्रिलियन डॉलर का हो गया। यह दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बन चुकी है।

Nvidia का सालाना राजस्व ही करीब 130 से 187 बिलियन डॉलर के बराबर बताया जाता है, जबकि भारत का पूरा IT सेक्टर ही 265 बिलियन डॉलर का है। अनुमान है कि अगले 5 साल में Nvidia का सालाना राजस्व 1 ट्रिलियन डॉलर तक जा सकता है।

यही कारण है कि जब कोई नया AI टूल आता है तो भारत में IT कंपनियों के शेयरों से लाखों करोड़ रुपए उड़ जाते हैं। Anthropic के Claude के कारण भारतीय टेक कंपनियों के शेयरों के भाव लाखों करोड़ कम हो गए।

नीति आयोग की रिपोर्ट पर सवाल

नीति आयोग की रिपोर्ट का लक्ष्य है कि 2035 तक IT सेक्टर की GDP में 7-8% की हिस्सेदारी को मेंटेन किया जाए। इस समय IT सेक्टर भारत की GDP में 265 बिलियन डॉलर जोड़ता है। इसे बढ़ाकर 750-800 बिलियन डॉलर करने का लक्ष्य रखा गया है।

लेकिन यह हिसाब कई लोगों को गड़बड़ लग रहा है। 9 साल में यह राजस्व डबल-ट्रिपल कैसे हो जाएगा? IT सेक्टर का ग्रोथ रेट ही 4 से 5% है। कम से कम 10 से 11% की वृद्धि दर चाहिए। 4% के ग्रोथ रेट से राजस्व ट्रिपल नहीं हो सकता।

2035 का टारगेट, लेकिन बीच के साल खाली

AI में एक नया मॉडल आता है और पिछला सब कुछ बदल जाता है। यह सब कुछ हफ्ते से लेकर महीने के भीतर हो जाता है। इस सेक्टर में एक सदी पर 1 महीना भारी पड़ रहा है और नीति आयोग अपनी रिपोर्ट में AI के लिए 2035 और 2047 का टारगेट लिखता है।

रिपोर्ट में बीच के सालों – 2027, 28, 29, 30 – में क्या होगा, इसकी कोई प्लानिंग नहीं है। साल दर साल क्या-क्या हासिल कर लेना चाहिए, इसका कोई माइलस्टोन नहीं है। यह नहीं बताया गया कि बिजली की गति से बदलते AI सेक्टर में अगले महीने तक क्या-क्या कर लेना होगा।

भारत में फाउंडेशन मॉडल क्यों नहीं बना?

OpenAI ने GPT बनाया, Google ने Gemini, Anthropic ने Claude, Meta ने Llama और चीन ने DeepSeek – इन सभी को फाउंडेशन मॉडल कहा जाता है। ये एक तरह से बेस रेसिपी हैं और इन्हीं पर AI का उत्तरोत्तर विकास होता जा रहा है। इनमें से एक भी भारत से नहीं बना।

भारत सरकार India AI Mission के तहत कई AI कंपनियों की मदद कर रही है। Sarvam AI, Sockets AI के अलावा IIT Bombay की Bharat GPT और Param भी इस सम्मेलन में लॉन्च होने जा रहे हैं। लेकिन क्या ये सभी GPT के स्तर के आसपास भी हैं? क्या इन्हें लेकर दुनिया में बातें हो रही हैं?

सरकार की मदद – सिर्फ 10,000 करोड़

AI India Mission के तहत मोदी सरकार अगले 5 साल में ₹10,000 करोड़ देगी। लेकिन AI की कंपनियां ट्रिलियन डॉलर की हो रही हैं। OpenAI ने 10 बिलियन डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपये) तक खर्च कर दिया। Microsoft ने 13 बिलियन डॉलर और भारत सरकार का मिशन 10,000 करोड़ का, वो भी 5 साल में।

ठीक है कि सरकार कुछ तो कर रही है, सोच रही है, दिशा दे रही है। लेकिन यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि बहुत कुछ किया जा रहा है।

