अगर हो जाए रोड एक्सिडेंट : पुलिस जांच से से लेकर मुआवजा, 1 अप्रैल से नए नियम

The News Air- नई दिल्‍ली : भारत में सड़क दुर्घटनाओं से जुड़ा एक आंकड़ा देखिए। साल 2020 में एक्‍सप्रेसवे समेत सभी नैशनल हाइवे पर कुल 1,16,496 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के पिछले साल संसद में यह बताया था। सवा लाख से ज्‍यादा हादसों में 47,984 लोगों की मौत हुई। यह भयावह आंकड़े उस समय के हैं जब साल के ज्‍यादातर वक्‍त कोरोना वायरस महामारी के चलते सख्‍त लॉकडाउन लगा था। सभी सड़क हादसों की जांच नहीं होती। पीड़‍ित के परिवार को बीमा मुआवजे में भी दिक्‍कतें आती हैं। उम्‍मीद है कि 1 अप्रैल 2022 से स्थिति में बदलाव आएगा। भारत सरकार सभी सड़क हादसों की पुलिस जांच अनिवार्य करने जा रही है। पुलिस को 48 घंटों के भीतर मोटर एक्सिडेट क्‍लेम ट्रिब्‍यूनल्‍स (MACTs) और बीमा कंपनियों को हादसे की जानकारी देनी होगी। बीमा प्रमाण पत्रों में वैध मोबाइल नंबर को भी 1 अप्रैल से जरूरी किया जा रहा है।

हर साल हजारों लोग सड़क हादसों में गंवाते हैं जान

सालसड़क दुर्घटनाएंमृतकों की संख्‍या
20201,16,49647,984
20191,37,19153,872

नए नियमों से सरकार मामलों के निपटारे और मुआवजों के भुगतान में तेजी लाना चाहती है। सड़क हादसों की जांच तो अनिवार्य की ही जा रही है, सरकार ने समयसीमा भी तय की है। पुलिस को मोटर एक्सिडेंट क्‍लेम ट्रिब्‍यूनल के सामने 50 दिन के भीतर अंतरिम जांच रिपोर्ट सौंपनी होंगी। जांच पूरी करने के लिए तीन महीने का समय मिलेगा।

भारत में रोड एक्सिडेंट : 1 अप्रैल से क्‍या-क्‍या बदल जाएगा?

  • पुलिस को हादसे की जगह पर जाकर सबूत जुटाने होंगे।
  • क्‍लेम ट्रिब्‍यूनल को 48 घंटे में इन्‍फॉर्म करना होगा। इंश्‍योरेंस कंपनी को पॉलिसी की डीटेल्‍स देनी होंगी।
  • जांच अधिकारी (IO) 10 दिन के भीतर पीड़‍ित/कानूनी प्रतिनिधियों के अधिकार देंगे।
  • अस्‍पताल 15 दिन के भीतर मेडिको लीगल मैनुअल (MLC) और पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट देंगे।
  • ड्राइवर और वीइकल ओनर की जानकारी 30 दिन के भीतर देनी होगी।
  • IO 50 दिन के भीतर अंतरिम जांच रिपोर्ट दाखिल करेंगे।
  • 60 दिनों के भीतर आपराधिक जांच पूरी हो जानी चाहिए।
  • ट्रिब्‍यूनल के सामने जांच अधिकारी अपनी रिपोर्ट हादसे के 90 दिनों के भीतर पेश करेंगे।

केंद्र के नोटिफिकेशन के अनुसार, पुलिस पीड़‍ितों या उनके कानूनी प्रतिनिधियों को उनके अधिकारों और दावों के बारे में अनिवार्य रूप से बताएगी। सरकार ने यह बदलाव दिल्‍ली हाई कोर्ट के एक आदेश के बाद किए हैं। अदालत ने केंद्र से दिल्‍ली में पहले से लागू मॉडल अपनाने को कहा था। राजधानी में इससे मुआवजों के निपटारे में काफी तेजी देखने को मिली।

कार पर लगाना होगा एक और स्टिकर!

जल्‍द की गाड़‍ियों की विंडस्‍क्रीन पर एक और स्टिकर लगाना पड़ सकता है। यह स्टिकर होगा वीइकल के ‘फिटनेस’ स्‍टेटस का। सड़क यातायात एवं राजमार्ग मंत्रालय ने ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में यह प्रस्‍ताव दिया है। इस कदम से एक्‍सपायर्ड फिटनेस टेस्‍ट सर्टिफिकेट वाली गाड़‍ियों को पकड़ने में आसानी होगी। फिलहाल सभी चार पहिया या उससे ऊपर के वाहनों को स्‍क्रीन पर FASTag लगाना अनिवार्य है। दिल्‍ली में वाहनों पर कलर कोडेड स्टिकर्स भी लगाने पड़ते हैं।

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पीड़‍ितों को मुआवजा मिलने में आएगी तेजी (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

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