अस्पताल में भर्ती कैदी नंबर 8647 की देखभाल के लिए हनीप्रीत को मिला अटेंडेंट का आई-कार्ड

चंडीगढ़, 7 जून

मेदांता में भर्ती डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख बाबा राम रहीम के लिए 15 जून तक उनकी मुंह बोली बेटी हनीप्रीत भी अटेंडेंट बनी हैं। मिली जानकारी के अनुसार अस्पताल की तरफ़ से 3 अन्य परिजनों के अटेंडेंट कार्ड बना दिए गए हैं। फिलहाल अभी तक यह तो तय है कि बाबा 15 जून 2021 तक अस्पताल में ही रहेंगे, रविवार को भी परिजनों के साथ-साथ हनीप्रीत ने बाबा राम रहीम से मुलाक़ात की थी। क़रीब 4  साल के बाद बाबा एक दिन से अधिक समय के लिए जेल से बाहर निकला हैं। कोरोना पॉजिटिव होने के कारण माना जा रहा है कि बाबा राम रहीम मेदांता में कोविड प्रोटोकोल के अनुसार निर्धारित अवधि तक ही रहेंगे। माना यह भी जा रहा है कि पेट के इलाज में अधिक समय लग सकता है, वहीं बाबा के जेल से अस्पताल जाने से जेल स्टाफ़ और कैदियों को काफी राहत की सांस मिली है, क्योंकि जेल में बाबा राम रहीम की सुरक्षा इतनी सख्त है कि कथित तौर पर सभी को भारी दिक्क़तों का सामना करना पड़ता है।

यौन शोषण के मामले में सुनारियां जेल में उम्र क़ैद की सज़ा काट रहे कैदी नंबर 8647 बाबा राम रहीम को इतनी सुरक्षा दी गई है, जोकि प्रदेश के आज तक के इतिहास में जेल में रहते किसी नेता व कैदी को नहीं दी गई थी। बाबा रहीम को अलग से ऐसी बैरक में रखा गया है, जिसकी 5 लेयर में तो सुरक्षा हर समय ही रहती है, जिसमें क़रीब 50 सुरक्षाकर्मी तैनात किए होते हैं। रोजाना ड्यूटी में तैनात होने वाले सुरक्षाकर्मियों की भी तब्दीली होती हौ और तो और ड्यूटी वाले दिन ही सुरक्षाकर्मी को पता चलता है कि आज बाबा की बैरक में ड्यूटी लगी है। जेल में सुरक्षा की कमान ख़ुद जेल अधीक्षक सुनील सांगवान संभाल रहे हैं और निगरानी के लिए 3 डीएसपी लगाये हैं। 

बतां दें कि 25 अगस्त, 2017 में साध्वी यौन शोषण मामले में सीबीआई की विशेष अदालत में बाबा राम रहीम को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी। सज़ा सुनने के बाद पंचकूला में जमकर हंगामा हुआ था। इस उपरांत में सरकार ने बाबा राम रहीम को रोहतक जेल भेजने का फैसला किया था और तभी से ही बाबा सुनारियां स्थित जेल में कैद हैं। शुरुआती समय में तो जेल से 3 से 5 किलोमीटर तक पुलिस का सख्त पहरा रहा, इससे अधिक निगरानी जेल के अंदर की गई है। जेल अधीक्षक सुनील ने बाबा की सुरक्षा को देखते हुए क़रीब पचास ऐसे सुरक्षाकर्मियों को शामिल किया है, जोकि बेहद ही विश्वासपात्र हैं। नाश्ते से लेकर रात के खाने की हर स्तर पर जांच के बाद सुरक्षाकर्मियों की निगरानी में खाना बैरक में पहुंचाया जाता है। यहां तक कि अधिकारियों की निगरानी में ही बाबा खाना खाते हैं। सुरक्षाकर्मियों के अलावा सीसीटीवी कैमरे की निगरानी भी रहती है। 

जेल अधिकारियों व कैदियों को बाबा के अस्पताल जाने से काफ़ी राहत मिली है। सुरक्षा कारणों के चलते जब भी बाबा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये पेशी व परिजनों से फ़ोन करने के लिए बैरक से बाहर आता था तो अन्य कैदियों को बैरक में भेज दिया जाता था, जिसको लेकर कैदियों ने शिकायत भी की थी। वरिष्ठ अधिकारी भी यह मानते हैं कि आज तक प्रदेश के इतिहास में कभी भी किसी कैदी को इतनी सुरक्षा में नहीं रखा गया ।

जेल में बंद बाबा राम रहीम को हर माह 6 हज़ार रुपये परिजनों द्वारा खाते में भेजे जाते हैं। इन रुपयों से बाबा फल अधिक ख़रीदते है और कुछ अन्य खाने का सामान जेल में स्थित कैंटीन से लेते हैं। जेल में बाबा पर ड्रेस कोड लागू है और वह कैदियों वाले ही कपड़े पहनते हैं। इसके अलावा बाबा को जेल प्रशासन से भी मेहनताना मिलता है। बाबा जेल में माली का काम करता हैं।

Leave a Comment