70-80 लाख लोगों की नौकरियां खतरे में

नीति आयोग की रिपोर्ट में लिखा है कि भारत में सॉफ्टवेयर सेक्टर में 70 से 80 लाख लोग काम करते हैं और इनमें से ज्यादातर एंट्री लेवल या जूनियर लेवल पर काम करते हैं। इनमें से बड़ी तादाद में लोगों की नौकरियां AI के कारण प्रभावित हो सकती हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि रीस्किलिंग से 15 लाख लोगों की नौकरियों को बचाया जा सकता है। लेकिन खतरा तो 70-80 लाख लोगों पर है। बाकी 60 लाख लोगों का क्या होगा? इस सवाल पर रिपोर्ट में चुप्पी है।

टेक खरबपति Vinod Khosla कह रहे हैं कि AI, BPO और सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री को खा जाएगा। क्या हम ऐसा भारत देखने जा रहे हैं जहां AI के चलते लाखों लोगों का काम खत्म हो गया? बेंगलुरु, पुणे, दिल्ली, हैदराबाद जैसे शहर खाली हो गए?

चीन ने प्रतिबंध के बाद भी DeepSeek बनाया

अमेरिका ने चीन पर प्रतिबंध लगाया, तब भी चीन ने DeepSeek बनाकर तूफान मचा दिया। भारत पर तो प्रतिबंध भी नहीं है। फिर भी भारत क्यों पीछे रह गया?

भले ही भारत भारतीय भाषाओं में काम करने के लिए मॉडल बना रहा हो, लेकिन इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि भारत ने AI की रेस में अपना घोड़ा दौड़ा दिया है या भारत की कोई कंपनी AI के मामले में दुनिया की कंपनियों को छकाने की स्थिति में आ गई है।

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डेटा पर भारत का दावा कहां है?

राहुल गांधी ने एक बात कही थी – लड़ाई डेटा की है। भारत दुनिया में सबसे अधिक डेटा जनरेट करता है। और डेटा है किसके पास? अमेरिका की कंपनियों के सर्वर पर।

राहुल गांधी ने कहा था कि चाइनीज के पास 1.4 बिलियन लोगों का डेटा पूल है। यूरोपियन डेटा, अफ्रीकन डेटा, अमेरिकन डेटा – सब जोड़ लो, तब भी चाइनीज डेटा के साथ कंपीट नहीं कर सकता। तो असली लड़ाई यह है कि भारत टेबल पर क्या रखेगा? भारत की ताकत क्या है?

नीति आयोग की रिपोर्ट में इस सवाल का जवाब नहीं मिलता कि भारत डेटा पर दावेदारी कैसे करेगा।

‘Ease of Doing Business’ का जुमला फिर से

नीति आयोग की रिपोर्ट में सरकार के लिए पहला ही सुझाव है – Ease of Doing Business कीजिए। मतलब अभी तक यह देश इसी जुमले में फंसा हुआ है।

रिपोर्ट में लिखा है कि PAN कार्ड, GST और आधार कार्ड, ROC, Entity Locker – अलग-अलग ID एक दूसरे से जुड़ी नहीं हैं। इन्हें जोड़ने की बात कही जा रही है। म्युनिसिपल मंजूरी की वेबसाइट अलग-अलग होती है, इसे समस्या बताया गया है।

अगर 10 साल से मोदी सरकार दुकान से लेकर ऑफिस के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान नहीं कर पाई, तब फिर इस सरकार ने किया क्या है?

और तो और, नीति आयोग ने कहा कि National Tax Service और Single Window की मंजूरी के लिए हमें संयुक्त अरब अमीरात के Basher Platform की तरह मॉडल बनाना होगा। भारत IT सेक्टर में दुनिया भर में लीडर कंट्री माना जाता है, लेकिन सीखना है UAE से।

पुरानी योजनाओं का क्या हुआ?

2015 में मोदी सरकार ने Digital India लॉन्च किया। बड़ी-बड़ी बातें की गईं। 2026 में भारत AI की दौड़ में कहां खड़ा है? उन सपनों और तैयारियों का क्या हुआ?

G20 को लेकर कितना माहौल बनाया गया। लेकिन एक साल में सारा माहौल लापता हो गया। लेकिन G20 के पोस्टर आज भी दिल्ली के कोने-कोने में दिख जाते हैं।

ऐसा ही माहौल Make in India के समय बनाया गया। करीब 12 साल बाद दिल्ली के लोधी गार्डन में Make in India का शेर जंग खाता नजर आता है। मेक इन इंडिया स्कीम के लॉन्च के 2 साल बाद 2016 में मुंबई में Make in India Week का कार्यक्रम हुआ था। मुकेश अंबानी, अजीम प्रेमजी, टाटा संस के दिवंगत साइरस मिस्त्री, कुमार मंगलम बिरला – सबने भाषण दिया और सपने दिखाए।

आज भारत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी पिछड़ चुका है और IT सेक्टर में भी।

विश्व आर्थिक मंच में मंत्री का जवाब

विश्व आर्थिक फोरम में IMF की CEO के सामने मोदी सरकार के मंत्री अश्विनी वैष्णव जवाब तो दे आए, लेकिन अभी तक भारत ने AI के क्षेत्र में ऐसा कुछ नहीं किया जिससे AI की दुनिया में भूचाल मच जाए।

जानें पूरा मामला

AI का तूफान आ चुका है। भारत इस क्षेत्र में अपनी सबसे बड़ी नाकामी के साथ खड़ा नजर आ रहा है। IT इंडस्ट्री में उसकी जगह लीडर की थी, तब भी वह AI में लीडर नहीं बन सका।

यहां 1 महीने में AI दुनिया बदल दे रहा है और टारगेट 10-20 साल का बताया जा रहा है। बोल्ड लेटर में स्लोगन लिख देने से कुछ नहीं होगा। स्मार्ट सिटी, Make in India, Skill India, G20 के समय का माहौल हम देख चुके हैं। अब AI के नाम पर कुंभ का आयोजन हो रहा है।

मुख्य बातें (Key Points)
  • दिल्ली में शुरू हुए AI सम्मेलन में 500 सत्र और 3000 वक्ता भाग ले रहे हैं
  • 30-40 साल के अनुभव के बाद भी भारत की IT कंपनियां AI रेस में पिछड़ गईं
  • Nvidia का मार्केट कैप 4.45 ट्रिलियन डॉलर, भारत का पूरा IT सेक्टर 265 बिलियन डॉलर का
  • नीति आयोग का लक्ष्य 2035 तक 750-800 बिलियन डॉलर पहुंचना, लेकिन बीच के माइलस्टोन नहीं
  • 70-80 लाख IT कर्मचारियों की नौकरियां AI के कारण खतरे में
  • OpenAI ने 10 बिलियन डॉलर खर्च किए, भारत सरकार का मिशन 10,000 करोड़ का (5 साल में)

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: भारत की IT कंपनियां AI में क्यों पिछड़ गईं?

उत्तर: 40 साल के अनुभव के बावजूद Infosys, TCS, Wipro जैसी कंपनियों ने AI में निवेश और इनोवेशन पर ध्यान नहीं दिया। जबकि अमेरिकी कंपनियों ने GPT, Gemini, Claude जैसे फाउंडेशन मॉडल बना लिए, भारतीय कंपनियां सर्विस प्रोवाइडर बनी रहीं।

प्रश्न 3: भारतीय IT कर्मचारियों की नौकरियों पर क्या खतरा है?

उत्तर: नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, 70-80 लाख IT कर्मचारियों की नौकरियां AI के कारण खतरे में हैं। इनमें से ज्यादातर एंट्री और जूनियर लेवल पर काम करते हैं।

प्रश्न 5: 2035 तक IT सेक्टर को 750-800 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य कैसे पूरा होगा?

उत्तर: यह सवाल विवादास्पद है क्योंकि वर्तमान में IT सेक्टर का ग्रोथ रेट 4-5% है। इतने कम ग्रोथ रेट से 9 साल में राजस्व तीन गुना होना मुश्किल लगता है।

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